रानी कमलापति पैलेस और पार्क भोपाल : Beautiful Rani Kamlapati Palace and Park Bhopal

रानी कमलापति पैलेस और पार्क भोपाल : भोपाल की शान

रानी कमलापति महल भोपाल शहर के मध्य में स्थित एक दर्शनीय स्थल है। यह स्थल अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। यह स्थल बड़े तालाब और छोटे तालाब के मध्य में स्थित है। यहां पर आसानी से घूमने के लिए आ सकते हैं।

आज इस लेख में हम आपको भोपाल की प्रसिद्ध रानी कमलापति पैलेस और पार्क (Rani Kamlapati Palace and Park) के बारे में जानकारी देंगे।

Rani Kamlapati Palace and Park Bhopal
Rani Kamlapati Palace

रानी कमलापति कौन थी (Who was Rani Kamlapati)

रानी कमलापति का इतिहास बहुत ही रोचक रहा है। रानी कमलापति (Rani Kamlapati) एक गोंड रानी थे। रानी कमलापति के नाम पर इस महल को रानी कमलापति महल के नाम से जाना जाता है। इस महल के सामने एक पार्क बना हुआ है, जिसे कमला पार्क के नाम से जाना जाता है। रानी कमलापति सौंदर्य, साहस और आत्मसम्मान की प्रतीक थीं। इतिहास में उनका नाम एक वीर और स्वाभिमानी रानी के रूप में लिया जाता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार रानी कमलापति के पति का नाम श्री चंदन गोंड चौधरी था। वह भोपाल के निवासी थे। रानी कमलापति का स्वयंवर गिन्नौरगढ़ के निजाम शाह के साथ हुआ था। वह उनकी पत्नी थी कमलापति। वह गोंड राजवंश की अंतिम रानी थी।

रानी कमलापति (Rani Kamlapati) के बारे में कहा जाता है, कि उन्होंने पति निजाम शाह की मृत्यु के उपरांत इस महल में निवास किया। निजाम शाह 18वीं शताब्दी के आरंभिक दशकों में गिन्नौरगढ़ के शासक थे। उन्हें बाड़ी के शासक ने धोखे से जहर देकर मार दिया था। गिन्नौरगढ़ के शासक निजाम शाह की मृत्यु की उपरांत उनकी रानी कमलापति तथा पुत्र नवल शाह गिन्नौरगढ़ सुरक्षित नहीं थे।

तब रानी कमलापति (Rani Kamlapati) ने सरदार दोस्त मोहम्मद को सहायता के लिए आमंत्रित किया। अति महत्वकांक्षी दोस्त मोहम्मद अफगानिस्तान का निवासी था। भारत आने के बाद, उन्होंने स्वतंत्र सत्ता स्थापित करने के उद्देश्य से मध्य भारत की ओर कूच किया।

रानी के आमंत्रण पर दोस्त मोहम्मद ने सेना को संगठित कर बाड़ी पर हमला कर उसे जीत लिया। दोस्त मोहम्मद खान रानी कमलापति विवाह का दबाव डालने लगा, जिससे रानी कमलापति ने छोटे तालाब में कूद कर अपनी जान दे दी।

जानें : भोपाल में घूमने की जगह के बारे में

रानी कमलापति पार्क और रानी कमलापति महल की यात्रा (Trip to Rani Kamlapati Palace and Park)

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल केवल झीलों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि अपने गौरवशाली इतिहास और ऐतिहासिक इमारतों के लिए भी प्रसिद्ध है। इन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भावनात्मक स्थल है, रानी कमलापति पैलेस, जिसे रानी कमलापति के नाम से भी जाना जाता है। रानी कमलापति महल भोपाल (Rani Kamlapati Palace)की स्थापना से जुड़ा हुआ है। यह महल प्रेम और बलिदान की कहानी को समेटे हुए हैं।

रानी कमलापति महल भोपाल मध्य शहर में बना हुआ है। यहां पर आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह महल बड़े तालाब और छोटे तालाब के बीच में स्थित है। यहां पर आप सड़क मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। यहां पर महल के सामने एक बड़ा पार्क बना हुआ है, जिसे कमला पार्क के नाम से जाना जाता है।

