अमरकंटक में घूमने की जगह: प्राकृतिक सौंदर्य और पवित्र स्थलों की संपूर्ण जानकारी
अमरकंटक मध्य प्रदेश की पवित्र नगरी है। यह एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। यह मध्य प्रदेश का वह पवित्र और प्राकृतिक नगर है, जहां का हर कोना अध्यात्म, प्राकृतिक सौंदर्य और शांति से भरा हुआ है। अमरकंटक विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमालयों के संगम पर स्थित है।
इस लेख में हम अमरकंटक में घूमने वाली प्रमुख जगहों ( Amarkantak Tourist Places in Hindi) के बारे में जानकारी देंगे। अगर आप अमरकंटक जाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी होगा।
अमरकंटक धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां पर भारत की प्रमुख तीन नदियों नर्मदा, सोन और जोहिला की यात्रा शुरू होती है। प्राकृतिक झरनों, घने जंगल, शांत वातावरण, नदी तट, पहाड़ी, घाटियों और प्राचीन मंदिरों से घिरा अमरकंटक मध्य प्रदेश का मिनी हिमालय है। अगर आप प्रकृति प्रेमी और धार्मिक आस्था रखते हैं, तो अमरकंटक जीवन में एक बार अवश्य आए। यहां के वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्रता दोनों का अनोखा संगम देखने के लिए मिलता है।
चलिए जानते हैं : अमरकंटक में घूमने के लिए कौन-कौन सी जगह है, अमरकंटक कैसे जा सकते हैं, अमरकंटक में घूमने का सबसे अच्छा समय, अमरकंटक टूर प्लान, अमरकंटक के आस-पास घूमने की जगह के बारे में विस्तृत जानकारी
अमरकंटक का इतिहास (History of Amarkantak)
अमरकंटक मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले का एक प्राचीन और अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यह स्थान विंध्य और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं के संगम पर स्थित है। यहां पर तीन प्रमुख नदियों नर्मदा, सोन और जोहिला का उद्गम स्थल है। अमरकंटक धार्मिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अमरकंटक को अमृतकूट के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि देवताओं और असुरों के समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत की कुछ बूंदें यहाँ गिरी थीं, इस कारण इसका नाम अमरकंटक पड़ा। पुराणों में वर्णन है, कि अमरकंटक में महर्षि कपिल, नारद, वशिष्ठ, अगस्त्य जैसे ऋषियों की तपोभूमि रहा है।
नर्मदा पुराण, स्कंद पुराण और वायु पुराण में अमरकंटक की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्य में अमरकंटक का वर्णन मिलता है। माना जाता है, कि भगवान श्री राम ने अपने वनवास काल के दौरान अमरकंटक में कुछ समय बिताया था। अमरकंटक का राम मंदिर इसी कथा से जुड़ा हुआ है।
महाभारत काल में यह क्षेत्र साधु-संतों और तपस्वियों की साधना स्थली रहा है। प्राचीन काल में अमरकंटक में कई शासको ने शासन किया है। 10वीं और 11वीं शताब्दी ने कलचुरी वंश ने यहां पर शासन किया गया है। अमरकंटक में बने हुए प्राचीन मंदिर इसके गवाह है।
