प्रयागराज में घूमने की जगह – Prayagraj (Allahabad ) Tourist Places in Hindi
प्रयागराज उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख जिला है। प्रयागराज को पहले इलाहाबाद के नाम से जाना जाता था। उत्तर प्रदेश का यह जिला ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह जिला गंगा, यमुना और सरस्वती के पावन संगम पर स्थित है। गंगा, यमुना और सरस्वती का पावन संगम विश्व में प्रसिद्ध है। प्रयागराज को तीर्थराज भी कहा जाता है। यह भारत की प्राचीनतम नगरी में से एक है।
इस लेख में हम प्रयागराज में घूमने की प्रमुख जगहों (Prayagraj me Ghumne ki Jagah) के बारे में जानकारी देंगे। अगर आप प्रयागराज में घूमने का प्लान (Allahabad or Prayagraj me Ghumne ki Jagah) कर रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी होगा।
इस लेख में प्रयागराज में घूमने की कौन-कौन सी जगह है, प्रयागराज कैसे पहुंचे, प्रयागराज टूर प्लान, प्रयागराज में घूमने का सही समय और प्रयागराज यात्रा गाइड के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी मिलेगी
प्रयागराज जिला का इतिहास (Prayagraj District History in Hindi)
प्रयागराज (पूर्व नाम इलाहाबाद) भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र नगरों में से एक है। यह नगर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित है, जिसे त्रिवेणी संगम कहा जाता है। प्रयागराज जिला धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्व रखता है। प्रयागराज का इतिहास भारतीय इतिहास में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
प्राचीन काल में प्रयागराज को प्रयाग कहा जाता था। वेदों, पुराणों और महाकाव्यों में प्रयाग को तीर्थराज यानी तीर्थों का राजा माना गया है। महाभारत काल में यह क्षेत्र पांडवों और ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा। मौर्य काल में सम्राट अशोक ने यहाँ स्तंभ स्थापित कराया, जो आज भी अशोक स्तंभ के रूप में प्रसिद्ध है।
गुप्त काल में प्रयागराज शिक्षा, धर्म और संस्कृति का बड़ा केंद्र बना। इसी काल में यहाँ अनेक आश्रम और विद्या केंद्र विकसित हुए। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने यहां पर यात्रा करी थी और प्रयागराज के धार्मिक महत्व का उल्लेख किया है।
मध्यकाल में यह क्षेत्र दिल्ली सल्तनत और बाद में मुगल साम्राज्य के अधीन आया। 1583 ई. में मुगल सम्राट अकबर ने यहाँ एक भव्य किले का निर्माण कराया और नगर का नाम इलाहाबाद रखा, जिसका अर्थ है “ईश्वर का नगर”। मुगल काल में यहां पर प्रशासनिक और सैनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। यमुना नदी के किनारे बना इलाहाबाद किला सम्राट अकबर के द्वारा बनाया गया था। यहां पर और भी मुगलकालीन इमारतें देखी जा सकती है।
ब्रिटिश काल में इलाहाबाद का महत्व और बढ़ गया। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में यहाँ महत्वपूर्ण घटनाएँ हुईं। 1857 की क्रांति के बाद क्षेत्र में विद्रोह हुआ था क्रांति के दमन के बाद अंग्रेजों ने यहां पर कड़ा प्रशासन लागु किया। मुगल शासन पूरी तरह से समाप्त हो गया। इस क्षेत्र में इंडिया कंपनी की जगह ब्रिटिश क्राउन का सीधा प्रशासन लागू हुआ।
1857 के बाद अंग्रेजों ने इलाहाबाद को उत्तर भारत का एक प्रमुख प्रशासनिक केंद्र बनाया। इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थापना 1866 में हुई। उत्तर पश्चिमी प्रांत की राजधानी कुछ समय तक इलाहाबाद रही। इलाहाबाद में रेलवे और डाक की व्यवस्था तेजी से हुआ।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना 1887 में हुई, जिसे “पूर्व का ऑक्सफोर्ड” कहा गया। यहां पढ़े हुए छात्र आगे चलकर राष्ट्रीय आंदोलन के नेता बने। शहर में पत्रकारिता, साहित्य और कानून की मजबूत किया गया। 1885 में कांग्रेस की स्थापना के बाद इलाहाबाद सक्रिय राजनीतिक शहर बन गया।
आनंद भवन और स्वराज भवन स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख केंद्र बने। मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी का इस नगर से गहरा संबंध रहा। 20वीं शदी की शुरुआत में इलाहाबाद क्रांतिकारियों का गढ़ बना। यहां पर चंद्रशेखर आजाद जी ने देश की आजादी के लिए अपनी जान दी थी।
देश की आजादी के बाद, उत्तर प्रदेश को एक राज्य की तरह गठित किया गया और इलाहाबाद को इसमें सम्मिलित किया गया। इलाहाबाद एक स्वतंत्र जिले के रूप में विकसित हुआ और इलाहाबाद जिले में ढेर सारे परिवर्तन किया।
यहां पर प्रशासनिक, स्वास्थ्य, रेल और सड़क की व्यवस्था की गई। आज इलाहाबाद अपने त्रिवेणी संगम के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इलाहाबाद में लगने वाला महाकुंभ विश्व भर में प्रसिद्ध है और लोग यहां पर हर साल नर्मदा नदी में स्नान करने के लिए आते हैं। 2018 में इलाहाबाद का नाम पुनः प्रयागराज कर दिया गया। आज प्रयागराज कुंभ मेला, माघ मेला, शिक्षा, न्याय और संस्कृति के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
प्रयागराज क्यों प्रसिद्ध है?
