मोती महल मंडला जिले के रामनगर में स्थित सबसे प्रसिद्ध स्मारक है। मोती महल को रामनगर किला के नाम से भी जाना जाता है। मोती महल (Moti Mahal) मुख्य रामनगर शहर में बनी हुई है। रामनगर का किला (Ramnagar Fort) गोंडवाना काल के महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक स्मारक है।
मोती महल (Moti Mahal) गोंड राजाओं की समृद्ध संस्कृति, प्रशासनिक व्यवस्था और स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। रामनगर क्षेत्र कभी गोंडवाना साम्राज्य की राजधानी रहा है और मोती महल उसी गौरवशाली अतीत की जीवंत स्मृति है। आज भी मोती महल (Moti Mahal) इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
इस लेख में हम आपको मंडला के रामनगर में स्थित मोती महल (Moti Mahal) के बारे में जानकारी देंगे

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Toggleरामनगर का किला या मोती महल की यात्रा (Ramnagar Fort or Moti Mahal Trip)
मोती महल रामनगर (Moti Mahal Ramnagar) में स्थित सबसे सुंदर और आकर्षक स्थान में से एक है। यह महल मंडला जिले के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थानों में से एक है। यह महल अच्छी अवस्था में है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं और महल को देख सकते हैं। यह महल मंडला जिले से करीब 25 किलोमीटर दूर रामनगर में बना हुआ है।
रामनगर मंडला का एक कस्बा है और यह नर्मदा नदी के किनारे बसा हुआ है। आप यहां पर सड़क मार्ग से आ सकते हैं। यहां पर आप बाइक, कार और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आ सकते हैं। रामनगर में घूमने के लिए बहुत सारी जगह हैं, जिनमें मोती महल प्रमुख है। मोती महल (Moti Mahal) में मुख्य सिटी में बना हुआ है। रामनगर में नर्मदा नदी को पार करते ही सबसे पहले आपको मोती महल देखने के लिए मिलता है।
मोती महल (Moti Mahal) में पहुंचकर आप महल के बाहर गाड़ी पार्किंग में खड़ी कर सकते हैं। यहां पर बहुत बड़ा स्पेस है, जहां पर आप अपनी बाइक और कार को आराम से खड़ी कर सकते हैं। उसके बाद मोती महल (Moti Mahal) घूमने के लिए जा सकते हैं। मोती महल के ठीक सामने एक बगीचा बना हुआ है, जहां पर शिव भगवान जी का मंदिर भी बना हुआ है। यहां पर जाकर आप नर्मदा नदी के सुंदर दृश्य का आनंद ले सकते हैं।
मोती महल (Moti Mahal) के बाहर आपको बहुत सारे तोते देखना लिए मिलते हैं। यहां पर ढेर सारे तोता महल की खिड़कियों और दरारें में देखे जा सकते हैं, जो यहां पर चाहकते रहते हैं और महल में एक अलग सा सुकून महसूस करवाते हैं। यहां का वातावरण बहुत शांतिपूर्ण और प्राकृतिक है। यहां पर आकर एक अलग प्रकार का सुकून मिलता है।
मोती महल (Moti Mahal) का प्रवेश द्वार बहुत ही सुंदर और छोटा सा है। मोती महल दो मंजिला है। मोती महल के अंदर जाने पर आपको एक बड़ा सा आंगन देखने के लिए मिलता है और आंगन के बीच में एक बड़ा सा कुंड बना हुआ है। यह कुंड बहुत ही सुंदर है और आयताकार है। कुंड में बरसात के समय पानी भर जाता है।
गर्मी के समय इसमें पानी सूख जाता है। गर्मी के समय इस कुंड में पानी सूख जाता है। इस कुंड में नीचे उतरने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। कुंड के चारों तरफ कमरे बने हुए हैं। महल के ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। आप महल के ऊपर जाकर महल के ऊपर बने हुए कमरे और महल की छत देख सकते हैं।
