प्राचीन लोहांगी पीर पर्वत विदिशा : Beautiful Lohangi Mountain Vidisha, Travel Guide 2026

लोहांगी पर्वत मध्य प्रदेश राज्य के एक ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक स्थान हैं। यह पर्वत मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में स्थित एक मुख्य आकर्षण स्थल है। यहां पर आप आसानी से पहुंच सकते हैं। यह मुख्य शहर में स्थित है। यहां पर आकर आप इस पर्वत में घूम सकते हैं और इस पर्वत से शहर का सुन्दर नजारा देख सकते है।

लोहांगी पर्वत हरियाली, चट्टानों और प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ है। अगर आपको प्राकृतिक और ऐतिहासिक जगह देखने का शौक है, तो आपको यहां पर आना चाहिए और इस पर्वत में घूमना चाहिए। इस लेख में हम विदिशा के लोहांगी पीर पर्वत (Lohangi Pir Mountain) के बारे में जानकारी देंगे

विदिशा जिला के लोहांगी पर्वत की यात्रा (Tour of Lohangi Mountain in Vidisha District)

लोहांगी पर्वत (Lohangi Mountains) मध्य प्रदेश का एक ऐतिहासिक और प्राकृतिक सुंदरता से घिरा हुआ स्थान है। यह मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पर्वतों स्थल में से एक है। यह जगह विदिशा शहर के मध्य में स्थित है। यहां पर आकर आपको मस्जिद और मंदिर देखने के लिए मिलते हैं, जो धार्मिक एकता का प्रतीक माना जाता है। यहां पर आप शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं।

लोहांगी पर्वत (Lohangi Mountain) न केवल स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है, बल्कि इतिहास प्रेमी, प्राकृतिक प्रेमियों के लिए भी विशेष महत्व रखता है। लोहंगी पहाड़ विदिशा शहर के बीचो-बीच स्थित है। यह एक ऊंची पहाड़ी है। इस पहाड़ी के ऊपर शंकर भगवान जी का मंदिर बना हुआ है। यहां पर एक प्राचीन दरगाह भी बनी हुई है। यह मंदिर और दरगाह दोनों आमने-सामने बने हुए हैं। यह जगह हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक है।

लोहंगी पर्वत (Lohangi Mountain) से आप विदिशा शहर के सुंदर दृश्य को देख सकते हैं। यहां पर आपको ढेर सारी प्राचीन कलाकृतियों देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही सुंदर है। गवर्नमेंट के द्वारा इस जगह को मेंटेन किया गया है और यह जगह अच्छी तरह से व्यवस्थित है। यहां पर बैठने की जगह है, जहां पर आप बैठकर कुछ अच्छा समय बिता सकते हैं।

शाम के समय यहां पर सूर्यास्त का बहुत ही शानदार दृश्य देखने के लिए मिलता है। आप यहां पर अपनी बाइक से पहुंच सकते हैं। आप बाइक से पहाड़ी के नीचे, जहां से सीढ़ियां स्टार्ट होती है। वहां तक पहुंच सकते हैं। अगर आप यहां पर कार से आते हैं, तो यहां पर आने लिए सड़क नहीं है। यहां पर घनी बस्ती है, जिससे आप कार से यहां पर नहीं आ पाएंगे। इसलिए आप यहां पर पैदल आ सकते हैं या बाइक से आ सकते हैं।

लोहंगी पर्वत विदिशा (Lohangi Mountain Vidisha) रेलवे स्टेशन से 2 किलोमीटर दूर है, तो आप यहां पर पैदल भी आराम से पहुंच सकते हैं। पहाड़ी के ऊपर पहुंचाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। पहाड़ी में, जो जाने का रास्ता है। वह घनी बस्ती से होकर जाता है। यहां पर एक पतली सी सड़क इस पहाड़ी तक जाती है। आप अगर बाइक से आते हैं, तो बाइक को नीचे खड़ा करके आप पहाड़ी की ओर जा सकते हैं।

