महारानी कमलापति स्मारक या महारानी कमलापति की समाधि मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण स्मारक है। यह स्मारक महाराजा छत्रसाल की रानी कमलापति की समाधि स्थल है। यह समाधि स्थल बुंदेलखंड की वीरता, शौर्य और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
अगर आप इतिहास प्रेमी है, तो आपको इस समाधि स्थल पर आना चाहिए और इस स्थल को देखना चाहिए। यह स्थल बहुत ही सुंदर है। इस लेख में हम आपको रानी कमलापति की समाधि (Maharani Kamlapati Samadhi) के बारे में जानकारी देंगे।

महारानी कमलापति समाधी स्थल की यात्रा (Trip to Maharani Kamlapati Samadhi Sthal)
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित महारानी कमलापति समाधी स्थल (Maharani Kamlapati Samadhi Sthal) एक सुंदर और आकर्षक स्थान में से एक है। इस स्मारक का निर्माण महाराजा छत्रसाल ने रानी कमलापति की याद में करवाया था। यह समाधि स्थल छतरपुर जिले के पास में मऊ सहानिया टाउन में बना हुआ है।
महारानी कमलापति स्मारक केवल ऐतिहासिक महत्व का स्थल नहीं है, बल्कि यह शैक्षणिक और पर्यटन केंद्र के रूप में भी लोकप्रिय है। इस समाधि स्थल में आप आसानी से घूमने के लिए आ सकते हैं। यह समाधि स्थल धुबेला झील के किनारे बना हुआ है। इस स्थल के आस-पास का दृश्य बहुत ही सुंदर रहता है।
महारानी कमलापति समाधि स्थल (Maharani Kamlapati Samadhi Sthal) में महाराजा छत्रसाल संग्रहालय के पास में ही बना हुआ है। यहां पर आने के लिए सड़क मार्ग बना हुआ है। आप महाराजा छत्रसाल संग्रहालय में घूमने के बाद, यहां पर आ सकते हैं। यह छत्रसाल संग्रहालय के पीछे की तरफ स्थित है। यहां पर आने के लिए रास्ता बना हुआ है।
महाराजा छत्रसाल संग्रहालय के बाजू से ही एक सड़क जाती है, जो समाधि की ओर जाती है ,आपको संग्रहालय के पीछे की तरफ धुबेला झील देखने के लिए मिलती है। धुबेला झील बहुत बड़े एरिया में फैली हुई है। साथ ही साथ यहां पर ढेर सारी पेड़ पौधे लगे हुए हैं। यहां पर रास्ते की एक तरफ आपको झील और दूसरी तरफ पहाड़ी देखने के लिए मिलती है।
यहां पर ढेर सारे पेड़ पौधे लगे हुए हैं, जिससे यह जगह और भी आकर्षक लगती है। आप करीब एक किलोमीटर अंदर आएंगे और आपको यह समाधि स्थल देखने के लिए मिल जाता है। यह समाधि स्थल बहुत ही सुंदर है। आप यहां पार्किंग में अपनी गाड़ी खड़ी कर सकते हैं। उसके बाद इस स्थल के अंदर जा सकते हैं।
समाधि स्थल के बाहर एक बड़ा सा आंगन बना हुआ है। यहां से आप धुबेला झील का सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है। समाधि के अंदर जाने पर एक व्यक्ति बैठे रहते हैं, जो यहां पर आने वाले व्यक्तियों की जानकारी, उनका नाम और मोबाइल नंबर कहां से आए हैं। यह सभी जानकारी एक रजिस्टर में लिखते हैं। उसके बाद आप यह समाधी स्थल घूम सकते है।
रानी कमलापति समाधि स्थल (Maharani Kamlapati Samadhi Sthal), महाराज छत्रसाल की प्रथम रानी की है। रानी कमलापति को देव कुँअरि के नाम से जाना जाता था। यह समाधि स्थल बहुत ही सुंदर तरीके से बनाया गया है। यहां पर समाधि के अंदर भित्ति चित्रण देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही आकर्षक है। यहां पर ढेर सारे चित्र बनाए गए हैं, जो आप देख सकते हैं।
समाधि के बीच में एक बड़ा सा गुंबद बना हुआ है और इसके चारों ओर 8 छोटे गुंबद बने हुए हैं, जो बहुत ही सुंदर है। समाधि के सेंट्रल हॉल में रानी कमलापति की समाधि है, जिसके दर्शन आप कर सकते हैं। समाधि के ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। आप ऊपरी मंजिल में जाकर घूम सकते हैं। यहां पर आप इस जगह को देख सकते हैं, जो बहुत ही सुंदर लगती है।
यह समाधि स्थल बुंदेलखंडी वास्तुकला में बनी हुई है। यहां पर खिड़कियां बनी हुई है, जिसे हवा आती है और बहुत अच्छा लगता है। समाधी के ऊपरी हिस्से में जाकर आप मुख्य गुबंद के बाहर जाकर घूम सकते हैं। यहां पर आप छोटे-छोटे में बनी खिड़कियों से बाहर के नजारे को देख सकते हैं, जो बहुत ही आकर्षक लगता है।
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रानी कमलापति मकबरा का इतिहास ( Maharani Kamlapati Samadhi Sthal History)
