गढ़पहरा का किला बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित एक प्रसिद्ध किला है। यह किला मध्य प्रदेश के सागर जिले में बना हुआ है। यह किला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है।
गढ़पहरा किले के पास में ही गढ़पहरा हनुमान मंदिर बना हुआ है, जिसका अलग महत्व है। अगर आप इतिहास में रुचि रखते हैं, तो आपको इस जगह घूमने के लिए आना चाहिए और इस किले को देखना चाहिए। आज के इस लेख में हम सागर जिले के गढ़पहरा किले (Garhpehra Fort) के बारे में जानकारी देंगे

सागर के गढ़पहरा किला की यात्रा (Trip to Garhpehra Fort in Sagar)
मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित गढ़पहरा किला (Garhpehra Fort) एक ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है। यह किला बुंदेलखंड स्टाइल में बना हुआ है। यह किला बहुत ही बड़े एरिया में फैला हुआ है। यह किला एक ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। गढ़पहरा किला न केवल एक प्राचीन दुर्ग है, बल्कि यह उस युग की याद दिलाता है जब किले सुरक्षा, प्रशासन और शक्ति के केंद्र हुआ करते थे।
गढ़पहरा किला में जाकर आप किले के अंदर स्थित सुंदर महल और किले के आसपास के परिसर को देख सकते हैं। किले के पास में ही प्राचीन हनुमान मंदिर बना हुआ है, जो लोगों में धार्मिक महत्व रखता है। लोग इस मंदिर में जाकर हनुमान जी के दर्शन करते हैं। इस किले से आसपास का बहुत ही भव्य दृश्य देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही आकर्षक लगता है। आप यहां पर शाम के समय जाकर सूर्यास्त का दृश्य देख सकते हैं।
गढ़पहरा का किला सागर (Garhpehra Fort Sagar) जिले 10 किलोमीटर दूर सागर झांसी राजमार्ग पर बना है। इस किले में आप सड़क मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। इस किले में आप अपने वाहन से भी आ सकते हैं। यहां पर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट से भी आ सकते हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आप आते हैं, तो गढ़पहरा हनुमान मंदिर के पास उतर सकते हैं और उसके बाद आप सीढ़ियों से चढ़कर आराम से किले में घूमने के लिए जा सकते हैं।
अगर आप अपनी बाइक से आते हैं, तो आप बाइक को नीचे खड़ा कर सकते हैं। यहां पर बहुत बड़ा पार्किंग एरिया है, जहां पर आप बाइक खड़ा कर सकते हैं और उसके बाद किले में घूमने के लिए जा सकते हैं। हनुमान मंदिर के पास में ही किले में जाने के लिए रास्ता बना हुआ है।
हनुमान मंदिर के पास में एक बुर्ज बना हुआ है और यहां पर गेट लगा हुआ है, जहां से आप किले में जा सकते हैं। किले में जाने के लिए एक सकरा रास्ता है, जहां पर एक तरफ पहाड़ी है और रास्ते के दूसरे तरफ आपको घाटी का सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर दूर-दूर तक फैला सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही अद्भुत लगता है। इस रास्ते से होते हुए आप गढ़पहरा किले तक पहुंच जाते हैं।
गढ़पहरा किले (Garhpehra Fort) में पहुंचने के लिए सड़क मार्ग भी बना हुआ है। मगर वह बहुत लंबा रूट है, अगर आपको ट्रैकिंग नहीं करनी है, तो आप सड़क का प्रयोग कर सकते हैं। सड़क मार्ग में आपको खूबसूरत जंगल और पहाड़ों का दृश्य देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही अद्भुत लगता है।
गढ़पहरा किले में आने के बाद, आपको यहां पर सबसे खूबसूरत और अच्छी तरह से संरक्षित महल शीश महल देखने के लिए मिलता है। शीश महल बहुमंजिला महल है और बहुत ही सुंदर है। शीश महल के चारों तरफ बाउंड्री वॉल बनी हुई है। शीश महल के ऊपर और नीचे की तरफ कक्ष बने हुए हैं। सबसे ऊपर की तरफ यहां पर एक बड़ा गुंबद बना हुआ है और गुंबद के नीचे वाले मंजिल पर छोटे-छोटे गुंबद बने हुए हैं, जो बहुत ही सुंदर लगते हैं।