- त्रिवेणी संगम
- कुंभ और अर्धकुंभ मेला
- ऐतिहासिक किले और संग्रहालय
- चंद्रशेखर आज़ाद से जुड़ा इतिहास
- प्राचीन मंदिर और आश्रम
इलाहाबाद या प्रयागराज में घूमने वाले प्रमुख दर्शनीय और पर्यटन स्थल (Allahabad or (Prayagraj me Ghumne ki Jagah)
प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रमुख जिलों में से एक है। प्रयागराज गंगा और यमुना के संगम पर स्थित है। इलाहाबाद या प्रयागराज के आसपास और प्रयागराज सिटी के अंदर घूमने के लिए ढेर सारे स्थल है, जहां पर जाकर आप अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं। तो चलिए जानते हैं – इलाहाबाद या प्रयागराज में घूमने के प्रमुख पर्यटन स्थलों (Prayagraj Tourist Places in Hindi) के बारे में
प्रयागराज के प्रसिद्ध मंदिर और धार्मिक स्थल (Famous temples and religious sites in Prayagraj or Allahabad)
1. त्रिवेणी संगम
त्रिवेणी संगम इलाहाबाद के विश्व प्रसिद्ध दर्शनीय और पवित्र स्थान में से एक है। त्रिवेणी संगम में गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का संगम हुआ है। यह संगम स्थल पवित्र है। इस संगम स्थल के दर्शन करने के लिए लाखों श्रद्धालु आते हैं। यहां पर मकर संक्रांति के समय माघ मेला लगता है, जिसमें श्रद्धालुओं की संख्या लाखों और करोड़ तक पहुंच जाती है।
यहां पर श्रद्धालु जाकर गंगा नदी संगम में डुबकी लगाते हैं और अपने पापों को धोते हैं। यहां पर माघ महीने में स्नान करने से मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। यह हर 12 वर्ष में महा कुंभ का आयोजन किया जाता है। महाकुंभ से दूर-दूर से साधु संत आते हैं और महाकुंभ में स्नान करते हैं। यहां पर मेले का आयोजन भी होता है। यहां पर आकर आप अच्छा और शांतिपूर्ण अनुभव कर सकते हैं। यहां पर आकर आप नाव की सवारी का भी आनंद उठा सकते हैं। त्रिवेणी संगम के आसपास ढेर सारे मंदिर बने हुए हैं, जहां पर आप घूम सकते हैं।
विशेषताएँ:
- कुंभ मेला का मुख्य केंद्र
- पवित्र स्नान का महत्व
- नाव से संगम दर्शन
मनकामेश्वर मंदिर इलाहाबाद
मनकामेश्वर मंदिर इलाहाबाद के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर शंकर भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर यमुना नदी के किनारे बना हुआ है। इस मंदिर में जाने का रास्ता प्रयागराज के नए पुल के पास है। आप यहां पर सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं और मंदिर में घूम सकते हैं।
इस मंदिर के बारे में कहा जाता है, कि इस मंदिर में आकर आप जो भी मनोकामना मांगते हैं। वह जरूर पूरी होती है। यह मंदिर बहुत सुंदर है और मंदिर परिसर मैं आपको और भी देवी देवताओं के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। इस मंदिर में पीपल का एक विशाल और प्राचीन पेड़ लगा हुआ है, जिसके नीचे मंदिर बना हुआ है।
मनकामेश्वर मंदिर की खासियत
- मनकामेश्वर मंदिर का वातावरण शांत और आध्यात्मिक है।
- यहां पर शिवरात्रि और सावन में बहुत सारे लोग आते हैं।
- मंदिर से यमुना नदी का सुंदर दृश्य
- मंदिर में नीचे की तरफ घाट है
लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर प्रयागराज
लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर प्रयागराज का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर प्रयागराज संगम स्थल के पास में ही बना हुआ है। यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है। इस मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा लेटी हुई अवस्था में है, जो बहुत ही सुंदर लगती है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है, कि मंदिर में आकर आप जो भी मनोकामना मांगते हैं। वह जरूर पूरी होती है।
