बांदकपुर श्री जागेश्वर महादेव मंदिर की यात्रा : Beautiful Bandakpur Mandir Damoh

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बांदकपुर मंदिर: शिव भक्ति और आस्था का पावन धाम

बांदकपुर मंदिर (Bandakpur Mandir), जिसे श्री जागेश्वर नाथ शिव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह हम मंदिर दमोह जिले के बांदकपुर गांव में बना हुआ है। इस गांव के कारण इस मंदिर को बांदकपुर धाम के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर बघेलखंड का सबसे महत्वपूर्ण पूजनीय और पवित्र तीर्थस्थान में से एक है।

बांदकपुर धाम दमोह जिले में स्थित शिव भक्तों के लिए बेहद आस्था का केंद्र है। बांदकपुर मंदिर (Bandakpur Mandir) न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसकी प्राचीनता, स्थापत्य कला और प्राकृतिक परिवेश इसे और भी खास बनाते हैं। हर साल हजारों श्रद्धालु यहाँ जलाभिषेक करने और भगवान शिव के दर्शन हेतु पहुँचते हैं।

जागेश्वर धाम बांदकपुर (Jageshwar Dham Bandakpur)

जागेश्वर धाम बांदकपुर पूरे मध्य प्रदेश में विख्यात है। इस मंदिर की चमत्कारी घटनाओं के बारे में लोगों को जानकारी है और लोग इस मंदिर के चमत्कारों को देखने के लिए मंदिर में आते हैं। यह मंदिर प्राचीन है और बहुत सुंदर है। मंदिर परिसर बहुत अच्छी तरह से बना हुआ है। मंदिर परिसर में ऐतिहासिक बावली देखने के लिए मिलती है, जिसका अपना महत्व है। इस बावली में अनेक चमत्कार हुए हैं, जो लोगों के द्वारा सुनाए जाते हैं।

मंदिर परिसर में मुख्य गर्भगृह में शिवलिंग विराजमान है। यह शिवलिंग स्वयंभू है और इस शिवलिंग के बारे में ढेर सारी बातें कही जाती है। मंदिर में आकर बहुत अच्छा लगता है। शिव मंदिर के ठीक सामने देवी पार्वती का मंदिर बना हुआ है। देवी पार्वती और शिव मंदिर को लेकर बहुत सारी कहानी है। शिव और पार्वती के मिलन को लेकर यह जगह प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में और भी ढेर सारे देवी देवता विराजमान है, जिनके दर्शन आप यहां पर आकर कर सकते हैं।

बांदकपुर धाम की यात्रा (Bandakpur Temple Yatra)

बांदकपुर मंदिर की यात्रा करना बहुत ही आसान है। बांदकपुर मंदिर (Bandakpur Mandir) की यात्रा करने के लिए आप अपनी पर्सनल गाड़ी से यहां पर आ सकते हैं या फिर रेलगाड़ी से यहां पर पहुंच सकते हैं। बांदकपुर गांव के पास में ही बांदकपुर रेलवे स्टेशन बना हुआ है, जिससे आप यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। बांदकपुर रेलवे स्टेशन बांदकपुर मंदिर से करीब ढाई किलोमीटर दूर है। आप पहले बांदकपुर रेलवे स्टेशन में आ सकते हैं। उसके बाद ऑटो के द्वारा या पैदल चलकर मंदिर पहुंच सकते हैं।

बांदकपुर मंदिर दमोह जिले से करीब 17 किलोमीटर दूर है। यह मंदिर दमोह कटनी हाईवे रोड के पास में बना हुआ है। बांदकपुर मंदिर हाईवे रोड से करीब ढाई किलोमीटर दूर है। बांदकपुर मंदिर (Bandakpur Mandir) में जाने के लिए सड़क मार्ग उपलब्ध है, जिससे आप आसानी से मंदिर तक जा सकते हैं। मंदिर के पास में ही पार्किंग के लिए बहुत बड़ा एरिया है।
यहां पर महाशिवरात्रि और सावन सोमवार के समय बहुत अधिक संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आते हैं। इसलिए यहां पर बहुत बड़ा एरिया है, जो पार्किंग के लिए रिजर्व है। इस समय यहां पर आप अपना वाहन खड़े कर सकते हैं और मंदिर तक पैदल जा सकते हैं।

