मंदसौर जिले में घूमने की 10 बेहतरीन जगहें | Amazing Mandsaur Tourist Places in Hindi

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मंदसौर जिले में घूमने की जगह – ऐतिहासिक, धार्मिक और प्रकृति अद्भुत संगम

मंदसौर जिला मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में स्थित एक प्रमुख जिला है। मंदसौर जिला अपने ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध है। मंदसौर जिला प्राचीन मंदिर, धार्मिक स्थल, जलप्रपात, वन्य जीव अभ्यारण, सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है।

मंदसौर में घूमने के लिए ढेर सारी पर्यटन स्थल है, जहां पर आप घूमने के लिए जा सकते हैं और अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं। अगर आप इतिहास, धर्म और प्रकृति का संगम एक ही जगह देखना चाहते हैं, तो मंदसौर जिले में घूमने की जगह (Mandsaur Tourist Places in Hindi) आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हैं।

इस लेख में हम आपको मंदसौर जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों (Mandsaur Tourist Places in Hindi), मंदसौर में घूमने का सही समय, मंदसौर कैसे पहुंचे, मंदसौर टूर प्लान, मंदसौर यात्रा टिप्स की विस्तृत जानकारी देंगे।

मंदसौर जिले का इतिहास (Mandsaur District History)

मध्य प्रदेश का मंदसौर जिला ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध रहा है। मंदसौर मालवा क्षेत्र में स्थित है और प्राचीन काल में दशपुर के नाम से जाना जाता था। मंदसौर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है। मंदसौर के इतिहास में वैदिक काल, मौर्य, शुंग, गुप्त, परमार, मुगल, मराठा और ब्रिटिश शासन की स्पष्ट छाप देखी जा सकती है। मंदसौर में मिले शिलालेख, मंदिर, किले और पुरातात्विक अवशेष इस बात का प्रमाण हैं कि मंदसौर प्राचीन भारत का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र रहा है।

प्राचीन ग्रंथों और शिलालेखों के अनुसार मंदसौर को पहले दशपुर कहा जाता था। यह नाम संभवतः दस गांवों के समूह से बना हुआ माना जाता है। गुप्त काल के दौरान दशपुर एक प्रमुख व्यापारिक और सांस्कृतिक नगर था। यहां से प्राप्त शिलालेख में रेशम बुनकर का उल्लेख किया गया है, जिससे पता चलता है कि प्राचीन समय में यहां पर रेशम का काम किया जाता था, जो इस क्षेत्र की समृद्ध अर्थव्यवस्था को दर्शाता है। दशपुर उस समय वस्त्र उद्योग का एक बड़ा केंद्र था।

मौर्य साम्राज्य के समय मंदसौर क्षेत्र सम्राट अशोक के अधीन रहा। अशोक के धम्म और बौद्ध विचारधारा का प्रभाव इस क्षेत्र में भी देखा गया। मौर्य काल के बाद शुंग वंश का शासन रहा, उनके समय हिंदू संस्कृति और धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला।

मंदसौर गुप्त काल में अपने चरम पर था। इसे भारत का स्वर्ण युग माना जाता है। गुप्त शासको के समय काल, स्थापत्य और साहित्य का व्यापक विकास हुआ। इसका यशोधर्मन का विजय स्तंभ ऐतिहासिक प्रमाण है। यह स्तंभ हूण शासक मिहिरकुल पर यशोधर्मन की विजय का प्रतीक है। यह शिलालेख भारतीय इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद, मंदसौर क्षेत्र परमार वंश के अधीन रहा। परमार शासकों ने यहां कई मंदिरों और धार्मिक स्थलों का निर्माण कराया। इस काल में शैव और वैष्णव परंपराओं का विकास हुआ। परमार वंश बाद, विभिन्न राजपूत शासकों ने इस क्षेत्र पर शासन किया, जिन्होंने किलों और रक्षा संरचनाओं का निर्माण कराया।