Rani Kamlapati Palace and Park Bhopal
Rani Kamlapati Palace and Park Bhopal

रानी कमलापति महल (Rani Kamlapati Mahal) में आप अपनी बाइक या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आ सकते हैं। यहां पर आप पार्किंग में गाड़ी कर सकते हैं। पार्किंग के लिए यहां पर अच्छा स्पेस दिया गया है। गाड़ी खड़ी करके आप पार्क अंदर आते हैं, तो आपको एक सुंदर पार्क देखने के लिए मिलता है।

कमला पार्क बहुत बड़ी एरिया में फैला हुआ है और यहां पर चारों तरफ पेड़ पौधे लगे हुए हैं। यहां पर घास का मैदान है और यहां पर वॉकिंग ट्रेल बनी हुई है, जहां पर आप टहल सकते हैं। यहां पर सुबह के समय बहुत सारे लोग टहलने के लिए आते हैं। यह पार्क बहुत ही डिजाइन से बनाया गया है।

कमला पार्क के बीच में एक फव्वारा बना है, जो बहुत ही सुंदर लगता है। यहां पर एक विशाल पीपल का पेड़ लगा हुआ है, जिसमें ढेर सारे चमगादड़ आराम करते हैं। आप इन्हें दिन के समय आराम से देख सकते हैं। यह पेड़ में लटकते हुए दिख जाते हैं। कमला पार्क में ढेर सारे झूले लगे हुए हैं, जो बच्चों को बहुत पसंद आते हैं। बच्चे यहां पर इंजॉय करते हैं।

यहां पर छोटे तालाब को देखने के लिए व्यूप्वाइंट बना हुआ है, जहां से आप तालाब का सुंदर दृश्य देख सकते हैं। व्यू प्वाइंट से छोटा तालाब में बना हुआ आर्च ब्रिज देखने के लिए मिलता है, जो बहुत ही सुंदर लगता है और आर्च ब्रिज के पास में ही रानी कमलापति की मूर्ति बनी हुई है, जो बहुत ही आकर्षक लगती है।

पार्क में सुबह के समय मॉर्निंग वॉक के लिए बहुत सारे लोग घूमने लिए आते हैं। यहां पर आकर अच्छा लगता है। पार्क के किनारे में रानी कमलापति महल बना हुआ है। यह महल छोटे तालाब के पास ढलान में बना हुआ है। यह महल बहुत ही सुंदर है। यह दो मंजिला है। महल में जाने के लिए प्रवेश शुल्क लगता है।

रानी कमलापति महल 11:00 के बाद खुलता है। 11:00 बजे के बाद आप यहां पर घूम सकते हैं। रानी कमलापति महल के बाहर एक बड़ी सी तोप देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही सुंदर लगती है। महल का बाहरी हिस्से में बड़ी-बड़ी सुंदर खिड़कियां देखने के लिए मिलती हैं।

Rani Kamlapati Palace and Park Bhopal
Rani Kamlapati Park Bhopal

रानी कमलापति महल (Rani Kamlapati Mahal)के अंदर प्रवेश करने पर आपको ढेर सारी प्राचीन वस्तु में देखने के लिए मिलती हैं, जो यहां पर संभाल कर रखी गई है। रानी कमलापति महल को अब संग्रहालय में बदल दिया गया है। यहां पर ढेर सारी प्राचीन वस्तुएं देखने के लिए मिलती है, जहां से आपको इस महल के बारे में पता चलता है और इस महल की हिस्ट्री के बारे में पता चलता है।

यह महल किस तरह बना हुआ है और बड़ा तालाब और छोटा तालाब किस तरह एक दूसरे से कनेक्ट है। वह सभी चीज आप यहां पर जान सकते हैं। महल में आपको ढेर सारी प्राचीन वस्तुएं भी देखने के लिए मिलती हैं, जो राजा महाराजाओं के द्वारा इस्तेमाल की जाती थी। आप महल के निचले हिस्से में जाकर नीचे से भी महल का और छोटे तालाब के सुंदर दृश्य का आनंद ले सकते हैं।

