कालभैरव मंदिर उज्जैन – मदिरा अर्पण का अनोखा रहस्य और तांत्रिक आस्था का प्रमुख केंद्र
काल भैरव मंदिर के सबसे प्रसिद्ध और रहस्य में मंदिरों में से एक है। यह मंदिर उज्जैन नगरी में बना हुआ है। यह मंदिर भगवान काल भैरव को समर्पित है, जिन्हें भगवान शिव उग्र रूप माना जाता है। यह मंदिर अपनी प्रसिद्ध धार्मिक आस्था के कारण जाना जाता है। मंदिर में मदिरा चढ़ाने की परंपरा के कारण यह पूरे भारत में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है।
इस लेख में हम काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav Mandir) के बारे में जानकारी देंगे। अगर आप उज्जैन आ रहे हैं, तो आपको काल भैरव जी के दर्शन जरूर करना चाहिए।
काल भैरव मंदिर की यात्रा (Kaal Bhairav Mandir Trip)
काल भैरव मंदिर उज्जैन (Kaal Bhairav Mandir Ujjain) के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। उज्जैन में भगवान काल भैरव को नगर कोतवाल का दर्जा प्राप्त हुआ है। मान्यता है कि उज्जैन नगर की रक्षा स्वयं भगवान काल भैरव करते हैं। उज्जैन की हर कोने पर काल भैरव के मंदिर बने हुए हैं। काल भैरव मंदिर अपनी तांत्रिक साधनाओं के लिए भी प्रसिद्ध है। तांत्रिकों के बीच यह मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। यहां पर तांत्रिक क्रियाएं की जाती हैं।
काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav Mandir) उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर मुख्य शहर से दूर भैरवगढ़ में बना है। इस मंदिर में आप सड़क मार्ग से आसानी से जा सकते हैं। इस भैरवगढ़ के बारे में कहा जाता है, कि प्राचीन समय में यहां पर पहाड़ हुआ करता था, जिसमें काल भैरव का मंदिर बना हुआ था।
इस पहाड़ को भैरव पर्वत कहा जाता है। मगर धीरे-धीरे इस जगह का नाम बदलकर भैरवगढ़ कर दिया गया और पहाड़ का धीरे धीरे समाप्त हो गया। यह मंदिर अपने चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है और सबसे बड़ा चमत्कार है – काल भैरव जी की मूर्ति का माद्रिरा पान करना है।
यह चमत्कार देखने के लिए पूरे भारतवर्ष से लोग यहां पर आते हैं और मदिरा का प्रसाद भगवान काल भैरव को अर्पित करते हैं और भगवान काल भैरव कुछ पल में वह मदिरा ग्रहण करके प्याले को पूरी तरह से खाली कर देते हैं।
उज्जैन की यात्रा में आपको काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav Mandir) में घूमने जरूर आना चाहिए। काल भैरव मंदिर मुख्य शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर है। यहां पर आप ऑटो के द्वारा आराम से जा सकते हैं। ऑटो वाले यहां पर नॉमिनल चार्ज में आपको पूरा शहर के मंदिर घुमा देते हैं। ऑटो वाले आपको महाकालेश्वर मंदिर के पास में मिल जाते हैं, जो पर्यटकों को शहर के सभी मंदिरों की सैर कर देते हैं बहुत नॉमिनल चार्ज में।
काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav Mandir) पहुंचने के लिए, शिप्रा नदी पर बने पुल को पार करने के बाद भैरवगढ़ पहुंच जाते हैं। शिप्रा नदी पर बने हुए पुल को पार करने के बाद, थोड़ा आगे जाने पर ही आप काल भैरव मंदिर पहुंच जाते हैं। इसके बाद आप मंदिर में पहुंच कर मदिरा ले सकते हैं। मंदिर के बाहर बहुत सारी दुकाने हैं, जहां से भैरव बाबा को चढ़ाने के लिए शराब प्रसाद के रूप में खरीदी जा सकती है।
