त्रिवेणी संगम – गंगा, यमुना और सरस्वती का पावन संगम
त्रिवेणी संगम भारत के सबसे पवित्र और प्रसिद्ध धार्मिक स्थान में से एक है। यह स्थान उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित है। यहां पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदी का संगम हुआ है। यह संगम स्थल बहुत सुन्दर है। हिंदू शास्त्र में इस संगम स्थल को मोक्षदायिनी माना गया है। यहां पर हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं और गंगा नदी में डुबकी लगाते हैं।
यह केवल नदियों का संगम नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति, इतिहास और अध्यात्म का अद्भुत संगम है। प्राचीन काल से लेकर आज तक त्रिवेणी संगम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है।
त्रिवेणी संगम प्रयागराज की यात्रा (Triveni Sangam Prayagraj Trip)
त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) भारत के सबसे पवित्र स्थान में से एक है। त्रिवेणी संगम की यात्रा करने के लिए सबसे पहले आपको प्रयागराज आना पड़ता है। प्रयागराज उत्तर प्रदेश का एक प्रसिद्ध शहर है। प्रयागराज में ढेर सारे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है। यहां पर आकर आप इन सभी स्थलों की सैर कर सकते हैं। प्रयागराज में आप सड़क मार्ग, रेल मार्ग और वायु मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं।
प्रयागराज अन्य शहरों से अच्छी तरह से कनेक्ट है। यहां पर दूसरे शहरों से आसानी से वायु मार्ग, रेल मार्ग और सड़क मार्ग के द्वारा आ सकते हैं। प्रयागराज में पहुंचने का सबसे अच्छा माध्यम ट्रेन है। आप ट्रेन से प्रयागराज पहुंच सकते हैं। उसके बाद ऑटो के द्वारा संगम स्थल पर पहुंच सकते हैं।
माघ मेले में त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) स्थल पर बहुत सारे लोग घूमने के लिए आते हैं। माघ मेले के समय यहां पर बहुत भीड़ रहती है। यहां पर व्यवस्थाएं भी अच्छी रहती हैं। पुलिस वाले यहां पर लगे रहते हैं और यहां पर हर प्रकार की व्यवस्था रहती है। यहां पर रेलवे स्टेशन में ही ऑटो मिल जाता है, जो आपको संगम घाट में ₹10 या ₹20 में आराम से पहुंचा देता है।
ऑटो वाले आपको त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) से करीब एक डेढ़ किलोमीटर पहले ही उतर देता है। वहां से आपको यहां पर पैदल आना पड़ता है। ऑटो वाला आपको संगम चौराहे के पास में या तिरंगा पार्क के पास छोड़ देता है। उसके बाद आपको पैदल आना पड़ता है। संगम चौराहे के पास में पार्किंग एरिया भी बना हुआ है।
अगर आप अपने वाहन से यहां आते हैं, तो अपनी गाड़ी संगम चौराहे के पास पार्क कर सकते हैं। उसके बाद पैदल यहां पर आ सकते हैं। आपको करीब 1 से 2 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। उसके बाद, आप यहां पर संगम घाट एरिया में पहुंचते हैं। घाट एरिया में पहुंचकर आपको ढेर सारे मंदिर और पंडाल देखने के लिए मिलते हैं।
यहां पर माघ माह के समय ढेर सारे पंडाल लगाए जाते हैं, जिनमें साधु संत रहते हैं और गंगा माता की आराधना करते हैं। इस समय यहां पर मेले वाला माहौल रहता है। ढेर सारे लोग भी इस समय यहां पर दर्शन करने के लिए आते हैं। अगर आप त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) में स्नान करना चाहते हैं, तो आपको किला घाट की ओर जाना पड़ेगा।