रानी कमलापति महल स्मारक का निर्माण महाराजा छत्रसाल द्वारा अपनी बड़ी रानी कमलापति की स्मृति में, उसकी याद में करवाया गया था। इस महल का निर्माण योजना दो मंजिला है। प्रवेश द्वार मेहराब युक्त है। महल में हरे लाल रंग से फूल पत्तियों का चित्रांकन किया गया है।
महल का शिखर अष्टकोणीय गुम्बंदकार है। महल की चित्रकला शैली बुंदेली है। महाराजा छत्रसाल की प्रथम रानी को देव कुँअरि के नाम से जाना जाता था। इस स्मारक में दीवारों में बनाए गए चित्रों में 180 चित्रांकन है। ऊपरी अखंड में 7 गुंबद है जिनमें 48 पंखुड़ियां वाले कमल पुष्प का प्रभाव है।

महारानी कमलापति स्मारक की वास्तुकला
महारानी कमलापति स्मारक (Maharani Kamlapati Samadhi Sthal) की वास्तुकला बुंदेला और आधुनिक शैली का मिश्रण है।
मुख्य विशेषताएं
- भव्य प्रवेश द्वार और प्रांगण
- स्मारक के मध्य में रानी कमलापति की समाधि
- स्मारक में आले और खिड़कियों का सुंदर डिजाइन
- स्मारक में बने भित्तिचित्र
- साफ-सुथरा और सुंदर वातावरण
पर्यटन और दर्शनीय अनुभव
रानी कमलापति स्मारक (Maharani Kamlapati Samadhi Sthal) छतरपुर का प्रमुख पर्यटन स्थल है। इतिहास प्रेमियों को इस जगह पर जरूर घूमने के लिए आना चाहिए। यह स्थल बुंदेला स्टाइल में बना हुआ है और बहुत ही आकर्षक लगता है। यहां पर आसपास का वातावरण भी बहुत सुंदर है। यहां पर चारों तरफ प्राकृतिक वातावरण देखने के लिए मिलता है।
पर्यटक गतिविधियां
- हरियाली भरा शांत वातावरण
- धुबेला झील का सुंदर दृश्य
- फोटोग्राफी और शांति पूर्ण यात्रा
- शैक्षणिक और शोध यात्रा
महारानी कमलापति समाधि कैसे पहुंचें (How to Reach Maharani Kamlapati Samadhi)
सड़क मार्ग : रानी कमलापति की समाधि (Maharani Kamlapati Samadhi) में सड़क मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। यह छतरपुर शहर के पास मऊ सहानिया टाउन में धुबेला झील के पास में बनी हुई है। यहां पर समाधि तक आने के लिए सड़क मार्ग बना हुआ है। आप यहां पर अपने निजी परिवहन से आ सकते हैं। आप यहां पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट से भी आसानी से घूमने के लिए आ सकते हैं।
रेल मार्ग : मऊ सहानिया का निकटतम रेलवे स्टेशन छतरपुर रेलवे स्टेशन है। छतरपुर रेलवे स्टेशन में आप अन्य शहरों से आसानी से पहुंच सकते हैं और उसके बाद रानी कमलापति की समाधि में आ सकते हैं।
हवाई मार्ग : मऊ सहानिया का निकटतम हवाई अड्डा खजुराहो एयरपोर्ट है, जो लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर है। आप हवाई मार्ग से खजुराहो आ सकते हैं और उसके बाद सड़क के द्वारा मऊ सहानिया आ सकते हैं।
रानी कमलापति समाधि स्थल का गूगल मैप लोकेशन
महारानी कमलापति समाधि या स्मारक घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit Maharani Kamlapati Samadhi or Memorial)
रानी कमलापति समाधि स्थल (Maharani Kamlapati Samadhi Sthal) में घूमने का सबसे अच्छा समय ठंड और बरसात का रहता है। आप यहां पर ठंड और बरसात के समय आ सकते हैं और इस जगह में घूम सकते हैं। ठंड और बरसात का समय बहुत ही बढ़िया रहता है, क्योंकि इस समय यहां पर चारों तरफ हरियाली देखने के लिए मिलती है और झील भी बहुत सुंदर लगती है। आप इस समय आकर इस जगह की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं।
स्मारक के आसपास दर्शनीय स्थल
- खजुराहो के मंदिर
- महाराजा छत्रसाल समाधि स्थल
- मस्तानी महल
- गुलगंज का किला
- छतरपुर किला
- महाराजा छत्रसाल संग्रहालय छतरपुर
- भेड़ाघाट और नर्मदा नदी क्षेत्र
- बीहड़ वन्यजीव अभयारण्य
पर्यटकों के लिए सुझाव
- परिसर में शांति बनाए रखें
- फोटो और वीडियो के नियमों का पालन करें
- बच्चों और परिवार के साथ सुरक्षित यात्रा करें
- कूड़ा-कचरा न फैलाएं
- गाइड और कर्मचारियों की निर्देशों का पालन करें
निष्कर्ष
महारानी कमलापति स्मारक, छतरपुर बुंदेलखंड की वीरता, महिला शक्ति और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह स्मारक इतिहास, कला और संस्कृति प्रेमियों के लिए ज्ञान और अनुभव का केंद्र है।
यदि आप छतरपुर या मध्य प्रदेश की यात्रा कर रहे हैं, तो महारानी कमलापति स्मारक को अपनी यात्रा सूची में अवश्य शामिल करें। यहाँ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक झलक आपके अनुभव को अविस्मरणीय बना देगी।