मंदिर के मुख्य गर्भगृह में हनुमान जी के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। इस मंदिर में हमेशा ही भीड़भाड़ का माहौल रहता है। आप को दर्शन करने में थोड़ा टाइम लग सकता है। मंदिर में जाकर हनुमान जी के दर्शन करने में शांति मिलती है। मंदिर के आस-पास का वातावरण बहुत अच्छा और आध्यात्मिक है। आप यहां पर आकर अच्छा अनुभव कर सकते हैं। यहां पर श्री राम जी का मंदिर भी देखने के लिए मिलता है, जहां पर राम जी, सीता जी और लक्ष्मण जी के दर्शन होते हैं।
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आदि विमान मंडपम मंदिर प्रयागराज
आदि विमान मंडपम मंदिर प्रयागराज में संगम स्थल के पास बना हुआ है। यह मंदिर 3 मंजिला है और बहुत सुंदर लगता है। यह मंदिर साउथ इंडियन स्टाइल में बना है। इस मंदिर में ढेर सारी देवी देवता विराजमान है। इस मंदिर की सबसे ऊपरी मंजिल में शंकर भगवान जी का मंदिर बना हुआ है, जहां पर शिवलिंग विराजमान है।
यह शिवलिंग देखने में बहुत सुंदर लगता है, क्योंकि इस शिवलिंग में असंख्य के छोटे-छोटे शिवलिंग बने हुए हैं। यह मंदिर शाम के समय खुलता है। आप मंदिर के ऊपर जाकर दर्शन कर सकते हैं। साथ ही साथ मंदिर से चारों तरफ का सुंदर दृश्य भी देखा जा सकता है, जो बहुत ही आकर्षक लगता है। इस मंदिर में खूबसूरत नक्काशी देखने के लिए मिलती है, जो इस मंदिर के दीवारों में की गई है।
पातालपुरी मंदिर प्रयागराज
पातालपुरी मंदिर प्रयागराज में संगम स्थल के पास बना हुआ एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर इलाहाबाद किले के अंदर बना हुआ है। इस मंदिर में आप आसानी से घूमने के लिए जा सकते हैं। कभी-कभी यह मंदिर बंद हो सकता है, मगर माघ महीने में खुला रहता है। यह मंदिर भूमिगत है, मलतब यह मंदिर धरातल के नीचे बना हुआ है और मंदिर में जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है।
मंदिर के जब आप नीचे पहुंचते हैं, तब आपको काल भैरव जी की बहुत ही अद्भुत प्रतिमा के दर्शन करने के लिए मिलते हैं, जो बहुत ही सुंदर लगती है। यहां पर और भी मंदिर और भी प्राचीन और सुंदर प्रतिमाएं हैं, जिनकी आप दर्शन कर सकते हैं।
यहां भगवान शिव का मंदिर बना हुआ है, जो आप देख सकते हैं। आस-पास का वातावरण बहुत सुंदर है। परिसर में पीपल का बड़ा सा पेड़ लगा हुआ है। यहां पर ढेर सारे तोता देखे जा सकते हैं, जो इस जगह को और भी ज्यादा सुंदर बनाते हैं। इसी मंदिर के अंदर एक पवित्र कुआं भी देखने के लिए मिलता है। इस कुआँ के बारे में अलग-अलग मान्यताएं हैं।
अक्षयवट प्रयागराज
अक्षयवट प्रयागराज के एक पवित्र स्थान में से एक है। अक्षयवट प्रयागराज में संगम के पास इलाहाबाद किले के अंदर स्थित है। अक्षयवट वृक्ष प्रयागराज में स्थित एक प्राचीन वृक्ष है। इस वृक्ष के बारे में ढेर सारी मान्यताएं हैं।
अक्षय वट बरगद का एक पेड़ है। इस पेड़ के बारे में कहा जाता है, यह पेड़ अमर है और यह पेड़ सतयुग, द्वापर युग, त्रेता युग और कलयुग रहा है। इस पेड़ की आयु आप इस मंदिर में जाते हैं, तो देख सकते हैं। यह पेड़ पातालपुरी मंदिर के पास में परिसर में लगा हुआ है। आप इस पेड़ को जाकर देख सकते हैं।
समुद्रकूप तीर्थ प्रयागराज
समुद्रकूप तीर्थ स्थल प्रयागराज के एक प्रमुख धार्मिक स्थान में से एक है। यह संगम स्थल के दूसरे तरफ झूसी स्थित है। समुद्र कूप का अर्थ होता है – समुद्र और कुआं। इस कुआँ का संबंध समुद्र से माना जाता है। माना जाता है, कि यह कुआं समुद्र से जुड़ा हुआ है। इस कुआँ के बारे में ढेर सारी मान्यताएं हैं। आप यहां पर आसानी से सड़क से घूमने के लिए आ सकते हैं।
