मध्य प्रदेश का प्राचीन किला – रायसेन का किला : Beautiful Raisen Fort Travel guide 2026

मध्य प्रदेश का रायसेन का किला एक महत्वपूर्ण किला है। यह किला भोपाल जिले के पास रायसेन में बना है। यह किला अपनी प्राचीन विरासत, प्राकृतिक सुंदरता और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। यह किला भोपाल से करीब 40 किलोमीटर दूर रायसेन जिले में एक ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है।

रायसेन किले में आपको गौरवशाली इतिहास, युद्ध एवं बहुत सारी चीज जानने के लिए मिलती है। आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। इस लेख में हम आपको रायसेन के किले (Raisen Fort) के बारे में जानकारी देंगे

Raisen Fort
Eye catching view from Raisen Fort

रायसेन किले का ऐतिहासिक महत्व (The historical significance of Raisen Fort)

रायसेन का किला मध्य प्रदेश के भोपाल जिले के पास में स्थित है। यह किला मध्य प्रदेश की सबसे प्राचीन और मजबूत किलो में से एक गिना जाता है। यह किला विंध्य पर्वतमाला की ऊंची चोटी पर बना हुआ है। यह किला चारों ओर से प्राकृतिक सुरक्षा से घिरा हुआ है। यह लगभग 800 मीटर की ऊंचाई में स्थित है।

इसके चारों ओर खड़ी चट्टानें और घना जंगल है। किले में प्रवेश करने के लिए प्रवेश द्वार बने हुए थे, जिनमें प्राचीन समय में सिपाही रहा करते थे। किले के भीतर मंदिर, मस्जिद, जल स्रोत और प्राचीन महल देखने के लिए मिलता है। यह किला हिंदू और मुस्लिम स्थापत्य का एक अद्भुत संगम है।

इस किले का निर्माण प्रारंभ में राजा भोज के द्वारा किया गया था। इस किले का निर्माण नवमी से दसवीं शताब्दी माना जाता है। इसके बाद में किले में ढेर सारे शासको ने शासन किया है। यहां परमार, सुल्तान, मुगल और अफगान शासक ने शासन किया है। 16वीं शताब्दी में यह किला मालवा सल्तनत का महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र बना था। यह किला कई युद्ध का साक्षी रहा है। इस किले में ढेर सारी ऐतिहासिक घटनाएं घटी है, जो इस किले को और भी ज्यादा गौरवशाली बनती हैं।

Raisen Fort
One of the Temple Inside Raisen Fort

रायसेन किले की यात्रा (Trip to Raisen Fort)

रायसेन का किला मध्य प्रदेश (Raisen Fort Madhya Pradesh) का प्रसिद्ध किला है। यह किला मुख्य रायसेन जिले में स्थित है। इस किले में आप आसानी से घूमने के लिए जा सकते हैं। किले की तलहटी में आप अपना वाहन खड़ा कर सकते हैं। यहां पर तलहटी में पार्किंग है, जहां पर पार्किंग का चार्ज लिया जाता है। आप यहां पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट से भी जा सकते हैं।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट से अगर आप जाएंगे, तो आपके यहां पर करीब 2 से 3 घंटा लगेगा। यह आपके घूमने के टाइम पर डिपेंड करता है, तो अगर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट बुक करके जा रहे हैं, तो इस बात का जरूर ध्यान रखें, क्याेंकि किले में चढ़ने में ही आपको आधा घंटा लग जाएगा।

रायसेन का किला (Raisen Fort) काफी ऊंचाई पर बना हुआ है। किले में जाने के लिए दो मार्ग है। एक मार्ग सड़क का है और दूसरा मार्ग सीढ़ियों का है। आप दोनों में से किसी भी मार्ग का चयन कर सकते हैं और किले में जा सकते हैं। किले के नीचे की तरफ तलहटी में गाड़ी खड़ी करने के लिए स्टैंड बना हुआ है, जहां पर आप अपनी कार और बाइक खड़ी कर सकते हैं।

उसके बाद सीढ़ियों के द्वारा पैदल किले में जा सकते हैं। यहां पर गाड़ी करने का चार्ज लगता है। यहां पर आपको कुछ स्नैक्स की दुकान भी देखने के लिए मिलती है, जहां पर आप खाने का सामान ले सकते है। उसके बाद किले में घूमने के लिए जा सकते हैं। किले में चढ़ाई करते हुए, किले के प्रवेश द्वार देखने के लिए मिलते हैं, जो बहुत ही भव्य और शानदार लगते हैं।