यहां पर अलग-अलग ब्रांड की शराब मिल जाती है। यहां पर अंग्रेजी और देसी शराब की दुकानें हैं, जहां से आप शराब ले सकते हैं। शराब का प्रसाद लेकर आप मंदिर जा सकते है। मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार बहुत ही सुंदर है। बाहर से देखने में यह किसी महल की तरह लगता है। इसके अंदर जाने के लिए कभी-कभी बहुत लंबी-लंबी लाइन लगती है।
काल भैरव जी के दर्शन करने के लिए बहुत बड़ी लाइन लगती है। भगवान काल भैरव के चमत्कार को देखने के लिए बहुत सारे लोग लाइन में खड़े होकर घंटे घंटे तक इंतजार करते हैं। यहां पर आप कुछ समय इंतजार करने के बाद आप मंदिर के गर्भगृह तक पहुंच जाते हैं।
काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav Mandir) परिसर बहुत ही सुंदर और प्राचीन है। मंदिर परिसर में आपको अन्य मंदिर देखने के लिए मिल जाते हैं। यहां पर आपको भगवान दत्तात्रेय का मंदिर देखने के लिए मिलता है और यहां पाताल भैरव का मंदिर भी बना हुआ है, जो बहुत सुंदर है। मंदिर के अंदर एक बड़ा सा दीप स्तंभ बना है, जो मराठा शासको के द्वारा बनाया गया है। यह दीप स्तंभ बहुत ही सुंदर लगता है।
काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav Mandir) की वास्तुकला बहुत सुंदर है। इस मंदिर में आपको परमार और मराठा वास्तुकला देखने के लिए मिल जाती है। मंदिर का निर्माण राजा भोज के द्वारा करवाया गया है। मंदिर में खंबे देखने के लिए मिलती है, जिनमें बारीक नक्काशी की गई है और यह बहुत खूबसूरत दिखते हैं।
आप काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav Mandir) के मुख्य गर्भगृह में पहुंचकर भगवान काल भैरव जी के दर्शन कर सकते हैं। काल भैरव जी की प्रतिमा बहुत ही आकर्षक है। यहां पर आप जो मथुरा का प्रसाद हैं। वह पंडित जी को दे देते हैं। पंडित जी उस प्रसाद को प्याले में डालकर भगवान काल भैरव जी को अर्पित करते हैं और काल भैरव जी उस प्रसाद को पूरा ग्रहण कर लेते हैं और प्याला खाली हो जाता है।
यह चमत्कार लोग प्रतिदिन अपनी आंखों से देखते हैं और यहां पर डेली हजारों लीटर मदिरा का प्रसाद काल भैरव जी को अर्पित कर दिया जाता है। काल भैरव जी के दर्शन करने के बाद, आप मुख्य गर्भ ग्रह से बाहर आकर परिसर के अन्य मंदिरों में घूम सकते हैं। परिसर में आपको पाताल भैरवी मंदिर और दत्तात्रेय जी का मंदिर देखने के लिए मिलता है। यह मंदिर भी प्राचीन है। आप इन मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर एक दीप स्तंभ बना है। आप उसे देख सकते हैं। खास उत्सवों के समय इस स्तंभ को रोशन किया जाता है, जिससे यह बहुत ही सुंदर लगता है।
काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav Mandir) के बारे में मान्यता प्रसिद्ध है, कि बिना काल भैरव के दर्शन किए महाकाल के दर्शन अधूरे माने जाते हैं। उज्जैन आने वाले हर एक श्रद्धालु पहले महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन करते हैं। उसके बाद काल भैरव मंदिर के दर्शन करने के लिए जाते हैं।
काल भैरव जी को उज्जैन का नगर कोतवाल कहा जाता है, अर्थात नगर की सुरक्षा और व्यवस्था होने के अधीन है। आज भी यहां पर बड़े-बड़े अधिकारी, पुलिसकर्मी, व्यापारी और यात्री। नए काम को करने से पहले काल भैरव मंदिर के दर्शन करते हैं।

काल भैरव मंदिर का इतिहास (Kaal Bhairav Temple History)
