शहडोल जिले में घूमने की जगह: प्रकृति, इतिहास और आदिवासी संस्कृति का अद्भुत संगम
शहडोल मध्य प्रदेश राज्य के उत्तर पूर्वी भाग में स्थित एक मुख्य जिला है। यह जिला अपने घनी हरियाली, कोयला खदानों, नदियों, झरनों, ऐतिहासिक धरोहर और आदिवासी संस्कृति के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। शहडोल विंध्य और मैंकल पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित है, जिससे यहां का प्राकृतिक सौंदर्य अत्यंत ही दुर्लभ होता है।
यहां पर पर्यटक जाकर अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं। यह एक आदर्श परफेक्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन है, जो भीड़ भाड़ से दूर शांति समय प्रकृति और सांस्कृतिक अनुभव की तलाश कर रहे हैं।
आज इस लेख में हम शहडोल जिले के बारे में, शहडोल जिले के आस-पास घूमने के प्रमुख स्थलों (Shahdol Tourist Places in Hindi) के बारे में जानकारी देंगे। अगर आप शहडोल जिले में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यह लेकर आपके लिए उपयोगी होगा। तो चलिए जानते हैं शहडोल जिले में घूमने की जगह (Shahdol Tourist Places in Hindi), इतिहास, शहडोल में घूमने का सही समय, शहडोल कैसे पहुंचे, शहडोल टूर प्लान के बारे में विस्तृत जानकारी।
शहडोल जिले का इतिहास (Shahdol District History)
शहडोल मध्य प्रदेश के उत्तरी पूर्वी भाग में स्थित एक प्रमुख जिला है। यह क्षेत्र अपने समृद्ध इतिहास, सांस्कृति और आदिवासी विरासत के लिए जाना जाता है। यह क्षेत्र प्राचीन समय में मानव सभ्यता का केंद्र रहा है। शहडोल जिला विशेष रूप से गोंड जनजाति की ऐतिहासिक भूमि है। यहां पर आज भी आदिवासी परंपरा देखि जा सकती है।
प्राचीन काल के समय शहडोल क्षेत्र चेदि महाजनपद के अंतर्गत आता था। यहां से प्राप्त तो पुरातात्विक अवशेष से यह प्रमाण मिलता है, कि यह क्षेत्र आदिमानव से लेकर विकसित सभ्यताओं तक का साक्षी रहा है। बाणसागर, सोन नदी, जोहिला नदी के किनारे बसे क्षेत्र प्राचीन समय में कृषि और व्यापार के केंद्र थे।
मध्यकाल में शहडोल क्षेत्र गोंड राजाओं का शासन रहा। गोंड शासको ने यहां अनेक के लिए तालाब और मंदिर का निर्माण कराया। गोंड संस्कृति और परंपरा आज भी शहडोल जिले की पहचान है। गोंड शासन के पश्चात यह क्षेत्र मुगल साम्राज्य के अधीन आया। मुगलों के बाद यह क्षेत्र मराठा के नियंत्रण में आया। इस क्षेत्र में इस काल में प्रशासनिक बदलाव हुए और व्यापारिक गतिविधियां बढ़ी।
ब्रिटिश काल के दौरान शहडोल को प्रशासनिक रूप से संगठित किया गया। शहडोल में रेल मार्ग का विस्तार हुआ, जिससे कोयला और वन संपदा के दोहन में तेजी आई। इस समय यहां पर शिक्षा और आधुनिक प्रशासन की नींव पड़ी। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में शहडोल जिले के लोगों का सक्रिय भूमिका थी। आदिवासी समाज और स्थानीय क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के विरोध आंदोलन किया।
स्वतंत्रता के बाद, शहडोल मध्य प्रदेश का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिला बना। बाद में इसे अनूपपुर और उमरिया जिले अलग किए गए। वर्तमान में शहडोल शिक्षा, उद्योग कोयला खनन और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। शहडोल आज भी आदिवासी लोक नृत्य, लोकगीत, त्योहार और परंपराओं के लिए जाना जाता है।
शहडोल के आसपास घूमने के प्रमुख स्थान (Shahdol Tourist Places in Hindi)
