झाबुआ जिले में घूमने के प्रमुख पर्यटन स्थल : Amazing Jhabua Tourist Places in Hindi

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झाबुआ जिले में घूमने की जगह – आदिवासी संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और परंपराओं की अनोखी पहचान

झाबुआ मध्य प्रदेश के दक्षिण पश्चिम भाग में स्थित एक सुंदर जिला है। झाबुआ जिला आदिवासी बहुल क्षेत्र है। यह जिला अपनी समृद्ध भील जनजातीय संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर भील जनजाति के लोगों की संख्या अधिक है।

यह जिला अपने प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ों, जंगल, नदियों और पारंपरिक जीवन शैली के लिए जाना जाता है। झाबुआ जिले में घूमने के लिए ढेर सारी स्थल (Jhabua Tourist Places in Hindi) है, जो बहुत सुंदर है। यह उन लोगों के लिए अच्छा स्थान है, जो भीड़ भर से दूर, सादगी, प्रकृति के बीच समय बिताना चाहते हैं।

अगर आपको आदिवासी जनजातियों की संस्कृति और उनके जीवन शैली को जानना चाहते हैं, तो आपको झाबुआ में जरूर यात्रा करनी चाहिए। इस लेख में हम आपको झाबुआ जिले में घूमने की प्रमुख जगहों (Jhabua Tourist Places in Hindi), उनके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और प्राकृतिक महत्व के साथ-साथ यात्रा से जुड़ी पूरी जानकारी विस्तार से देंगे।

झाबुआ जिले का इतिहास (Jhabua District History)

झाबुआ जिला मध्य प्रदेश के पश्चिमी भाग में स्थित है। झाबुआ जिला गुजरात और राजस्थान की सीमा से सटा हुआ है। यहां मुख्य रूप से भील जनजाति निवास करती है, जिनकी संस्कृति, नृत्य, संगीत, त्यौहार, झाबुआ जिले की विशेष पहचान देता है। प्राचीन समय में झाबुआ क्षेत्र मालवांचल का हिस्सा माना जाता था।

इस क्षेत्र में हजारों सालों से भील जनजाति निवास कर रही है। भील समुदाय ने इस क्षेत्र में अपने स्वतंत्रत पहचान, परंपरा और शासन विकसित किया है। ऐतिहासिक प्रमाण बताते हैं, कि यह क्षेत्र मौर्य, गुप्त और परमार वंश के प्रभाव में रहा है। मध्यकाल में झाबुआ क्षेत्र पर परमार शासको के बाद, मुगल साम्राज्य का प्रभाव देखने मिला है।

मुगल काल में यह इलाका जागीरदारों और स्थानीय शासको के अधीन रहा है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां आदिवासी समाज ने मध्यकाल में स्वतंत्र रूप से निवास किया है। ब्रिटिश काल के दौरान झाबुआ एक रियासत का दर्जा प्राप्त हुआ। झाबुआ रियासत का शासन स्थानीय राजाओं के हाथ में था, लेकिन वे ब्रिटिश सरकार के अधीन कार्य करते थे।

इस समय भील समुदाय ने कई बार अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया। भील आंदोलन और जनजातीय संघर्ष झाबुआ के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में झाबुआ जिले के आदिवासियों की सक्रिय भूमिका थी। झाबुआ के आदिवासी स्वतंत्रता आंदोलन में अपने साहस और बलिदान के लिए जाने जाते हैं।

स्वतंत्रता के बाद झाबुआ को मध्य प्रदेश का एक जिले के रूप में स्थापित किया गया। यह जिला आदिवासी बहुल क्षेत्र है। यहाँ की संस्कृति, नृत्य, संगीत और त्योहार प्रसिद्ध हैं। इस जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रेल मार्ग का कार्य निरंतर प्रगति कर रहा है। यह जिला आज अपने आदिवासी विरासत को सहेजते हुए आधुनिक विकास की ओर अग्रसर है।

झाबुआ जिले में घूमने की प्रमुख जगहें (Jhabua Tourist Places in Hindi)

देवझिरी शिव मंदिर झाबुआ (Devjiri Shiva Temple Jhabua)

