प्रयागराज का मुगलकालीन उद्यान – खुसरो बाग : Beautiful Khusro Bagh, Prayagraj History and Travel Guide 2026

खुसरो बाग प्रयागराज – मुगल इतिहास और शांति का अद्भुत संगम

खुसरो बाग उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित एक प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मुगल उद्यान है। यह स्थान अपनी भव्य वास्तुकला, शांत माहौल और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। खुसरो बाग (Khusro Bagh) केवल एक पर्यटक स्थल नहीं, बल्कि यह मुगल काल के इतिहास का एक गवाह है।

यह उद्यान मुख्य रूप से मुगल राजकुमार खुसरो मिर्जा और उनके परिवार से जुड़े मकबरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर ढेर सारे मकबरे देखने के लिए मिलते हैं, जो बहुत ही सुंदर है। इतिहास, कला और फोटोग्राफी में रुचि रखने वालों के लिए यह स्थान किसी स्वर्ग से काम नहीं है। चलिए जानते हैं – प्रयागराज के प्रसिद्ध खुसरो बाग (Khusro Bagh) के बारे में

खुसरो बाग प्रयागराज की यात्रा

खुसरो बाग प्रयागराज (Khusro Bagh Prayagraj) के प्रसिद्ध और सुन्दर उद्यान में से एक है। यह उद्यान अपने ऐतिहासिक स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है। इस उद्यान के अंदर मुगल काल के सुंदर स्मारक बने हुए हैं, जो बहुत ही आकर्षक है। यह उद्यान प्रयागराज में प्रयागराज रेलवे जंक्शन के पास में बना हुआ है। यहां पर आप आसानी से पहुंच सकते हैं। यहां पर आप आकर अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं।

खुसरो बाग (Khusro Bagh) बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है और यहां पर ढेर सारे पेड़ पौधे लगे हुए हैं। खुसरो उद्यान (Khusro Bagh) के चारों तरफ ऊंची ऊंची बाउंड्री वॉल बनी हुई है। यहां पर एंट्री फ्री है, इसलिए यहां पर आप आराम से जा सकते हैं और घूम सकते हैं। खुसरो उद्यान (Khusro Bagh) के बाहर पार्किंग की व्यवस्था है। उद्यान का एंट्री गेट बहुत ही सुंदर और आकर्षक है।

खुसरो उद्यान (Khusro Bagh) के गेट से अंदर जाने पर चारों तरफ हरे भरे पेड़ पौधे देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर सुंदर गलियारे बने हुए हैं, जिन से होते हुए आप आगे बढ़ते हैं। रास्ते की दोनों तरफ आपको सुंदर क्यारिया देखने के लिए मिलती है, जिसमें रंग बिरंगे फूल खिले हुए हैं। यहां पर किसी ठंड की सुबह जाने पर बहुत अच्छा लगता है और यहां पर बहुत ज्यादा ठंड रहती है।

इस सुंदर रास्ते से आगे बढ़ने पर और भी सुंदर-सुंदर जगह देखने के लिए मिलती है। यहां पर बच्चों के खेलने के लिए क्रिकेट ग्राउंड बना हुआ है, जहां पर बच्चे लोग खेलते हैं। साथ ही साथ यहां पर फुटबॉल कोर्ट बना हुआ है, जहां पर युवा लोग फुटबॉल की प्रैक्टिस करते हैं। यहां पर बहुत सारे लोग टहलने के लिए आते हैं। वैसे इस जगह पर टहलने का एक अलग ही आनंद होता है।

कई बच्चे यहां पर स्टडी करते हैं। यहां का बहुत शांत वातावरण है, जिससे यहां पर आराम से स्टडी की जा सकती है। वैसे यहां पर ढेर सारी गलियारे बने हैं। आप इन गरियारों से होते हुए बाग में घूम सकते हैं या आप ऐतिहासिक स्मारक की तरफ जा सकते हैं।