प्रवेश द्वार के ऊपर, छत में जाने के लिए सीढ़ियां भी बनी हुई है। आप प्रवेश द्वार के ऊपर जा सकते हैं और ऊपर से आसपास के दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। आप धीरे-धीरे किले के ऊपर तक जाते हैं और आपको किले से आस-पास के शहर का सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है।

रायसेन किले (Raisen Fort) तक पहुंचते, यहां पर लोगों की हालत खराब हो जाती है, क्योंकि यहां पर चढ़ाई बहुत ज्यादा है। किले में अगर आप जाते हैं, तो पानी जरूर लेकर जाए, क्योंकि यहां पर किसी प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां पर बरसात और ठंड के समय घूमने की बेहतर रहेगा। गर्मी के समय यहां पर आने में बहुत दिक्कत होती है।

रायसेन किले (Raisen Fort) में प्रवेश करते ही सबसे पहले शिव मंदिर देखने के लिए मिलता है। रायसेन किले के अंदर शिव मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर को सोमेश्वर मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर में खिड़कियां बनी हुई है, जिनमें सुंदर नक्काशी की गई है। मंदिर का प्रवेश द्वार बहुत ही सुंदर है। यह मंदिर ऊंची चबूतरे पर बना हुआ है। यह मंदिर प्राचीन है। इस मंदिर का छत सपाट है। यह मंदिर चौकोर आकार में बना हुआ है। यहां पर शंकर भगवान जी के दर्शन किए जा सकते हैं। मंदिर के भीतर शिवलिंग स्थापित है।

मंदिर के दर्शन करने के बाद, मंदिर के पास ही में एक जल कुंड बना हुआ है। यह जल कुंड चौकोर आकार में बना हुआ है। यह जल कुंड वर्षा जल संरक्षण के लिए बनाया गया था। बरसात का पानी इस जल कुंड में आता है और इकट्ठा रहता है।

प्राचीन समय में यह एक अच्छी तकनीक थी। जल कुंड में नीचे उतरने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। जलकुंड को देखने के बाद, आप किले के अंदर जा सकते हैं। यहां पर आपको प्राचीन दरगाह देखने के लिए मिलती है। यह दरगाह पीरजादा शेख सलाहुद्दीन की दरगाह है।

यह दरगाह बहुत ही अच्छी तरह से बनी हुई है। आप इस दरगाह में घूम सकते हैं। पीर सलाहुद्दीन एक हिंदू राजा थे। उन्होंने इस्लाम धर्म को ग्रहण किया और अपना नाम परिवर्तित कर सलाहुद्दीन रख लिया और उसके बाद वह एक पीर के रूप में जाने गए और यहां उनके सम्मान में दरगाह का निर्माण किया गया।

इस दरगाह में कब्र देखे जा सकती है। यहां पर बहुत सारे मुस्लिम लोग आते हैं और प्रार्थना करते हैं। दरगाह के बाहर आंगन बना हुआ है। यहां पर प्राचीन तोप देखने के लिए मिलती है। दरगाह के पास में एक भूमिगत टंकी बनी हुई है, जिस पर बहुत सारे लोग आकर सिक्के डालते हैं। इस टंकी का पानी साफ रहता है और इसमें आपको बहुत सारे सिक्के देखने के लिए मिल जाएंगे।

यहां पर आपको बरादरी भी देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही सुंदर लगती है। यहां पर आपको पाइप देखने के लिए मिलते हैं, जो वर्षा जल को इकट्ठे करने के लिए लगाए गए थे। यह वर्षा जल का संरक्षण करने के लिए एक बेहतर उपाय है, जो प्राचीन समय में उपयोग किया जाता था। आंगन में छोटे-छोटे कक्ष बने हुए हैं, जो देख सकते हैं। जिनमें जालीदार खिड़कियां लगी हुई है।

रायसेन के किले (Raisen Fort) में आपको और भी बहुत सारी जगह मिलती है, जिन्हें आप एक्सप्लोर कर सकते हैं। यहां पर रानी महल देखने के लिए मिलता है, जो प्राचीन है और बहुत सुंदर है। महल का अधिकतर भाग खंडहर में तब्दील हो गया है। महल के कुछ हिस्से ही अच्छी अच्छे हैं और आप इन्हें देख सकते हैं।