बाद में यह क्षेत्र गोंड राजाओं के अधीन हुआ। गोंड राजाओं ने अमरकंटक को धार्मिक केंद्र के रूप में संरक्षित किया है। मध्यकाल में अमरकंटक साधु संतों की प्रमुख साधना स्थली रहा है। ब्रिटिश काल में इसका धार्मिक महत्व बना रहा है। हालांकि,स्वतंत्रता के बाद अमरकंटक को एक प्राकृतिक, धार्मिक और संस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है।
आज अमरकंटक नर्मदा परिक्रमा का प्रमुख पड़ाव है और मध्य प्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा नदी का उद्गम अमरकंटक से ही होता है। यहां पर स्थित नर्मदा कुंड में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं और स्नान करते हैं और नर्मदा जी की पूजा करते हैं। नर्मदा नदी को भारत की पवित्र नदियों में से एक है। अमरकंटक केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि भारत के प्राचीन संस्कृति, इतिहास आस्था का प्रतीक है।
अमरकंटक में घूमने के प्रमुख पर्यटन स्थल (Amarkantak Tourist Places in Hindi)
1. नर्मदा उद्गम स्थल – अमरकंटक का सबसे पवित्र स्थान
नर्मदा नदी भारत की सबसे पवित्र नदियों में से एक है और इसका उद्गम स्थान अमरकंटक है। अमरकंटक में नर्मदा माता का मंदिर बना हुआ है और यहां पर एक पवित्र कुंड बना हुआ है। इस कुंड से ही नर्मदा नदी की शुरुआत होती है। कुंड के चारों तरफ प्राचीन मंदिर बने हुए हैं, जो विभिन्न देवी देवताओं को समर्पित है।
यहां पर लोग आते हैं। नर्मदा कुंड में स्नान करते हैं और उसके बाद मां नर्मदा जी की पूजा करते हैं। मां नर्मदा जी की मूर्ति, कुंड के बीच में स्थापित की गई है। यहां पर श्रद्धालुओं के स्नान की अच्छी व्यवस्था है। नर्मदा कुंड के आसपास प्राचीन मंदिर बने हुए हैं, जो भगवान शिव जी, गणेश जी, श्री राम जी, राधा कृष्ण जी को समर्पित है।
यहां पर एक प्राचीन हाथी भी देखने के लिए मिलता है, जो पत्थर का बना हुआ है और इस हाथी के बारे में ढेर सारी मान्यताएं हैं। यहां पर लोग आकर अच्छा समय बिताते हैं। यहां पर मंदिर ट्रस्ट में ठहरने की सुविधा भी उपलब्ध है।
नर्मदा मंदिर या नर्मदा उद्गम स्थल की खासियत
- नर्मदा मैया के दर्शन
- आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा
- फोटोग्राफी और प्राकृतिक दृश्य
- सुबह और शाम की आरती बहुत मनमोहक
- उद्गम स्थल का दर्शन
- नर्मदा परिक्रमा की शुरुआत
2. सोनमुडा अमरकंटक (Sonmuda)
सोनमुडा अमरकंटक के पास घूमने के लिए एक सुंदर स्थान है। सोनमुडा नर्मदा मंदिर से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है। यहां पर आप सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं। यहां पर आने का मार्ग सुंदर है। यहां पर सूर्योदय और सूर्यास्त का अत्यंत मनमोहक दृश्य देखने के लिए मिलता है।
यहां पर सोन नदी का उद्गम हुआ है। यहां पर दो कुंड बने हुए हैं। सोन और भद्र नाम के इन दोनों कुंडो को ही सोन नदी का उद्गम स्थल कहा जाता है। यह कुंड पक्के बने हुए हैं और यहां पर गौमुख बना हुआ है।