आगे जाने पर यहां पर भी के बगीचे देखे जा सकते हैं। यहां पर ढेर सारे पौधे लगे हैं, जिनमें से सबसे पहले आपको बिही के ढेर सारी पौधे देखने के लिए मिलते हैं, जो इस जगह की शोभा को बढ़ाते हैं। साथ ही साथ यह सभी पौधे आप यहां पर खरीद कर अपने घर ले जा सकते हैं। यहां पर नर्सरी बनी हुई है, जहां पर सभी प्रकार के पौधे खरीदे जा सकते हैं।

यहां पर बहुत सारे लोग घूमने के लिए आते हैं। सुबह समय लोग यहां पर मॉर्निंग वॉक और खेलने कूदने के लिए भी आते हैं। यहां पर फुटबॉल कोर्ट बना हुआ है, जहां पर बच्चे खेलते हैं। यहां पर आंवले के भी ढेर सारे पेड़ लगे हुए हैं। आगे जाने पर आम के पेड़ देखने के लिए मिलते हैं।

आम के ढेर सारी वैरायटी देखने के लिए मिल जाती है। यहां पर शांति के साथ चिड़ियों और पंछियों की आवाज सुनना एक सुकून देता है। यहां पर ग्राउंड पर बना हुआ है, जहां पर लोग क्रिकेट खेलते हैं। इस उद्यान में टहलते हुए, आगे बढ़ने पर हनुमान जी का मंदिर देखने के लिए मिलता है।

यहां एक बड़ा सा पीपल का पेड़ लगा हुआ है, जिसके नीचे मंदिर बना हुआ है। उसके पास में ही कुआं बना हुआ है। यहां पर जगह जगह पर बैठने की व्यवस्था है, जहां पर बैठकर आप इस उद्यान की खूबसूरती का आनंद उठा सकते हैं। खुसरो बाग (Khusro Bagh) में अंदर जाने पर नर्सरी देखने के लिए मिलती है, जहां पर बहुत सारे प्लांट तैयार किए जाते हैं और आप इन प्लांट को खरीद सकते हैं।

यहां पर एक बोर्ड लगा हुआ है, जहां पर आम की ढेर सारी प्रजातियां देखी जा सकती है। यहां पर आम के बारे में ढेर सारा नॉलेज मिल जाएगा। यह उद्यान बहुत ही साफ सुथरा और व्यवस्थित है। यहां पर आप अच्छा समय बिता सकते हैं। आगे बढ़ने पर यहां पर फव्वारा देखने के लिए मिलता है।

फव्वारा बहुत ही सुंदर है। आगे जाने पर प्राचीन मकबरा देखने के लिए मिलती है, जो इस जगह की शान है। यहां पर ढेर सारी ऐतिहासिक इमारतें देखने के लिए मिलती हैं। यहां पर शाह बेगम का मकबरा, खुसरो का मकबरा, निसार बेगम का मकबरा और बीवी तमोलन का मकबरा बना हुआ है। आप इन सभी मकबरों में जाकर घूम सकते हैं और उनकी बनावट देख सकते हैं, जो बहुत ही सुंदर है।

इन सभी जगह में घूमने के बाद, आप अपना कुछ समय पार्क में शांतिपूर्वक बिताने के बाद वापस आ सकते हैं और अपने प्रयागराज के आगे की यात्रा कर सकते हैं।

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खुसरो बाग का इतिहास (Khusro Bagh History)

इलाहाबाद को प्राचीन समय में प्रयाग के नाम से जाना जाता था। प्रयाग में कई साम्राज्य एवं राजवंशों द्वारा नियंत्रण किया गया है। 1575 ईस्वी में मुगल सम्राट अकबर ने संगम के पवित्र तट पर एक किला बनवाया और इसे इल्हाबाद नाम दिया, जो बाद में इलाहाबाद बन गया।

राजकुमार सलीम ने इलाहाबाद से ही अपने पिता अकबर के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था। 1605 ईस्वी में अकबर की मृत्यु के पश्चात उसके पुत्र सलीम ने जहांगीर के नाम से सम्राट पद ग्रहण किया। जहांगीर उद्यानों का बहुत बड़ा प्रेमी था। अपने इलाहाबाद प्रवास के दौरान राजकुमार सलीम ने खुसरो बाग का निर्माण कराया था।

