भीमबेटका गुफाएँ – इतिहास, शैलचित्र, टाइमिंग, टिकट | Beautiful Bhimbetka Caves Guide

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भीमबेटका गुफाएँ: प्रागैतिहासिक मानव सभ्यता की अनमोल धरोहर

भीमबेटका गुफाएँ भारत के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। भीमबेटका की गुफाएं भारत के हृदय मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 46 किलोमीटर दूर दक्षिण में स्थित है। यह गुफाएं रातापानी वन्यजीव अभयारण्य टाइगर रिज़र्व के अंदर बनी हुई है। इन गुफाओं में ढेर सारी पेंटिंग्स दे सकते हैं, जो आदिमानव के द्वारा बनाई गई है।

भीमबेटका (Bhimbetka) न केवल इतिहास प्रेमियों के लिए बल्कि प्रकृति, कला और संस्कृति में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए भी एक अद्भुत पर्यटन स्थल है। इस लेख में हम भीमबेटका गुफाओं (Bhimbetka Caves) के बारे में जानकारी देंगे।

भीमबेटका नाम की उत्पत्ति (Origin of the name Bhimbetka)

भीमबेटका की गुफाओं (Bhimbetka Caves) का संबंध महाभारत काल के पांडव से माना जाता है। माना जाता है, कि पांडु पुत्र भीम अपने वनवास के दौरान यहां पर विश्राम किए थे, इसलिए इस जगह को भीमबेटका के नाम से जाना जाता है।
भीम + बैठक = भीमबेटका
हालाँकि ऐतिहासिक रूप से यह स्थान उससे भी हजारों साल पुराना है, लेकिन लोककथाओं ने इसे धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान दी है।

भीमबेटका क्यों प्रसिद्ध है (Why is Bhimbetka Famous?)

भीमबेटका मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल है, जो अपनी प्रागैतिहासिक गुफाओं और शैलचित्रों के कारण विश्वभर में जाना जाता है। यह गुफाएं भोपाल के पास 45 किमी दूर स्थित है। यहाँ लगभग 700 से अधिक प्राकृतिक गुफाएँ और शैल आश्रय स्थल हैं, जिनमें से कई में हजारों वर्ष पुराने चित्र आज भी सुरक्षित हैं। यह शैल चित्र आदिमानव के द्वारा बनाए गए थे। यहां पर विभिन्न विषयों में शैल चित्र बने हुए हैं। ये शैलचित्र आदिम मानव के दैनिक जीवन, शिकार, नृत्य, धार्मिक अनुष्ठानों और पशु-पक्षियों को दर्शाते हैं, जो मानव सभ्यता के प्रारंभिक विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भीमबेटका की गुफाओं (Bhimbetka Caves) में पाषाण युग से लेकर ऐतिहासिक काल तक मानव निवास के प्रमाण मिलते हैं, जिससे यह स्थल अत्यंत विशेष बन जाता है। इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए वर्ष 2003 में इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।

भीमबेटका प्राकृतिक रूप से भी सुंदर है। यह गुफाएँ प्राकृतिक रूप से विंध्य पर्वतमाला की गोद में स्थित है। यह स्थान अपनी अनोखी चट्टानों, हरियाली और शांत वातावरण के लिए भी प्रसिद्ध है। इस जगह का धार्मिक महत्व है। माना जाता है, कि महाभारत काल में पांडवों ने या विश्राम किया था। जिससे इसका पौराणिक महत्व है। इसलिए इस जगह को भीमबेटका का नाम से जाना जाता है। मतलब भीम के बैठने का स्थान।

इन सब कारण से भीमबेटका इतिहास, कला और संस्कृति में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है।

भीमबेटका गुफा की यात्रा (Bhimbetka Caves Trip)

भीमबेटका गुफाएँ (Bhimbetka Caves) भारत के सबसे मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक हैं। ये गुफाएं मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित हैं और मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 45 किलोमीटर दूर पानी, रातापानी वन्य जीव अभ्यारण्य के अंदर स्थित है। इन गुफाओं तक आसानी से सड़क के द्वारा पहुंचा जा सकता है। यहां पर आप बाइक और कार से गुफाओं तक जा सकते हैं।