शीश महल एक ऊंचे मंडप पर बना हुआ है। महल के ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। आप शीश महल घूम सकते हैं। शीश महल का आकार वर्गाकार है। इस इमारत में विभिन्न रंग की चमकदार टाइल्स लगाई गई है। इस महल के निर्माण का श्री राजा जयसिंह ने कराया था, इन्होंने इस महल 18वीं शताब्दी के पूर्व में बनवाया था। महल में एक छतरी भी स्थापित है, जिसमें बुंदेला कला देखी जा सकती है।
शीश महल के पास में एक और महल के अवशेष देखने के लिए मिलते हैं। यह महल पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो गया है। महल के अंदर पहुंचने पर एक बड़ा मैदान देखने के लिए मिलता है और इसके चारों तरफ कमरे बने हुए हैं। महल के ऊपर छत नहीं है। इस महल में भी ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। आप महल के ऊपर जाकर ऊपर से आसपास के दृश्यों को देख सकते हैं।
वैसे यहां पर आकर आप चारों तरफ की पहाड़ियों और आसपास के दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। यहां पर घूमने का सबसे अच्छा समय बरसात का रहता है, क्योंकि बरसात के समय यह जगह हरियाली से गिर जाती है और बहुत ही सुंदर लगती है। यहां पर ढेर सारे बंदर भी हैं, तो आप संभाल कर रहे, नहीं तो बंदर आपके खाने पीने का सामान छीन सकते हैं।
आप यहां पर जाते हैं और अगर आपको ज्यादा समय तक रुकना है, तो आप यहां पर पानी और खाने का कुछ सामान जरूर लेकर जाएं। इस तरह से आप यहां पर अच्छा समय बिता सकते हैं और आपके यहां पर अच्छा लगेगा। यहां पर आपको शाम के समय सूर्यास्त का भी बहुत दृश्य बहुत ही शानदार दृश्य देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही सुंदर लगता है।
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गढ़पहरा नाम का अर्थ
“गढ़” का अर्थ है किला और “पहरा” का अर्थ है निगरानी। इस प्रकार गढ़पहरा का शाब्दिक अर्थ हुआ – ऐसा किला जहाँ से चारों ओर पहरा दिया जाता हो। इस नाम से ही स्पष्ट होता है कि यह किला रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान पर बनाया गया था, जहाँ से दूर-दूर तक निगरानी रखी जा सकती थी।

गढ़पहरा किला का इतिहास (Garhpehra Fort History)
सागर के गढ़पहरा किला (Garhpehra Fort) का इतिहास बहुत ही रोचक है। यह किला गोंड साम्राज्य के 52 गढ़ों में शामिल था। यहां पर गोंड राजा संग्राम सिंह का शासन हुआ करता था। राजा संग्राम सिंह के बाद यहां पर दांगी राजपूत का शासन हुआ और उन्होंने इस जगह पर कब्जा कर लिया।
उन्होंने इस जगह पर बहुत सारे महलों का निर्माण कराया, जिसकी संरचना है आज भी यहां पर देखी जा सकती है। दांगी राजपूतों की गढ़पहरा राजधानी थी। 1857 की क्रांति में भी इस किले की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इस किले में राजा मर्दन सिंह का कब्जा था। तब राजा मर्दन सिंह ने अपनी सेना के साथ अंग्रेजों के साथ युद्ध लड़े थे। मगर अंग्रेजों के आधुनिक हथियारों के सामने वो टिक नहीं पाए और उन्हें समर्पण करना पड़ा।
गढ़पहरा किले के बारे में भूतिया किस्से (Ghost Stories of Garhpahra Fort)
गढ़पहरा किला (Garhpehra Fort) के बारे में कहा जाता है कि यह किला भूतिया है। यहां पर कई सारी घटनाएं हो चुकी है, जो भूत प्रेत से संबंधित है। इस किले के बारे में माना जाता है, कि रात के समय यहां पर आत्माएं भटकती हैं और बहुत से लोगों ने इन्हें देखा है। यहां पर अगर कोई भी रात में सफर करता है, तो रात के समय उन्हें रोड में आत्माएं देखने के लिए मिलती है, जो उनकी गाड़ी को रोकते हैं।
इस किले के बारे में लोगों के अनुसार मानना है, कि इस किले में रात के समय नट और नटिनी की आत्माएं घूमती है। यहां पर बहुत से लोगों ने इन्हें देखने का दावा किया है। यहां पर रात के समय कोई नहीं रहता है। रात के समय यह किला सुनसान रहता है। यहां पर आज भी नट और नटिनी के गीतों की आवाज सुनाई देती है।