पार्किंग एरिया से मंदिर तक जाने के लिए बहुत कम दूरी रहती है और आप पैदल इस दूरी को तय कर सकते हैं। यहां पर महाशिवरात्रि और सावन के समय ढेर सारी दुकानें लगी रहती हैं। यहां पर तरह-तरह की दुकान लगी रहती है, जिसमें ढेर सारा सामान मिलता रहता है। इसके अलावा यहां पर झूले और मनोरंजन के अन्य साधन भी होते है।

यहां पर खाने की ढेर सारी चीज मिलती हैं। यहां पर आप महाशिवरात्रि और सावन सोमवार के अलावा अन्य समय में आते हैं, तो यहां पर भीड़ नहीं रहती है। यहां पर आप जाकर डायरेक्ट मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। मंदिर के बाहर ढेर सारी प्रसाद की दुकान लगी रहती हैं, जहां से आप प्रसाद ले सकते हैं और प्रसाद के दुकान के पास में ही आप चप्पल उतार सकते हैं, जिससे आपके चप्पल चोरी ना हो जाए।

महाशिवरात्रि और सावन के समय भगवान शिव के दर्शन के लिए, यहां पर बहुत लंबी लाइन लगती है, जिससे दर्शन करने में 2 से 3 घंटे आराम से लग जाते हैं। 2 से 3 घंटे में आप भगवान शिव के दर्शन कर सकते हैं और मंदिर परिसर में घूम सकते हैं। बांदकपुर का मुख्य मंदिर बहुत ही आकर्षक है। इसका शिखर बहुत ही मनमोहक लगता है। मंदिर बाहर से देखने में बहुत ही सुंदर दिखता है। मंदिर अंदर से भी बहुत सुंदर है। यह मंदिर पूरा सफेद रंग का है और मंदिर के ऊपर के शिखर का हिस्सा गोलाकार है और ऊपर कलश विराजमान है।

बांदकपुर मंदिर (Bandakpur Mandir) के मुख्य गर्भगृह में शिवलिंग के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां शिवलिंग बहुत ही सुंदर है और आकर्षक है। इस शिवलिंग के बारे में कहा जाता है, कि यह शिवलिंग हर साल बढ़ता जाता है। इसका आकार हर साल बढ़ रहा है। शिवलिंग की जलहरी चांदी की बनी हुई है। शिवलिंग के ठीक सामने माता पार्वती का मंदिर बना हुआ है। माता पार्वती जी की मूर्ति बहुत ही भव्य है। मंदिर परिसर के बाहर आकर आपको और भी मंदिर देखने के लिए मिलते हैं और जिनमें प्राचीन मूर्तियां विराजमान है।

मंदिर परिसर में एक बावली भी देखने के लिए मिलती है, जो प्राचीन समय में बनाई गई है। इस बावली के बारे मेंअलग-अलग कहानी प्रसिद्ध है। यह बावली बहुत सुंदर है। इस तरह आप पूरे मंदिर में घूम सकते हैं और अच्छा अनुभव कर सकते हैं। यहां पर आप कुछ शांति से समय बिता सकते हैं। मंदिर के परिसर में आप शांति से बैठ सकते हैं।

बांदकपुर मंदिर शिवलिंग (Bandakpur Mandir Shivling)

बांदकपुर मंदिर का मुख्य आकर्षण भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग बहुत ही अद्भुत है। यह शिवलिंग स्वयंभू है। स्वयंभू का अर्थ है – धरती से स्वयं उत्पन्न हुआ। इस शिवलिंग को किसी ने भी स्थापित नहीं किया है।
यह शिवलिंग काले पत्थर से बना है और बहुत ही आकर्षक और बहुत बड़ा है। शिवलिंग के चारों तरफ जलहरी देखी जा सकती है। इस जलहरी में चांदी की परत चढ़ाई गई है, जिससे यह और भी सुंदर लगती है।

इस शिवलिंग के बारे में कहा जाता है, कि यह शिवलिंग हर साल अपने आकार से बढ़ता है। इस चमत्कार को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते है। यह शिवलिंग को देखने से लोगों की इच्छाएं पूरी होती है और भी बहुत सारे चमत्कार और मान्यताएं हैं, जो शिवलिंग से जुड़ी हुई है।

बांदकपुर मंदिर का इतिहास (Bandakpur Temple History)