सोन नदी के उद्गम स्थल के पास ढेर सारे मंदिर बने हुए हैं, जो बहुत सुंदर हैं। सोन नदी कुंड से निकलती है और थोड़ी दूर जाकर जलप्रपात के रूप में बहती है और बहुत ही सुंदर लगती है। यहां पर व्यूप्वाइंट बना हुआ है, जहां पर आस-पास की वादी और जंगल का खूबसूरत दृश्य देखा जा सकता है।
मुख्य आकर्षण
- सोन नदी का आरंभ बिंदु
- फोटोग्राफी के लिए परफेक्ट जगह
- शांत वातावरण
- ट्रेकिंग के लिए शानदार जगह
प्राचीन मंदिर समूह अमरकंटक (Kalchuri group of ancient temples)
प्राचीन मंदिर समूह या कलचुरी कालीन मंदिर समूह अमरकंटक के पास घूमने के लिए एक सुंदर और ऐतिहासिक मंदिर समूह है। ये मंदिर नर्मदा कुंड के पास में बने हुए हैं। यह मंदिर कलचुरी कालीन है। इस मंदिर में आप घूमने के लिए जा सकते हैं। यहां पर ढेर सारी मंदिर बने हुए हैं, जो बहुत सुंदर है।
यह मंदिर शिव भगवान जी और विष्णु भगवान जी को समर्पित है। यहां पर खूबसूरत बगीचा भी बना हुआ है। यहां पर आकर आप इन मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर 1042 से 1072 के बीच में बनाया गया था। इन मंदिरों को राजा करण देव द्वारा बनाया गया था। कलचुरी कालीन प्राचीन मंदिरों में करण मंदिर और पातालेश्वर मंदिर बहुत प्रसिद्ध है।
माई की बगिया (Mai Ki Bagiya)
माई की बगिया अमरकंटक में घूमने का एक और पवित्र स्थान है। माई की बगिया अमरकंटक मुख्य नर्मदा मंदिर से सोनमुड़ा के जाने की और मार्ग में स्थित है। मंदिर में आप आसानी से पहुंच सकते हैं। यह मंदिर मुख्य रूप से मां नर्मदा जी के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है, कि प्राचीन समय में मां नर्मदा जी यहां पर अपनी सखियों के साथ खेलने के लिए आया करते थे।
यहां पर चारों तरफ का वातावरण प्राकृतिक है। यहां पर एक विशेष प्रकार की औषधि गुलबकावली पाई जाती है, जो आंखों की रोशनी बढ़ाने का काम करती है। इस स्थल पर मां नर्मदा का मंदिर बना है। आस-पास ढेर सारे औषधीय पौधे लगे हुए हैं। साथ ही साथ यहां आम का बगीचा भी है। यहां पर आकर आप शांति से बैठ कर अच्छा समय बिता सकते हैं।
कपिलधारा जलप्रपात – प्रकृति का अद्भुत चमत्कार
कपिलधारा नर्मदा अमरकंटक के पास घूमने के लिए प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर एक स्थल है। यहां पर एक सुंदर झरना देखने के लिए मिलता है। कपिलधारा नर्मदा नदी पर बनने वाला पहला झरना है। यह झरना कपिलधारा के नाम से जाना जाता है। माना जाता है, कि इस जगह पर कपिल ऋषि ने तपस्या की थी, इसलिए इस झरने को कपिलधारा के नाम से जाना जाता है।
झरने के आसपास का दृश्य बहुत सुंदर और आकर्षक है। झरने के पास व्यूप्वाइंट बना हुआ है, जहां से झरने का सुंदर दृश्य देखा जा सकता है। अगर आप ट्रैकिंग करना चाहते हैं, तो आप झरने के नीचे जा सकते है और झरने को नीचे से देख सकते हैं। आप यहां पर नहाने का आनंद भी उठा सकते हैं।
मुख्य आकर्षण:
- ऊँचाई से गिरता सफ़ेद झरना
- घने जंगल और चट्टानी घाटियाँ
- प्राकृतिक ट्रेकिंग पथ
- फोटोग्राफी के लिए बेहतरीन स्पॉट
दुग्धधारा जलप्रपात – दूध जैसा सफेद झरना