भीमबेटका गुफाएँ (Bhimbetka Caves) अपने अद्भुत शैल-चित्रों और प्रागैतिहासिक मानव जीवन के प्रमाण के लिए प्रसिद्ध है। इन गुफाओं को 2003 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित किया गया है। भीमबेटका की गुफाओं (Bhimbetka Caves) में पुरापाषाण काल से लेकर ऐतिहासिक काल तक की पेंटिंग देखी जा सकती है, जो यह बताता है कि यह क्षेत्र लंबे मानव के रहने का स्थल था।

यह प्राकृतिक गुफाएं बहुत बड़े क्षेत्र में फैली हुई हैं। मगर पर्यटकों के लिए कुछ सीमित क्षेत्र की गुफाएं खोला गया है, जहां पर पर्यटक जाकर इन गुफाओं को देख सकते हैं। तो चलिए शुरू करते हैं भीमबेटका गुफाओं का सफर की, आप भीमबेटका कैसे जा सकते हैं और इन गुफाओं को देख सकते हैं।

भीमबेटका गुफाएँ (Bhimbetka Caves) में यात्रा करने के लिए सबसे पहले भोपाल आ सकते हैं। भोपाल से यह गुफाएं करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित है। यह गुफाएं भोपाल होशंगाबाद हाईवे मार्ग के पास में रतापानी वन्य जीव अभ्यारण के अंदर स्थित है। यहां पर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट से या अपने वाहन से आ सकते हैं।

आप भोपाल शहर में हवाई मार्ग और रेल मार्ग से पहुंच सकते हैं। भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी है, इसलिए यहां पर आसानी से आया जा सकता है। उसके बाद भीमबेटका गुफाओं की तरफ आप सफर कर सकते हैं। आप अपनी सुविधा अनुसार यहां पर जा सकते हैं।

यह गुफाएं भोपाल के पास अब्दुल्लागंज कस्बा के करीब है। अब्दुल्लागंज से भीमबेटका गुफाएँ (Bhimbetka Caves) करीब सात किलोमीटर दूर है। गुफाओं तक पहुंचाने के लिए सड़क मार्ग बना हुआ है। यहां पर गुफाओं तक आप अपने वाहन से आराम से जा सकते हैं। भोपाल से होशंगाबाद मार्ग जाने वाले हाईवे मार्ग पर बहुत सारे अन्य पर्यटन स्थल है, जहां पर भी आप चाहे तो घूमने जा सकते हैं।

भोपाल होशंगाबाद रूट पर विश्व प्रसिद्ध भोजपुर मंदिर बना है, जो सबसे बड़े शिवलिंग के कारण प्रसिद्ध है। आप यहां पर जाकर भगवान शिव के दर्शन कर सकते हैं। इसके अलावा यहां पर आस-पास और भी पुरातात्विक स्थल है, जहां पर आप घूमने के लिए जा सकते हैं। आप अपने भीमबेटिका की गुफा की यात्रा में इस जगह को भी शामिल कर सकते हैं।

भीमबेटका की गुफाएं (Bhimbetka Caves) अब्दुल्लागंज वन क्षेत्र में स्थित है। भोपाल होशंगाबाद रोड पर पर्यटन विभाग द्वारा बोर्ड लगाया गया है। इस बोर्ड को फॉलो करते हुए आप भीमबेटका की गुफाओं तक जा सकते हैं। इस बोर्ड के बाजू से ही रास्ता गया है। उस रास्ते की तरफ बढ़ाना है और सीधा जाना है।

भोपाल होशंगाबाद रोड से भीमबेटका करीब 3 किलोमीटर दूर है और यहां तक पहुंचाने के लिए पक्की सड़क है। सड़क की शुरुआत में रेलवे क्रासिंग है, और फिर दोनों तरफ सुंदर खेत देखने लिए मिलते हैं, जो रास्ते को और भी ज्यादा आनंदमई बनाते हैं। आगे जाकर आपको जंगल देखने के लिए मिलता है।