बांदकपुर मंदिर का इतिहास बहुत ही रोचक रहा है। बांदकपुर मंदिर (Bandakpur Mandir) में स्थापित शिवलिंग के बारे में कहा जाता है, कि इस शिवलिंग की स्थापना त्रेता युग में हुई थी। यह शिवलिंग त्रेता युग में स्वयं भूमि से उत्पन्न हुआ था। स्थानीय मान्यता है कि बांदकपुर का शिवलिंग किसी ने स्थापित नहीं किया, बल्कि यह स्वयं प्रकट हुआ।
कहानी है कि प्राचीन समय में एक तपस्वी साधु यहाँ कठोर तप कर रहे थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वयं शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए। तभी से यह स्थान जागेश्वर महादेव धाम कहलाने लगा।

वर्तमान मंदिर का निर्माण 1711 ईस्वी में करवाया गया था, जो मंदिर की प्राचीनता को दिखाता है। मंदिर की वास्तुकला बहुत ही सुंदर है। यह मंदिर मध्यकालीन स्थापत्य शैली का अनूठा उदाहरण है। यहाँ की मूर्तियों और मंदिर के शिलालेखों से पता चलता है कि यह क्षेत्र उस समय धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था।

बांदकपुर मंदिर की वास्तुकला (Bandakpur Temple Architecture)

  • मंदिर का मुख्य गर्भगृह – यहाँ एक विशाल शिवलिंग स्थापित है, जिसे जलेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।
  • शिवलिंग की विशेषता – यह काले पत्थर से निर्मित है और मान्यता है कि यह स्वयंभू है।
  • मंदिर परिसर – इसमें कई छोटे-छोटे मंदिर भी बने हुए हैं, जिनमें माता पार्वती, हनुमान जी, नंदी महाराज और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं।
  • शिल्पकला – दीवारों पर की गई नक्काशी और मूर्तियाँ मध्यकालीन कला की झलक प्रस्तुत करती हैं।
  • नदी तट पर स्थिति – यह मंदिर शहजाद नदी के किनारे स्थित है, जो इसे और भी पवित्र बनाता है।

बांदकपुर मंदिर के धार्मिक मान्यता और प्राचीन कहानियां (Bandakpur temple Significance and Beliefs )

इस मंदिर को लेकर लोगों की मान्यताएं, हैं कि इस मंदिर में आकर आप भगवान शिव के दर्शन करके, जो भी मनोकामना मांगते हैं। वह जरूर पूरी होती है। लोग यहां पर दूर-दूर से भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आते हैं और अपनी मनोकामना मांगते हैं। यहां पर लोग धागे बांध के जाते हैं, और लोगों की मन्नत पूरी हो जाने पर, वह दोबारा जाकर धागे खोलते हैं।

तेरहवाँ ज्योतिर्लिंग – भगवान जागेश्वर धाम महाराज को 13वां ज्योतिर्लिंग माना जाता है। भारत में 12 ज्योतिर्लिंग प्रसिद्ध है, मगर भगवान जागेश्वर बाबा को तेरहवाँ ज्योतिर्लिंग माना जाता है।

इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि चार धामों के दर्शन, बाबा जागेश्वर धाम के बिना अधूरे माने जाते हैं। जो भी श्रद्धालु चार धाम की तीर्थ यात्रा करते हैं। उन्हें बाबा जागेश्वर धाम के दर्शन जरूर करने चाहिए, तभी उनकी चार धाम की तीर्थ यात्रा को पूरा माना जाता है।

बांदकपुर धाम का धार्मिक महत्व (Religious importance of Bandakpur Dham)

  • यह मंदिर शिवभक्तों के लिए आस्था का केंद्र है।
  • बांदकपुर धाम को शिवभक्त अत्यंत पवित्र मानते हैं। यहाँ आने वाले श्रद्धालु जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करके अपने जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।
  • सावन और महाशिवरात्रि – सावन मास में यहाँ लाखों की संख्या में भक्त जल चढ़ाने आते हैं। महाशिवरात्रि पर यहाँ भव्य मेला लगता है और आसपास के जिलों से लोग शामिल होते हैं।
  • धार्मिक मान्यता – स्थानीय मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

बांदकपुर धाम के त्योहार और मेला

  • महाशिवरात्रि का मेला
    महाशिवरात्रि का मेला बांदकपुर के प्रसिद्ध मेले में से एक है। यह मेला बहुत ही भव्य तरीके से लगता है। इस मेले में बहुत दूर-दूर से लोग घूमने के लिए आते हैं। इस मेले में तरह-तरह की दुकान और मनोरंजन के लिए ढेर सारी चीज रहती हैं, जिनका लोग यहां पर आकर आनंद उठाते हैं।
  • सावन सोमवार का मेला
    सावन सोमवार भी बांदकपुर में एक उत्सव की तरह मनाया जाता है। यहां पर सावन सोमवार के समय बहुत सारी दुकानें लगाई जाती हैं और बहुत सारे श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आते हैं।