1. विराट मंदिर शहडोल (Virat Mandir Shahdol)
विराट मंदिर शहडोल के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थानों में से एक है। यह मंदिर सोहागपुर में स्थित है। इस मंदिर में आप सड़क मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। यह मंदिर प्राचीन है और बहुत सुंदर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर को विराटेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
विराटेश्वर मंदिर पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है। इस मंदिर में आकर बहुत अच्छा लगता है। यह मंदिर 11वीं शताब्दी में बना हुआ है। इसे कलचुरी कालीन महाराजा युवराज देव जी ने बनाया था। इस मंदिर में गर्भग्रह, मंडप, अर्धमंडप और महामंडप बना है। मंदिर की दीवारों में सुंदर नक्काशी की गई है, जो देखने लायक है।
इस मंदिर की दीवारों की नक्काशी खजुराहो के मंदिर के समान है। इस मंदिर में बहुत सारी कामुक मूर्तियां देखने के लिए मिलती है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भगवान शिव का शिवलिंग विराजमान है और नंदी भगवान विराजमान है। मंदिर में आकर अच्छा लगता है। आप यहां पर दर्शन कर सकते हैं। मंदिर के आस-पास एक बड़ा बगीचा है।
विराट मंदिर की खासियत
- मंदिर में महाशिवरात्रि और सोमवार में विशाल मेला लगता है
- मंदिर का वातावरण शांत और आध्यात्मिक है
- मंदिर के मुख्य गर्भगृह में प्राचीन शिवलिंग के दर्शन
2. बाणसागर बाँध (Bansagar Dam)
बाणसागर बांध मध्य भारत के सबसे बड़े बांधों में से एक है। यह बांध शहडोल जिले का एक प्रसिद्ध और आकर्षक पर्यटन स्थल है। यहां पर आकर अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिताया जा सकता है। यह बांध प्राकृतिक प्रेमियों के लिए एक शानदार जगह है। यहां पर हरे-भरे शांत वातावरण और विशाल जलाशय इसे एक अच्छा पर्यटन स्थल बनता है।
बाणसागर बांध शहडोल जिले के पास देवलोद गांव में बना हुआ है। आप यहां पर सड़क मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। यह सोन नदी पर बना हुआ है। बाणसागर बांध रीवा शहडोल मार्ग पर बना हुआ है। यह बांध रीवा से 50 किलोमीटर दूर और शहडोल से 100 किलोमीटर दूर है।
बाणसागर बांध बहुउद्देश्यीय नदी घाटी परियोजना है। है। इस बांध से सिंचाई और जल विद्युत पैदा की जाती है। इस बांध में 18 गेट है। बरसात के समय यह गेट खोले जाते हैं, जिससे बांध का दृश्य और भी ज्यादा सुंदर लगता है। यहां पर शाम के समय सूर्यास्त का नजारा देखने का आनंद ही अलग होता है। बाणसागर बांध की नीव प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने 1978 में रखी थी और 2006 में इस बांध का इनॉग्रेशन अटल बिहारी वाजपेई के द्वारा किया गया था।
मुख्य आकर्षण
- विशाल जलाशय
- सूर्यास्त का मनोरम दृश्य
- फोटोग्राफी और पिकनिक के लिए उपयुक्त
घूमने का सही समय: अक्टूबर से मार्च
क्यों जाएँ: प्राकृतिक सौंदर्य और शांति के लिए
3. मां शारदा मंदिर घाटी डोंगरी (Maa Sharda Temple Ghati Dongri)
मां शारदा धाम मंदिर को मिनी मैहर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर शहडोल जिले के पास घूमने के लिए प्रमुख आकर्षण और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर अटरिया गांव में बना हुआ है। यह पर मानपुर-टेटका मार्ग से होते हुए आ सकते हैं। यह मंदिर हरियाली से घिरा है। यहां पर आप अपने वाहन से या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आ सकते हैं। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है।