खुसरो बाग (Khusro Bagh) में चार केंद्रीय संरक्षित स्मारक है, जिन्हें शाह बेगम का मकबरा, खुसरो का मकबरा, निसार बेगम का मकबरा एवं बीवी तमोलन का मकबरा के नाम से जाना जाता है।

खुसरो का मकबरा (Khusro’s Tomb)

खुसरो उद्यान (Khusro Bagh) का सबसे सुंदर और सबसे प्रसिद्ध मकबरा खुसरो का मकबरा है। खुसरो (१५८७ – १६२२ ) जहांगीर और शाह बेगम का बड़ा बेटा था। खुसरो सुशिक्षित और अपने शिष्ट व्यवहार एवं निर्वाचित व्यक्तित्व के कारण जनता में लोकप्रिय था। 1607 ईस्वी में अकबर बुरी तरह से बीमार पड़े और तब खुसरो के साथियों ने उनके ससुर मिर्जा अजीज कोका और उनके मामा आमेर के राजा मान सिंह के नेतृत्व में खुसरो को गद्दी पर बैठाने का भरपूर प्रयास किया।

परंतु अकबर ने अपने अंतिम समय में सलीम को गद्दी पर नियुक्त किया और सलीम को जहांगीर की पदवी से नवाजा। जहांगीर की गद्दी पर बैठने के कुछ महीनों बाद खुसरो ने विद्रोह कर दिया, परंतु वह जहांगीर द्वारा परास्त कर दिया गया। उसे गिरफ्तार कर अंधा कर दिया गया।

अपने भाई खुर्रम (जिन्हें बाद में शाहजहां के नाम से जाना गया ) की देखरेख में बंदी रहते हुए ही 1622 ईस्वी में उनकी मृत्यु हो गई। उन्हें खुसरो बाग में ही उनकी मां के मकबरे के बगल में दफनाया गया। खुसरो का मकबरा उनकी बहन सुल्तान निसार बेगम ने बनवाया था।

मेहराबदार दीवारों वाली यह इमारत अष्टकोण आकार की संरचना पर बने स्तंभों पर टिके विशाल गुंबद से ढकी है, जिसके कोने पर छोटी छतरियां बनी है। इस कक्ष के भीतरी हिस्से पुष्प और सनोबर की डिजाइन से सजे हैं। गुंबद पर व्रत और तारों का शैली में चित्रण किया गया है, जो एतादउल्ला के मकबरे में बनी शैली से काफी समानता रखता है।

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शाह बेगम का मकबरा (Shah Begum’s Tomb)

जहांगीर के समय में यह कई महत्वपूर्ण इमारतों का निर्माण हुआ, जिसमें उनकी पहली पत्नी मानबाई का मकबरा प्रमुख है। जहांगीर ने अपने पुत्र खुसरो के जन्म के पश्चात मान भाई को शाह बेगम की उपाधि दी थी। इसी कारण इस मकबरे का नाम शाह बेगम का मकबरा है।

मानबाई आमेर के राजा भगवंत दास, जो उस समय पंजाब के गवर्नर थे, की पुत्री थी और राजपूत राजा मानसिंह की बहन थी। 1584 ईसवी में उनका विवाह सलीम के साथ हुआ और 1587 इसमें उन्होंने खुसरो को जन्म दिया। सलीम मुगल शासक जहांगीर के बचपन का नाम था।

शाह बेगम ने 1603 ईसवी में इलाहाबाद में अफीम की अत्याधिक मात्रा में सेवन करके आत्महत्या कर ली थी। वह पिता और पुत्र के बीच कड़वाहट को लेकर बहुत चिंतित और दुखी थी। उनकी कब्र इसी बाग में निर्मित है, जिसे बाद में खुसरो बाग के नाम से जाना जाने लगा।

इस मकबरे का नक्शा जहांगीर के सबसे प्रमुख कलाकार अक्का रजा ने 1606 से 1607 ईसवी के बीच तैयार किया था। यह एक तीन मंजिला इमारत है। इसकी छत पर खड़ी है, जिसके ऊपर एक बड़ी छतरी है। इसके ठीक नीचे शाह बेगम की कब्र है। मकबरे पर अभिलेख जहांगीर के प्रसिद्ध लेखाकार मीर अब्दुल मुस्कीन कलाम द्वारा बेल बूटे जैसा दिखने वाले अरबी अभिलेखों से सजा है।

