जंतर मंतर उज्जैन – इतिहास और यात्रा गाइड : Beautiful Jantar Mantar Ujjain

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Jantar Mantar Ujjain – उज्जैन का एक ऐतिहासिक स्थान

उज्जैन, जिसे प्राचीन काल में अवंतिका और उज्जयिनी कहा जाता था, भारत का एक प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के साथ-साथ उज्जैन खगोल विज्ञान और ज्योतिष के लिए भी प्रसिद्ध है। उज्जैन में स्थित है जंतर मंतर या वेधशाला, जिसे महाराजा जयसिंह द्वितीय ने 18वीं शताब्दी में बनवाया था। यह स्थान खगोल शास्त्र, समय मापन और ग्रह-नक्षत्रों की गति का अध्ययन करने के लिए एक अद्वितीय वेधशाला है।

उज्जैन का जंतर मंतर की यात्रा (Trip to Jantar Mantar in Ujjain)

उज्जैन आने वाला हर पर्यटक उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की यात्रा करने के लिए आता है। उज्जैन अपने मंदिरों के लिए बहुत प्रसिद्ध है, मगर उज्जैन में मंदिरों के अलावा भी ढेर सारे स्थल है, जहां पर जाकर लोग यात्रा कर सकते हैं। उज्जैन का एक ऐसा ही स्थल है – जंतर मंतर 

वेधशाला, जिसे स्थानीय रूप से जंतर मंतर के नाम से जाना जाता है। इस वेधशाला को शासकीय जीवाजी वेधशाला के नाम से भी जाना जाता है। जंतर मंतर का निर्माण 117वीं शताब्दी में राजा जयसिंह के द्वारा करवाया गया था। यह एक प्राचीन खगोलीय वेधशाला है। भारत की पांच वेधशालाओं में यह एक है, जो सटीक खगोलीय मापन के लिए डिजाइन किया गया है। यह उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। यहां पर आकर आप अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं।

इस स्थल पर बड़े-बड़े पत्थर के उपकरण बने हुए हैं, जिनका उपयोग प्राचीन समय में आकाशीय गतियां, समय का मापन और ग्रहण की भविष्यवाणी करने के लिए किया जाता था। यहां पर जानकारी के लिए एक बोर्ड लगाया गया है, जहां पर यह यंत्र किस तरह से काम करते हैं। इसके बारे में लिखा है। आप इसे पढ़कर इन यंत्रों से समय का मापन कर सकते हैं। उज्जैन का जंतर मंतर ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यहां कर्क रेखा पर स्थित है और खगोलीय अध्ययन के लिए एक प्रमुख केंद्र है।

उज्जैन के जंतर मंतर की यात्रा करने के लिए उज्जैन मुख्य शहर से ऑटो ले सकते हैं। यह मुख्य शहर से करीब 2 किलोमीटर दूर शिप्रा नदी के किनारे बना हुआ है। आप चाहे, तो इस जगह पर पैदल भी आ सकते हैं। पैदल आने में आपको 20 से 25 मिनट लग जाएंगे और अगर आप ऑटो से आते हैं, तो आप 5 या 10 मिनट में यहां पर आराम से पहुंच सकते हैं।

वेधशाला या जंतर मंतर 10:30 बजे के बाद खुलता है। आप यहां पर 10:30 बजे के बाद घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर प्रवेश करने के लिए शुल्क लगता है। शुल्क देने के बाद, आप यहां पर प्रवेश कर सकते हैं। यहां पर गाइड की सुविधा भी उपलब्ध है। गाइड यंत्रों के बारे में डिटेल जानकारी देगा, जिससे आप यंत्रों के उपयोग के बारे में भी जान सकते हैं।

यहां पर बहुत बड़ा ग्लोब भी रखा गया है। यह ग्लोब बच्चों को अपनी और आकर्षित करता है। बच्चे इस ग्लोब को जरुर देखना पसंद करेंगे। आप भी इस ग्लोब को देख सकते हैं। इस ग्लोब से आपको बहुत सारी जानकारी हासिल होगी। इस ग्लोब में पृथ्वी में स्थित सारे देश देखने के लिए मिल जाते हैं। हमारा भारत देश और हमारा समुद्री एरिया भी देखने के लिए मिलता है।

यहां पर एक सुंदर बगीचा भी बना हुआ है ,जिसमें तरह-तरह के पेड़ पौधे लगाए गए हैं। यहां पर फूलों वाले प्लांट लगाए गए हैं। बगीचे के बीच में बैठने की व्यवस्था है, जहां पर आप कुछ देर बैठकर इस जगह में शांति का अनुभव कर सकते हैं। यहां पर महाराजा जयसिंह जी की प्रतिमा भी देखने के लिए मिलती है। साथ ही साथ यहां पर लाइब्रेरी है, जहां पर जाकर आप खगोलीय विज्ञान से संबंधित किताबें पढ़ सकते हैं।