16वीं शताब्दी में मंदसौर मुगल साम्राज्य के अधीन आ गया। मुगल काल में यह क्षेत्र एक प्रशासनिक इकाई के रूप में विकसित हुआ। कृषि, व्यापार और सड़क मार्गों का विस्तार इसी काल में हुआ। 18वीं शताब्दी में मराठाओं ने मालवा क्षेत्र पर अधिकार किया। मंदसौर भी होल्कर और सिंधिया शासकों के प्रभाव में रहा। मराठा काल में प्रशासनिक सुधार किए गए और धार्मिक स्थलों को संरक्षण मिला।

मंदसौर की संधि भारतीय इतिहास में विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह संधि अंग्रेजों और होलकर शासको के बीच हुई, जिसके बाद मालवा क्षेत्र ब्रिटिश शासन के अधीन चल गया। यह संधि भारत में ब्रिटिश सत्ता के विस्तार का एक महत्वपूर्ण चरण मानी जाती है। ब्रिटिश शासन के दौरान मंदसौर प्रशासनिक रूप से विकसित हुआ। यहां पर सड़क, रेल और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार किए गए।

हालांकि इस काल में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का भी प्रभाव यहां देखने के लिए मिला। मंदसौर के लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई और कई स्वतंत्रता सेनानिया इस क्षेत्र से जुड़े रहे।

स्वतंत्रता के बाद भारत मंदसौर मध्य भारत राज्य का हिस्सा बना और बाद में मध्य प्रदेश राज्य में शामिल हुआ। 1956 में राज्य पुनर्गठन के बाद मंदसौर को पूर्ण जिला का दर्जा मिला। आज मंदसौर कृषि, अफीम उत्पादन, शिक्षा और व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

मंदसौर के पास घूमने के पर्यटन स्थल (Mandsaur Tourist Places in Hindi)

1. पशुपतिनाथ मंदिर मंदसौर (Pashupatinath mandir mandsaur)

श्री पशुपतिनाथ मंदिर मंदसौर जिले में घूमने के लिए एक प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थान हैं। यह मंदिर पूरे विश्व भर में अपने अद्भुत और अनोखी शिवलिंग के कारण प्रसिद्ध है। यह मंदिर मंदसौर में शिवना नदी के किनारे स्थित है। इस मंदिर में आप सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं। यह मंदिर मंदसौर रेलवे स्टेशन से 3 किलोमीटर दूर है। यहां पर आप ऑटो से या अपने वाहन से आसानी से पहुंच सकते हैं। मंदिर में सभी प्रकार की व्यवस्थाएं उपलब्ध है।

यहां पर भगवान पशुपतिनाथ जी का दुर्लभ शिवलिंग देखने के लिए मिलता है। यह शिवलिंग 8 मुखी है। यह शिवलिंग दुनिया भर में मशहूर है। इस शिवलिंग को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और भगवान शिव जी के दर्शन करते हैं। शिव भगवान जी का शिवलिंग एक बड़े पत्थर में बना है।

इस शिवलिंग का वजन 46 क्विंटल, ऊंचाई 75 फिट, और गोलाई 71 फिट है। इसमें भगवान शिव के आठ मुख देखे जा सकते हैं, जो बहुत ही सुंदर लगते हैं। यह शिवलिंग बहुत ही आकर्षक लगता है। यह मंदिर बहुत अच्छी तरह बना हुआ है। मंदिर कावातावरण सकारात्मक है। मंदिर में आकर एक अलग अनुभूति होती है।

आरती के दौरान यहां पर आपको एक अलग एनर्जी फील होगी। मंदिर परिसर काफी बड़ा एरिया है और यहां खूबसूरती से मेंटेन किया गया है। इस मंदिर में विष्णु भगवान की अलग-अलग अवतारों की पेंटिंग देखने के लिए मिल जाती है, जो बहुत ही खूबसूरत लगती है। मंदिर में आने का सबसे अच्छा समय सुबह का और शाम का है।यहां पर और आप घूम सकते हैं। महाशिवरात्रि और सावन सोमवार के समय यहां पर ढेर सारे श्रद्धालु आते हैं और भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं।

मुख्य आकर्षण:

  • आठ मुखों वाला दुर्लभ शिवलिंग
  • शिवना नदी का शांत वातावरण
  • महाशिवरात्रि पर विशाल मेला

2. यशोधर्मन संग्रहालय मंदसौर (Yashodharman Museum Mandsaur)

यशोधर्मन पुरातत्व संग्रहालय मंदसौर में घूमने की एक प्रमुख जगह है। अगर आप मंदसौर जिले के इतिहास के बारे में जानना चाहते हैं, तो आपको इस संग्रहालय में जरूर आना चाहिए और मंदसौर के इतिहास को जानना चाहिए। इस संग्रहालय में परमार वंश, मौर्य वंश, होलकर वंश की बहुत सारी और प्राचीन मूर्तियां आपको देखने के लिए मिल जाएगी।

यहां पर बहुत सारी पेंटिंग भी रखी गई है। यह संग्रहालय सोमवार को बंद रहता है। संग्रहालय खोलने का समय 10:00 से 5:00 तक है। यहां आकर आप ढेर सारी जानकारी हासिल कर सकते हैं। यह संग्रहालय बच्चों के साथ घूमने के लिए एक बढ़िया जगह है। यशोधर्मन पुरातत्व संग्रहालय मंदसौर रतलाम हाईवे रोड पर स्थित है। यहां पर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट से या अपने वाहन से आ सकते हैं।

3. यशोधर्मन विजय स्तम्भ मंदसौर (Yashodharman Vijay Pillar Mandsaur)

यशोधर्मन विजय स्तंभ या सोधनी स्तंभ मंदसौर का एक प्रमुख ऐतिहासिक स्थल है। यहां पर पत्थर से बना हुआ स्तंभ देखने के लिए मिलता है, इसे राजा यशोधर्मन ने हूणों पर जीत के बाद बनवाया था। यहां पर बहुत सारी प्राचीन प्रतिमा है, जिन्हें आप देख सकते हैं। यह हेरिटेज साइट आर्किलॉजिकल डिपार्टमेंट के द्वारा संरक्षित है। यहां पर आप सड़क मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। यह रतलाम धार हाईवे रोड सेकरीब 2 किलोमीटर दूर है। अगर आपको इतिहास में रुचि है, तो आप इस जगह अगर घूम सकते हैं।

4. गांधी सागर बांध मंदसौर (Gandhi Sagar Dam Mandsaur)

गांधी सागर बांध चंबल नदी पर बना मध्य प्रदेश का एक प्रमुख बांध है। आप यहां पर आकर प्रकृति के अद्भुत दृश्य का आनंद ले सकते हैं। यह डैम मंदसौर के भानपुरा तहसील में गांधी सागर वन्य जीव अभ्यारण के अंदर स्थित है। यहां पर सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां पर आप अपने वाहन से घूमने के लिए आ सकते हैं।

यहां पर चारों तरफ प्रकृति की सुंदर घाटियों, पहाड़ियों और जंगल का दृश्य देखने के लिए मिलता है। बरसात के समय बांध का नजारा देखने लायक रहता है। बरसात के समय डैम के गेट खोले जाते हैं, तब यह बांध बहुत ही मनोरम लगता है। इस बांध में 19 गेट बने हुए हैं। इस डैम की नींव 1954 में रखी गई थी, और 1960 तक इसका काम पूरा हो गया था।

यहां पर चंबल घाटी भी बहुत ही आकर्षक है। यहां पर आप आकर अच्छा समय बिता सकते हैं। बांध के पास में एक छोटा सा गार्डन देखने के लिए मिलता है, जहां पर वॉच टावर बना है, जिससे आप आस-पास के नजारे देख सकते हैं।

5. धर्मराजेश्वर मंदिर भानपुरा, मंदसौर (Dharmarajeshwar Temple Mandsaur)