देवझिरी शिव मंदिर झाबुआ के पास घूमने के लिए एक प्रसिद्ध स्थान है। यह मंदिर इंदौर अहमदाबाद नेशनल हाईवे के पास देवझिरी गांव में बना हुआ है। यह मंदिर श्री संकट मोचन महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां विरल गुप्त नर्मदा जलधारा बहती रहती है। मंदिर के चारों तरफ प्राकृतिक वातावरण देखा जा सकता है।

यह मंदिर झाबुआ और आसपास के क्षेत्र में बहुत प्रसिद्ध है। इस मंदिर में प्राकृतिक जलधारा देखने के लिए मिलती है, जिसका पानी शिव भगवान जी के ऊपर गिरता है। यह पानी साल भर इसी तरह से शिव भगवान जी के ऊपर गिरता है और शिव भगवान जी का अभिषेक करता है।

यह जगह बहुत सुंदर है और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। आप यहां पर आकर अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं। इस जगह के बारे में ढेर सारी मान्यताएं हैं। लोग कहते हैं, कि यहां पर, जो जलधारा शिवजी के ऊपर गिरती है। वह नर्मदा जल है और यह शिव जी का जल अभिषेक होता है। अगर आप झाबुआ की यात्रा कर रहे हैं, तो आपको यहां पर जरूर आना चाहिए।

देवझिरी शिव मंदिर की खासियत :

  • मंदिर के आस-पास प्राकृतिक वातावरण और ढेर सारे पेड़ पौधे
  • महाशिवरात्रि और सावन सोमवार के समय भक्तों की भीड़
  • यहां पर जल कुंड बना है जहां पर स्नान कर सकते हैं
  • भगवान शिव का प्राचीन धाम

हाथीपावा झाबुआ (Hathipawa Jhabua)

हाथीपावा झाबुआ के पास एक इको टूरिज्म साइट है। यहां पर पहाड़ों का सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है। इसे झाबुआ का कश्मीर कहा जाता है, क्योंकि यहां चारों तरफ हरियाली, पेड़ पौधे और पहाड़ियों देखने के लिए मिलती है। यह जगह झाबुआ से करीब 4 किलोमीटर दूर है। यहां पर आप अपने वाहन से आसानी से पहुंच सकते हैं।

यहां पर आकर आप पिकनिक मना सकते हैं। यह जगह झाबुआ वन मंडल क्षेत्र में आती है। यहां पर सूर्यास्त और सूर्योदय का बहुत ही शानदार नजारा देखने के लिए मिलता है। यहां पर व्यू प्वाइंट बना हुआ है, जहां से आप आसपास के क्षेत्र को देख सकते हैं। बच्चों के लिए पार्क बना हुआ है, जहां बच्चे एंजॉय कर सकते हैं। यहां ध्यान स्थल बना है, जहां पर आप मेडिटेशन कर सकते हैं। यह फैमिली और दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने के लिए बढ़िया जगह है।

हनुमान टेकरी मंदिर झाबुआ (Hanuman Tekri Temple Jhabua)

हनुमान टेकरी मंदिर झाबुआ का प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है। यह मंदिर झाबुआ शहर के पास ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। मंदिर में आप आसानी से जा सकते हैं। मंदिर में जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में हनुमान जी की सुन्दर प्रतिमा स्थापित है।

मंदिर से आसपास का सुंदर दृश्य देखने लायक है। मंदिर के नीचे की तरफ तलहटी में तालाब बना हुआ है, जिसे बड़ा तालाब के नाम से जाना जाता है। आप यहां पर आकर अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं। यह मंदिर हाथी पावा जाने वाली मार्ग पर बना हुआ है।

भाबरा (Bhabra)

भाबरा झाबुआ जिले के पास एक ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। भाबरा कस्बे को अब चंद्रशेखर आजाद नगर के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहां पर चंद्रशेखर आजाद जी का जन्म हुआ था। चंद्रशेखर आजाद जी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। चंद्रशेखर आजाद जी के जन्म स्थल को एक संग्रहालय में बदल दिया गया है।

यहां पर आप आकर इस जगह को देख सकते हैं, जहां पर अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद जी का जन्म हुआ था। इस जगह को आजाद स्मृति मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस जगह पर चंद्रशेखर आजाद जी के बारे में डिटेल इनफॉरमेशन मिलती है। यहां पर उनके तस्वीरों के साथ जानकारी दी गई है और इस खूबसूरती से बनाया गया है।

