नागद्वार पचमढ़ी का रहस्यमय और खूबसूरत स्थान है। नागद्वार पचमढ़ी के घने जंगलों के बीच बसा हुआ एक सुंदर और धार्मिक स्थान है। यहां पर आप साल में एक ही बार जा सकते हैं और वह नाग पंचमी का दिन है। नाग पंचमी के दिन आप जंगल के भीतर जाकर ट्रैकिंग कर सकते हैं और इस जगह में घूम सकते हैं।
आज इस लेख में हम आपको पचमढ़ी के रहस्यमई स्थल नागद्वार के बारे में बताएंगे

नागद्वार पचमढ़ी का प्राकृतिक सौंदर्य
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन पचमढ़ी में स्थित नागद्वार (Nagdwar) एक अत्यंत पवित्र, रहस्यमयी और धार्मिक स्थल है। यह स्थान भगवान शिव और नाग देवता से जुड़ी मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं में विशेष महत्व रखता है। नागद्वार (Nagdwar) न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह सतपुड़ा की पहाड़ियों, घने जंगलों और शांत वातावरण के कारण एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है। सावन मास और नाग पंचमी के अवसर पर यहाँ हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
नागद्वार पचमढ़ी (Nagdwar Pachmarhi) में घने जंगलों के बीच में स्थित एक सुंदर स्थान है। यहां पर पहुंचने के लिए ट्रैकिंग करनी पड़ती है और यहां पर पहुंचने का रास्ता बहुत ही खूबसूरत है। यह रास्ता घने जंगलों, पहाड़ियों और घाटियों से होते हुए जाता है। इस रास्ते में आपको चलकर बहुत मजा आएगा। यह एक एडवेंचरस सफर रहता है और इस सफर में आपको कई उतार-चढ़ाव देखने के लिए मिलते हैं।
नागद्वार पचमढ़ी (Nagdwar Pachmarhi) करीब आपको 10 से 12 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है और यह सफर ऐसा वैसा नहीं होता है। यह सफर जंगल का होता है। जंगल का रास्ता बेहद ही खतरनाक होता है। जंगल के रास्ते में एक तरफ खाई, तो एक तरफ खड़ी चढ़ाई देखी जा सकती है और इन मुश्किलों को पार करके आप नागद्वार मंदिर में पहुंचते हैं।
नागद्वार मंदिर (Nagdwar Mandir) अपने आप में रहस्यमय है। इस मंदिर को सांपों का मंदिर बताया जाता है और यह मंदिर साल में एक ही बार खोला जाता है। इस मंदिर में भगवान शंकर के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां प्राकृतिक रूप से बने हुए शिवलिंग और नाग देवता विराजमान है, जिनके आप दर्शन कर सकते हैं।
नागपंचमी के समय यहां पर बहुत ज्यादा भीड़ लगती है। यहां पर दर्शन करके बहुत अच्छा लगता है। नागपंचमी के समय पूरे जंगल का एरिया लोगों से भरा हुआ रहता है और यहां का दृश्य और भी शानदार रहता है। नागपंचमी सावन के महीने में पड़ती है, तो सावन के महीने में यहां पर बारिश होती है, जिससे यह सफर और भी एडवेंचरस हो जाता है।
यहां पर और भी ज्यादा मजा आता है, इसलिए अगर आप एडवेंचर करना चाहते हैं, तो आपको एक बार यहां पर जरूर यात्रा करनी चाहिए। यहां पर 10 दिनों का मेला लगता है, जिसमें आप 10 दिन में किसी भी दिन इस जगह पर यात्रा के लिए आ सकते हैं और यात्रा कर सकते हैं।
पचमढ़ी के नागद्वार की यात्रा (Trip to Nagdwar of Pachmarhi)