नट और नटिनी प्राचीन समय में करतब दिखाए करते थे। एक बार गढ़पहरा राज्य में नट और नटिनी करतब दिखाने आए थे। उन्हें दरबार में आमंत्रित किया था और एक रस्सी में चलने के लिए कहा था। नट और नटिनी में रस्सी में चलने के लिए, दूसरे दिन महल में बुलाया गया और रस्सी में चलने के लिए कहा गया। इस रस्सी का एक छोर महल में बांधा गया था और दूसरा छोर पहाड़ी में बांधा गया था।
नटिनी ने रस्सी में चलना शुरू कर दिया और वह रस्सी के आधे हिस्से में पहुंच गई। तब रानी ने रस्सी को काट दिया, जिसे नटिनी नीचे गिर गई और उसकी मृत्यु हो गई। नट इस दुख के कारण, उसकी मौत हो गई और इन दोनों की आत्माएं अभी भी यहां पर भटक रही है। यहां पर अकेले जाना माना है और इस जगह के बारे में बहुत सारी बातें कही जाती है।
गढ़पहरा किले की स्थापत्य शैली
गढ़पहरा किला (Garhpehra Fort) मुख्य रूप से सैन्य स्थापत्य का उदाहरण है, जहाँ सौंदर्य से अधिक सुरक्षा और मजबूती पर ध्यान दिया गया।
स्थापत्य की प्रमुख विशेषताएं
- ऊँची पहाड़ी पर स्थित दुर्ग
- मोटी पत्थर की दीवारें
- विशाल प्रवेश द्वार
- चौकोर और गोल बुर्ज
- निगरानी के लिए ऊँचे स्थान
गढ़पहरा किला कैसे पहुंचें (How to Reach Garhpehra Fort)
सड़क मार्ग : गढ़पहरा किला सागर (Garhpehra Fort Sagar) शहर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। इस किले तक जाने के लिए सड़क मार्ग बना हुआ है। सागर से टैक्सी, ऑटो या निजी वाहन द्वारा यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग : गढ़पहरा किला का निकटतम रेलवे स्टेशन सागर रेलवे स्टेशन है, जो भोपाल, जबलपुर और अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। आप सागर जिले में रेल मार्ग से अन्य शहरों से आसानी से आ सकते हैं और उसके बाद इस किले में सड़क के द्वारा पहुंच सकते हैं।
हवाई मार्ग : सागर का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा राजा भोज एयरपोर्ट, भोपाल है, जो सागर से लगभग 170 किलोमीटर दूर स्थित है। आप वायु मार्ग के द्वारा भोपाल आ सकते हैं और उसके बाद सड़क मार्ग के द्वारा इस किले में पहुंच सकते हैं।
गढ़पहरा किले का गूगल मैप लोकेशन
गढ़पहरा किला में घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit Garhpehra Fort)
गढ़पहरा किला (Garhpehra Fort) में घूमने का सबसे अच्छा समय ठंड और बरसात का रहता है। आप यहां पर ठंड और बरसात के समय आ सकते हैं और इस किले में घूमने का आनंद उठा सकते हैं। इस समय मौसम बहुत ही बढ़िया रहता है। आप यहां पर ट्रैकिंग और अन्य एक्टिविटी कर सकते हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और पहाड़ी पर चढ़ाई भी आरामदायक होती है। इस समय यहां पर चारों तरफ का दृश्य भी शानदार रहता है।
गढ़पहरा किले के आसपास दर्शनीय स्थल
गढ़पहरा किले (Garhpehra Fort) के साथ-साथ आसपास कई अन्य दर्शनीय स्थल भी हैं:
- सागर झील
- रहली का किला
- लाखा बंजारा झील
- आपचंद की गुफा
- टिकीटोरिया देवी मंदिर
- गढ़पहरा हनुमान मंदिर
- सूर्य मंदिर रहली
- गढ़ाकोटा
- एरण के ऐतिहासिक अवशेष
इन सभी स्थलों को मिलाकर सागर जिला एक समृद्ध पर्यटन क्षेत्र बन जाता है।
संरक्षण की आवश्यकता
गढ़पहरा किला (Garhpehra Fort) हमारी ऐतिहासिक धरोहर है। इसके संरक्षण के लिए:
- किले की संरचना को नुकसान न पहुंचाएं
- परिसर में स्वच्छता बनाए रखें
- ऐतिहासिक महत्व के प्रति जागरूकता फैलाएं
निष्कर्ष
गढ़पहरा किला, सागर मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह किला न केवल युद्ध और सुरक्षा का प्रतीक है, बल्कि यह उस युग की जीवनशैली, साहस और स्थापत्य कौशल को भी दर्शाता है।
यदि आप सागर जिले या बुंदेलखंड क्षेत्र की यात्रा पर हैं, तो गढ़पहरा किला अवश्य देखें। यह स्थल आपको इतिहास, वीरता और संस्कृति का अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।