धर्मराजेश्वर मंदिर मंदसौर के पास एक ऐतिहासिक और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर पर्यटन स्थल है। यह मंदिर मध्य प्रदेश का एलोरा माना जाता है। मंदिर को बनाने में एक बड़ी चट्टान को काटकर इस अनोखे मंदिर को बनाया गया है। पूरे ही मंदिर को तराशकर बनाया गया है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। मंदिर में गर्भगृह, सभा मंडप, अर्ध मंडप बने है। मंदिर का शिखर उत्तर भारतीय शैली में बना है।

मूल रूप से यह मंदिर विष्णु जी को समर्पित था, जिनकी प्रतिमा गर्भ गृह में विधमान है। बाद में यह शिव मंदिर में परिवर्तित किया गया था। धर्मराजेश्वर मंदिर में विष्णु भगवान जी की प्रतिमा के साथ.साथ शिव भगवान जी का शिवलिंग के भी दर्शन होते है। प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की प्रतिमा बनाई गई है।

धर्मराजेश्वर मंदिर मंदसौर के भानपुरा के पास स्थित है। यह मंदिर मंदसौर से 80 किलोमीटर चंदवासा गांव में बना है। यहां पर सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां पर आप अपने वाहन से या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से घूमने के लिए आ सकते हैं।

यह जगह बारिश के मौसम में घूमने के लिए बहुत अच्छी जगह है। धर्मराजेश्वर के मंदिर चौथी और पांचवी शताब्दी में बनाए गए थे। यहाँ पत्थर पर खूबसूरत नक्काशी भी की गई है। यह मंदिर ए एस आई के द्वारा संरक्षित है। इस जगह पर महाशिवरात्रि और सावन सोमवार के समय बहुत सारे लोग भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आते हैं।

6. होलकर छतरी भानपुरा, मंदसौर (Holkar Chhatri Bhanpura, Mandsaur)

होलकर छतरी मंदसौर के भानपुरा के पास घूमने के लिए एक प्रमुख स्थानों में से एक है। यहां पर महाराजा यशवंत राव होल्कर की छतरी बनी हुई है, जो होलकर राजा की स्मृति में बनाई गई है। यहां पर आप आसानी से सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं। यहां पर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट से या अपने वाहन से आ सकते हैं। यह छतरी बहुत अच्छी तरह से बनाई गई है।

यहां पर एक संग्रहालय और मंदिर देखने के लिए मिलता है। महाराजा यशवंत राव होल्कर ने अंग्रेज शासन को नष्ट करने के लिए, उनके विरुद्ध भानपुरा के पास में ही तोपों का कारखाना विकसित किया था, जिसमें उन्होंने 200 तोपों का निर्माण किया था। उन्होंने अंग्रेज शासन से संघर्ष के लिए एक लाख सैनिकों की टुकड़ी बनाई थी।

महाराजा यशवंत राव होल्कर की मृत्यु के पश्चात इस स्थल पर छतरी का निर्माण किया गया है। छतरी का निर्माण 1814 में शुरू हुआ था और 1841 में यह छतरी पूरी हुई है। छतरी का निर्माण उनकी पत्नी तुलसा बाई ने किया था। यहां पर महाराजा यशवंत राव की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। संग्रहालय में ढेर सारी जानकारी भी मिलती है। भानपुरा के निकटवर्ती गांव नवली और इंदरगढ़ में तोपों के कारखाने के भग्नावशेष देखने के लिए मिलते हैं।

7. हिंगलाजगढ़ किला भानपुरा, मंदसौर (Hinglajgarh Fort Bhanpura, Mandsaur)

हिंगलाज का किला मंदसौर के पास भानपुरा में घूमने के लिए प्रमुख स्थानों में से एक है। यह किला भानपुरा के पास इतिहास प्रेमी, प्रकृति प्रेमी और फोटोग्राफी करने वाले लोगों के लिए एक बढ़िया जगह है। यहां पर आकर चारों तरफ हरियाली से भारी घाटियों और घना जंगल देखने के लिए मिलता है। यहां पर आकर आप शांतिपूर्वक सुकून भरा समय बिता सकते हैं।