नागद्वार यात्रा (Nagdwar Yatra) के लिए सबसे पहले आपको पचमढ़ी आना पड़ता है। नागद्वार में यात्रा साल भर में केवल एक ही टाइम होती है और वह टाइम होता है, नाग पंचमी। आप यहां पर नाग पंचमी के टाइम में आ सकते हैं और नागद्वार की यात्रा कर सकते हैं। इस समय यहां पर 10 दोनों का मेला लगता है। इन 10 दिनों में आप कभी यहां आ सकते हैं और इस जगह की यात्रा कर सकते हैं।
नागद्वार की यात्रा बहुत ही कठिन रहती है। यह यात्रा बहुत ही एडवेंचरस रहती है, क्योंकि यह यात्रा जंगलों के बीच में होती है, जहां पर किसी भी तरह की कोई व्यवस्था नहीं होती है, इसलिए अगर आप यात्रा करने जाते हैं, तो अपने आप को पूरी तरह से प्रिपेयर करके जाएं, क्योंकि आपको वहां पर सिर्फ पैदल चलना पड़ेगा और कोई सुविधा नहीं है।
नागद्वार की यात्रा के लिए आपको पचमढ़ी आना पड़ता है। पचमढ़ी आने के लिए आप पिपरिया आ सकते हैं। पिपरिया आप बस के द्वारा या ट्रेन के द्वारा पहुंच सकते हैं। पिपरिया में रेलवे स्टेशन बना हुआ है। पिपरिया रेलवे स्टेशन के बाहर ही बस स्टैंड मिलता है, जहां से आप पिपरिया से पचमढ़ी का सफर करना पड़ता है।
पिपरिया से पचमढ़ी तक का सफर
पिपरिया से पचमढ़ी का सफर बहुत ही बढ़िया रहता है। पिपरिया से पचमढ़ी जाने वाला मार्ग बहुत ही सुंदर रहता है। इस मार्ग में आपको घुमावदार मोड़ और खूबसूरत घाटियों का दृश्य देखने के लिए मिलता है। इस सफर में आपको बहुत ही मजा आएगा। आप यहां पर पचमढ़ी रेलवे स्टेशन के बाहर आपको बस स्टैंड मिलता है, जहां पर आपको बस मिल जाती है।
बस स्टैंड में नागपंचमी के समय बहुत ज्यादा भीड़ रहती है, तो यहां पर आप जाते हैं। तो आप बस में बैठकर डायरेक्ट पिपरिया से पचमढ़ी के लिए निकल सकते हैं। पचमढ़ी जाने का रास्ता बहुत खूबसूरत है और इस समय बरसात का मौसम रहता है, इसलिए आपको पचमढ़ी के घाटियों में सुंदर जलप्रपात बहते हुए देखने के लिए मिलते हैं, जो बहुत ही सुंदर लगते हैं।
पचमढ़ी जाने वाले रास्ते में ढेर सारे दर्शनीय स्थल पढ़ते हैं, मगर नागपंचमी के समय गाड़ी नहीं रोका जाता है। गाड़ी सीधे पचमढ़ी में ही जाकर रुकी जाती है। इस समय यहां पर पुलिस भी बहुत ज्यादा लगी रहती है, जो सुरक्षा का ध्यान रखते हुए काम करती है।
पिपरिया से पचमढ़ी आप जिप्सी और टैक्सी बुक करके भी जा सकते हैं। आपको रेलवे स्टेशन के बाहर टैक्सी और जिप्सी का ऑप्शन मिल जाता है। उसके द्वारा भी आप आराम से पिपरिया पहुंच सकते हैं। बस वालों को पुलिस वाले रोक लेते हैं, मगर जिप्सी और टैक्सी को नहीं रोकते हैं। वह डायरेक्ट पचमढ़ी में ही जाकर रुकती है।
पचमढ़ी पहुंचकर, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को शहर के बाहर ही रोक दिया जाता है, क्योंकि इस समय यहां पर बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। इसलिए इन ट्रांसपोर्ट को शहर के अंदर नहीं आने दिया जाता है। आपको पचमढ़ी शहर के बाहर उतरना पड़ता है और पचमढ़ी में पैदल जाना पड़ता है।
देनवा नदी व्यूपॉइंट (Denwa River Viewpoint)