यहां पर वन विभाग की चौकी बनी हुई है, जहां से आपको टिकट लेना पड़ता है। उसके बाद, आप इस जगह पर प्रवेश कर सकते हैं। यहां पर प्रवेश करने पर जंगल का सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है। बड़े-बड़े पहाड़, खुले मैदान और साथ में ही जंगली जानवर भी देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर मोर, लोमड़ी, हिरण यह सभी जानवर आराम से देखे जा सकते हैं।

यह सभी जानवर यहां पर खुले में विचरण करते हैं, जो बहुत ही आकर्षक लगते हैं। इन सभी प्राकृतिक दृश्य का आनंद उठाते हुए, आप भीमबेटका गुफाओं तक पहुंच जाते हैं। भीमबेटिका की गुफाएं (Bhimbetka Caves) चारों तरफ से प्राकृतिक वातावरण से घिरी है। यहां पर आप अपनी गाड़ी पार्किंग में खड़ी कर सकते हैं। यहां पर गार्ड भी खड़े रहते हैं। यहां पर बाथरूम और पीने के पानी की व्यवस्था भी है। आप यहां अपना सामान रखकर, गाड़ी खड़ी करके घूमने के लिए जा सकते हैं।

यहां पर सबसे पहले आपको एक बड़ा सा ऑडिटोरियम देखने के लिए मिलता है, जिसे सभागृह के नाम से जाना जाता था। यह गुफा नंबर एक है और इसकी ऊंचाई करीब 20 मीटर है। इस गुफा की खोज श्री विष्णु श्रीधर वाकणकर द्वारा की गई थी। इस गुफा के निचले हिस्से में हस्त निर्मित पाषाण हथियार मिले हैं। यहां पर हस्त कुकुर, कुल्हाड़ी और पाषाण कालीन उपकरण प्राप्त हुए हैं।

इस गुफा के ऊपरी हिस्से की छत पर बाहरी सीमा पर हाथियों का चित्रण किया गया है, जिसमें छोटे हाथी पर एक आदमी बैठा हुआ है, जिसके एक हाथ में अंकुश, दूसरे हाथ में भाला तथा कमर में तलवार बंधी हुई है। दोनों हाथियों के दांत काफी लंबे हैं। गुफा नंबर एक के पास में, गुफा नंबर दो बनी हुई है, जो बहुत छोटी है। मगर बहुत सुंदर है। यहां पर माटी के पुतले देखने के लिए मिलते हैं, जो मानव निर्मित है।

यह गुफा 5 मीटर ऊंची है। इस गुफा में मूर्तियों में स्त्री, पुरुष और बच्चे की मूर्ति है और इन मूर्तियों की माध्यम से यह बताने की कोशिश की गई है, कि प्राचीन काल में आदिमानव कैसे रहा करते थे। यहां पर भी चित्र बने हैं। मगर यह चित्र समय के साथ धुंधले पड़ गए हैं। आप इन गुफाओं को देखने के बाद आप आगे बढ़ सकते हैं।

भीमबेटका के अन्य गुफाओ में जाने के लिए पतला और पक्का रास्ता बना है। रास्ते के दोनों तरफ पेड़ पौधे लगे हुए हैं। यहां पर ढेर सारे बंदर भी हैं, जो नुकसान नहीं करते हैं, मगर आप बंदर से शरारत ना करें, तो बेहतर रहेगा। नहीं तो बंदर आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं और खाने पीने का सामान अपने पास ना रखे।

आगे जाने पर गुफा नंबर चार देखने के लिए मिलती है, जिसे जंतु शैलाश्रय या जू रॉक के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस शैलाश्रय में ढेर सारे जानवर के चित्र बने हुए हैं। इस शैलाश्रय में कुल 453 आकृतियां बनी हुई है, जिनमें से 16 प्रजाति के 252 जानवरों की आकृतियों का चित्रण है। यह गुफा अर्धवृत्ताकार है और इसकी ऊंचाई 3.4 मीटर है और इसका क्षेत्रफल 14 मीटर और गहराई 6.2 मीटर है।

गुफा नंबर 4 को देखने के बाद, आगे जाने पर गुफा नंबर 5 देखने के लिए मिलती है। गुफा नंबर 5 कछुए के आकार के सामान की लगती है। यहां पर व्यूप्वाइंट भी बना हुआ है, जहां से आप पहाड़ी से दूर तक का सुंदर दृश्य देख सकते हैं। यहां पर दूर तक जंगल और पहाड़ों का सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है।