यह मंदिर शारदा माता को समर्पित है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। मंदिर तक पहुंचाने की यात्रा थकान भरी रहती है, मगर मंदिर में पहुंच कर बहुत अच्छा लगता है। यह मंदिर प्राचीन है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में शारदा माता के काले पत्थर से बनी हुई बहुत ही सुंदर प्रतिमा विराजमान है, जो बहुत ही आकर्षक लगती है।
4. तुम्मी पहाड़ी शहडोल (Tummi Hills Shahdol)
तुम्मी पहाड़ी शहडोल के पास घूमने के लिए एक सुंदर और प्राकृतिक स्थान है। यहां पर चारों तरफ हरी भरी घाटियों और पहाड़ी का व्यू देखने के लिए मिलती है। यहां पर पहुंचने के लिए सड़क मार्ग बना हुआ है। यहां पर आप अपनी बाइक और कार से आराम से पहुंच सकते हैं और इस जगह में घूम सकते हैं।
यहां पर व्यूप्वाइंट बने हुए हैं, जहां से आप दूर-दूर तक फैले पहाड़, जंगल और सुंदर घाटियों को देख सकते हैं। यहां पर बरसात के समय ढेर सारे जलप्रपात भी देखने के लिए मिलते हैं, जो बहुत ही आकर्षक लगते हैं। आप यहां पर बरसात और ठंड के समय घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर आने का रास्ता भी हरे भरे जंगलों से घिरा रहता है।
5. झरिया नाला शहडोल (Jharia Nala Shahdol)
झरिया नाला शहडोल के पास घूमने के लिए एक बहुत ही बढ़िया जगह है। यह जगह प्राकृतिक वातावरण और हरियाली से घिरी है। यह इको टूरिज्म पॉइंट है। यह शहडोल के पास घुनघुटी में बना हुआ है। यहां पर आप सड़क मार्ग और रेल मार्ग से आराम से पहुंच सकते हैं। यहां पर ढेर सारे स्थल हैं, जहां पर आप घूम सकते हैं और ढेर सारी गतिविधियां हैं, जिनका आप आनंद उठा सकते हैं।
यहां पर आकर आपको चारों तरफ हरा भरा जंगल का दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर ढेर सारे व्यू प्वाइंट बने हुए हैं, जहां से आप आस-पास के दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। प्रकृति के साथ समय बिताने के लिए यह एक बढ़िया जगह है।
6. बूढ़ी माता मंदिर शहडोल (Budhi Mata Mandir Shahdol)
बूढ़ी माता मंदिर शहडोल के पास एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर शहडोल मुख्य शहर से 3 किलोमीटर दूर शहडोल बाईपास में स्थित है। यहां पर आप सड़क मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। यह मंदिर बहुत ही प्राचीन है। मंदिर के बारे में ढेर सारी मान्यताएं हैं।
मंदिर के मुख्य गर्भगृह में बूढ़ी माता की बहुत ही आकर्षक प्रतिमा के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। बूढ़ी माता मां दुर्गा का ही रूप है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है, कि यहां पर आकर आप जो भी मनोकामना मांगते हैं। वह पूरी होती है। यहां पर मंदिर परिसर में और भी मंदिर बने हुए हैं।
यहां पर हनुमान मंदिर, शंकर जी मंदिर, गणेश जी मंदिर, शानी मंदिर, रामजी मंदिर, भैरव जी मंदिर बना हुआ है। मंदिर का माहौल सकारात्मक है। मंदिर में हनुमान जी की एक विशाल प्रतिमा है। यहां पर गार्डन भी बना हुआ है, जहां बैठकर आप शांति का अनुभव कर सकते हैं।
7. सरफा बांध शहडोल (Sarfa Dam Shahdol)
सराफा बांध शहडोल शहर के पास घूमने के लिए एक सुंदर जगह है। यहां पर आपको एक सुंदर जलाशय देखने के लिए मिलता है, जो सराफा नाला नदी पर बना है। यहां पर आप अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं। यह डैम शहडोल बुरहर रोड के पास बना हुआ है। यहां पर आप आसानी से अपने वाहन से पहुंच सकते हैं।