माघ मेले के समय गंगा नदी पर पीपो के पुल बनाए जाते हैं, जिन्हें आप पार करके इस मंदिर में आराम से घूमने के लिए आ सकते हैं। इस मंदिर में आपको और भी अन्य मंदिरों के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर प्राचीन श्री राम जानकी मंदिर, श्री लड्डू गोपाल मंदिर, दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर, विष्णु जी के पद के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। आप यहां पर आकर अच्छा अनुभव कर सकते हैं।
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भारद्वाज आश्रम मंदिर प्रयागराज
भारद्वाज आश्रम मंदिर प्रयागराज का एक प्रमुख धार्मिक स्थान है। इस मंदिर का संबंध रामायण काल से है। यहां पर प्राचीन समय में ऋषि भारद्वाज का आश्रम हुआ करता था, जहां पर श्री राम जी अपने वनवास काल के दौरान आए थे और भारद्वाज ऋषि ने राम जी का आगे जाने की यात्रा के लिए परामर्श दी।
यहां पर ऋषि भारद्वाज जी की प्रतिमा के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर और भी मंदिर बने हुए हैं, जिनकी आप दर्शन कर सकते हैं। यहां पर श्री राम जी का मंदिर हनुमान जी का मंदिर बना हुआ है। भारद्वाज आश्रम मंदिर इलाहाबाद मुख्य शहर में आनंद भवन के पास में स्थित है। आप यहां पर आसानी से घूमने के लिए आ सकते हैं और मंदिर के दर्शन कर सकते हैं।
नागवासुकी मंदिर प्रयागराज
नाग वासुकी मंदिर प्रयागराज का प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर गंगा नदी के किनारे दारागंज में बना हुआ है। इस मंदिर में आप सड़क मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। यह मंदिर नाग देवता को समर्पित है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में नाग देवता के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। मंदिर से गंगा नदी का भी सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है। इस मंदिर के बारे में ढेर सारी प्राचीन मान्यता है। आप अगर प्रयागराज आते हैं, तो आप इस मंदिर में जरूर आकर दर्शन करें।
वेणी माधव मंदिर प्रयागराज
वेणी माधव मंदिर प्रयागराज के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर प्रयागराज की दारागंज में बना हुआ है। इस मंदिर में आप सड़क मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। यह मंदिर प्राचीन है और यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। मंदिर के गर्भगृह में कृष्ण जी की बहुत सुंदर प्रतिमा के दर्शन करने के लिए मिलते हैं।
मंदिर के बाहर ढेर सारी मिठाइयों की दुकान लगी हुई है, जहां से आप प्रसाद ले सकते हैं और कृष्णा जी को अर्पित कर सकते हैं। मंदिर के सामने शंकर भगवान जी का मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर भी बहुत सुंदर और पुराना है।
इस्कॉन मंदिर प्रयागराज
इस्कॉन मंदिर प्रयागराज के प्रसिद्ध धार्मिक स्थान में से एक है। यह मंदिर श्री कृष्ण जी को समर्पित है। यह मंदिर यमुना नदी के किनारे बना हुआ है। इस मंदिर में आप आसानी से सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं। इस मंदिर में आपको श्री कृष्ण जी के दर्शन करने के लिए मिलते हैं।
इस मंदिर में आप घूमने के लिए जाते हैं, तो आपको समय का विशेष ध्यान देना पड़ता है, क्योंकि दोपहर के समय यह मंदिर बंद रहता है। आप यहां पर जाकर भगवान कृष्ण के दर्शन कर सकते हैं। यहां का माहौल बहुत अच्छा और शांत है।
पत्थर गिरजाघर इलाहाबाद