देनवा नदी पचमढ़ी में सतपुड़ा घाटियों के बीच में रहने वाली प्रमुख नदी है। देनवा नदी का उद्गम पचमढ़ी से ही होता है। यहां पर व्यू प्वाइंट बना हुआ है, जहां से आप देनवा नदी का शानदार दृश्य को देख सकते हैं। यहां पर एक मंदिर भी बना हुआ है, जहां पर भंडारा होता है।
यहां पर कई बस वाले नाग पंचमी के समय बस रुकते हैं, जिससे लोग यहां पर भंडारा भी ग्रहण कर सकते हैं और शानदार व्यू का आनंद भी ले सकते हैं। अगर आपको यहां पर मौका मिले, तो आप इस जगह पर उतरकर घाटियों को सुंदर दृश्य जरूर देखना। इस स्थान पर गाड़ियों का जमघट लगा रहता है, क्योंकि इस स्थान पर ढेर सारी गाड़ियां आकर रुकती हैं। नाग पंचमी के दौरान यहां पर बहुत ज्यादा भीड़ रहती है।

पचमढ़ी मुख्य शहर से नागद्वार तक का सफर
पचमढ़ी मुख्य शहर से नागद्वार (Nagdwar) का सफर बहुत ही रोमांचक रहता है। पचमढ़ी मुख्य शहर से नागद्वार (Nagdwar) में जाने के लिए आपको जिप्सी की सुविधा मिल जाती है। आम दिनों में यह जिप्सी पचमढ़ी के लोकल जगह को घूमने का काम करती है, मगर नाग पंचमी के समय यह जिप्सी आपको पचमढ़ी से नागद्वार और चौरागढ़ महादेव मंदिर तक ले जाती है।
इस समय किराया बहुत ही कम लगता है। 40 से ₹50 में आप नागद्वार (Nagdwar) तक पहुंच जाते हैं। नागद्वार पहुंचकर आपको पार्किंग एरिया में गाड़ी को रोक दिया जाता है और वहां से आपको पैदल चलना पड़ता है। वहां से आपके करीब 2 से 3 किलोमीटर का रास्ता पैदल तय करना पड़ता है। यह रास्ता पक्का बना हुआ है। आप आराम से यहां पर जा सकते हैं।
इस घाट से खाई का दृश्य देखने के लिए मिलता है, जिसके नीचे नदी बहती है। यहां पर अंग्रेजों के द्वारा बनाया गया पुराना पुल भी देखा जा सकता है। कई लोगों का मानना है, कि यहां पर नाग पंचमी के समय नाग नागिन का जोड़ा देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही शुभ होता है। लोग यहां पर पुल के ऊपर मन्नत का धागा बांधते हैं।
यहां पर रास्ते में ढेर सारी दुकाने हैं, जहां से आप खाने पीने का सामान ले सकते हैं। यह घाट करीब 2 से 3 किलोमीटर लंबा है। पूरी खड़ी चढ़ाई है, मगर यहां पर मजा बहुत आता है। यहां पर बादल आपके आस-पास में उड़ते हैं और बहुत ही अच्छा लगता है। लोग यहां पर बाबा भोले के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते हैं।
यहां पर आप जाते हैं, तो बरसाती भी खरीद लेना, क्योंकि यहां पर बरसात कभी भी हो सकती है। घाट को पार करने के बाद, शिव जी का मंदिर देखने के लिए मिलता है। यहां पर जंगलों का दृश्य देखते हुए आप पचमढ़ी के नागद्वार के एंट्री पॉइंट में पहुंच जाते है।
नागद्वार (Nagdwar) धूपगढ़ जाने वाले रास्ते में हैं। यहां एक जंगल का रास्ता है – जो नागद्वार की ओर जाता है और दूसरा रास्ता धूपगढ़ की ओर जाता है। धूपगढ़ जाने का रास्ता पूरा पक्का बना हुआ है। यहां पर नागद्वार का मैप भी बना हुआ है, जिससे आप समझ सकते हैं, कि इस रास्ते में कौन-कौन सी जगह पड़ेगी और कितनी दूर आपको पैदल चलना पड़ेगा।
नागद्वार की पैदल यात्रा
