आदेगांव का किला मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। यह किला मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के लखनादौन तहसील में स्थित है। यह किला अपने गौरवशाली अतीत, वीरता और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है।
आदेगांव का किला (Adegaon Fort) में आकर आप इसकी प्राचीन दीवारें, बुर्ज, किले के अंदर स्थित काल भैरव का मंदिर और किले के इतिहास के बारे में जान सकते हैं, जो बहुत ही रोचक है। इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए, यह किला एक महत्वपूर्ण स्थल है। आज के लेख में हम आपको आदेगांव के किला और काल भैरव के मंदिर के बारे में जानकारी देंगे

आदेगांव का किला और काल भैरव मंदिर (छोटी काशी) की यात्रा (A Trip to Adegon Fort and Kal Bhairav Temple (Chhoti Kashi))
आदेगांव का किला (Adegaon Fort) मध्य प्रदेश के एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। यह किला मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के लखनादौन तहसील में बना है। यह किला लखनादौन तहसील से करीब 18 किलोमीटर दूर आदेगांव नाम के गांव में बना है। इस गांव तक पहुंचाने के लिए सड़क मार्ग बना हुआ है। इस किले में आप अपनी बाइक, कार और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आ सकते हैं।
आदेगांव का किला (Adegaon Fort) लखनादौन नरसिंहपुर हाईवे मार्ग से करीब 5 किलोमीटर दूर है। आप हाईवे मार्ग से इस गांव तक आने के लिए ऑटो मिल जाती है। अगर आप यहां पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आ रहे हैं, तो आपको इस गांव में आने के लिए ऑटो मिल जाती है, जिससे आप गांव में पहुंच सकते हैं और उसके बाद इस किले में घूमने के लिए जा सकते हैं।
आदेगांव का किला (Adegaon Fort) गांव के अंदर स्थित है। किले में जाने के लिए गांव का सकरा रास्ता है। इस रास्ते से होते हुए आप किले के गेट के सामने पहुंचते हैं। यहां पर काल भैरव मंदिर का बोर्ड लगा हुआ है। यह किला पहाड़ी पर बना हुआ है। पहाड़ी पर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। किले के पास पहाड़ी में गवर्नमेंट स्कूल भी बना हुआ है।
इस किले के बाहर अगर आप अपनी गाड़ी से आते हैं, तो गाड़ी कर सकते हैं और किले में जा सकते हैं। आप यहां पर जाते हैं, तो आप बाइक से जाएं, तो बेहतर रहेगा, क्योंकि किले के सामने पार्किंग की जगह कम है। इसलिए कार को खड़ी करने में परेशानी हो सकती है। आदेगांव किले (Adegaon Fort) में पहुंचने के लिए करीब 100 सीढ़ियां है। 100 सीढ़ियां चढ़कर आप किले के ऊपरी भाग में पहुंच जाते हैं। किले के ऊपरी भाग में पहुंचकर आपको किले का सामने का भाग देखने के लिए मिलता है, जो खंडहर में तब्दील हो गया है, मगर बहुत सुंदर लगता है।
समय के साथ यह अवशेष धीरे-धीरे नष्ट होते जा रहे हैं, मगर यह किले का सबसे सुंदर स्थान है। यहां से आप किले के चारों तरफ का दृश्य देख सकते हैं। यहां से किले से दूर-दूर तक के गांव का दृश्य देखने के लिए मिलता है। दूर-दूर तक पहले खेत और गांव देखे जा सकते हैं। यहां पर शाम के समय सूर्यास्त का बहुत ही सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है।
किले के बाहर के दृश्य को देखने के बाद, किले के अंदर प्रवेश कर सकते हैं। किले का प्रवेश द्वार बहुत ही भव्य है और प्रवेश द्वार के दोनों तरफ आले बने हुए हैं, जहां पर हनुमान जी विराजमान है। आदेगांव किले (Adegaon Fort) के भीतर काल भैरव जी का मंदिर बना हुआ है, जो प्राचीन है। इस मंदिर में काल भैरव जी की प्राचीन प्रतिमा के दर्शन करने के लिए मिलते हैं।