भूतेश्वर महादेव मंदिर झाबुआ (Bhuteshwar Mahadev Temple)

भूतेश्वर महादेव मंदिर झाबुआ के पास पेटलावद में घूमने के लिए एक ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का स्थान है। यह मंदिर पेटलावद तहसील में चंपावती नदी के किनारे बना हुआ है। मंदिर में कार और बाइक से सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं। यह मंदिर प्राचीन है। पूरा मंदिर पत्थरों से बना हुआ है।

इस मंदिर को फूटा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर की दीवारों में सुंदर नक्काशी देखने के लिए मिलती है। मंदिर में सुंदर स्तंभ बने हुए हैं, जिनमें खूबसूरत नक्काशी की गई है। यह मंदिर परमार कालीन है और 13वीं शताब्दी में बनाया गया है।

मंदिर के मुख्य गर्भगृह में शिवलिंग के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। मंदिर में महाशिवरात्रि और सावन सोमवार के समय बहुत सारे भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं। यह मंदिर पंचरथ शैली में बना है। यहां पर मंडप, अर्ध मंडप, गर्भगृह, अंतराल बना हुआ है। यहां पर आकर आप अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं।

माही बांध झाबुआ (Mahi Dam Jhabua)

माही बांध झाबुआ जिले के पास घूमने के लिए एक बढ़िया जगह है। माही बांध माही नदी पर बना हुआ है। यहां पर आप सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं। यहां पर आप बरसात के समय आएंगे, तो आपको ज्यादा अच्छा लगेगा, क्योंकि बरसात के समय डैम पूरी तरह पानी से भर जाता है और डैम के चारों तरफ हरियाली देखने के लिए मिलती है। यह बांध चारों तरफ से पहाड़ियों और जंगल से घिरा हुआ है। यहां पर आकर आप अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं। यह परिवार और दोस्तों के साथ एक दिन की यात्रा के लिए बढ़िया जगह है।

पिपल खूंटा हनुमान मंदिर झाबुआ (Pipal Khunta Hanuman Temple Jhabua)

पिपल खूंटा हनुमान मंदिर मंदिर झाबुआ जिले के पास मेघनगर में स्थित एक सुंदर धार्मिक और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर स्थल है। यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है। यह मंदिर बहुत सुंदर है। मंदिर के पीछे की तरफ अनस नदी बहती है, जिसका दृश्य भी बहुत शानदार रहता है। इस मंदिर में आप सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं।

यहां पर हनुमान जी का मंदिर बहुत ही अच्छी तरीके से बनाया गया है। यह मंदिर प्राचीन है। यहां पर आश्रम भी बना हुआ है, जहां पर संत महात्मा रहते हैं। इस मंदिर के मुख्य गर्भगृह में हनुमान प्रतिमा के दर्शन होते हैं। यहां पर आकर अच्छा लगता है। अगर आप झाबुआ के पास शांतिपूर्वक समय बिताना चाहिए, तो यह एक बढ़िया जगह है। मंदिर के पीछे की तरफ अनस नदी में घाट बना हुआ है, जहां पर जाकर आप स्नान कर सकते हैं। यहां का दृश्य भी बहुत सुंदर लगता है।

भगोरिया हाट मध्य प्रदेश

भगोरिया पर्व आदिवासी लोगों के लिए खास पर्व है। भगोरिया पर्व मध्य प्रदेश के झाबुआ, अलीराजपुर, धार और रतलाम जिले में मनाया जाना वाला एक आदिवासी लोक पर्व है। यह पर्व होली से कुछ दिनों पहले आयोजित किया जाता है, जिसमें भील और अन्य जनजाति के लोग भाग लेते हैं। यह उनकी सांस्कृतिक पहचान है।

भगोरिया हाट का उद्देश्य सामाजिक मेल मिलाप, परंपराओं को निभाने और आनंद मानना है। यहां पर आसपास के गांव वाले पारंपरिक वेशभूषा पहनकर मेले में आते है। मेले में ढोल नगाड़े बजाए जाते हैं। लोकगीत गाए जाते हैं और पारंपरिक नृत्य किए जाते हैं।