कालभैरव मंदिर (Kaal Bhairav Mandir) मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित प्राचीन और अत्यंत प्रसिद्ध स्थल है। यह एक भगवान शिव के उग्र अवतार काल भैरव जी को समर्पित है। भगवान काल भैरव को काल मतलब समय और मृत्यु के देवता माना जाता है। वह नगर के रक्षक देवता या कोतवाल के रूप में पुजे जाते हैं। उज्जैन में मान्यता है, कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के बाद, भगवान काल भैरव के दर्शन करना जरूरी है। वरना दर्शन अधूरे माने जाते हैं।
पुराणों के अनुसार, ब्रह्मा और विष्णु में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। शिव ने काल भैरव को उत्पन्न किया, जिन्होंने ब्रह्मा के पांचवें सिर का अहंकार नष्ट किया। इस कार्य के पश्चात काल भैरव को प्रायश्चित स्वरूप पृथ्वी पर भ्रमण करना पड़ा। उज्जैन वह स्थान है जहाँ काल भैरव ने निवास किया और बाद में यहीं उनकी पूजा आरंभ हुई। स्कंद पुराण और शिव पुराण में उज्जैन को काल भैरव की प्रमुख साधना स्थली बताया गया है।
ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार, माना जाता है कि (Kaal Bhairav Mandir) की स्थापना 6वीं से 8वीं शताब्दी के बीच हुई। वर्तमान मंदिर का स्वरूप परमार काल (9वीं–13वीं शताब्दी) में विकसित हुआ। कई बार आक्रमणों और प्राकृतिक आपदाओं के कारण मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ। गर्भगृह में स्थापित मूर्ति अत्यंत प्राचीन और तांत्रिक प्रभाव वाली मानी जाती है।
काल भैरव को तंत्र साधना का प्रमुख देवता माना जाता है। विशेष रूप से अष्टमी, अमावस्या और कालाष्टमी पर यहां तांत्रिक अनुष्ठान होते हैं। मान्यता है कि काल भैरव की पूजा से भय, नकारात्मक ऊर्जा, शत्रु बाधा और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
भगवान कालभैरव कौन हैं?
भगवान कालभैरव, भगवान शिव के रौद्र और उग्र स्वरूप माने जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, जब ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता का विवाद हुआ, तब भगवान शिव ने कालभैरव को उत्पन्न किया। भगवान कालभैरव को काल (समय) के स्वामी माना जाता है।
कालभैरव के स्वरूप की विशेषताएँ
- उग्र मुखमुद्रा
- हाथ में त्रिशूल और डमरू
- गले में नरमुंडों की माला
- वाहन – कुत्ता
कालभैरव मंदिर का पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कालभैरव ने ब्रह्मा के अहंकार को नष्ट किया था। इसके बाद उन्हें प्रायश्चित स्वरूप पृथ्वी पर विचरण करना पड़ा। उज्जैन वह स्थान माना जाता है जहाँ भगवान कालभैरव स्थायी रूप से विराजमान हुए।
इसी कारण:
- उज्जैन को कालभैरव की नगरी कहा जाता है
- महाकालेश्वर के रक्षक के रूप में कालभैरव की पूजा होती है
मदिरा अर्पण की अनोखी परंपरा
काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav Mandir) की सबसे प्रसिद्ध और रहस्यमय परंपरा है – भगवान को मदिरा अर्पण करना। यह परंपरा सदियों से इसी तरह चली आ रही है। सदियों से भगवान कालभैरव को मदिरा अर्पित की जा रही है और इस चमत्कार को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पर आते हैं।
यह परंपरा क्यों प्रसिद्ध है
- मंदिर में भगवान कालभैरव को शराब चढ़ाई जाती है
- श्रद्धालुओं के अनुसार मदिरा स्वयं भगवान ग्रहण करते हैं
- चढ़ाई गई मदिरा धीरे-धीरे कम होती दिखाई देती है
यह दृश्य पहली बार देखने वाले श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत आश्चर्यजनक होता है।
कालभैरव अष्टमी का विशेष महत्व