यहां पर बेतवा नदी का कछार मैदान दिखाई देता है। आगे जाने पर गुफा नंबर 8 देखने के लिए मिलती है। इस गुफा में चमगादड़ है। इस गुफा में आराम से जाकर खड़े हो सकते हैं। गुफा नंबर 8 में भी चित्र बने हुए हैं, मगर समय के साथ यह चित्र धुंधले पड़ गए हैं। यहां पर सैनिकों और घुड़सवार का चित्रण किया गया है।

आगे जाने पर गुफा नंबर 9 देखने के लिए मिलती है। यह गुफा छोटी है। इसकी ऊंचाई कम है। इसकी छत पर चित्रण किया गया है। इसके चित्र समय के साथ धुंधले पड़ गए हैं। इसमें कवच पहने सैनिक, घुड़सवार और सैनिक का चित्रण है। यहां पर लाल और रंग के अलावा सफेद रंग से चित्र बनाए गए हैं। सफेद रंग के चित्र प्राचीन है, क्योंकि लाल रंग के चित्रण के ऊपर बने हुए हैं।

आगे जाने पर आपको और भी बहुत सारी गुफाएं देखने के लिए मिलती है। यहां पर शैलाश्रय 10, 11, 12, 13, 14 बने हुए हैं। इन सभी शैलाश्रय में आप घूम सकते हैं और पेंटिंग देख सकते हैं। सभी शैलाश्रय में अलग-अलग पेंटिंग बनी हुई है। इसके अलावा आपके यहां पर प्रकृति और आसपास हरियाली भी देखने के लिए जो मिलती है, जो इस जगह को और भी ज्यादा अद्भुत बनती है।

यहां पर एक विशाल बरगद का वृक्ष देखने के लिए मिलता है, जो चट्टानों के बीच से होकर निकला है। इसकी जड़ चट्टानों को चीरते हुए जमीन में गई है, जो बहुत ही सुंदर लगता है। आप यहां पर कुछ समय बैठ सकते हैं और शांति का अनुभव कर सकते हैं। उसके बाद आप इन गुफाओं से बाहर आ सकते हैं।

भीमबेटका शैलाश्रय (Bhimbetka Caves) से थोड़ा आगे जाने पर एक प्राचीन स्थल है। यह स्थल भी ऐतिहासिक और धार्मिक है। यहां पर अष्टभुजी वैष्णो देवी मंदिर बना है। यह मंदिर प्राकृतिक रूप से बनाया गया है। यह मंदिर प्राकृतिक पहाड़ी के नीचे बना हुआ है और बहुत सुंदर है। आप इस मंदिर में जाकर दर्शन कर सकते हैं।

मंदिर के पास यहां पर एक विशाल बरगद का पेड़ लगा हुआ है। बरगद के पेड़ के नीचे चबूतरा बना हुआ है, जहां पर एक छोटी सी खाने-पीने की दुकान लगती है, जहां पर आप खाने पीने का सामान और प्रसाद ले सकते हैं। भीमबेटका की यह सभी जगह देखने के बाद आप अपनी यात्रा में आगे जा सकते हैं।

भीमबैठका शैलाश्रय की खोज किसने की (Who discovered Bhimbetka?)

भीमबैठका के शैलाश्रय (Bhimbetka Caves) एवं शैलचित्र की खोज डॉ विष्णु श्रीधर वाकणकर ने सन 1957 से 1958 में भीमबैठका की खोज की। डॉ वी श्रीधर वाकणकर ने भीमबेटिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। डॉ वी श्रीधर वाकणकर विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के प्रोफ़ेसर थे। उनकी इस खोज तथा शोध के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।

इस महत्वपूर्ण खोज ने शैल कला के क्षेत्र में अनेक शोधों नई दिशा प्रदान की तथा विभिन्न शोधकर्ताओं तथा संस्थाओं ने अनेक चित्रित शैलाश्रय की खोज की और उत्खनन किया और शैलाश्रय जीवन से संबंधित विभिन्न आयामों को लोगों के सामने प्रस्तुत किया।