निसार बेगम का मकबरा (Tomb of Nisar Begum)

निसार बेगम खुसरो की बहन थी। निसार बेगम का मकबरा शाह बेगम के मकबरे के समीप स्थित है। इस मकबरे का निर्माण 1624 से 1625 में उन्हीं के द्वारा खुसरो के मकबरे के निर्माण के समय ही किया गया था। यह मकबरा कभी समाधि के रूप में प्रयोग नहीं किया गया। इस मकबरे की वास्तु संरचना बहुत ही प्रभावशाली है। यह मकबरा एक ऊचे चबूतरे पर बना हुआ है।

बीवी तमोलन का मकबरा (Biwi Tamolan’s Tomb)

यहां स्थित चतुर्थ मकबरा बीवी तमोलन का है, जो परिसर के पश्चिमी भाग में स्थित है। इस मकबरे को किसी प्रकार का लेख अंकित नहीं है। यह मान्यता है कि यह मकबरा फतेहपुर सीकरी के इंस्तांबुल बेगम से संबंधित है। खुसरो कि किसी बहन ने अपने लिए यह मकबरा बनवाया था। परंतु उनको वहां पर दफनाया नहीं गया था।

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खुसरो बाग घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit Khusro Bagh)

खुसरो बाग (Khusro Bagh) साल भर खुला रहता है, लेकिन घूमने का सबसे अच्छा समय है। खुसरो बाग में घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च का है। इस समय मौसम सुहावना और ठंडा रहता है। इस समय आप आराम से घूम सकते हैं और बैठकर इस जगह का आनंद उठा सकते हैं।

गर्मी के समय यहां पर घूमने में परेशानी होती है। गर्मी के समय आप यहां पर आते हैं, तो सुबह के समय आएंगे, तो बेहतर होगा।

खुसरो बाग कैसे पहुँचे (How to Reach Khusro Bagh)

रेल मार्ग से : प्रयागराज जंक्शन खुसरो बाग से बहुत नजदीक स्थित है। स्टेशन से पैदल या ऑटो द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।

सड़क मार्ग से : शहर के किसी भी हिस्से से ऑटो, ई-रिक्शा और टैक्सी उपलब्ध हैं।

हवाई मार्ग से : प्रयागराज शहर में एयरपोर्ट बना हुआ है। आप वायु मार्ग से अन्य शहरों में यहां पर आ सकते हैं और उसके बाद टैक्सी लेकर खुसरो बाग जा सकते हैं।

खुसरो बाग प्रयागराज गूगल मैप लोकेशन

खुसरो बाग के खुलने और बंद होने का समय (Khusro Bagh Opening and Closing Times)

खुसरो बाग (Khusro Bagh) के खुलने और बंद होने का समय सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक है।

खुसरो बाग के आसपास घूमने की जगहें

  • आनंद भवन
  • चंद्रशेखर आज़ाद पार्क
  • त्रिवेणी संगम
  • इलाहाबाद किला
  • सरस्वती घाट

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खुसरो बाग से जुड़े रोचक तथ्य

  • यह स्थान ब्रिटिश काल में भी संरक्षित रहा
  • स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई ऐतिहासिक गतिविधियाँ आसपास हुईं
  • आज भी इसकी मूल संरचना काफी हद तक सुरक्षित है

यात्रा से जुड़े सुझाव

  • स्मारकों को नुकसान न पहुँचाएँ
  • स्वच्छता बनाए रखें
  • शाम के समय समूह में घूमना बेहतर
  • फोटोग्राफी नियमों का पालन करें

निष्कर्ष

खुसरो बाग प्रयागराज (Khusro Bagh Prayagraj) केवल एक उद्यान नहीं, बल्कि मुगल इतिहास की अमूल्य धरोहर है। यदि आप प्रयागराज की यात्रा पर हैं और इतिहास, शांति व सुंदरता का अनुभव करना चाहते हैं, तो खुसरो बाग अवश्य जाएँ। यह स्थान आपको अतीत की गलियों में ले जाकर एक अलग ही अनुभूति देगा।

 

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