नागद्वार (Nagdwar) पहुंचकर, कुछ दूरी तक पक्के रास्ते से पैदल चलकर आप उसे पॉइंट पर पहुंच जाते हैं, जहां से आपको जंगल का रास्ता तय करना पड़ता है। यह रास्ता बहुत ही सुंदर है और खतरनाक दोनों ही है। इस रास्ते में आपको ऐसी ऐसी जगह देखने के लिए मिलेगी, जो आपने शायद ही कहीं देखी हो, क्योंकि यह जगह नेचर के द्वारा बनाई गई है और बहुत ही खूबसूरत है।
इस जंगल वाले रास्ते में आप थोड़ा ही अंदर जाएंगे, तो आपको पहाड़ों से गिरता हुआ एक झरना देखने के लिए मिलता है, जो कुंड में गिरता है। इस झरने का पानी कुंड में इकट्ठा होता है। यहां पर बहुत सारे लोग नहाने का आनंद उठाते हैं। यहां पर भगवान शिव का मंदिर भी बना हुआ है, जहां पर शिवलिंग विराजमान है और पहाड़ों से पानी गिरकर शिव जी का अभिषेक करता है।
नागद्वार मंदिर (Nagdwar Mandir) जाने का रास्ता बहुत पतला है और खूबसूरत है। यहां पर छोटी-छोटी पत्थर रास्ते में हैं, जिनको पार करते हुए आपको आगे बढ़ता रहता है। साथ ही साथ आपको साइड में उड़ते हुए बादल देखने के लिए मिल जाते हैं, जो बहुत ही सुंदर लगते हैं। यहां चारों तरफ हरियाली रहती है।
यहां पर नाग पंचमी के समय लोग कई टन के त्रिशूल उठाकर नाग देवता के मंदिर तक लेकर जाते हैं और अपनी मन्नत के पूरा होने पर नाग देवता को त्रिशूल अर्पित करते हैं। यहां लोग पैदल चलना बहुत मुश्किल होता है। लोग इतना वजन उठा कर चलते हैं।
इसी तरह चलते हुए आप जंगल के रास्ते से होते हुए कालाझाड या भजियागिरी तक पहुंच जाते हैं। भजियागिरी में ढेर सारी दुकान देखने के लिए मिलती है, जहां से आप खाने का सामान ले सकते हैं। यहां पर आप कुछ देर रेस्ट करके फिर से अपनी पैदल यात्रा शुरू कर सकते हैं।
नागद्वार यात्रा (Nagdwar Yatra) का रास्ता बहुत ही खूबसूरत है। यह रास्ता उबड़ खाबड़, कहीं पर बड़े-बड़े पत्थर चट्टानें देखने के लिए मिलती है, कहीं पर घना जंगल, कहीं पर गहरी घाटी, कहीं पर चढ़ाई, कहीं पर ढलान वाले रास्तों से होते हुए आप घने जंगल के अंदर जाते हैं और यहां पर जंगल का खूबसूरत दृश्य, पहाड़ियां, घाटियों, नदियां, झरने यह सभी भी देखने के लिए मिलते हैं।
साथ में बरसता हुआ पानी इस जगह को और भी ज्यादा सुंदर बनाता है। यहां पर विशाल पर्वत श्रृंखलाएं देखी जा सकती है, जो बहुत ही अद्भुत लगती है। यह बहुत ही ज्यादा एडवेंचरस रहता है। यहां घने जंगल के अंदर मेला भरता है, जिसे नागद्वार मेले के नाम से जाना जाता है। यह मेला नागपंचमी में भरता है।
नागद्वार मेला 10 दिनों तक रहता है। यहां पर तरह-तरह का सामान मिलता है। यहां पर प्रसाद भी मिलता है।यहां पर नाग पंचमी के समय भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें आपको टेस्टी खाना खाने के लिए मिलता है। यहां पर आप भंडारा ग्रहण कर सकते हैं। उसके बाद थोड़ा देर रेस्ट करके आगे की यात्रा शुरू कर सकते हैं।
यहां पर रास्ते में आपको ढेर सारे बरसाती नाली देखने के लिए मिलते हैं, जिनको पार करने के बाद, आप आगे बढ़ सकते हैं। आगे जाने पर यहां पर पहाड़ों का मनोरम दृश्य देखने के लिए मिलता है। नागद्वार पर पद्मशेष मंदिर प्रमुख है। आपके यहां पर श्री नागद्वार स्वामी मंदिर पद्मेश देखने के लिए मिलता है।