दूध धारा जलप्रपात अमरकंटक में कपिलधारा के पास एक और सुंदर झरना है। यह झरना नर्मदा नदी पर बना हुआ है। यह झरना कपिलधारा के थोड़ा आगे स्थित है। यहां पर आप ट्रैकिंग करके आसानी से पहुंच सकते हैं। झरने में ट्रैकिंग का रास्ता करीब एक किलोमीटर है। यह रास्ता बहुत ही खूबसूरत है, क्योंकि यहां पर पहाड़ और जंगल का खूबसूरत दृश्य देखने के लिए मिलता है।
यहां पर पहुंचकर आपको सुंदर झरना देखने के लिए मिलता है, जो बहुत तीव्र गति से बहता है। यहां पर गुफा भी बनी हुई है, जिसमें ऋषि की पत्थर की मूर्ति विराजमान है। यहां पर खूबसूरत जंगल का दृश्य देखा जा सकता है। साथ ही साथ आप यहां पर नहाने का आनंद भी उठा सकते हैं। इस झरने का जल सफ़ेद दूध की तरह नीचे आता है, इसलिए इसका नाम दुग्धधारा पड़ा।
मुख्य आकर्षण:
- मंत्रमुग्ध कर देने वाला सफेद झरना
- शांत और प्राकृतिक वातावरण
- कपिलधारा से छोटा लेकिन अधिक सुंदर
श्री यंत्र महामेरू मंदिर अमरकंटक (Shri Yantra Maha Meru Temple)
श्री यंत्र मंदिर अमरकंटक के एक और सुंदर मंदिरों में से एक है। इस मंदिर की स्थापत्य कला बहुत ही अद्भुत है। यह नर्मदा मंदिर दूर से थोड़ी ही दूर है। इस मंदिर में खूबसूरत मूर्ति देखी जा सकती है। यह मंदिर अमरकंटक मुख्य शहर में बना हुआ है। यहां पर आप पैदल ही घूमने के लिए जा सकते हैं।
इस मंदिर के बाहरी और मंदिर के ऊपरी भाग में खूबसूरत मूर्तियां बनाई गई हैं, जो अलग-अलग मुद्राओं में खड़ी हुई अवस्था में है और बहुत ही सुंदर लगते हैं। यह मंदिर वर्गाकार है। आप यहां पर जाकर घूम सकते हो और अच्छा समय बिता सकते हैं।
मुख्य आकर्षण:
- ऊँचे और विशाल शिखर
- अंदर बना श्री यंत्र
- शांत और सकारात्मक वातावरण
सर्वोदय जैन मंदिर अमरकंटक
सर्वोदय जैन मंदिर अमरकंटक का एक सुंदर और आकर्षक मंदिर है। यह मंदिर मुख्य अमरकंटक शहर में बना हुआ है। यहां पर आप आसानी से घूमने के लिए जा सकते हैं। यह मंदिर जैन धर्म के पहले तीर्थकर भगवान आदिनाथ जी को समर्पित है। मंदिर बहुत ही आकर्षक है।
मंदिर में संगमरमर और गुलाबी बलुआ पत्थरों का काम देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही सुंदर है। मंदिर में भगवान आदिनाथ की 24 मीटर ऊंची भव्य प्रतिमा है, जो पद्मासन मुद्रा में विराजमान है। यहां पर जैन धर्म के अन्य तीर्थंकरों की मूर्तियां भी स्थापित है। सर्वोदय जैन मंदिर के सामने ही सर्वोदय जैन धर्मशाला है, जहां पर आपके रुकने और खाने की व्यवस्था है। यहां पर बहुत कम कीमत पर आप रुक सकते हैं।
भृगु ऋषि तपोस्थली (Bhrigu rishi taposthali)
भृगु ऋषि की तपोस्थली अमरकंटक में घूमने के लिए प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर एक अद्भुत प्लेस है। यहां पर जाने के लिए आपको ट्रैकिंग करनी पड़ती है। यहां पर करीब एक से डेढ़ किलोमीटर की ट्रैकिंग करनी पड़ती है, क्योंकि यह जगह घने जंगल के अंदर स्थित है।
यहां पर एक प्राचीन गुफा देखने के लिए मिलती है, जिसके अंदर शिवलिंग विराजमान है। इस जगह के बारे में कहा जाता है, कि यहां पर ऋषि भृगु तपस्या क्या करते थे। यहां पर चारों तरफ हरियाली देखी जा सकती है। यहां की शांति मन मोह लेती है। यह मुख्य अमरकंटक शहर से करीब चार किलोमीटर दूर सोनमुदा के पास में स्थित है।