यहां पर एक बहुत ही अद्भुत यंत्र देखने के लिए मिलता है, जिसे सन डायल यंत्र कहते हैं। इस यंत्र से सूरज की रोशनी से समय का पता लगाया जाता है। यह बहुत ही आश्चर्यजनक बात है, की सूरत से रोशनी से समय का पता लगाना। मगर यह बहुत ही इंटरेस्टिंग है। आप यहां पर आकर, यह यंत्र कैसे काम करता है यह जान सकते हैं और समय का पता लगा सकते हैं। यह यंत्र बहुत बड़ा है और यंत्र में नंबर्स लिखे हुए हैं और जब सूरज की रोशनी बढ़ती है, तो इन नंबरों से ज्ञात होता है, कि समय कितना हुआ है।

जंतर मंतर में और भी यंत्र देखने के लिए मिले। यहां पर सम्राट यंत्र, शंकु यंत्र, नाडीवलय यंत्र, और दिगश यंत्र बने है। यहां पर बोर्ड लगे हुए हैं, जिनसे यह यंत्र किस तरह से कम कर सकते हैं। आप जान सकते हैं या आप यहां पर गाइड को हायर कर सकते हैं। गाइड आपको पूरी जानकारी दे सकता है। यहां पर सौरमंडल का मॉडल देखने के लिए मिला, जो बहुत अच्छी तरीके से बनाया गया था। यहां पर एक्यूप्रेशर ट्रैक भी बनाया गया था। एक्यूप्रेशर ट्रैक में चलकर अपने शरीर के जो भी रोग रहते हैं। उन से छुटकारा पा सकते हैं।

चलिए एक्यूप्रेशर के बारे में जाने (Information about Acupressure)

एक्यूप्रेशर प्राचीन पद्धति है। एक्यूप्रेशर से शरीर के बहुत सारे दर्द ठीक हो जाते हैं। यहां पर एक्यूप्रेशर के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई है, जिससे आप जान सकते हैं, कि एक्यूप्रेशर के क्या फायदे हैं।

एक्यूप्रेशर शरीर के विभिन्न हिस्सों के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर दबाव डालकर रोग निदान करने की विधि है। हमारे शरीर के मुख्य अंगो के दबाव केंद्र या प्रेशर पॉइंट पैरों के तलवों और हथेलियों में होते हैं। अगर इन दबाव केंद्रों की मालिश की जाए या दबाव डाले जाएं। तो प्रेशर पॉइंट जिस अंग से संबंधित है। वह स्वस्थ होता है।

अगर आप निम्न दाब में तीन परिक्रमा, मध्यम दाब की दो परिक्रमा और उच्च दाब की एक परिक्रमा करके इसी परिक्रमा क्रम से वापस आते है, तो आपके स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है। आपका रक्त संचार अच्छा होता है। मांसपेशियों में मजबूती आती है। स्नायु तंत्र भी मजबूत होता है और उससे संबंधित अंग में स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है। एक्यूप्रेशर बहुत महत्वपूर्ण है और आपको एक्यूप्रेशर जरूर करना चाहिए, जिससे आप स्वस्थ रहें। जंतर मंतर में एक्यूप्रेशर ट्रैक बना हुआ है, जिसमें आप चल सकते हैं और अपने आप को स्वस्थ कर सकते हैं।

जंतर मंतर में प्रवेश के लिए प्रवेश शुल्क  (Jantar Mantar Ujjain Ticket Price)

जंतर मंतर में प्रवेश के लिए शुल्क लिया जाता है।

  • भारतीय पर्यटक – ₹10
  • विद्यार्थी – ₹5
  • विदेशी व्यक्ति – ₹100
  • तारामंडल – ₹ 20

वेधशाला के खुलने का समय – (Jantar Mantar Ujjain Timings)

वेधशाला के खुलने का समय सुबह 10:30 से शाम 5:30 बजे तक है।

जंतर मंतर कहां पर स्थित है (Where is Jantar Mantar located)

जंतर मंतर उज्जैन (Jantar Mantar Ujjain) शहर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। जंतर मंतर उज्जैन (Jantar Mantar Ujjain) में शिप्रा नदी के किनारे पर बना हुआ है। जंतर-मंतर महाकाल मंदिर से करीब 3 किलोमीटर दूर होगा और यहां पर आप कार या बाइक से पहुंच सकते हैं। यहां पर पार्किंग की अच्छी व्यवस्था है।

जंतर मंतर उज्जैन का इतिहास (Jantar Mantar Ujjain History)

  • निर्माणकर्ता: महाराजा जयसिंह द्वितीय (राजस्थान के जयपुर के कछवाहा शासक)
  • निर्माण काल: लगभग 1725 ईस्वी
  • जयसिंह द्वितीय ने भारत में कुल 5 वेधशालाएँ बनवाईं – दिल्ली, जयपुर, वाराणसी, मथुरा और उज्जैन।
  • उज्जैन वेधशाला का महत्व सबसे ज्यादा है क्योंकि यह शहर प्राचीन काल से ही कालगणना और खगोल विज्ञान का केंद्र माना जाता रहा है।

जंतर मंतर उज्जैन की वास्तुकला और संरचना (Architecture and Structure of Jantar Mantar Ujjain)

