नोहटा शिव मंदिर जिसे नोहलेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। नोहटा शिव मंदिर मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध और प्राचीन धार्मिक स्थल है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह दमोह जिले का प्रसिद्ध शिव धाम है। यह मंदिर दमोह जिले के नोहटा गांव में बना हुआ है और आसपास के एरिया में बहुत प्रसिद्ध है।
नोहटा शिव मंदिर (Nohta Shiv Mandir) प्राचीन है। इस मंदिर की दीवारों में सुंदर मूर्ति कला देखने के लिए मिलती है। इस मंदिर में आप घूमने के लिए आ सकते हैं। इस लेख में हम नोहटा शिव मंदिर (Nohta Shiv Mandir) के बारे में जानकारी देंगे

दमोह के नोहलेश्वर शिव मंदिर की यात्रा (Nohleshwar Shiva Temple Damoh Trip)
मध्य प्रदेश के दमोह जिले में स्थित नोहटा शिव मंदिर (Nohta Shiv Mandir) भारतीय स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और अपने भव्य निर्माण, विशाल परिसर और अद्भुत शिल्पकला के लिए पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में प्रसिद्ध है। यह मंदिर दमोह जिले के प्रमुख दर्शनीय और तीर्थ स्थलों में गिना जाता है।
नोहटा शिव मंदिर (Nohta Shiv Mandir) केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह मध्यकालीन भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और वास्तुकला परंपराओं को दर्शाने वाली एक महत्वपूर्ण धरोहर है। यह मंदिर दमोह जिले से 21 किलोमीटर दूर नोहटा गांव में जबलपुर हाईवे मार्ग पर बना हुआ है। यहां पर आप आसानी से सड़क मार्ग से आ सकते हैं।
नोहटा शिव मंदिर मुख्य हाईवे सड़क पर है, इसलिए यहां पर आना आसान है। यहां पर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट से भी आ सकते हैं। यह मंदिर बहुत ही भव्य तरीके से बना हुआ है। मंदिर के बाहर एक बड़ा सा गार्डन बना हुआ है। गार्डन के बीच में मंदिर बना हुआ है। मंदिर के बाहर पार्किंग के लिए एरिया है।
अगर आप अपने वाहन से आते हैं, तो गाड़ी खड़ी करके मंदिर के अंदर प्रवेश कर सकते हैं। मंदिर के बाहर आपको दुकान देखने के लिए मिलती है, जहां से आप प्रसाद वगैरा ले सकते हैं। यहां पर चाय नाश्ते की भी दुकान है, जहां से आप चाय नाश्ता कर सकते हैं।

नोहटा शिव मंदिर में प्रवेश करने पर आसपास गार्डन एरिया देखने के लिए मिलता है, जहां पर पेड़ पौधे लगे हुए हैं। मंदिर के चारों तरफ बाउंड्री बना दी गई है। यहां पर मुख्य मंदिर और की तरफ जाने का रास्ते की दोनों तरफ पेड़ पौधे लगे हुए हैं। आप मंदिर में आराम से जा सकते हैं।
मुख्य मंदिर के सामने यहां पर भगवान शिव जी विराजमान है। यहां पर काले पत्थर से बना हुआ शिवलिंग विराजमान है, जिनकी आप दर्शन कर सकते हैं। यहां पर ढेर सारे लोहे के चमीटे भी लगे हुए हैं। यहां अलग-अलग साइज के चमीटे लगे हुए हैं। शायद लोग यहां पर चमीटे भगवान शिव को चढ़ाते हैं। भगवान शिव के दर्शन करने के बाद, आप मुख्य मंदिर में जा सकते हैं। यह मंदिर चबूतरे पर बना हुआ है। चबूतरे में जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है।
सीढ़ियों से आप चढ़कर मुख्य मंदिर में जा सकते हैं। यहां पर खूबसूरत मंदिर देखने के लिए मिलता है। मंदिर में प्रवेश करने पर आपको यहां पर खंबे देखने के लिए मिलते हैं, जिनमें नक्काशी की गई है। मंदिर की छत में भी नक्काशी की गई है, यहां पर फूलों की नक्काशी की गई है, जो बहुत ही सुंदर लगती है।
यहां पर ढेर सारे देवी देवताओं की दिवार पर सुंदर नक्काशी देखने के लिए मिलती है। मंदिर का गर्भगृह बंद रहता है। उसमें ताला लगा रहता है। मंदिर का प्रवेश द्वार बहुत ही सुंदर है। गर्भगृह के चारों तरफ सुंदर नक्काशी की गई है, जो देखने लायक है। यहां पर देवी देवताओं की, फूल पत्तियों की, बेल बूटियों की सुंदर नक्काशी की गई है। आप गर्भ ग्रह को बाहर से देख सकते हैं। यहां पर लोहे का गेट लगा हुआ है, जिससे आप अंदर देख सकते हैं। अंदर ढेर सारी प्राचीन मूर्तियों को रखा गया है।
यहां पर शिवलिंग के भी दर्शन होते हैं। यहां पर और भी बेशकीमती मूर्तियों को रखा गया है। आप इन्हें बाहर से ही देख सकते हैं। पूरा मंदिर पत्थर का बना हुआ है। मंदिर में आपको मंडप, अर्ध मंडप और गर्भगृह देखने के लिए मिलता है। मंदिर की दीवारों पर सुंदर मूर्ति कला देखी जा सकती है।
मंदिर के कुछ हिस्सों को नष्ट कर दिया गया है और यह मुस्लिम शासको के द्वारा किया गया है। आप मंदिर में कुछ देर बैठ सकते हैं। उसके बाद आप अपने आगे की यात्रा को कर सकते हैं। मंदिर में महाशिवरात्रि के समय बहुत ज्यादा भीड़ लगती है। बहुत सारे लोग यहां पर दर्शन करने के लिए आते हैं।
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नोहटा शिव मंदिर का इतिहास
नोहटा शिव मंदिर (Nohta Shiv Mandir) का निर्माण कल्चुरी नरेश ने अपनी रानी नोहला के लिए करवाया था। यह मंदिर1100 साल पहले बना है। यह मंदिर नागर शैली में बना है। इसमें गर्भगृह, अंतराल, मंडप, अर्धमंडप, जगती और सीढ़ियां है। मंदिर के ऊपर एक शिखर है। शिखर के ऊपर आमलक है और आमलक के ऊपर कलश बना हुआ है।