बांदकपुर मंदिर की यात्रा गाइड (Travel guide to Bandakpur temple)

बांदकपुर कहां है (Where is Bandakpur)

  • स्थान: दमोह जिला, मध्य प्रदेश

बांदकपुर दमोह जिले से 15 किलोमीटर दूर दमोह कटनी हाईवे रोड के पास में स्थित है। यह हाईवे रोड से 2 किमी अंदर बांदकपुर मंदिर स्थित है।

बांदकपुर शिव मंदिर की गूगल मैप लोकेशन

बांदकपुर की अन्य सिटी से दूरी (Distance from other cities of Bandakpur)

  • दमोह से बांदकपुर की दूरी (Damoh to Bandakpur Distance) – लगभग 25 किमी
  • जबलपुर से बांदकपुर की दूरी (Jabalpur to Bandakpur Distance) – लगभग 105 किमी
  • सागर से बांदकपुर की दूरी (Sagar to Bandakpur Distance) – लगभग 90 किमी
  • भोपाल से बांदकपुर की दूरी  (Bhopal to Bandakpur Distance) – लगभग 270 किमी
  • बांदकपुर से कुंडलपुर की दूरी (Bandakpur to Kundalpur distance) – लगभग 30 किमी

बांदकपुर कैसे पहुँचें (How to reach Bandakpur)

सड़क मार्ग

बांदकपुर सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। बांदकपुर में आप मुख्य शहरों जैसे जबलपुर, कटनी, सागर से आराम से पहुंच सकते हैं। इन सभी सिटी से हाईवे रोड डायरेक्ट बांदकपुर के लिए आती है। दमोह से बस और टैक्सी आसानी से बांदकपुर आने के लिए उपलब्ध हैं।

रेल मार्ग

दमोह के बांदकपुर गांव के पास बांदकपुर रेलवे स्टेशन बना हुआ है। यह रेलवे स्टेशन बांदकपुर शिव मंदिर से करीब 2 किलोमीटर दूर है। आप रेल के द्वारा बांदकपुर रेलवे स्टेशन में आ सकते हैं और उसके बाद बांदकपुर पैदल या ऑटो के द्वारा जा सकते हैं।

वायु मार्ग

बांदकपुर का नजदीकी हवाई अड्डा जबलपुर में बना हुआ है। अगर आपका हवाई मार्ग से दमोह आने का प्लान है, तो आप जबलपुर आ सकते हैं और उसके बाद दमोह जा सकते हैं।

बांदकपुर में घूमने का सबसे अच्छा समय (Best time to visit Bandakpur)

बांदकपुर में घूमने का सबसे अच्छा समय शिवरात्रि का रहता है। शिवरात्रि के समय आकर आप भगवान शिव के दर्शन कर सकते हैं। वैसे शिवरात्रि के समय यहां पर भारी भीड़ रहती है, मगर सबसे अधिक महत्व बांदकपुर आने का शिवरात्रि के समय है। आप यहां पर सावन सोमवार के समय भी आ सकते हैं। सावन सोमवार के यहां समय भी भगवान शिव के दर्शन करने का महत्व है।

इसके अलावा आप ठंड के समय यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। आप यहां पर अक्टूबर से मार्च महीने के बीच में घूमने के लिए आ सकते हैं। जब मौसम बहुत अच्छा रहता है।

बांदकपुर पर्यटन स्थल (Bandakpur Tourist Places)

बांदकपुर भोलेनाथ मंदिर के आसपास घूमने के लिए ढेर सारी जगह है, जहां पर जाकर आप अच्छा समय बिता सकते हैं। आप बांदकपुर महादेव मंदिर (Bandakpur mahadev mandir) की यात्रा कर सकते हैं और उसके बाद आपके पास जो भी समय बचता है। आप बांदकपुर के आसपास के क्षेत्र में जो भी मंदिर और पर्यटन स्थल है। वहां की सैर कर सकते हैं। चलिए जानते हैं – बांदकपुर के आसपास घूमने के लिए क्या क्या है, जहां पर आप जा सकते हैं।