लोहंगी पहाड़ी के रास्ते में आपको ढेर सारे घर देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर सफाई की भी कमी थी, वैसे यह एक ऐतिहासिक धरोहर है, मगर इसे अच्छी तरह से संरक्षित करके नहीं रखा गया है। रास्ते में जगह-जगह पर कूड़ा कचरा लगा हुआ था। सीढ़ियों से चढ़कर आप लोहंगी पर्वत पहुंच सकते हैं।

यहां पर पहुंचने पर सुंदर गार्डन देखने के लिए मिलता है। यहां पर ढेर सारी जगह है, जो आप देख सकते हैं। यहां पर गार्डन में बैठने की जगह देखने के लिए मिलती है, जहां पर आप शांति से बैठकर आसपास के दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। यहां पर ढेर सारे पेड़ पौधे लगे हैं। यहां पर फूलों वाले पौधे भी लगाए गए हैं।

यहां पर आपको प्राचीन कलाकृतियों देखने के लिए मिलती है, जो यहां पर संभाल कर रखी गई है। इसके अलावा, यहां पर प्राचीन कब्र देखने के लिए मिलती है, जो इस गार्डन के एक साइड बनी हुई है। यहां पर दरगाह देखने के लिए मिलती है, जो प्राचीन है और बहुत सुंदर है। यह दरगाह सूफी संत शेख जलील चिश्ती की है, जिन्हें स्थानीय लोग लोहंगी पीर (Lohangi Pir) के नाम से जानते हैं और इस पहाड़ी का नाम भी इन्हीं के नाम पर रखा गया है।

यहां पर एक गुंबद वाला मकबरा या दरगाह बनी हुई है, जो प्राचीन है। आप इसे देख सकते हैं। इस मकबरा में फारसी में लिखा हुआ है, जिसमें इसे 16वीं और 17वीं शताब्दी के मालवा सल्तनत और मुगल काल का माना जाता है।

दरगाह के पास में ही भगवान शिव का मंदिर बना हुआ है। यहां पर भगवान शिव का शिवलिंग विराजमान है। यह शिवलिंग खुले आसमान के नीचे एक चबूतरे पर बना हुआ है। यह शिवलिंग प्राचीन है और बहुत सुंदर है। आप इनके दर्शन कर सकते हैं। यहां पर अन्नपूर्णा मंदिर के खंडहर देखने के लिए मिलते हैं, जो प्राचीन हैं। यहां पर हिंदू मंदिर के खंडहर और एक सूफी संत का मकबरा भी देखा जा सकता है। अशोक स्तंभ के बचे हुए हिस्से भी यहां देखे जा सकते हैं।

यहां पर आपको प्राचीन मंडप के अवशेष भी देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर पत्थर की संरचना से बने हुए मंडप देखने के लिए मिलते हैं। प्राचीन मूर्तियां आप यहां पर देख सकते हैं। आप यहां पर जाकर शाम के समय सूर्यास्त के बहुत सुंदर दृश्य का आनंद उठा सकते हैं। साथ ही साथ विदिशा जिले का यहां पर बहुत ही शानदार दृश्य देखने के लिए मिलता है।

आप यहां पर फैमिली और दोस्तों के साथ आकर ट्रेवल कर सकते हैं। अगर आप यहां पर ज्यादा समय बिताना चाहते हैं, तो आप यहां पर खाने पीने का सामान लेकर आ सकते हैं, क्योंकि ऊपर कुछ भी खाने-पीने का सामान नहीं मिलता है। आप यहां पर पानी जरूर लेकर आएं, क्योंकि आपके यहां पर प्यास लगेगी। यह जगह बरसात के समय बहुत ही सुंदर लगती है, क्योंकि बरसात के समय यहां पर चारों तरफ हरियाली देखने के लिए मिलती है।

जानें : विदिशा में घूमने की प्रमुख जगह

लोहांगी पर्वत का नाम कैसे पड़ा?