पत्थर गिरजाघर के नाम से मशहूर यह स्मारक इलाहाबाद मुख्य शहर के ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। इस स्मारक को ऑल सेंट्स कैथेड्रल के नाम से जाना जाता है। यह गिरजाघर सिविल लाइन में बना हुआ है। यहां पर आप आसानी से सड़क मार्ग से आ सकते हैं।
यह गिरजाघर बहुत ही सुंदर डिजाइन में बना हुआ है। इस गिरजाघर को सर विलियम एमर्सन द्वारा डिज़ाइन किया था। यह चर्च गोथिक शैली में बना हुआ है। अगर आप इस चर्च को अंदर से देखना चाहते हैं, तो आप संडे के दिन आ सकते हैं और चर्च को अंदर से देख सकते हैं। बाकी दिन चर्च बंद रहता है।
ललिता देवी शक्तिपीठ प्रयागराज
ललिता देवी शक्ति पीठ प्रयागराज के प्रसिद्ध धार्मिक स्थान में से एक है। यह मंदिर प्रयागराज में यमुना नदी के किनारे मीरपुर में बना हुआ है। इस मंदिर में आप सड़क मार्ग से आ सकते हैं। इस मंदिर के बारे में मान्यता है, कि यहां पर देवी सती की उंगलियां गिरी थी।
यह मंदिर श्री यंत्र डिजाइन पर स्थापित किया गया है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में ललिता मां के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। माना जाता की मां शक्ति यहां ललिता देवी के रूप में और भगवान शिव भैरव के रूप में विराजमान है। माँ ललिता मंदिर के बगल में ललितेश्वर महादेव मंदिर है। इस मंदिर का उल्लेख देवी पुराण में मिलता है। नवरात्रि में इस मंदिर में दर्शन करने के लिए बहुत सारे भक्तगण आते हैं।
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श्री हनुमान मंदिर प्रयागराज
श्री हनुमान मंदिर प्रयागराज में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर को हनुमत निकेतन मंदिर के नाम से या सिविल लाइन वाले हनुमान मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर इलाहाबादके पवित्र और सुंदर स्थान में से एक है। मंदिर में आकर आप हनुमान जी के दर्शन कर सकते हैं।
आप यहां पर आसानी से आ सकते हैं। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में हनुमान जी विराजमान है। यहां पर भगवान शिव जी और श्री राम जी का मंदिर भी बना हुआ है। मंदिर परिसर बहुत अच्छा है। शाम के समय यहां पर बहुत सारे लोग दर्शन करने के लिए आते हैं।
दुख हरण 54 फीट हनुमान मंदिर
दुख हरण 54 फीट हनुमान मंदिर इलाहाबाद के झूसी एरिया में बना हुआ है। यह इलाहाबाद के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में आप आसानी से सड़क मार्ग से आ सकते हैं। इस मंदिर में हनुमान जी की विशाल प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो 54 फीट ऊंची है।
यह प्रतिमा देखने में बहुत ही सुंदर लगती है। यहां पर 111 दिव्य शिवलिंग, महालक्ष्मी जी और विष्णु जी की सुंदर प्रतिभा विराजमान है। यहां पर और भी मंदिर बने हुए हैं, जहां पर आप घूम सकते हैं।
इलाहाबाद या प्रयागराज के प्रसिद्ध पार्क और गार्डन (Famous parks and gardens in Allahabad or Prayagraj)
चंद्रशेखर आजाद पार्क प्रयागराज
चंद्रशेखर आजाद पार्क, जिसे अल्फ्रेड पार्क के नाम से भी जाना जाता है। यह पार्क इलाहाबाद मुख्य शहर में सिविल लाइन में बना हुआ है। इस पार्क में आप आसानी से सड़क मार्ग से आ सकते हैं। यह पार्क बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है। पार्क के अंदर घूमने के लिए ढेर सारी जगह है, जो इस पार्क को खास बनाती है।
पार्क की सबसे खास वह जगह है, जहां पर चंद्रशेखर आजाद जी ने भारत की स्वतंत्रता और अपने प्रण को पूरा करने के लिए खुद को ही गोली मारी थी। जब चंद्रशेखर आजाद अंग्रेजों से घिर गए थे और वह अंग्रेजों से लड़ रहे थे। तब उन्होंने अपने बंदूक में देखा और उनको अपने बंदूक में लास्ट गोली देखे, तब उन्होंने खुद को गोली मारी क्योंकि, वह अंग्रेजों के हाथों जिंदा नहीं आना चाहते थे।