बरसात के समय डैम का नजारा बहुत ही आकर्षक होता है। जब डैम पानी से ओवरफ्लो होकर बहता है, तब यह बहुत ही सुंदर लगता है। यह ऐसा लगता है, जैसे कोई झरना बह रहा हो। सराफा डैम के पास ही एक मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यहां आकर आप अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं।
8. क्षीर सागर शहडोल (Ksheer Sagar Shahdol)
क्षीर सागर पिकनिक स्पॉट शहडोल के पास घूमने के लिए प्राकृतिक स्थान है। यह शहडोल वन क्षेत्र में टिकुरी गांव में सोन नदी के पास स्थित है। यहां पर आने के लिए सड़क मार्ग बना हुआ है। यहां पर आप अपने वाहन से या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आसानी से आ सकते हैं। यह शहडोल में परिवार और दोस्तों के साथ घूमने के लिए बहुत ही बढ़िया जगह है।
यहां का शांत माहौल, नदी की सुंदर धारा और चारों तरफ हरियाली लोगों को अपनी और आकर्षित करती है। यहां पर अगर आप अच्छा और शानदार वातावरण एंजॉय कर सकते हैं। यहां पर मध्य प्रदेश की दो प्रमुख नदियां मुरना नदी और सोन नदी का संगम हुआ है।
यहां चारों तरफ घना जंगल है। इस जगह को मध्य प्रदेश का मिनी गोवा कहा जाता है। जंगल के और अंदर जाने पर छोटा सा जलप्रपात भी देखने के लिए मिलता है। यहां पर सोन नदी का पानी ज्यादा गहरा नहीं है। इसलिए यहां पर नहाने का आनंद उठाया जा सकता है। यहां पर मकर संक्रांति में बहुत ज्यादा भीड़ लगती है। यहां पर मंदिर भी बना हुआ है, जिससे यह जगह आध्यात्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।
9. सिंहवासिनी माता का मंदिर शहडोल (Singhwasini Mata Temple Shahdol)
सिंहवासिनी माता मंदिर शहडोल के पास घूमने के लिए एक प्रमुख धार्मिक स्थान है। यह मंदिर जैतपुर तहसील के चांदपुर गांव में बना है। इस मंदिर में आप आसानी से सड़क मार्ग के द्वारा पहुंच सकते हैं। इस मंदिर में आप अपने वाहन से या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आ सकते हैं। यह मंदिर बहुत प्राचीन है।
मंदिर के गर्भगृह में विराजमान माता की प्रतिमा कलचुरी कालीन है। यह प्रतिमा बहुत ही आकर्षक लगती है। यहां पर माता सिंह पर सवार है, इसलिए इन्हे सिंहवाहिनी के नाम से जाना जाता है। माता के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। इस मंदिर को लेकर ढेर सारी मान्यताएं हैं।
यहां पर नवरात्रि के समय ढेर सारे भक्त माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। नवरात्रि के समय यहां पर मेले का आयोजन होता है। मंदिर के बारे में मान्यता है, कि मंदिर में आप जो भी मनोकामना मांगते हैं। वह जरूर पूरी होती है। यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है।
10. केलमानिया घाट शहडोल (Kelmania Ghat Shahdol)
केलमानिया घाट शहडोल शहर के पास एक प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर स्थल है। यहां पर आपको खूबसूरत भू भाग देखने के लिए मिलता है। यहां पर चारों तरफ हरियाली, पेड़ पौधे और सुंदर घाटियों का दृश्य देखने के लिए मिलता है। ये जगह बरसात के समय और भी आकर्षक लगती है। जब चारों तरफ हरियाली रहती है। यहां पर आकर बरसात के समय आप सुंदर जलप्रपात देख सकते हैं। यहां पर व्यूप्वाइंट बने हुए हैं, जहां से आप दूर-दूर तक फैले हुए घाटी का दृश्य देख सकते हैं।
शहडोल जिले की आदिवासी संस्कृति