भीमबेटका गुफा की विशेषता (Features of the Bhimbetka Caves)

भीमबेटका (शैलचित्रों) की मुख्य विशेषता – भीमबैठका में बनाई गई चित्र से मानव आकृतियां, शिकार, सामूहिक नृत्य, पशु पक्षी, युद्ध, प्राचीन मानव की दैनिक क्रियाकलापों को दर्शाया गया है। यहां पर बनाए गए चित्रों से पता चलता है, कि यह पेंटिंग 100000 साल पुरानी है।

मतलब भीमबैठका में सबसे पहले मानव की उत्पत्ति हुई है। भीमबैठका में और भी अन्य जगह हैं, जिन्हें देखा जा सकता है। भीमबेटका के आसपास बहुत सारे प्राचीन अवशेष पाए गए हैं। प्राचीन किले की दीवारें, लघु स्तूप, पाषाण निर्मित भवन, शंगु- गुप्तकालीन अभिलेख, शंख अभिलेख और परमार कालीन मंदिर के अवशेष यहां पर पाए गए हैं।

चित्रित शैलाश्रय भीमबैठका – भीमबैठका में 750 शैलाश्रय हैं, जिनमें 500 शैलाश्रय चित्रों द्वारा सुसज्जित है। यह स्थल पूर्व पाषाण काल से मध्य ऐतिहासिक काल तक मानव गतिविधियों का केंद्र रहा है।

भीमबेटका की गुफाएं कितनी पुरानी है (How old are the Bhimbetka caves?)

भीमबेटका की गुफाएं (Bhimbetka Caves) लाखों साल पुरानी है। भीमबेटका में आदिकाल से मानव निवास करता आया है। यहां हुए उत्खनन से मालूम चलता है, कि पूर्व पाषाण काल लगभग एक लाख से 40000 वर्ष पूर्व से लेकर मध्यकाल आज से लगभग 10000 वर्ष पूर्व तक, यहां मानव ने निवास किया है।

इस लंबे काल तक मानव के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में अनेक परिवर्तन हुए। यहां से प्राप्त सांस्कृतिक अवशेषों जैसे पाषाण उपकरण, शवाधान तथा मुख्यतः चित्र मानव जीवन के विकास क्रम को दर्शाती है। इनमें से शैल चित्र मध्य काल के मानव को जानने का एक मुख्य जरिया है।

भीमबेटका गुफाओं की टाइमिंग  (Bhimbetka Opening Hours)

भीमबैठका के खुलने का समय – सुबह 7:00 बजे
शाम 5:00 बजे तक

भीमबेटका गुफा एंट्री फीस (Bhimbetka Caves Entry Fees)

भीमबेटका गुफा (Bhimbetka Caves) पर अलग-अलग वाहन का अलग-अलग एंट्री शुल्क लगता है।

  • बस या मिनी बस – 300 रूपए
  • कार, जीप या हल्के वाहन – 150 रुपया (जिसमें छह व्यक्ति हो)
  • ऑटो – 100 (जिसमें 3 व्यक्ति हो)
  • बाइक – 50 रूपए (जिसमें 2 व्यक्ति हो)
  • पैदल – 15 रूपए (1 व्यक्ति)

भीमबेटका की गुफाएं कहां स्थित है (Where are the Bhimbetka Caves located)

भीमबेटका एक विश्व प्रसिद्ध धरोहर है। भीमबेटका भोपाल के दक्षिण पूर्व दिशा में स्थित है और भोपाल से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भीमबेटका की गुफाएं (Bhimbetka Caves) रायसेन जिले के अंतर्गत आती है।

यह भोपाल होशंगाबाद मार्ग पर आदिवासी ग्राम भियापुर के निकट स्थित है। यहां पर आराम से बस, टैक्सी या खुद के वाहन से पहुंचा जा सकता है। यहां पार्किंग की बहुत अच्छी व्यवस्था है। भीमबेटका की गुफाएं विंध्याचल की पहाड़ियों पर रातापानी अभयारण के अंदर स्थित है। यह जगह अब्दुल्लागंज के समीप में स्थित है।