हिंगलाज का किला घने जंगल के अंदर है। यहां पर पहुंचने के लिए सड़क मार्ग बना हुआ है। यह जगह मंदसौर से 165 किलोमीटर और भानपुरा से 26 किलोमीटर दूर है। आप यहां सड़क मार्ग से आ सकते हैं। किले तक पहुंचाने के लिए सड़क मार्ग बना हुआ है। किले के नीचे आप अपनी गाड़ी पार्किंग में खड़ी करने के बाद किले में पैदल जा सकते हैं।

किले तक पहुंचने के लिए यहां सीढ़ियां बनी है। यह किला बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है। किले में ढेर सारे स्थल देखने के लिए मिलते हैं। यहां पर प्राचीन मंदिर, बावली, प्राचीन महल, मूर्तियां और ढेर सारी चीज देखी जा सकती है। किले के अंदर हिंगलाज माता का मंदिर बना हुआ है। यह किला बरसात और ठंड के समय घूमने के लिए बढ़िया जगह है।

8. चतुर्भुज मंदिर मंदसौर (Chaturbhuj Nala Mandsaur)

चतुर्भुज नाथ मंदिर मंदसौर के पास घूमने के लिए एक प्रमुख पर्यटन और धार्मिक महत्व का स्थान है। यह मंदिर भानपुरा के पास गांधी सागर बांध के करीब स्थित है। यह मंदिर बहुत प्राचीन है। यह मंदिर घने जंगल के अंदर बना हुआ है। यहां पर भगवान विष्णु की बहुत ही आकर्षक प्रतिमा के दर्शन करने के लिए मिलते हैं, जिसमें भगवान विष्णु विश्राम की मुद्रा में है और उनके चेहरे में हल्की सी मुस्कान है।

भगवान विष्णु की यह प्रतिमा बहुत ही अद्भुत लगती है। इस प्रतिमा के बारे में माना जाता है, कि यह दसवीं शताब्दी के आस-पास बनाई गई है। मंदिर के पास में ही एक सुंदर नदी बहती है, जो बहुत ही सुंदर लगती है। इस नदी के कारण इस जगह को चतुभुज नाला के नाम से जाना जाता है।

यह चंबल की एक सहायक नदी है। आप यहां पर आकर अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं। इस मंदिर से थोड़ा आगे, नदी के किनारे जाने पर शैलाश्रय और शैलाश्रय में बनी हुई पेंटिंग देखने के लिए मिलती है। यहां पर आप बरसात और ठंड के समय घूमने के लिए आ सकते हैं और अपना अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं।

9. तक्षेश्वर महादेव मंदिर मंदसौर (Taksheshwar Mahadev Temple)

तक्षेश्वर महादेव मंदिर मंदसौर जिले के पास घूमने के लिए प्राकृतिक और धार्मिक महत्व का स्थान है। यह मंदिर घने जंगल के अंदर बना है। यह मंदिर मंदसौर के पास भानपुरा तहसील से 22 किलोमीटर दूर हिंगलाजगढ़ रोड पर बना है। इस मंदिर में आप आसानी से सड़क मार्ग के द्वारा पहुंच सकते हैं। यहां पर आप अपने वाहन या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आ सकते हैं।

यह मंदिर नागों के राजा तक्षक को समर्पित है। कहा जाता है, कि नागों के राजा तक्षक यहां पर निवास करते हैं और उन्हें यहां पर तक्षेश्वर के रूप में पूजा जाता है। आप यहां पर आते हैं, तो आपके यहां पर जलप्रपात देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही खूबसूरत लगता है।

यह जलप्रपात नीचे कुंड में गिरता है। कुंड पर लोग नहाने का आनंद उठाते हैं। कुंड में ढेर सारी मछलियां भी है। यहां पर चारों तरफ का दृश्य बहुत ही शानदार रहता है। यहां पर वैशाख महीने की पूर्णिमा को मेले का आयोजन होता है। बरसात और ठंडी यहां पर घूमने का बहुत बढ़िया समय है।

बरसात में यहां पर चारों तरफ हरियाली देखने के लिए मिलती है और झरने में पानी की मात्रा भी बहुत ज्यादा रहती है। गर्मी के समय झरने में पानी नहीं रहता है। यह मंदसौर के पास फैमिली और दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने और शांति पूर्वक समय बिताने के लिए बढ़िया जगह है।