इस पार्क में विक्टोरिया मेमोरियल बना है, जो अंग्रेजों के द्वारा बनाया गया था। पार्क में जड़ी बूटियां का प्लांटेशन भी किया गया है। पार्क में नर्सरी बनी हुई है, जिसमें तरह-तरह के फूलों वाले प्लांट लगाए गए हैं। पार्क के अंदर लाइब्रेरी है, जहां पर आपको ढेर सारी किताबें पढ़ने के लिए मिलती है।
पार्क के अंदर चारों तरफ हरियाली और आकर्षक वस्तुएं देखने के लिए मिलती है। पार्क में आकर आप ढेर सारी गतिविधियां कर सकते हैं। यह पार्क बच्चों के लिए और बड़ों के लिए घूमने के लिए बहुत ही बढ़िया जगह है। यहां पर ढेर सारे झूले लगे हुए हैं, जिनमें आप इंजॉय कर सकते हैं।
भारद्वाज पार्क प्रयागराज
भारद्वाज पार्क प्रयागराज में घूमने के लिए प्रमुख पार्कों में से एक है। यह पार्क इलाहाबाद मुख्य शहर में चंद्रशेखर आजाद पार्क से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है। यहां पर आप सड़क मार्ग से अपने वाहन से या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आ सकते हैं। यह पार्क बहुत ही सुंदर है।
पार्क में भारद्वाज ऋषि की बहुत बड़ी प्रतिमा विराजमान है। पार्क में ढेर सारे फव्वारे लगे हुए हैं, जो जब चालू होते हैं। तब बहुत ही सुंदर लगते हैं। पार्क में चारों तरफ पेड़ पौधे लगे हुए हैं और यहां पर ढेर सारे झूले लगे हुए हैं, जिनमें बच्चे लोग एंजॉय कर सकते हैं।
हाथी पार्क प्रयागराज
हाथी पार्क प्रयागराज में स्थित एक सुंदर पार्क है। यह पार्क मुख्य शहर में बना हुआ है। यहां पर आप आसानी से सड़क मार्ग से आ सकते हैं। इस पार्क में हाथी की एक बड़ी सी प्रतिमा है। यहां पर बच्चों के मनोरंजन के लिए ढेर सारी गतिविधियां उपलब्ध है। पार्क में एक छोटी सी झील पर बनी हुई है।
साथ ही साथ यहां पर ढेर सारे पक्षी भी देखने के लिए मिलते हैं। पार्क के अंदर एक फूड कोर्ट बना हुआ है, जहां खाने पीने का सामान मिलता है। इस पार्क को सुमित्रानंदन पंत पार्क के नाम से भी जाना जाता है। पार्क में सुमित्रानंदन पंत की प्रतिमा बनी हुई है।
खुसरो बाग प्रयागराज
खुसरो बाग प्रयागराज के ऐतिहासिकस्थान में से एक है। खुसरो बाग में मुगलकालीन मकबरे देखने के लिए मिलते हैं, जो बहुत ही सुंदर है। यह मकबरे बगीचे के बीच में बने हुए हैं। इस बगीचे में ढेर सारे पेड़ पौधे लगे हुए हैं। यहां पर फलों और फूल के पेड़ पौधे लगे हुए हैं, जो इस बगीचे को खास बनाते हैं। यहां पर मुगल काल के सम्राट खुसरो के कब्र देखने के लिए मिलती है।
यहां पर उनके परिवार के और भी सदस्यों की कब्र बनी हुई है, जो आप देख सकते हैं। इस पार्क में आकर आप ढेर सारी गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं। यह पार्क बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है। खुसरो बाग पार्क प्रयागराज मुख्य शहर में रेलवे स्टेशन के बहुत पास है। आप यहां पर आसानी से पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आ सकते हैं। यहां पर एंट्री फ्री है।
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मिंटो पार्क इलाहाबाद
मिंटो पार्क इलाहाबाद के प्रसिद्ध पार्कों में से एक है। यह गार्डन भी प्राचीन है। इस गार्डन में आप आसानी से घूमने के लिए आ सकते हैं। यह गार्डन यमुना नदी के किनारे बना हुआ है। इस गार्डन में प्रवेश के लिए शुल्क लगता है। यह गार्डन बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है।