मोती महल (Moti Mahal) के ऊपर छत में चारों कोने पर गुंबदनुमा छोटे-छोटे कमरे बने हुए हैं, जो बहुत ही सुंदर लगते हैं। महल के ऊपरी भाग में जाकर आसपास के दृश्यों का आनंद उठा सकते हैं। आप इन कमरों में जाकर घूम सकते हैं। इन कमरों को देख सकते हैं। मोती महल (Moti Mahal) में तहखाना भी बना हुआ है, जहां पर आप घूमने के लिए जा सकते हैं। यहां पर आपको पानी निकालने की एक सुंदर संरचना देखने के लिए मिलती है। यहां पर अंधेरा रहता है, मगर आप इस तहखाने को टॉर्च जलाकर देख सकते हैं।
मोती महल (Moti Mahal) में घूमने के बाद, आप मोती महल के सामने बने पार्क में जा सकते हैं। यहां पर शंकर भगवान जी का मंदिर भी बना हुआ है, जहां पर आप कुछ टाइम बैठ सकते हैं और नर्मदा नदी के सुंदर दृश्य का आनंद उठा सकते हैं। यहां पर भजन कीर्तन भी होते रहते हैं, जो आप सुन सकते हैं।
मोती महल (Moti Mahal) के पास में ही एक और स्मारक है, जो आपको जरुर देखना चाहिए। यहां पर भगवान विष्णु का प्राचीन मंदिर बना हुआ है, जो बहुत ही सुंदर है और प्राचीन है। इस मंदिर में आपको भगवान विष्णु के दर्शन करने के लिए मिलते हैं और यह गोंड कालीन स्मारक है।
प्राचीन विष्णु मंदिर रामनगर (Ancient Vishnu Temple, Ramnagar) में मोती महल के थोड़ा आगे जाने पर आपको देखने के लिए मिल जाता है। यह मंदिर बहुत ही सुंदर है और यह मंदिर गोंड कालीन है। 1667 में इस मंदिर का निर्माण किया गया था। यह मंदिर भगवान विष्णु के सम्मान में बनाया गया था। इस मंदिर में इंडो इस्लामी शैली का प्रभाव देखने के लिए मिलता है।
प्राचीन विष्णु मंदिर का निर्माण राजा हृदय शाह की पत्नी सुंदरी देवी ने करवाया था। इस मंदिर का गर्भ ग्रह वर्गाकार है। इस मंदिर का गर्भगृह वर्गाकार है। इसके चारों ओर 4 बरामदे एवं चारों कोनों पर 4 कमरे हैं। इसका गोल शिखर गुंबदनुमा है।
पूर्व में यहां पर विष्णु, शिव, गणेश, दुर्गा जी और सूर्य भगवान की प्रतिमाएं प्रतिष्ठित थी। वर्तमान में मंदिर का गर्भगृह खाली है। सूर्य भगवान सूर्य प्रतिमा के कारण इस मंदिर को लोग सूरज मंदिर के नाम से जानते हैं। यह सभी प्रतिमा जिला पुरातत्व संग्रहालय मंडला में प्रदर्शित की गई है। यह गोंड कालीन वास्तुकला का एक सुन्दर उदहारण है। अगर आप रामनगर आते हैं, तो आप इस मंदिर में भी जरूर घूमने जाएं।
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मोती महल का इतिहास
नर्मदा तट पर स्थित ऐतिहासिक ग्राम में गोंड राजा ने 1667 ईस्वी में मंडला से अपनी राजधानी यहां में स्थानांतरित की। मोती महल को स्थानीय लोग राजा महल अथवा किले के नाम से जानते हैं। यह आयताकार महल 3 मंजिला है। बाहर से यह 212 फीट लंबा तथा 200 फीट चौड़ा है। महल के भीतर विस्तृत आंगन है, जो 167 फीट लंबा और 154 फीट चौड़ा है।
पत्थरों से निर्मित इस महल के आंगन के चारों कोने पर बरामदा युक्त अधिकांश कमरे लंबे-लंबे किंतु सकरे हैं, जबकि कोने के किनारे वाले कमरे वर्गाकार एवं छोटे हैं। नर्मदा नदी की ओर मुख वाला उत्तरी प्रवेश द्वार प्रमुख प्रवेश द्वार है, जबकि पश्चिम में भी गांव की ओर एक प्रवेश द्वार है।
दीवार पर जुड़े हुए प्रस्तर लेख में गौड़ वंश के संस्थापक जादोराय (यदुराय) से लेकर हृदय शाह तक गढ़ मंडला के गोंड राजाओं की वंशावली दी हुई है। इस लेख में तिथि 1724 विक्रम संवत दी हुई है।

मोती महल का ऐतिहासिक महत्व
मोती महल का निर्माण गोंडवाना शासनकाल में हुआ माना जाता है, जब रामनगर गोंड राजाओं की राजधानी था।
इतिहास की पृष्ठभूमि
- मोती महल गोंड शासकों का प्रमुख आवासीय और प्रशासनिक केंद्र था