10. छोटा महादेव मंदिर भानपुरा, मंदसौर (Chota Mahadev Temple Bhanpura, Mandsaur)

छोटा महादेव मंदिर मंदसौर के पास घूमने के लिए एक धार्मिक स्थान है। यह मंदिर भानपुरा तहसील में बना हुआ है। यहां पर आप सड़क मार्ग से आसानी से घूमने के लिए आ सकते हैं। यह मंदिर पहाड़ों और हरे भरे दृश्य से घिरा हुआ है। यहां पर आपको शिवलिंग के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर चट्टानों का भी सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है।

बरसात के समय यहां झरना बहता है, जो चट्टानों के ऊपर से बहता है। झरने के नीचे कुंड भी बना हुआ है, जिसमें आप नहा सकते हैं। यहां पर भगवान शिव का मंदिर बना हुआ है। यहां पर काल भैरव जी, हनुमान जी, गणेश जी का मंदिर बना हुआ है। यहां पर महाशिवरात्रि के समय बहुत सारे लोग भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आते हैं।

मंदसौर में घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit Mandsaur)

मंदसौर में घूमने का सबसे अच्छा समय ठंड का रहता है। आप यहां पर यात्रा करने के लिए अक्टूबर से मार्च महीने में आ सकते हैं और मंदसौर के सभी पर्यटन स्थलों की सैर कर सकते हैं। ठंड के समय मौसम सुहावना रहता है, जिससे आप यहां पर आराम से घूम सकते हैं।

आप यहां बरसात के समय भी आ सकते हैं। बरसात के समय मंदसौर के आसपास के पर्यटन स्थल बहुत ही सुंदर लगते हैं। आप यहां पर प्राकृतिक जगह की सैर कर सकते हैं। गर्मी के समय यहां पर यात्रा करने में कठिनाई होती है।

मंदसौर कैसे पहुंचें (How to Reach Mandsaur)

सड़क मार्ग: मंदसौर में सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह अन्य शहरों से अच्छी तरह कनेक्ट है। मंदसौर उज्जैन, इंदौर, नीमच और कोटा से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। आप यहां पर बस या टैक्सी के द्वारा आराम से आ सकते हैं।

रेल मार्ग: मंदसौर रेलवे स्टेशन पश्चिम रेलवे के प्रमुख मार्ग पर स्थित है। आप यहां पर रेल मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। यहां पर सभी प्रमुख शहरों से ट्रेन आती है।

हवाई मार्ग: मंदसौर का निकटतम हवाई अड्डा इंदौर में बना है। आप इंदौर वायु मार्ग से आ सकते हैं। उसके बाद मंदसौर सड़क मार्ग के द्वारा पहुंच सकते हैं।

मंदसौर जिला का गूगल मैप लोकेशन

मंदसौर यात्रा टिप्स

  • गर्मियों में हल्के सूती कपड़े रखें
  • धार्मिक स्थलों पर मर्यादित वस्त्र पहनें
  • मानसून में नदी और बांध क्षेत्रों में सावधानी रखें

निष्कर्ष

मंदसौर जिला इतिहास, धर्म और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है। यहां के मंदिर, किले, बांध और पुरातात्विक स्थल हर प्रकार के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। अगर आप मध्य प्रदेश के किसी ऐसे जिले की खोज में हैं जहां शांति, संस्कृति और विरासत एक साथ देखने को मिले, तो मंदसौर जिले में घूमने की जगह (Mandsaur Tourist Places in Hindi) आपकी यात्रा सूची में अवश्य होनी चाहिए।

इस लेख में हमने आपको मंदसौर जिले के बारे में विस्तृत जानकारी दी है। यदि आप इस लेख में किसी भी प्रकार का बदलाव या नई जानकारी जोड़ना चाहते हैं, तो कृपया हमें कमेंट के माध्यम से बताएं। हम आपके सुझावों के अनुसार लेख को अपडेट कर देंगे।

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