काल भैरव जी के मंदिर को छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। भैरव अष्टमी के समय यहां पर बहुत ज्यादा भीड़ लगती है। बहुत सारे लोग यहां पर काल भैरव जी के दर्शन करने के लिए आते हैं। इस मंदिर को लेकर ढेर सारी मान्यताएं हैं। यहां पर आकर अच्छा लगता है।
मंदिर के मुख्य गर्भगृह में काल भैरव, नाग भैरव और बटुक भैरव की प्रतिमाएं विराजमान है, जिनकी आप दर्शन कर सकते हैं। मंदिर के बाहर शंकर भगवान जी का मंदिर बना हुआ है। यहां पर भैरव अष्टमी के समय मेले का आयोजन किया जाता है। यह मेला करीब 15 दिन तक लगता है।
काल भैरव मंदिर घूमने के बाद, आप किले में घूम सकते हैं। वैसे अब यहां पर देखने के लिए किले के अवशेष रह गए हैं। यहां पर भैरव मंदिर के बाहर एक बड़ा सा मैदान देखने के लिए मिलते हैं, जहां पर आपको किले के अवशेष देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर किले के चारों तरफ दीवार बनी हुई है, जिसके चारों कोने पर बुर्ज बने हुए हैं।
इन बुर्ज में जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। आप सीढ़ियां के माध्यम से बुर्ज में जा सकते हैं और इन बुर्ज की संरचना को देख सकते हैं, जो बहुत सुंदर है। किले के पीछे के साइड सीढ़ियां बनी हुई है, जिससे आप किले के पीछे जा सकते हैं और निचले हिस्से में जाकर आप घूम सकते हैं। किले के पीछे निचले हिस्से में हनुमान जी का मंदिर और एक झील बनी हुई है, जहां जिसे आप जाकर देख सकते हैं।
किले में घूमने के बाद, आप बाहर आ सकते हैं और किले के बाहर देख सकते हैं। किले के बाहर की तरफ आपको खाली मैदान देखने के लिए मिलता है, जहां पर एक मजार बनी हुई है। यह मजार भी प्राचीन है। किले के आसपास और भी घूमने के लिए स्थल है, जहां पर आप घूम सकते हैं और इन जगह की अपनी विशेष मान्यताएं हैं।
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आदेगांव किले के पास देखने के लिए अन्य स्थल
हनुमान मंदिर
आदेगांव किले (Adegaon Fort) के पीछे की तरफ हनुमान मंदिर बना हुआ है, जो एक प्रसिद्ध मंदिर है। आप इस किले में घूमने के लिए आते हैं, तो हनुमान मंदिर में भी जाकर दर्शन कर सकते हैं। मंदिर का परिसर बहुत अच्छा और शांत है। यहां पर ढेर सारे पेड़ पौधे लगे हुए हैं। हनुमान मंदिर के सामने आपको विशाल झील देखने के लिए मिलती है, जो बहुत सुंदर लगती है।
दुर्लभ श्यामलता वृक्ष
आदेगांव किले (Adegaon Fort) के पीछे की तरफ एक दुर्लभ वृक्ष लगा हुआ है, जिसे श्यामलता का वृक्ष कहा जाता है। इस वृक्ष के पत्ते कुछ अनोखे प्रकार के हैं। इस वृक्ष के पत्तों की विशेषता यह है, कि इस वृक्ष के पत्तों में श्री राधा कृष्ण का नाम लिखा दिखाई देता है। यह वृक्ष कब और किसने लगाया इसके बारे में कोई भी जानकारी नहीं है। यह वृक्ष इकलौता यहीं पर है। इस वृक्ष को आप देख सकते हैं, जो बहुत ही पवित्र माना जाता है।

आदेगांव किले का इतिहास (Adegaon Fort History )
आदेगांव किले (Adegaon Fort) का आकार आयताकार है। यह पूर्व मुखी है। आदेगांव किले को गढ़ी के रूप में भी जाना जाता है। इस गढ़ी का निर्माण की नींव नागपुर के मराठा शासक रघुजी भोसले के शासनकाल में 18वीं सदी ईस्वी में उनके गुरु श्री नर्मदा भारती ने डाली थी।
इन्हें भोंसले राज्य शासन ने 84 गांव की जागीर दी थी। उन्हीं के द्वारा गढ़ी के भीतर काल भैरव मंदिर का निर्माण हुआ। श्री नर्मदा भारती से यह किला गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत श्री भैरव भारती, श्री धोकल भारती एवं श्री दौलत भारती से ब्रिटिश शासन ने अपने अधिपत्य में ले लिया।