गार्डन में चारों तरफ हरियाली देखने के लिए मिलती है। इस गार्डन में एक स्तंभ देखने के लिए मिलता है, जो प्राचीन है। मिंटो पार्क को मदन मोहन मालवीय पार्क के नाम से भी जाना जाता है। इस पार्क में 1858 रानी विक्टोरिया का लेटर पढ़ा गया था, जो ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए था।
इलाहाबाद या प्रयागराज के ऐतिहासिक स्थान (Historical places in Prayagraj)
प्रयागराज का किला (Allahabad Fort)
इलाहाबाद का किला या अकबर का किला के नाम से मशहूर यह किला त्रिवेणी संगम पर स्थित है। यह किला 16वीं शताब्दी में बना एक विशाल मुगल किला है। यह किला अपने भव्य वास्तुकला और इतिहास के लिए मशहूर है। यह किला सम्राट अकबर ने 1583 में बनवाया था और यह यमुना नदी के किनारे बना है। आज के समय यह किला अपने धार्मिक महत्व के कारण जाना जाता है, क्योंकि इस किले अंदर अक्षय वट (अमर बरगद का पेड़) और पातालपुरी मंदिर है।
यह किला भारतीय सेना के अधीन है, इसलिए किले के कुछ सीमित भाग पर आप घूम सकते है। माघ मेले के समय यहां पर बहुत सारे लोग घूमने के लिए आते हैं। किले की ऊंची ऊंची दीवार और बुर्ज बहुत ही आकर्षक लगते हैं। किले के अंदर जाने के लिए स्लाइडर सड़क बनी हुई है। किले के अंदर आप आराम से जा सकते है।
स्वराज भवन प्रयागराज (Swaraj Bhawan Prayagraj)
स्वराज भवन प्रयागराज शहर में घूमने का एक मुख्य स्थान है। स्वराज भवन इलाहाबाद शहर के बीचो-बीच स्थित है। आप यहां पर आसानी से सड़क मार्ग से आ सकते हैं। यह प्रयागराज में स्थित एक बड़ी हवेली है। यह मोतीलाल नेहरू की संपत्ति है। 1930 तक नेहरू परिवार यहां पर रहा करता था।
यहां पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी का जन्म हुआ है। इस इमारत को संग्रहालय में बदल दिया गया है और यहां पर इंदिरा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के बहुत सारी जानकारी और उनकी तस्वीर देखी जा सकती है। यहां पर इंदिरा गांधी के बचपन से लेकर शादी तक की तस्वीरें देखने के लिए मिलती हैं।
इलाहाबाद लाइब्रेरी (Allahabad Library)
इलाहाबाद लाइब्रेरी इलाहाबाद मुख्य शहर में चंद्रशेखर आजाद पार्क के बीच में बनी हुई है। यह एक पुरानी बिल्डिंग है और यह बिल्डिंग बहुत ही सुंदर है। बिल्डिंग का आर्किटेक्चर बहुत ही बढ़िया है। यहां पर आपको पुस्तकों का अच्छा कलेक्शन देखने के लिए मिलता है, जिसेआप पढ़ सकते हैं। अगर आप किसी एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके यहां पर जरूर आना चाहिए और अध्ययन करना चाहिए।
इलाहाबाद संग्रहालय (Allahabad Museum)
इलाहाबाद संग्रहालय प्रयागराज शहर मेंचंद्रशेखर आजाद पार्क के बीचों-बीच बना हुआ है। यहां पर आप आसानी से पहुंच सकते हैं। यह संग्रहालय 1931 में स्थापित किया गया था और इस संग्रहालय में आपको ढेर सारी हिस्ट्री के बारे में पता चलता है। यहां पर इतिहास, कला और शिल्प में रुचि रखने वालों के लिए यह जगह बहुत ही बढ़िया है।
जवाहर तारामंडल प्रयागराज (Jawahar Planetarium Prayagraj)
जवाहर तारामंडल प्रयागराज में स्थित एक प्रमुख स्थान है। यहां पर आपको सौरमंडल के बारे में जानकारी मिलती है। यहां पर आकर आप हमारे ग्रह, नक्षत्र, तारों के बारे में जान सकते हैं। यहां पर ऑडियो और वीडियो फिल्म के द्वारा भी जानकारी दी जाती है। बच्चों के लिए यह जगह बहुत ही बढ़िया है। बच्चे यहां पर आकर ढेर सारा ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। यह जगह प्रयागराज शहर के बीचों बीच में आनंद भवन के पास में स्थित है।
प्रयागराज में घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit Prayagraj)