किला घाट की ओर जाने पर आपको स्नान घाट देखने के लिए मिलेगा, जहां पर आप स्नान कर सकते हैं। किला घाट में आपको नाव भी देखने के लिए मिल जाती है, जहां से आप नाव लेकर बीच संगम घाट में जा सकते हैं। यहां पर बहुत सारे लोग आते हैं और बीच संगम स्थल पर जाकर स्नान करते हैं, जहां पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदी का संगम हुआ है।
बीच संगम में जाने के लिए नाव वाले आप से 50 या ₹60 लेते हैं, जिसमें पांच या छह लोग बैठते हैं और नाव वाला आपको वहां लेकर जाता है। आप वहां पर जाकर स्नान कर सकते हैं। यहां पर स्नान के लिए एक छोटा सा लकड़ी का स्थल बना दिया गया है और यहां पर ज्यादा गहराई नहीं है।
यहां पर घुटनों घुटनों तक पानी है। आप यहां पर आराम से स्नान कर सकते हैं और उसके बाद कपड़े चेंज कर सकते हैं। महिलाओं के लिए कपड़े चेंज करने की व्यवस्था है। यहां पर महिलाएं भी आकर स्नान करती हैं और कपड़े चेंज करती है। वैसे यहां पर आपको चाय नाश्ते की व्यवस्था भी मिल जाती है। यहां पर नाव वाले चाय, नाश्ता, पकोड़े बेचते हैं। नाव वाले नाव में ही चाय पकौड़े बनाते हैं और बेचते हैं। आप चाहे तो यहां पर चाय कॉफी और पकड़ा को भी आनंद उठा सकते हैं।
बीच संगम घाट में स्नान करने के बाद, आप नाव से वापस आ सकते हैं। आप किला घाट में वापस आकर संगम स्थल के आसपास बने हुए मंदिरों में घूम सकते हैं। त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) में आपको रेत का बड़ा मैदान देखने के लिए मिलता है, जहां पर ढेर सारे साधु संतों के पंडाल लगे रहते हैं। आप इन पंडालों में जाकर घूम सकते हैं और साधु-संतों से मिल सकते हैं।
त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) के किनारे और आसपास मंदिर घूम सकते है। आप पाताल भैरवी मंदिर, इलाहाबाद का किला, लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर, बड़े हनुमान जी का मंदिर, श्री आदि शंकर विमान मंडपम मंदिर घूम सकते हैं। इसके अलावा भी इलाहाबाद में ढेर सारे स्थल है, जहां पर आप घूम सकते हैं। आप पूरा संगम स्थल को पैदल घूम कर देख सकते हैं।

त्रिवेणी संगम का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्मग्रंथों में त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) को अत्यंत पुण्यदायी स्थान माना गया है। मान्यता है कि यहाँ स्नान, दान और पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से माघ मास, अमावस्या, पूर्णिमा, मकर संक्रांति और कुंभ/अर्धकुंभ मेले के दौरान यहाँ स्नान का विशेष महत्व है।
संगम स्नान का महत्व
- पापों से मुक्ति
- पितृ दोष शांति
- जीवन में सुख-समृद्धि
- मोक्ष की प्राप्ति
गंगा, यमुना और सरस्वती का महत्व
- गंगा नदी – गंगा को भारत की सबसे पवित्र नदी माना जाता है। इसे माँ गंगा कहा जाता है और यह जीवनदायिनी नदी है।
- यमुना नदी – यमुना नदी भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई है और इसे भी अत्यंत पवित्र माना गया है।
- सरस्वती नदी – सरस्वती नदी को ज्ञान और विद्या की देवी माना गया है। यह नदी अदृश्य रूप में संगम में मिलती है, इसलिए इसे गुप्त सरस्वती भी कहा जाता है।
त्रिवेणी संगम का इतिहास
त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) का इतिहास वैदिक काल से जुड़ा हुआ है। ऋग्वेद, पुराणों और महाकाव्यों में इस पवित्र संगम का उल्लेख मिलता है। प्राचीन काल में प्रयाग को तीर्थराज प्रयाग कहा जाता था, जिसका अर्थ है “तीर्थों का राजा”।
पौराणिक मान्यताएँ
- समुद्र मंथन के दौरान अमृत की बूंदें यहाँ गिरी थीं
- देवताओं और ऋषियों ने यहाँ यज्ञ किए
- महर्षि भारद्वाज का आश्रम इसी क्षेत्र में था

त्रिवेणी संगम क्यों प्रसिद्ध है?