धूनी पानी अमरकंटक (Dhuni Pani Amarkantak)
धुनी पानी अमरकंटक के सुंदर और प्राकृतिक स्थलों में से एक है। धुनी पानी भृगु ऋषि तपोस्थली के पास ही में स्थित है। यहां पर जाने के लिए भी आपको ट्रैकिंग करनी पड़ती है। यहां का रास्ता भी खूबसूरत है और घने जंगलों से घिरा हुआ है। धुनी पानी में एक पवित्र पानी का कुंड देखने के लिए मिलता है, जिसका पानी स्वच्छ और पवित्र है। आप यहां पर आकर इस जलकुंड को देख सकते हैं। चारों तरफ का सुंदर दृश्य देख सकते हैं। यहां पर आकर अच्छा लगता है।
माई का मंडप अमरकंटक (Mai ka Mandap Amarkantak)
माई का मंडप अमरकंटक के पास घूमने के लिए खूबसूरत स्थलों में से एक है। यह जगह अमरकंटक में घने जंगलों के अंदर स्थित है। यहां पर आने के लिए आपको पेंड्रा मार्क से होते हुए आना पड़ता है। इस जगह के बारे में मान्यता है, कि यहां पर मां नर्मदा जी का विवाह होने वाला था। तब इसी जगह पर मां नर्मदा जी के विवाह की तैयारी की गई थी।
आज यहां पर आपको वह सभी चीज देखने के लिए मिलती हैं, जो तैयारी में यूज़ हुए थे और वह सभी पत्थर में बदल गए हैं। आप यहां पर उन सभी चीजों को देख सकते हैं। यहां पर प्राकृतिक झरना देखा जा सकता है, जो बहुत ही खूबसूरत लगता है। यह स्थल घने जंगलों के अंदर स्थित है। यहां पर आप अपने फैमिली और दोस्तों के साथ आ सकते हैं। यहां चारों तरफ प्रकृतिक दृश्य देखा जा सकता है।
ज्वालेश्वर मंदिर अमरकंटक (Jwaleshwar temple amarkantak)
ज्वालेश्वर मंदिर अमरकंटक के एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर अमरकंटक मुख्य शहर से दूर पिंडरा मार्ग पर बना हुआ है। इस मंदिर में आप आसानी से घूमने के लिए आ सकते हैं। यह मंदिर बहुत ही सुंदर है। इस स्थल पर जोहिला नदी का उद्गम हुआ है। यहां पर भगवान शिव का मंदिर बना हुआ है। जोहिला नदी का उद्गम यहां पर एक कुआँ से हुआ है। इस कुएं का पानी को आप निकल सकते हैं और नहा सकते हैं। ये जगह बहुत सुंदर है।
श्री अमरेश्वर महादेव मंदिर अमरकंटक (Shri Amareshwar Mahadev Temple)
श्री अमरेश्वर महादेव मंदिर अमरकंटक के प्रमुख धार्मिक स्थान में से एक है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यहां पर विशाल शिवलिंग के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर 50 टन से अधिक वजनी और 11 फुट लंबा शिवलिंग विराजमान है। इस मंदिर में सीढ़ियां चढ़कर शिवलिंग के जल अभिषेक किया जाता है।
अमरेश्वर मंदिर ज्वालेश्वर मंदिर के करीब है। आप यहां पर गाड़ी और बाइक से जा सकते हैं। यहां पर 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृति भी देखने के लिए मिलती है। मंदिर के आस-पास का वातावरण सुंदर और प्राकृतिक है। मंदिर में महाशिवरात्रि और सावन सोमवार के समय बहुत सारे भक्तगढ़ दर्शन करने के लिए आते हैं।
दुर्गाधारा अमरकंटक (Durgadhara Amarkantak)