मंदिर की स्थापत्य शैली
नोहटा शिव मंदिर (Nohta Shiv Mandir) अपनी भव्य और कलात्मक स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर नागर शैली में निर्मित है, जो चंदेलकालीन मंदिरों की प्रमुख पहचान है।
स्थापत्य की प्रमुख विशेषताएं
- ऊँचे चबूतरे पर स्थित विशाल मंदिर
- गर्भगृह, अंतराल और मंडप की स्पष्ट रचना
- ऊँचा और आकर्षक शिखर
- स्तंभों पर बारीक नक्काशी
- संतुलित और सममित संरचना
मंदिर की भव्यता इसे बुंदेलखंड के सबसे सुंदर शिव मंदिरों में शामिल करती है।
मूर्तिकला और नक्काशी
नोहटा शिव मंदिर (Nohta Shiv Mandir) की दीवारों और स्तंभों पर की गई नक्काशी चंदेलकालीन कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
यहां देखने को मिलती हैं:
- देवी-देवताओं की मूर्तियां
- शिव-पार्वती के दृश्य
- पौराणिक कथाओं के शिल्प
- ज्यामितीय और पुष्प आकृतियां
इन मूर्तियों में भाव, संतुलन और सौंदर्य अद्भुत रूप से दर्शाया गया है।

महाशिवरात्रि का भव्य उत्सव
महाशिवरात्रि के दिन नोहटा शिव मंदिर (Nohta Shiv Mandir) में भव्य मेला और धार्मिक आयोजन होते हैं। इस दिन:
- रात्रि जागरण
- भजन-कीर्तन
- शिव बारात
- विशाल भंडारा
आयोजित किया जाता है। यह पर्व पूरे दमोह जिले में विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है।
पर्यटन की दृष्टि से नोहटा शिव मंदिर
नोहटा शिव मंदिर (Nohta Shiv Mandir) आज एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं हेरिटेज टूरिज्म स्थल है। यहां:
- श्रद्धालु
- इतिहास प्रेमी
- शोधकर्ता
- फोटोग्राफर
सभी आते हैं। मंदिर का विशाल परिसर और शांत वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है।
नोहटा शिव मंदिर कैसे पहुंचें (How to Reach Nohata Shiva Temple)
सड़क मार्ग : नोहटा गांव दमोह शहर से लगभग 15–20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दमोह से टैक्सी, बस या निजी वाहन द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग : नोहटा का निकटतम रेलवे स्टेशन दमोह रेलवे स्टेशन है, जो जबलपुर, सागर, भोपाल और कटनी से जुड़ा हुआ है। आप अन्य सिटी से रेल मार्ग के द्वारा आ सकते हैं और उसके बाद सड़क मार्ग के द्वारा नोहटा गांव आ सकते हैं और मंदिर में जा सकते हैं।
हवाई मार्ग : नोहटा का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जबलपुर एयरपोर्ट है, जो दमोह से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित है। आप हवाई मार्ग के द्वारा जबलपुर आ सकते हैं और उसके बाद सड़क के द्वारा नोहटा गांव पहुंच सकते हैं।
नोहटा शिव मंदिर का गूगल मैप लोकेशन
नोहटा शिव मंदिर घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit Nohata Shiva Temple)
नोहटा शिव मंदिर (Nohta Shiv Mandir) में घूमने का सबसे अच्छा समय ठंड का रहता है। आप यहां पर ठंड में जाकर आराम से घूम सकते हैं। यहां पर आप महाशिवरात्रि और सावन के समय भी आ सकते हैं। महाशिवरात्रि और सावन का समय मंदिर में दर्शन करने के लिए शुभ रहता है। इस समय आप आकर दर्शन कर सकते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
नोहटा शिव मंदिर के आसपास दर्शनीय स्थल
- सिंगौरगढ़ का किला
- बांदकपुर
- हटा का किला
- जटाशंकर मंदिर
- निदान फॉल
- नौरादेही अभयारण्य
निष्कर्ष
नोहटा शिव मंदिर, दमोह शिवभक्ति, चंदेलकालीन स्थापत्य और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का एक अनमोल रत्न है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह मध्य प्रदेश के गौरवशाली इतिहास का भी साक्षी है।
यदि आप दमोह जिले या बुंदेलखंड क्षेत्र की यात्रा कर रहे हैं, तो नोहटा शिव मंदिर को अपनी यात्रा सूची में अवश्य शामिल करें। यहां की भव्यता, आध्यात्मिक शांति और ऐतिहासिक महत्व आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेंगे।