  • कुंडलपुर जैन मंदिर – कुंडलपुर जैन मंदिर बांदकपुर से करीब 30 किलोमीटर स्थित एक प्रसिद्ध जैन मंदिर है। आप यहां की भी यात्रा कर सकते हैं।
  • जटाशंकर मंदिर – जटाशंकर मंदिर दमोह का एक प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर है। यह दमोह सिटी में स्थित है। आप यहां के भी सैर कर सकते हैं।
  • राजनगर झील – राजनगर झील दमोह के पास स्थित एक प्राकृतिक स्थान है। यह एक बहुत बड़ी झील है।
  • सर्किट हाउस और दमोह व्यू प्वाइंट – सर्किट हाउस और दमोह व्यू पॉइंट एक सुंदर स्थल है। यहां से आपका दमोह शहर का सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है। यह बांदकपुर के पास शहर करने के लिए एक अच्छी जगह है।
  • नोहटा शिव मंदिर – आप जबलपुर से दमोह की यात्रा करते हुए नोहटा नाम की जगह पर पहुंचते हैं। नोहटा दमोह की तहसील है। यहां पर भगवान शिव का प्राचीन मंदिर मुख्य सड़क पर ही बना हुआ है। आप इसकी भी यात्रा कर सकते हैं।

यात्रियों के लिए सुझाव

  • मंदिर में प्रवेश से पहले स्नान अवश्य करें।
  • फूल, बेलपत्र और जल पूजा सामग्री साथ लेकर आएँ।
  • भीड़भाड़ वाले दिनों में बच्चों का विशेष ध्यान रखें।
  • फोटोग्राफी करते समय मंदिर परिसर की पवित्रता का ध्यान रखें।
  • स्थानीय गाइड की मदद लें, ताकि आपको पूरा इतिहास और महत्व समझ में आ सके।

निष्कर्ष

बांदकपुर मंदिर (Bandakpur Mandir) सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम है। यह स्थान भगवान शिव की दिव्यता, भक्तों की श्रद्धा और भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाता है। चाहे आप एक भक्त हों, इतिहास प्रेमी हों या प्रकृति प्रेमी – बांदकपुर मंदिर हर किसी के लिए खास अनुभव प्रदान करता है।

अगर आप मध्य प्रदेश घूमने की योजना बना रहे हैं, तो बांदकपुर मंदिर को अपनी यात्रा सूची में जरूर शामिल करें।

बांदकपुर मंदिर से जुड़े प्रमुख प्रश्न (FAQ)

1. बांदकपुर मंदिर कहाँ स्थित है?
बांदकपुर मंदिर मध्य प्रदेश के दमोह ज़िले में, शहजाद नदी के तट पर स्थित है।

2. बांदकपुर मंदिर को और किस नाम से जाना जाता है?
इसे जलेश्वर धाम और जलेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

3. बांदकपुर मंदिर का इतिहास क्या है?
मान्यता है कि यहाँ भगवान शिव का शिवलिंग स्वयंभू प्रकट हुआ था। बाद में बुंदेलखंड और गोंड शासकों ने इसे विकसित किया।

4. बांदकपुर मंदिर में विशेष मेले कब लगते हैं?
यहाँ महाशिवरात्रि और श्रावण मास में विशाल मेले का आयोजन होता है, जब लाखों श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक करने आते हैं।

5. बांदकपुर मंदिर कैसे पहुँचा जा सकता है?
मंदिर तक पहुँचने के लिए नज़दीकी रेलवे स्टेशन दमोह (18 किमी) और नज़दीकी एयरपोर्ट जबलपुर (120 किमी) है। सड़क मार्ग से बस और टैक्सी की सुविधा आसानी से मिलती है।

6. बांदकपुर मंदिर में दर्शन का समय क्या है?
मंदिर सुबह 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है। विशेष पर्व और उत्सव के दौरान समय बढ़ा दिया जाता है।

7. क्या बांदकपुर मंदिर में नंदी की मूर्ति है?
हाँ, मंदिर में भगवान शिव के वाहन नंदी की एक विशाल और आकर्षक प्रतिमा स्थापित है, जो भक्तों के बीच विशेष आस्था का केंद्र है।

8. बांदकपुर मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
सावन माह और महाशिवरात्रि मंदिर यात्रा के लिए सबसे शुभ माने जाते हैं। मौसम की दृष्टि से अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है।

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