यहां पर रानी महल के बाहर एक कैंटीन भी बनी हुई है, जहां पर चाय, पानी, बिस्कुट नमकीन वगैरा मिल जाता है, तो आप यहां पर स्नैक्स ले सकते हैं। महल के पास नीचे की तरफ तलहटी में आपको एक तालाब भी देखने के लिए मिलता है, जो बरसात के समय पानी से पूरी तरह भर जाता है और बहुत ही खूबसूरत लगता है। यह जगह बरसात में बहुत ही शानदार लगते हैं। आपको यहां पर बरसात में और ठंड के समय जरुर विजिट करना चाहिए और देखना चाहिए। यहां पर आकर अच्छा लगता है।

जानें : रायसेन में घूमने की 10 प्रमुख जगह

रायसेन फोर्ट का फोटो (Photo of Raisen Fort)

Raisen Fort
Beautiful View from Raisen Fort
Raisen Fort
Dargah of Pir Salahuddin inside Raisen Fort

रायसेन का किला का इतिहास (Raisen fort history in hindi)

रायसेन किले (Raisen Fort) का नाम प्राचीन समय में राजदासिनी और राज शयन अर्थात राजा का शाही निवास शब्द का अपभ्रंश है। वही जनश्रुतियों के अनुसार किले के प्रथम संस्थापक रायसिंह के नाम पर किले का नाम रायसेन का किला पड़ा। इस किले का निर्माण दसवीं से 11वीं शताब्दी में परमार शासनकाल में हुआ था। रायसेन किले का वर्तमान स्वरूप स्थानीय राजपूत शासक द्वारा निर्मित किया गया है।

तेरहवीं शताब्दी से रायसेन किला (Raisen Fort) लगातार दिल्ली के शासकों के आक्रमण का शिकार होता रहा। गुलाम वंश के शासक इल्तुतमिश ने रायसेन के किले में आक्रमण कर, 1234 में परमार शासकों से किले को छीन लिया था। सन 1293 ईसवी में दिल्ली के शासक अलाउद्दीन खिलजी का रायसेन के किले पर अधिकार हो गया था।

इसके उपरांत तुगलक शासक महमूद बिन तुगलक ने रायसेन के किले पर अधिकार कर उसे सागर मे मिला दिया। 15वीं शताब्दी में इस किले में मांडू के सुल्तान का आधिपत्य था।

रायसेन के स्थानीय शासक राजपूत थे। इनके 9 शासकों की वंशावली में सिलहदी नामक राजा सबसे अधिक लोकप्रिय था। किंतु सन 1528 में सिलहदी राजा को मांडू के किले में कैद कर लिया गया। तब रायसेन के किले पर सिलहदी राजा का भाई लक्ष्मण सेन का अधिकार हो गया। सन 1532 ईसवी में गुजरात के शासक बहादुर शाह का रायसेन किले पर अधिकार हो गया।

सन 1543 में जब इसी वंशावली का राजा पूरणमल शासन कर रहा था। तब दिल्ली के शासक शेरशाह सूरी ने 4 माह तक किले की घेराबंदी करने के बाद, किले पर अधिकार कर पाने में सफलता प्राप्त की।

सम्राट अकबर के शासनकाल में सन 1575 में यह किला मुगल साम्राज्य का सूबा बन गया। मुगल शासक औरंगजेब ने किले के स्मारक महत्व को देखते हुए किले की दीवारों की मरम्मत करवाई। मुगलों के पतन के उपरांत 18वीं सदी में यह किला भोपाल रियासत के अधीन हो गया। जल्द ही आमिर पिंडारी और फिर सन 1816 ईस्वी में अंग्रेजों द्वारा अधिकार कर लिया गया।

इस किले के ऐतिहासिक महत्व और स्थापत्य को देखते हुए भारत सरकार ने सन 1951 में इस किले को राष्ट्रीय महत्व की स्मारक घोषित किया।

रायसेन किले के अंदर घूमने वाले प्रमुख स्थान

धोबी महल (Dhobi Mahal)

रायसेन किले (Raisen Fort) के अंदर धोबी महल बना हुआ है। यह महल प्राचीन है और बहुत सुंदर है। इस महल को आप घूम सकते हैं और देख सकते हैं। यह महल राजा के कर्मचारियों के रहने के लिए बनाया गया था। यह महल पूरी तरह पत्थर से बना हुआ है और बहुत सुंदर दिखता है।