भगोरिया हाट आदिवासी समाज में प्रेम और विवाह को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है। यहां पर एक बहुत ही खास रीति रिवाज निभाया जाता है, जो विवाह से जुड़ा होता है। यहां पर मेले में आई हुई जवान युवक, जवान युवती को गुलाल लगता है और युवती भी उस युवक को गुलाल लगाती है, तो यहां पर रिश्ता पक्का माना जाता है और उनका विवाह कराया जाता है।

यह यहां के खास परंपरा है। इसी से यहां पर लोगों के रिश्ते तय किए जाते हैं। इसके अलावा भगोरिया हाट में आप ढेर सारे हस्त निर्मित कलाकृतियां ले सकते हैं और साथ ही आप यहां पर आदिवासी परंपरा को भी देख सकते हैं।

झाबुआ का लोक जीवन और त्यौहार

झाबुआ जिले के त्यौहार इसकी सांस्कृतिक आत्मा हैं। त्यौहारों के समय पूरा जिला रंग-बिरंगा और जीवंत हो उठता है।

प्रमुख त्यौहार

  • भगोरिया हाट
  • होली
  • दिवाली
  • नवरात्रि

झाबुआ में घूमने का सबसे अच्छा समय (Best time to visit Jhabua)

झाबुआ में घूमने का सबसे अच्छा समय ठंड का रहता है। आप यहां पर अक्टूबर से मार्च महीने के बीच जा सकते हैं और झाबुआ के सभी पर्यटन स्थलों की सैर कर सकते हैं। ठंड के समय मौसम सुहावना और बहुत ही बढ़िया रहता है। आप यहां पर मानसून के समय भी आ सकते हैं। मानसून के समय आप यहां के पहाड़ी क्षेत्र की सैर कर सकते हैं।

झाबुआ कैसे पहुँचें (How to reach Jhabua)

सड़क मार्ग : सड़क मार्ग से झाबुआ आसानी से आ सकते हैं। झाबुआ में नेशनल हाईवे 47 गुजरता है, जिसके द्वारा यह अन्य शहर से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। झाबुआ जिला इंदौर, धार, अलीराजपुर और रतलाम से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। झाबुआ में आप बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आसानी से आ सकते हैं।

रेल मार्ग : झाबुआ का निकटतम रेलवे स्टेशन रतलाम में बना है। रतलाम रेलवे स्टेशन अन्य शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप रतलाम में रेल मार्ग द्वारा आ सकते हैं। उसके बाद झाबुआ सड़क के द्वारा पहुंच सकते हैं।

हवाई मार्ग : झाबुआ का निकटतम हवाई अड्डा इंदौर में बना हुआ है। इंदौर में यहां वायु मार्ग से आ सकते हैं और उसके बाद झाबुआ में सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं।

झाबुआ जिला का गूगल मैप लोकेशन

झाबुआ में ठहरने की व्यवस्था

झाबुआ और थांदला में होटल, लॉज, धर्मशाला और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। बजट यात्रियों के लिए पर्याप्त विकल्प मिल जाते हैं।

स्थानीय भोजन और स्वाद

झाबुआ का भोजन सरल, पौष्टिक और पारंपरिक होता है।

प्रमुख व्यंजन

  • मक्का की रोटी
  • दाल
  • स्थानीय सब्जियाँ
  • महुआ से बने व्यंजन

क्यों जाएँ झाबुआ जिला?

  • समृद्ध आदिवासी संस्कृति
  • भगोरिया हाट जैसा अनोखा पर्व
  • प्राकृतिक शांति और हरियाली
  • भीड़-भाड़ से दूर सुकून भरा वातावरण
  • वास्तविक ग्रामीण भारत का अनुभव

निष्कर्ष

झाबुआ जिला मध्य प्रदेश का एक ऐसा पर्यटन स्थल है जहाँ संस्कृति, परंपरा और प्रकृति का अनोखा मेल देखने को मिलता है। यहाँ की आदिवासी जीवन शैली, लोक पर्व, जंगल और नदियाँ इसे विशेष बनाती हैं। यदि आप भारत की जड़ों से जुड़ना चाहते हैं और सादगी भरे जीवन का अनुभव करना चाहते हैं, तो झाबुआ जिला आपकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।

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