शहडोल जिले की पहचान इसकी गोंड जनजाति है। यहां पर कई जगह पर आदिवासी जनजाति रहती है और आज भी वह अपने पारंपरिक रीति-रिवाज को फॉलो कर रही है।
मुख्य विशेषताएँ
- पारंपरिक वेशभूषा
- लोककला और चित्रकला
- प्रकृति आधारित पूजा पद्धति
शहडोल का खान-पान
यहाँ का भोजन सादा, पौष्टिक और स्थानीय होता है। यहां पर आदिवासियों का जीवन सामान्य होता है और उनका खान-पान भी सामान्य होता है। आप यहां पर जाकर उनके खान-पान का आनंद उठा सकते हैं।
प्रसिद्ध व्यंजन
- मक्का की रोटी
- कोदो-कुटकी
- साग-भाजी
- स्थानीय चटनी
शहडोल में घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit Shahdol)
शहडोल में घूमने का सबसे अच्छा समय ठंड का होता है। आप यहां पर अक्टूबर से मार्च के समय आ सकते हैं। अक्टूबर के मार्च के समय आकर आप यहां के सभी पर्यटन स्थलों की सैर कर सकते हैं। यहां पर आप मानसून के समय भी आ सकते हैं। मानसून के समय शहडोल के आसपास के क्षेत्र में हरियाली रहती है और आसपास के खूबसूरत झरने आप देख सकते हैं। गर्मी के समय यहां पर यात्रा करने में कठिनाई होती है।
शहडोल कैसे पहुँचें (How to reach Shahdol)
रेल मार्ग: शहडोल मुख्य शहर में रेलवे स्टेशन बना हुआ है। शहडोल रेलवे स्टेशन, प्रमुख स्टेशनों से जुड़ा हुआ है। यहां पर सभी प्रमुख शहरों से ट्रेन आती है। आप यहां पर रेल मार्ग से आ सकते हैं। उसके बाद अन्य स्थानों में सड़क मार्ग से जा सकते हैं।
सड़क मार्ग: शहडोल में सड़क मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। शहडोल अन्य शहर जैसे रीवा, अनूपपुर, कटनी, जबलपुर, उमरिया से सड़क मार्ग से अच्छी तरह कनेक्ट है। आप यहां पर बस और अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आ सकते हैं।
हवाई मार्ग: शहडोल का नजदीकी एयरपोर्ट जबलपुर में है। जबलपुर शहडोल से करीब 190 किलोमीटर दूर है। आप वायु मार्ग से अन्य शहरों से जबलपुर आ सकते हैं और उसके बाद शहडोल सड़क मार्ग के द्वारा आ सकते हैं।
शहडोल जिला का गूगल मैप लोकेशन
शहडोल यात्रा के लिए उपयोगी टिप्स
- मानसून में झरनों के पास सावधानी रखें
- आदिवासी क्षेत्रों की संस्कृति का सम्मान करें
- स्थानीय गाइड से जानकारी लें
निष्कर्ष
शहडोल जिला प्राकृतिक सुंदरता, नदियों, बाँधों, आदिवासी संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत का अनोखा संगम है। बाणसागर बाँध की भव्यता से लेकर सोन और जोहिला नदियों की शांति तक, यहाँ हर प्रकृति प्रेमी और शांति चाहने वाले पर्यटक के लिए कुछ न कुछ खास है। यदि आप मध्य प्रदेश के किसी शांत, हरियाली से भरे और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जिले की यात्रा करना चाहते हैं, तो शहडोल आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होना चाहिए।
इस लेख में हमने शहडोल जिले के इतिहास और सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देने का प्रयास किया है। यदि आप शहडोल जिले से जुड़े किसी पर्यटन स्थल, ऐतिहासिक स्थान या यात्रा से संबंधित कोई अतिरिक्त जानकारी जोड़ना चाहते हैं या इस लेख में किसी प्रकार का सुधार करना चाहते हैं, तो कृपया हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं।
हमें आपके सुझावों के अनुसार लेख में बदलाव करने में खुशी होगी। यदि आपको यह लेख उपयोगी और रोचक लगा हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर शेयर करें, खासकर उनके साथ जो शहडोल यात्रा का प्लान कर रहे हैं।