त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) कई कारणों से विश्व-प्रसिद्ध है:
- तीन पवित्र नदियों का संगम
- कुंभ और अर्धकुंभ मेले का आयोजन
- पितृ तर्पण और पिंडदान का प्रमुख स्थल
- हिंदू धर्म का सबसे बड़ा तीर्थ
- आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व
कुंभ मेला और त्रिवेणी संगम
कुंभ मेला विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है, जो त्रिवेणी संगम पर आयोजित होता है। कुंभ के दौरान लाखों साधु-संत, नागा साधु और श्रद्धालु संगम स्नान करते हैं।
कुंभ मेले के प्रकार
- कुंभ मेला – 12 वर्ष में
- अर्धकुंभ मेला – 6 वर्ष में
- माघ मेला – हर वर्ष
त्रिवेणी संगम में क्या करें (What to do at Triveni Sangam)
- संगम स्नान – त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) पर स्नान करने का बहुत ही महत्व है। यहां पर माघ मेले के समय बहुत सारे श्रद्धालु जाकर संगम स्थल पर स्नान करते हैं।
- पूजा और हवन – यहां पर हवन और पूजा होती है। यहां पर ढेर सारे मंदिर है,जहां पर आप पूजा कर सकते हैं। यहाँ विशेष पूजा, हवन और अनुष्ठान कराए जाते हैं।
- पिंडदान और तर्पण – पितरों की शांति के लिए त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) को सर्वश्रेष्ठ स्थान माना जाता है। यहां पर देसी विदेशी श्रद्धालु आते हैं और पिंडदान और तर्पण की पूजा करते हैं।
- नाव की सवारी – नाव से संगम का दृश्य देखना एक विशेष अनुभव होता है, जहाँ अलग-अलग रंगों की नदियाँ मिलती दिखाई देती हैं। यहां पर ठंड में समय आपको विदेशी पक्षी भी देखने के लिए मिलते हैं।
त्रिवेणी संगम जाने का सबसे अच्छा समय (Best time to visit Triveni Sangam)
त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) साल भर में कभी भी घूमने के लिए जा सकते हैं, मगर यहां पर घूमने का सबसे अधिक महत्व माघ महीने में होता है। आप यहां पर जनवरी महीने में आ सकते हैं और घूम सकते हैं। माघ मेले की शुरुआत 4 से 5 तारीख से हो जाती है और यह मेला महाशिवरात्रि तक रहता है। माघ मास धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है।
इस समय आकर आप यहां पर स्नान कर सकते हैं और गंगा नदी से प्रार्थना कर सकते हैं। बाकी आप अपनी इच्छा अनुसार यहां पर कभी भी आ सकते हैं।
त्रिवेणी संगम कैसे पहुँचे (How to reach Triveni Sangam)
सड़क मार्ग से : प्रयागराज उत्तर प्रदेश और देश के प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा है। यहां पर सड़क के द्वारा बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आसानी से आ सकते हैं। प्रयागराज के हर एक कोने से त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) आने के लिए ऑटो और टैक्सी की सुविधा मिल जाती है।
रेल मार्ग से : प्रयागराज जंक्शन, प्रयागराज रामबाग और छिवकी स्टेशन प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं। प्रयागराज अन्य शहरों से अच्छी तरह कनेक्ट है। यहां पर अन्य शहरों से डायरेक्ट ट्रेन आती है। आप यहां पर रेल मार्ग से आसानी से आ सकते हैं।
हवाई मार्ग से : प्रयागराज एयरपोर्ट (बमरौली) निकटतम हवाई अड्डा है। आप यहां पर वायु मार्ग से आ सकते हैं और उसके बाद आप टैक्सी या ऑटो के द्वारा संगम पहुंच सकते हैं।
त्रिवेणी संगम का गूगल मैप लोकेशन
त्रिवेणी संगम के आसपास घूमने की जगहें
- अक्षयवट – यह एक पवित्र वृक्ष है, जिसे अमर वृक्ष माना जाता है।
- हनुमान मंदिर (लेटे हनुमान जी) – यह मंदिर अपने अनोखे स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है।
- आनंद भवन – यह पंडित जवाहरलाल नेहरू का ऐतिहासिक निवास स्थल है।
- प्रयागराज में घूमने की जगह
- अल्फ्रेड पार्क (चंद्रशेखर आज़ाद पार्क) – स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल।
त्रिवेणी संगम यात्रा टिप्स
- कुंभ के समय पहले से होटल बुक करें
- संगम स्नान के समय सुरक्षा का ध्यान रखें
- पंडितों से विधि-विधान समझकर पूजा कराएँ
- स्वच्छता बनाए रखें
त्रिवेणी संगम क्यों जाएँ?
- धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक शांति
- भारत की प्राचीन संस्कृति का अनुभव
- कुंभ मेले का दिव्य दर्शन
- ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व
निष्कर्ष
त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) भारत की आध्यात्मिक आत्मा का प्रतीक है। गंगा, यमुना और सरस्वती का यह पावन संगम न केवल शरीर को, बल्कि आत्मा को भी शुद्ध करता है। यदि आप जीवन में एक बार सच्चे आध्यात्मिक अनुभव की तलाश में हैं, तो त्रिवेणी संगम की यात्रा अवश्य करें।