कालभैरव अष्टमी भगवान कालभैरव का प्रमुख पर्व है। इस दिन पर ढेर सारी श्रद्धालु आकर काल भैरव जी के दर्शन करते हैं। इस दिन यहां पर मंदिर को बहुत अच्छी तरह से सजाया जाता है। इस दिन भगवान काल भैरव के दर्शन करने का बहुत ही महत्व रहता है। माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा से सभी कष्टों का नाश होता है।
इस दिन:
- विशेष पूजा
- रात्रि जागरण
- हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति
दर्शन और पूजा का समय
- मंदिर खुलने का समय: सुबह 5:00 बजे
- मंदिर बंद होने का समय: रात 9:00 बजे
- मदिरा अर्पण: सुबह से शाम तक (विशेष पर्वों पर समय बदल सकता है)
कालभैरव मंदिर कैसे पहुँचे (How to Reach Kal Bhairav Temple)
सड़क मार्ग : उज्जैन का काल भैरव मंदिर सड़क मार्ग के द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यहां पर आप आसानी से आ सकते हैं। उज्जैन शहर के किसी भी एक कोने से ऑटो, रिक्शा और ई-रिक्शा से आसानी से इस मंदिर में घूमने के लिए आ सकते हैं।
रेलवे : उज्जैन का काल भैरव मंदिर उज्जैन रेलवे जंक्शन से करीब 7 किलोमीटर दूर है। आप रेल मार्ग से यहां पर पहुंचकर इस मंदिर में ऑटो या रिक्शा से आ सकते हैं। उज्जैन रेलवे स्टेशन में सभी प्रमुख शहरों से ट्रेन आती हैं।
हवाई मार्ग : उज्जैन का निकटतम एयरपोर्ट इंदौर में बना हुआ है। अगर आप हवाई मार्ग से उज्जैन आना चाहते हैं, तो आप इंदौर आ सकते हैं और उसके बाद सड़क मार्ग के द्वारा इस मंदिर में पहुंच सकते हैं।
काल भैरव मंदिर का गूगल मैप लोकेशन
कालभैरव मंदिर में घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit Kal Bhairav Temple)
काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav Mandir) में घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च का होता है। इस समय मौसम ठंडा और सुहावना रहता है, जिससे घूमने में कोई भी दिक्कत नहीं होती है। आप आराम से इस समय जाकर उज्जैन के सभी तीर्थ स्थलों की यात्रा कर सकते हैं। काल भैरव मंदिर में भैरव अष्टमी और अमावस्या के समय बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। इस समय बहुत सारे लोग यहां पर दर्शन करने लिए आते हैं।
कालभैरव मंदिर के पास घूमने की जगहें
- महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
- राम घाट
- सिद्धवट मंदिर
- सांदीपनि आश्रम
- हरसिद्धि माता मंदिर
श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी सुझाव
- मदिरा अर्पण मंदिर नियमों के अनुसार करें
- अशांति और अनुशासनहीनता से बचें
- कैमरा उपयोग से पहले अनुमति लें
- भीड़ में सावधानी रखें
FAQ – कालभैरव मंदिर उज्जैन
Q1. कालभैरव मंदिर (Kaal Bhairav Mandir) क्यों प्रसिद्ध है?
यह मदिरा अर्पण की परंपरा और नगर कोतवाल की मान्यता के कारण प्रसिद्ध है।
Q2. क्या महिलाएँ मदिरा अर्पण कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएँ भी दर्शन और पूजा कर सकती हैं।
Q3. क्या बिना मदिरा चढ़ाए दर्शन कर सकते हैं?
हाँ, मदिरा अर्पण वैकल्पिक है।
Q4. कालभैरव को क्या प्रसाद चढ़ता है?
मदिरा, तेल, नारियल, फूल और सिंदूर।
निष्कर्ष
काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav Mandir) उज्जैन केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, रहस्य और तांत्रिक शक्ति का संगम है। यहाँ आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु एक अलग ऊर्जा और आत्मिक संतोष का अनुभव करता है। यदि आप उज्जैन की यात्रा पर हैं, तो महाकालेश्वर के साथ-साथ कालभैरव मंदिर के दर्शन अवश्य करें, क्योंकि यही उज्जैन यात्रा को पूर्ण बनाता है।