- यह महल राजकीय सभाओं और महत्वपूर्ण निर्णयों का साक्षी रहा
- गोंड राजाओं की शक्ति और वैभव का प्रतीक माना जाता था
- रामनगर, रानी दुर्गावती के शासन से भी ऐतिहासिक रूप से जुड़ा रहा है
मोती महल गोंडवाना साम्राज्य के राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र था।
मोती महल की वास्तुकला (Architecture)
मोती महल की वास्तुकला गोंड और स्थानीय शैली का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करती है।
वास्तुशिल्प की विशेषताएं
- मजबूत पत्थरों और चूने से निर्मित संरचना
- विशाल कक्ष और खुले प्रांगण
- ऊँची छतें और मोटी दीवारें
- प्राकृतिक रोशनी और वायु संचार की व्यवस्था
मोती महल से जुड़ी लोककथाएं
स्थानीय लोगों में मोती महल को लेकर कई रोचक कथाएं प्रचलित हैं। मोती महल के बारे में कई लोगों का मानना है, कि इस महल का निर्माण काले जादू से किया गया है। राजा हृदय शाह के पास ढेर सारी काली शक्तियों थी, जिसके द्वारा उन्होंने इस महल का निर्माण एक रात में ही करवाया है। ये कथाएं महल को रहस्यमय और रोचक बनाती हैं।
लोककथाएं
- गुप्त सुरंगों की कहानियां
- शाही खजाने से जुड़ी मान्यताएं
- रानी और राजपरिवार से जुड़े किस्से
पर्यटन की दृष्टि से मोती महल
इतिहास और विरासत पर्यटन के लिए मोती महल अत्यंत उपयुक्त स्थल है।
पर्यटकों के लिए आकर्षण
- गोंडवाना इतिहास को जानने का अवसर
- शांत और प्राकृतिक वातावरण
- फोटोग्राफी और अध्ययन के लिए उपयुक्त
मोती महल के पास घूमने की जगहें
- राय भगत की कोठी
- सहस्त्रधारा
- मंडला का किला
- रपटा घाट
- विष्णु मंदिर
- काला पहाड़
मोती महल कैसे पहुँचें (How to reach Moti Mahal)
सड़क मार्ग : रामनगर मंडला जिले से करीब 25 किलोमीटर दूर है। रामनगर और मंडला से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। यहां पर पहुंचने के लिए सड़क मार्ग बना हुआ है। यहां पर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट से या अपने खुद के वाहन से आसानी से पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग : मंडला का निकटतम रेलवे स्टेशन जबलपुर जंक्शन है। आप किसी अन्य शहर से जबलपुर आ रहे हैं, तो आप जबलपुर आ सकते हैं और उसके बाद सड़क के द्वारा मंडला और उसके बाद रामनगर पहुंच सकते हैं।
हवाई मार्ग : मंडला का निकटतम हवाई अड्डा जबलपुर एयरपोर्ट है। आप वायु मार्ग से जबलपुर आ सकते हैं और उसके बाद सड़क मार्ग के द्वारा मंडला और उसके बाद रामनगर पहुंच सकते हैं।
मोती महल का गूगल मैप लोकेशन
मोती महल में घूमने का अच्छा समय (Best time to visit Moti Mahal)
मोती महल में घूमने का सबसे अच्छा समय ठंड का रहता है। आप यहां पर अक्टूबर से मार्च महीने के बीच में आ सकते हैं और मोती महल में घूम सकते हैं। इस समय मौसम बहुत ही बढ़िया रहता है और आसपास भी आपको हरियाली देखने के लिए मिलती है।
मोती महल क्यों देखें?
- गोंडवाना साम्राज्य का इतिहास जानने के लिए
- रानी दुर्गावती के युग को समझने के लिए
- ऐतिहासिक वास्तुकला देखने के लिए
- शांत और प्रेरणादायक वातावरण के लिए
निष्कर्ष
मोती महल, रामनगर गोंडवाना साम्राज्य की गौरवशाली विरासत और मध्य प्रदेश के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। यह महल हमें गोंड शासकों की प्रशासनिक क्षमता, सांस्कृतिक समृद्धि और स्थापत्य कला से परिचित कराता है।
यदि आप मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों, आदिवासी संस्कृति और विरासत पर्यटन में रुचि रखते हैं, तो मोती महल रामनगर अवश्य देखें।