भीमबेटका शैलाश्रय का गूगल मैप लोकेशन

भीमबेटका रॉक शेल्टर्स की संरचना

भीमबेटका क्षेत्र में लगभग 700 से अधिक शैल आश्रय (Rock Shelters) पाए जाते हैं, जिनमें से करीब 240 गुफाएँ संरक्षित क्षेत्र में आती हैं।

इन गुफाओं की प्रमुख विशेषताएँ:

  • प्राकृतिक चट्टानों से बनी संरचना
  • पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा क्षेत्र
  • बलुआ पत्थर (Sandstone) की चट्टानें
  • विशाल छतें और खुले आश्रय स्थल

भीमबेटका के शैलचित्र (Rock Paintings)

भीमबेटका गुफाओं (Bhimbetka Caves) की सबसे बड़ी खासियत यहां बने प्रागैतिहासिक शैलचित्र हैं। ये चित्र प्राकृतिक रंगों से बनाए गए हैं, जो हजारों वर्षों बाद भी स्पष्ट दिखाई देते हैं।

भीमबेटका के चित्र – शैलचित्रों में दर्शाए गए विषय:

  • शिकार करते मानव
  • हिरण, हाथी, भैंस, बाघ और घोड़े
  • नृत्य और उत्सव
  • युद्ध के दृश्य
  • धार्मिक और सामाजिक क्रियाएँ

भीमबेटका के चित्र रंगों का उपयोग:

  • लाल (हेमेटाइट से)
  • सफेद
  • पीला
  • हरा

ये चित्र उस समय के मानव जीवन, सोच और संस्कृति को समझने में अत्यंत सहायक हैं।

भीमबेटका घूमने का सबसे अच्छा समय (The best time to visit Bhimbetka Caves)

भीमबेटका में घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच में होता है। इस समय ठंड का मौसम रहता है। इस दौरान मौसम बहुत ही सुहावना रहता है। गर्म कम होती है और घूमने में आनंद आता है। इस समय आप आराम से ट्रैकिंग वगैरह कर सकते हैं।

आप यहां पर गर्मियों के समय भी आ सकते हैं। गर्मियों में भी यहां पर ज्यादा गर्मी नहीं रहती है। आप यहां पर आकर अच्छा समय बिता सकते हैं। बरसात के समय यहां पर चट्टानें फिसलन भरी हो जाती है, मगर हरियाली चारो तरफ रहती है।

भीमबेटका कैसे पहुँचें (How to reach Bhimbetka caves)

सड़क मार्ग से : भीमबेटका भोपालहोशंगाबाद हाईवे मार्ग पर स्थित है। भोपाल से भीमबेटका के लिए नियमित टैक्सी और बस सुविधा उपलब्ध है।

रेल मार्ग से : भीमबेटका का नजदीकी रेलवे स्टेशन भोपाल जंक्शन है। आप किसी भी अन्य शहर से भोपाल आ सकते हैं और उसके बाद भी भीमबेटका सड़क मार्ग से आ सकते हैं।

हवाई मार्ग से : भीमबेटका का नजदीकी हवाई अड्डा भोपाल में बना है। भोपाल में राजा भोज एयरपोर्ट बना हुआ है। आप भोपाल में वायु मार्ग से आ सकते हैं। उसके बाद भी भीमबेटका सड़क मार्ग के द्वारा पहुंच सकते हैं।

भीमबेटका घूमते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • गुफाओं की दीवारों को न छुएँ
  • शैलचित्रों को नुकसान न पहुँचाएँ
  • प्लास्टिक का प्रयोग न करें
  • गाइड की सहायता लेना बेहतर होता है
  • आरामदायक जूते पहनें

निष्कर्ष

भीमबेटका गुफाएँ (Bhimbetka Caves)  केवल पत्थरों का समूह नहीं हैं, बल्कि यह मानव इतिहास की शुरुआत की कहानी कहती हैं। यहाँ बने शैलचित्र, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व इसे भारत के सबसे अनोखे पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं।

यदि आप इतिहास, कला और प्रकृति से प्रेम करते हैं, तो भीमबेटका गुफाएँ आपकी यात्रा सूची में अवश्य होनी चाहिए।

 

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