लोहांगी पर्वत (Lohangi Mountain) के नाम को लेकर कई लोककथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। पर्वत पर बनी शेख जलील चिश्ती की दरगाह है, जिन्हें स्थानीय लोग लोहंगी पीर के नाम से जानते थे। इसलिए इस पहाड़ी को लोहंगी पर्वत के नाम से जाना जाता है।

पर्यटन की दृष्टि से लोहांगी पर्वत

आज लोहांगी पर्वत (Lohangi Mountain) एक उभरता हुआ पर्यटन स्थल बन रहा है। यह स्थल ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक महत्व रखता है। यहां पर आकर आप अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं। यह जगह बरसात के समय बहुत ही सुंदर लगती है। यहां पर आकर अच्छा समय बिताया जा सकता है। यहां आने वाले पर्यटक:

  • प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेते हैं
  • ट्रेकिंग और पहाड़ी चढ़ाई का अनुभव करते हैं
  • शांति और एकांत की तलाश पूरी करते हैं

यह स्थान उन लोगों के लिए आदर्श है, जो भीड़-भाड़ से दूर प्रकृति के करीब समय बिताना चाहते हैं।

लोहांगी पर्वत कैसे पहुंचें (How to Reach Lohangi Mountains)

सड़क मार्ग : लोहांगी पर्वत (Lohangi Mountain) विदिशा मुख्य शहर में बना हुआ है। लोहांगी पर्वत सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। आसपास के प्रमुख शहरों और कस्बों से बस और टैक्सी की सुविधा उपलब्ध रहती है।

रेल मार्ग : विदिशा रेलवे स्टेशन से लोहंगी पर्वत 2 किलोमीटर दूर है। आप अन्य शहरों से रेल मार्ग से यहां पर आ सकते हैं और उसके बाद इस पर्वत में पैदल ही घूमने के लिए जा सकते हैं।

हवाई मार्ग : विदिशा का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा भोपाल में स्थित है। आप भोपाल में हवाई मार्ग के द्वारा आ सकते हैं और उसके बाद सड़क मार्ग के द्वारा इस स्थल पर आ सकते हैं।

लोहांगी पर्वत का गूगल मैप लोकेशन

लोहांगी पर्वत में घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit Lohangi Mountains)

लोहंगी पर्वत में घूमने का सबसे अच्छा समय ठंड का रहता है। आप यहां पर अक्टूबर से मार्च के मौसम में आ सकते हैं। अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है और प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर रहता है। इस समय आकर आप अच्छा समय बिता सकते हैं। आप यहां पर बरसात के समय भी घूमने के लिए आ सकते हैं। बरसात के समय भी यह जगह बहुत खूबसूरत लगती है।

लोहांगी पर्वत के आसपास घूमने की जगहें

यदि आप लोहांगी पर्वत की यात्रा कर रहे हैं, तो आसपास के कुछ अन्य दर्शनीय स्थल भी देख सकते हैं:

संरक्षण और जिम्मेदारी

लोहांगी पर्वत (Lohangi Mountain) जैसी प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। पर्यटकों को चाहिए कि:

  • कचरा न फैलाएं
  • प्राकृतिक संरचनाओं को नुकसान न पहुंचाएं
  • पर्यावरण का सम्मान करें

ताकि यह स्थल आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।

निष्कर्ष

लोहांगी पर्वत (Lohangi Mountain) केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और प्रकृति का सुंदर संगम है। यह स्थान हमें प्रकृति के करीब लाता है और जीवन की भागदौड़ से दूर कुछ शांत क्षण बिताने का अवसर देता है।

यदि आप प्रकृति, इतिहास और आध्यात्मिक शांति को एक साथ अनुभव करना चाहते हैं, तो लोहांगी पर्वत (Lohangi Mountain) की यात्रा अवश्य करें।

 

 

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