श्री नागद्वार स्वामी मंदिर पद्मेश भगवान शिव को समर्पित है। यहां पर नाग देवता और शिव भगवान जी की प्राकृतिक प्रतिमा विराजमान है, जो बहुत ही सुंदर है। यहां पर एक गुफा है। यहां पर प्राचीन प्रतिमाएं स्थापित है। आप यहां पर दर्शन के लिए जा सकते हैं। यहां पर दर्शन के लिए बहुत टाइम लगता है, क्योंकि यहां पर लंबी लाइन लगती है।
पद्मशेष मंदिर के दर्शन करने के बाद, आपको आगे बढ़ना पड़ता है। आगे का रास्ता फिर से जंगल वाला है। यहां आगे जाने पर आपको खूबसूरत झरना देखने के लिए मिलता है, जो पहाड़ों से गिरता है और बहुत ही आकर्षक लगता है। यहां पर बहुत ऊंचा पहाड़ है। यहां पर बहुत सारे लोग झरने में नहाने का आनंद भी उठाते हैं। यहां पर झरने का पानी चट्टानों के नीचे से बहता है और बहुत ही सुंदर लगता है।
यहां पर पश्चिम द्वार देखने के लिए मिलता है। पश्चिम द्वार एक मंदिर है। यहां पर एक प्राकृतिक गुफा बनी हुई है। इस गुफा में भगवान शिव जी के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यह मंदिर बहुत सुंदर है। यहां पर आकर अच्छा लगता है। इस मंदिर में जाने के लिए आपको बैठकर जाना पड़ता है। साथ ही साथ झरने का जो पानी है, गुफा के नीचे से बहुत ही तेज गति से बहता है, जो एक अलग ही एक्सपीरियंस देता है।
पश्चिम द्वार के दर्शन करने के बाद, आप आगे जा सकते हैं। आगे आपको एक पहाड़ी देखने के लिए मिलती है। यह खड़ी पहाड़ी है और इसमें एक लोहे की सीढ़ियां बनी हुई है, जिससे आपको ऊपर जाना पड़ता है और यहां पर आपको काफी ऊपर चढ़ाई करनी पड़ती है। इसके बाद आप एक गुफा में पहुंचते हैं।
इस गुफा को स्वर्ग द्वार कहा जाता है। इस गुफा की संरचना बहुत ही सुंदर है। यह गुफा बहुत ही खूबसूरत दिखती है। इस गुफा से आपको घाटियों का सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है। यह गुफा शंकर भगवान जी को समर्पित है। इस गुफा में शंकर भगवान जी के दर्शन किए जा सकते हैं। गुफा के आस-पास भंडारा बनता है, जिसको आप ग्रहण कर सकते हैं। साथ ही साथ आप यहां पर कुछ देर विश्राम करके आगे की यात्रा शुरू कर सकते हैं।
स्वर्गद्वार के दर्शन करने के बाद, आप आगे बढ़ सकते हैं। यहां पर खूबसूरत रास्ते से होते हुए आप आगे जाते हैं, तो आपको चित्रशाला मंदिर देखने के लिए मिलता है। चित्र शाला मंदिर भी प्राचीन है और बहुत सुंदर है। आप इस मंदिर के दर्शन करने के बाद आगे जा सकते हैं। रास्ते में आपको ढेर सारे झरने और प्राकृतिक सुंदरता देखने के लिए मिलती है।
यहां पर जंगल की एक अलग ही आवाज सुनाई देती है, जो बहुत सुंदर लगती है। इन सभी चीजों का आनंद लेते हुए, आप वापस भजियागिरी तक पहुंच जाते हैं। उसके बाद आप पैदल चलते हुए नागद्वार (Nagdwar) के एंट्री पॉइंट पर पहुंचते हुए पचमढ़ी आ सकते हैं। यहां पर नागपंचमी के समय दिन-रात जिप्सी चलती रहती है, जिससे आप आराम से पचमढ़ी आ सकते हैं।

नागद्वार का धार्मिक महत्व
नागद्वार (Nagdwar) को भगवान शिव के भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहाँ नाग देवता की विशेष पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यताएं