दुर्गाधारा अमरकंटक के पास घूमने के लिए एक सुंदर और शांत जगह है। यहां पर आकर आप चारों तरफ का प्राकृतिक दृश्य देख सकते हैं। यहां पर मंदिर भी बना हुआ है, जहां पर आपको शिव शंकर जी के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर ढेर सारे बंदर हैं। आप यहां पर आकर झरने का सुंदर दृश्य देख सकते हैं। साथ ही साथ यहां आप आस-पास के प्राकृतिक दृश्य का भी आनंद उठा सकते हैं। यह जगह ठंड और बरसात में घूमने के लिए बहुत ही बढ़िया है।
राजमेरगढ़ (Rajmergarh)
राजमेरगढ़ अमरकंटक के पास घूमने के लिए एक सुंदर और शांत स्थान है। यह एक व्यू प्वाइंट है। यहां से आप सूर्यास्त का सुंदर दृश्य देख सकते हैं। यहां पर चारों तरफ आपको हरियाली भरा माहौल देखने के लिए मिलता है। यहां पर आकर आप ट्रैकिंग कर सकते हैं। ट्रैकिंग करके आप पहाड़ी की चोटी में पहुंच सकते हैं। पहाड़ी की चोटी पर व्यू प्वाइंट बना हुआ है, जहां से आप चारों तरफ का दृश्य देख सकते हैं। साथ ही साथ नीचे तलहटी पर एक झील भी बनी हुई है, जो आप देख सकते हैं।
अमरकंटक कैसे पहुँचे (How to Reach Amarkantak)
By Road : अमरकंटक में सड़क मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। जबलपुर, डिंडोरी, मंडला, बिलासपुर, शहडोल, कटनी जैसे शहरों से आराम से बस की सुविधा उपलब्ध है। आप यहां पर बस के द्वारा आसानी से आ सकते हैं।
By Train : अमरकंटक का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पिंडरा रोड है। यह अमरकंटक से करीब 25 से 30 किलोमीटर दूर है। आप पेंड्रारोड रेलवे स्टेशन आ सकते हैं और उसके बाद अमरकंटक सड़क मार्ग के द्वारा पहुंच सकते हैं।
By Air : अमरकंटक का नजदीकी एयरपोर्ट रायपुर और जबलपुर में है। आप अपनी सुविधा के अनुसार रायपुर या जबलपुर में आ सकते हैं और उसके बाद अमरकंटक सड़क मार्ग के द्वारा पहुंच सकते हैं।
अमरकंटक का गूगल मैप लोकेशन
अमरकंटक में घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit Amarkantak)
अमरकंटक में घूमने का सबसे अच्छा समय ठंड का रहता है। आप यहां पर अक्टूबर से मार्च महीने में आ सकते हैं। अक्टूबर से मार्च का महीना ठंडा और सुहावना रहता है। इस समय अगर आप अमरकंटक के सभी पर्यटन स्थलों की सैर कर सकते हैं।
अगर आप अमरकंटक के झरनों की सैर करना चाहते हैं, तो आप मानसून के समय आ सकते हैं। मानसून के समय अमरकंटक के आसपास के सभी झरने अपने चरम पर होते हैं।
Local Food to Try
- महुआ की मिठाई
- कोदो–कुटकी की खिचड़ी
- जंगल एरिया की ऑर्गेनिक सब्जियाँ
Travel Tips
- सुबह-शाम ठंड रहती है—हल्की जैकेट रखें
- झरनों के पास सावधानी रखें
- स्थानीय गाइड का सहारा लें
- प्लास्टिक का उपयोग न करें
Conclusion
अमरकंटक एक ऐसा स्थान है जहाँ प्रकृति, अध्यात्म और पवित्रता का संगम देखने को मिलता है। यहाँ के झरने, पहाड़, उद्गम स्थल और प्राचीन मंदिर इसे भारत के सबसे खास धार्मिक-प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में से एक बनाते हैं। अगर आप ऐसी जगह ढूँढ रहे हैं जहाँ मन को शांति, आत्मा को सुकून और आँखों को प्राकृतिक सुंदरता मिले—तो अमरकंटक एकदम परफेक्ट डेस्टिनेशन है।