भगवान शिव का मंदिर (Raisen Fort Shiv Mandir)

भगवान शिव का मंदिर रायसेन के किले (Raisen Fort) का प्रमुख स्थान है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यह मंदिर बहुत सुंदर और प्राचीन है। इस मंदिर को सोमेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में आप घूमने के लिए जा सकते हैं। इस मंदिर की सपाट छत है और मंदिर में सुंदर स्तंभ देखे जा सकते हैं, जो बहुत ही आकर्षक है।

मोतिया तालाब

रायसेन किले (Raisen Fort) के अंदर मोतिया तालाब बना हुआ है। यह तालाब सुंदर है और प्राचीन है। इस तालाब में बरसात का पानी इकट्ठा होता था।

रानी महल

रानी महल रायसेन किले (Raisen Fort) का एक प्रमुख भाग है। यहां पर आप घूम सकते हैं और इस महल को देख सकते हैं। यहां पर प्राचीन समय में रानियां के रहने का स्थान था। वर्तमान समय में इस महल का बहुत सारा भाग खंडहर में तब्दील हो गया है, मगर यह बहुत सुंदर है।

प्राचीन दरगाह

रायसेन किले (Raisen Fort) के अंदर प्राचीन दरगाह बनी हुई है, जिसकी आप दर्शन कर सकते हैं। यह दरगाह बहुत ही सुंदर है और इस दरगाह में दर्शन करने के लिए बहुत सारे लोग आते हैं। इस दरगाह का अपना एक विशेष महत्व है।

रायसेन किला घूमने का सही समय (Best Time to Visit Raisen Fort)

रायसेन किले (Raisen Fort) में घूमने का सबसे अच्छा समय ठंड का रहता है। आप यहां पर अक्टूबर से मार्च महीने में आ सकते हैं। अक्टूबर से मार्च का महीना में यहां पर घूमने के लिए बहुत ही बढ़िया रहता है। इस समय मौसम बहुत ही अच्छा और सुहावना होता है।

आपको हर जगह हरियाली देखने के लिए मिलती है। इस समय आकर आप अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं। गर्मियों में चढ़ाई थोड़ी कठिन हो सकती है। सुबह का समय किला देखने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

रायसेन किला कैसे पहुंचें (How to Reach Raisen Fort)

सड़क मार्ग : रायसेन किले (Raisen Fort) में सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह किला मुख्य शहर में बना हुआ है। यह किला सड़क मार्ग से अच्छी तरह से कनेक्ट है। यह किला सागर भोपाल शहर से 40 किलोमीटर दूर है। आप इस किले में बस के द्वारा या अपने निजी परिवहन के द्वारा आ सकते हैं।

रेल मार्ग : रायसेन का निकटतम रेलवे स्टेशन भोपाल में बना हुआ है। आप भोपाल में अन्य शहरों से रेल मार्ग के द्वारा आ सकते हैं और उसके बाद सड़क मार्ग के द्वारा रायसेन पहुंच सकते हैं।

वायु मार्ग : रायसेन का निकटतम हवाई अड्डा भोपाल में बना हुआ है। आप भोपाल में वायु मार्ग से अन्य शहरों से आसानी से पहुंच सकते हैं और उसके बाद सड़क मार्ग के द्वारा रायसेन पहुंच सकते हैं। रायसेन शहर से टैक्सी या स्थानीय वाहन द्वारा किले तक पहुँचा जा सकता है।

रायसेन किला का गूगल मैप लोकेशन

रायसेन किले के आसपास घूमने की जगहें

इन स्थलों को रायसेन किले की यात्रा के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है।

यात्रा टिप्स

  • किले पर चढ़ते समय आरामदायक जूते पहनें
  • पानी और हल्का भोजन साथ रखें
  • बरसात में फिसलन से सावधान रहें
  • ऐतिहासिक संरचनाओं को नुकसान न पहुँचाएं

निष्कर्ष

रायसेन किला मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह किला न केवल प्राचीन युद्धों और राजवंशों की कहानी कहता है, बल्कि आज भी अपनी भव्यता से हर आगंतुक को मंत्रमुग्ध कर देता है। यदि आप इतिहास, विरासत और रोमांच में रुचि रखते हैं, तो रायसेन किला आपकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।

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