- नागद्वार में नाग देवता का वास माना जाता है
- सावन महीने में दर्शन का विशेष महत्व
- नाग पंचमी पर विशेष पूजा-अर्चना
- सर्प दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति की मान्यता
नागद्वार का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व
नागद्वार (Nagdwar) का उल्लेख कई लोककथाओं और धार्मिक मान्यताओं में मिलता है।
पौराणिक कथाएं
- यह स्थान भगवान शिव के नागों से जुड़ा हुआ माना जाता है
- कहा जाता है कि यहाँ स्वयं नाग देवता तपस्या करते थे
- नागद्वार को पाताल लोक का द्वार भी कहा जाता है
ऐतिहासिक महत्व
- आदिवासी समुदाय सदियों से यहाँ पूजा करते आ रहे हैं
- पचमढ़ी क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं में नागद्वार का विशेष स्थान है
नागद्वार के पास घूमने की जगहें
- चौरागढ़ महादेव मंदिर
- धूपगढ़
- बी फॉल
- पांडव गुफा
- बड़ा महादेव
- राजेंद्र गिरी
- जटाशंकर मंदिर
नागद्वार पचमढ़ी कैसे पहुंचें (How to reach Nagdwar Pachmarhi)
सड़क मार्ग : पचमढ़ी सड़क मार्ग से भोपाल, इटारसी और नर्मदापुरम से जुड़ा हुआ है। पचमढ़ी से नागद्वार (Nagdwar) तक स्थानीय मार्ग से पहुंचा जा सकता है। नागद्वार तक आने के लिए जिप्सी की सुविधा उपलब्ध रहती है। यहां आप नागपंचमी के समय बस आ सकते हैं।
रेल मार्ग : पचमढ़ी का निकटतम रेलवे स्टेशन पिपरिया जंक्शन (लगभग 55 किमी) है। पिपरिया रेलवे जंक्शन अन्य शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यहां पर सभी प्रमुख शहरों से ट्रेन आती है। आप यहां पर आसानी से आ सकते हैं और उसके बाद पचमढ़ी में सड़क मार्ग के द्वारा पहुंच सकते हैं।
हवाई मार्ग : पचमढ़ी का निकटतम हवाई अड्डा राजा भोज एयरपोर्ट, भोपाल है। आप यहां पर वायु मार्ग से आ सकते हैं और उसके बाद पचमढ़ी में सड़क मार्ग और रेल मार्ग के द्वारा पहुंच सकते हैं।
नागद्वार पचमढ़ी की गूगल मैप लोकेशन
नागद्वार में घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit Nagdwar)
नागद्वार (Nagdwar) में घूमने का सबसे अच्छा समय बरसात का रहता है, क्योंकि नागद्वार बरसात के समय ही लोगों के लिए खोला जाता है। नाग पंचमी के समय ही यह पब्लिक के लिए ओपन किया जाता है। यहां पर आप नाग पंचमी के समय आकर घूम सकते हैं। बाकी साल भर यह बंद रहता है, इसलिए अगर आप यहां पर घूमना चाहते हैं, तो नाग पंचमी के समय आ सकते है। बारिश में रास्ता फिसलन भरा हो सकता है
यात्रियों के लिए सुझाव
- आरामदायक जूते पहनें
- सावन में भीड़ से बचने के लिए सुबह जाएं
- जंगल क्षेत्र में नियमों का पालन करें
- बच्चों और बुजुर्गों के साथ सावधानी रखें
- प्राकृतिक और धार्मिक स्थल की मर्यादा बनाए रखें
निष्कर्ष
नागद्वार (Nagdwar), पचमढ़ी आस्था, रहस्य और प्रकृति का अद्भुत संगम है। यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन भी प्रदान करता है।
यदि आप पचमढ़ी की यात्रा कर रहे हैं, तो नागद्वार (Nagdwar) के दर्शन अवश्य करें। यह अनुभव आपकी यात्रा को आध्यात्मिक और यादगार बना देगा।