यह वेधशाला वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद सटीक और अद्भुत है। इसमें विभिन्न यंत्र स्थापित किए गए हैं जिनका उपयोग समय और खगोलीय गणनाओं के लिए किया जाता था।

प्रमुख यंत्र (Instruments of Vedh Shala Ujjain)

  1. सूर्य घड़ी (Samrat Yantra) – सूर्य की छाया से समय मापने के लिए।
  2. नाडी वालायंत्र (Nadi Valaya Yantra) – दिन और रात के समय में विभिन्न रेखांशों पर समय ज्ञात करने के लिए।
  3. शंकु यंत्र (Shanku Yantra) – ऊंचाई और कोण मापने के लिए।
  4. भित्ति यंत्र (Bhitthi Yantra) – सूर्य और चंद्रमा की गति का अध्ययन करने के लिए।
  5. दिगांश यंत्र (Digansh Yantra) – दिशा और ग्रहों की स्थिति जानने के लिए।

इन यंत्रों की मदद से खगोल वैज्ञानिक ग्रहण, संक्रांति, विषुव, और पंचांग संबंधी गणनाएँ किया करते थे।

जंतर मंतर उज्जैन की फोटो (Jantar Mantar Ujjain Photos)

Jantar Mantar Ujjain
जंतर मंतर के बगीचे में महाराजा जयसिंह जी की प्रतिमा
Jantar Mantar Ujjain
जंतर मंतर में बना प्राचीन यन्त्र
Jantar Mantar Ujjain
Jantar Mantar Ujjain
Jantar Mantar Ujjain
जंतर मंतर में जाने की जगह

खगोल विज्ञान में जंतर मंतर उज्जैन का महत्व

  • उज्जैन प्राचीन भारत का शून्य मेरिडियन (Zero Longitude) माना जाता था।
  • यहाँ से समय की गणना पूरे भारत में लागू की जाती थी।
  • प्राचीन काल से ही उज्जैन में पंचांग, ग्रह-नक्षत्र और ज्योतिष विद्या का अध्ययन होता रहा है।
  • महाराजा जयसिंह द्वितीय ने इन यंत्रों के जरिए भारतीय खगोल विज्ञान को और भी सटीक बनाया।

जंतर मंतर उज्जैन घूमने का सबसे अच्छा समय (Best time to visit Jantar Mantar Ujjain)

जंतर मंतर में घूमने का अच्छा समय ठंड का है। आप यहां पर ठंड के समय जाकर आराम से घूम सकते हैं और शांति पूर्वक समय बिता सकते हैं। गर्मी के दिनों में यहां पर दिन के समय घूमने में परेशानी हो सकती है। आप यहां सुबह के समय या शाम के समय गर्मी के मौसम में घूम सकते हैं।

जंतर मंतर उज्जैन कैसे पहुंचे (How to reach Jantar Mantar Ujjain)

  • हवाई मार्गनजदीकी हवाई अड्डा: देवी अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट, इंदौर (55 किमी दूर)
  • रेल मार्गउज्जैन जंक्शन रेलवे स्टेशन – भारत के कई बड़े शहरों से सीधी ट्रेन उपलब्ध।
  • सड़क मार्गउज्जैन मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे इंदौर (55 किमी), भोपाल (190 किमी), और रतलाम से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

जंतर मंतर का गूगल मैप लोकेशन

जंतर मंतर उज्जैन के पास घूमने की जगहें

जंतर मंतर उज्जैन (Jantar Mantar Ujjain) – FAQs (Frequently Asked Questions)

Q1. जंतर मंतर उज्जैन (Jantar Mantar Ujjain) किसने बनवाया था?
इसे महाराजा जयसिंह द्वितीय ने 18वीं शताब्दी में बनवाया था।

Q2. जंतर मंतर उज्जैन (Jantar Mantar Ujjain) में क्या खास है?
यहाँ पर प्राचीन खगोल यंत्र स्थापित हैं जिनसे समय और ग्रहों की गति का अध्ययन किया जाता था।

Q3. जंतर मंतर उज्जैन (Jantar Mantar Ujjain) कब घूमना सबसे अच्छा है?
अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा है।

Q4. जंतर मंतर उज्जैन (Jantar Mantar Ujjain) कहाँ स्थित है?
यह महाकालेश्वर मंदिर से लगभग 2 किमी की दूरी पर उज्जैन शहर में स्थित है।

Q5. क्या आज भी जंतर मंतर उज्जैन (Jantar Mantar Ujjain) में अध्ययन होता है?
हाँ, यहाँ खगोल विज्ञान और पंचांग संबंधी शोध आज भी किए जाते हैं।

निष्कर्ष

जंतर मंतर उज्जैन (Jantar Mantar Ujjain) भारतीय खगोल विज्ञान और वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। यहाँ जाकर पर्यटक न केवल इतिहास से जुड़ते हैं बल्कि यह भी समझते हैं कि भारत में सदियों पहले किस तरह वैज्ञानिक शोध और खगोलीय अध्ययन किए जाते थे। उज्जैन यात्रा करने वाले हर यात्री को यह वेधशाला अवश्य देखनी चाहिए।

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