प्रयागराज में घूमने का सबसे अच्छा समय ठंड का रहता है। आप यहां पर अक्टूबर से लेकर मार्च में यात्रा कर सकते हैं। अक्टूबर से मार्च का समय यहां पर बहुत बढ़िया रहता है। यहां पर इस समय बहुत ज्यादा ठंड रहती है और आप इस समय जाकर प्रयागराज के सभी जगह में घूम सकते हैं।
जनवरी का महीना प्रयागराज में घूमने के लिए बहुत ही बढ़िया रहता है, क्योंकि जनवरी में यहां पर माघ मेला लगता है। माघ मेला में यहां पर त्रिवेणी संगम स्नान करने के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं और यहां पर बहुत हलचल रहती है। आप यहां पर माघ मेला के समय घूमने के लिए आ सकते हैं और प्रयागराज के सभी पर्यटन स्थलों की सैर कर सकते हैं।
अक्टूबर से मार्च – सबसे उपयुक्त मौसम
कुंभ मेला समय – आध्यात्मिक अनुभव (भीड़ अधिक होती है)
प्रयागराज कैसे पहुँचे (How to Reach Prayagraj)
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) भारत के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक शहरों में से एक है। यहाँ रेल, सड़क और हवाई मार्ग तीनों से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
हवाई मार्ग से प्रयागराज कैसे पहुँचे (How to Reach Prayagraj by Air)
निकटतम हवाई अड्डा: प्रयागराज एयरपोर्ट (Bamrauli Airport – IXD)
यह एयरपोर्ट शहर से लगभग 12–13 किमी दूर है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, भोपाल जैसे बड़े शहरों से सीधी और कनेक्टिंग फ्लाइट्स उपलब्ध हैं। एयरपोर्ट से टैक्सी, कैब और ऑटो आसानी से मिल जाते हैं।
रेल मार्ग से प्रयागराज कैसे पहुँचे (How to Reach Prayagraj by Rail)
प्रयागराज उत्तर भारत का एक बड़ा रेलवे जंक्शन है। प्रयागराज के प्रमुख रेलवे स्टेशन: प्रयागराज जंक्शन (PRYJ), प्रयागराज छिवकी, प्रयागराज रामबाग, प्रयागराज संगम है। प्रमुख शहरो से डायरेक्ट ट्रेन कनेक्शन जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, भोपाल, इंदौर है। रेल मार्ग सबसे सस्ता और सुविधाजनक माना जाता है।
सड़क मार्ग से प्रयागराज कैसे पहुँचे (How to Reach Prayagraj by Road)
प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्गों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यहां पर सभी प्रमुख शहरों से आने के लिए बस की सुविधा उपलब्ध है। यहां पर बस, टैक्सी, कैब या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आराम से आ सकते हैं। प्रयागराज शहर के भीतर परिवहन के लिए ऑटो, रिक्शा, ई – रिक्शा, सिटी बस, टैक्सी या ओला उबर की सुविधा उपलब्ध है।
प्रयागराज की अन्य शहरों से दूरी
- वाराणसी → लगभग 120 किमी
- लखनऊ → लगभग 200 किमी
- कानपुर → लगभग 200 किमी
- रीवा (MP) → लगभग 140 किमी
प्रयागराज (इलाहाबाद) का गूगल मैप लोकेशन
यात्रा टिप्स
- कुंभ / माघ मेला के समय पहले से टिकट और होटल बुक करें
- सर्दियों में सुबह-शाम ठंड होती है
- धार्मिक स्थलों के लिए आरामदायक कपड़े पहनें
प्रयागराज यात्रा टिप्स
- कुंभ या मेला समय होटल पहले बुक करें
- घाटों पर सावधानी रखें
- धार्मिक स्थलों पर मर्यादा बनाए रखें
- सुबह-शाम घूमना बेहतर
निष्कर्ष
प्रयागराज में घूमने की जगह (Prayagraj me Ghumne ki Jagah) इतिहास, धर्म और प्रकृति का अद्भुत संगम हैं। चाहे आप धार्मिक यात्रा पर हों, इतिहास में रुचि रखते हों या शांति की तलाश में हों – प्रयागराज हर किसी को कुछ न कुछ खास देता है। एक बार यहाँ आकर आप भारतीय संस्कृति की गहराई को महसूस कर सकते हैं।
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