वर्तमान समय में इस किले की ऊंची चार दीवारें एवं बुर्ज ही शेष है। आंतरिक महल ध्वस्त हो गया है। किले के भीतर काल भैरव का मंदिर ईंटों से निर्मित किया गया है। इस मंदिर का मुख़ पूर्व की ओर है। इस मंदिर में काल भैरव, बटुक भैरव और नाग भैरव की सुंदर प्रतिमाएं विराजमान है।
आदेगांव किले की स्थापत्य कला
आदेगांव किला (Adegaon Fort) प्राचीन भारतीय स्थापत्य शैली का उदाहरण है। आदेगांव का किला चारों तरफ से परकोटे से घिरा हुआ है। इस किले के कोनों पर बुर्ज बने हुए हैं। यह किला ऊंचे पहाड़ी पर बना हुआ है। आदेगांव किले का निर्माण पत्थर, चूने और गारे से किया गया है।
स्थापत्य विशेषताएं
- मोटी पत्थर की दीवारें
- भव्य प्रवेश द्वार
- प्राकृतिक ऊँचाई पर स्थित संरचना
किले की बनावट से यह स्पष्ट होता है कि इसे सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया था।
आदेगांव किले की वर्तमान स्थिति
आज आदेगांव किला (Adegaon Fort) ऐतिहासिक अवशेष के रूप में मौजूद है। इस किले का अधिकांश भाग नष्ट हो चुका है। किले की दीवार और बुर्ज देखने के लिए मिलते हैं। किले के अंदर मंदिर देखा जा सकता है, जो अभी अच्छी अवस्था में है और पूजनीय है। इसके बावजूद यह स्थल इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण बना हुआ है।
वर्तमान स्थिति
- कुछ हिस्से खंडहर में तब्दील
- दीवारों और संरचना के अवशेष अभी भी मौजूद
- संरक्षण की आवश्यकता
आदेगांव किले के आसपास घूमने की जगहें
- पेंच नेशनल पार्क
- मठ घोघरा वॉटरफॉल
- भीमगढ़ जलाशय
- श्री गुरुरत्नेश्वर मंदिर (गुरुधाम)
- माँ वैष्णवी देवी धाम सीलादेही
आदेगांव किला कैसे पहुंचें (How to reach Adegaon Fort)
सड़क मार्ग : लखनादौन सड़क मार्ग से सिवनी, छिंदवाड़ा और नागपुर से जुड़ा हुआ है। लखनादौन से आदेगांव किला स्थानीय मार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है। यहां पर आने के लिए अच्छी सड़क बनी हुई है। यहां पर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट से या अपने निजी वाहन से आ सकते हैं।
रेल मार्ग : आदेगांव किला का निकटतम रेलवे स्टेशन लखनादौन रेलवे स्टेशन है। आप लखनादौन रेलवे स्टेशन से आ सकते हैं और उसके बाद इस किले में सड़क मार्ग के द्वारा पहुंच सकते हैं।
हवाई मार्ग : आदेगांव किला का निकटतम हवाई अड्डा नागपुर एयरपोर्ट है। आप नागपुर हवाई मार्ग से आ सकते हैं और उसके बाद इस किले में सड़क के द्वारा पहुंच सकते हैं।
आदेगांव किला लखनादौन का गूगल मैप लोकेशन
आदेगांव किला में घूमने का सबसे अच्छा समय (Best time to visit Adegaon Fort)
आदेगांव किले में घूमने को सबसे अच्छा समय ठंड का रहता है। आप यहां से यहां पर अक्टूबर से मार्च महीने के बीच में आ सकते हैं। अक्टूबर से मार्च का महीना ठंड का रहता है। इस समय मौसम सुहावना रहता है। इस समय आप यहां पर आकर घूम सकते हैं और अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आप बरसात के समय भी आ सकते हैं। बरसात के समय भी यह जगह बहुत सुंदर लगती है।
पर्यटकों के लिए सुझाव
- मजबूत जूते पहनें
- स्थानीय गाइड की सहायता लें
- किले की संरचना को नुकसान न पहुँचाएं
- साफ-सफाई बनाए रखें
- बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें
निष्कर्ष
आदेगांव किला लखनादौन (Aadegaon Fort Lakhnadon) मध्य प्रदेश के इतिहास, वीरता और सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। भले ही आज यह किला खंडहर के रूप में मौजूद हो, लेकिन इसकी दीवारें आज भी अतीत की गौरवगाथा सुनाती हैं।
यदि आप इतिहास, संस्कृति और शांत पर्यटन स्थलों में रुचि रखते हैं, तो आदेगांव किला आपकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए। यह स्थान न केवल इतिहास से जोड़ता है, बल्कि क्षेत्र की आत्मा को भी महसूस कराता है।