रानी कमलापति महल का इतिहास (Rani Kamlapati Palace History )

इस महल राजा भोज द्वारा भोपाल ताल के पूर्वी प्राचीन बांध के ऊपर निर्मित किया गया था, जो की भॊजपाल के नाम से भी जाना जाता था। कालांतर में इससे वर्तमान भोपाल का प्रादुर्भाव हुआ। वर्तमान में वह भाग महल का ही एक भाग था, जो सन 1722 में गिन्नौरगढ़ के शासक निजाम शाह की विधवा रानी कमलापति द्वारा बनवाया गया था।

इस स्थान के पश्चिमी छोर के समीप स्थित पहाड़ी पर फतेहगढ़ किले के अवशेष है, जिसे भोपाल के प्रथम शासक सरदार दोस्त मोहम्मद खान द्वारा निर्मित करवाया गया था, जिन्हें आधुनिक भोपाल की स्थापना का श्रेय जाता है।

यह नगर में18वीं सदी में निर्मित तत्कालीन राजकीय स्थापत्य कला का प्रारंभिक एवं सर्वोत्तम उदाहरण माना गया है। इस दो मंजिले महल के निर्माण में लाखोरी ईटों का प्रयोग किया गया है, जिसका ऊपरी भाग मेहराबों तथा कमल की पंखुड़ियां से अलंकृत स्तंभों पर आधारित है।

महल के सामने की ओर छज्जे बनाए गए हैं। इस महल को पुरातत्व स्मारक के रूप में भारत सरकार द्वारा सन 1989 में अभिरक्षित घोषित किया गया एवं तभी से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इसकी देखभाल कर रहा है।

Rani Kamlapati Palace and Park Bhopal
Lot of Trees in Rani Kamlapati Park Bhopal

रानी कमलावती पैलेस और पार्क में घूमने का सही समय (Best Time to Visit Rani Kamalavati Palace and Park)

रानी कमलापति पैलेस और पार्क (Rani Kamlapati Mahal and Park)साल भर खुला रहता है। आप साल भर में कभी भी यहां पर आकर घूम सकते हैं। वैसे पर्यटकों के लिए ठंड का समय बहुत अच्छा रहता है। यहां घूमने के लिए ठंड के समय आप किसी भी समय यहां पर घूम सकते हैं। अगर आप गर्मी के समय आ रहे हैं, तो आप सुबह और शाम के समय यहां पर आकर घूम सकते हैं। शाम के समय भी यहां पर बहुत अच्छा लगता है।

रानी कमलावती पैलेस कैसे पहुँचे (How to Reach Rani Kamalavati Palace)

सड़क मार्ग : रानी कमलापति पार्क (Rani Kamlapati Park)सड़क मार्ग के द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यह पार्क मुख्य शहर में बना हुआ है। यहां पर आप भोपाल शहर के किसी भी कोने से ऑटो, रिक्शा से या बैटरी रिक्शा से आराम से पहुंच सकते हैं।

रेल मार्ग : कमलापति पैलेस का निकटतम रेलवे स्टेशन भोपाल जंक्शन है। भोपाल जंक्शन से यह पार्क और पैलेस 3 किलोमीटर दूर है। आप भोपाल जंक्शन से इस पैलेस में बैटरी रिक्शा या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आसानी से पहुंच सकते हैं।

हवाई मार्ग : भोपाल में राजा भोज हवाई अड्डा बना हुआ है। अगर आप किसी अन्य शहर से इस पैलेस में घूमने के लिए आ रहे हैं, तो आप भोपाल आ सकते हैं और उसके बाद टैक्सी की सर्विस लेकर इस पैलेस तक आ सकते हैं।

रानी कमलापति पैलेस के गूगल मैप लोकेशन

आसपास घूमने की जगहें

  1. ऊपरी झील (भोजताल)
  2. मनुआभान की टेकरी
  3. चिनार पार्क भोपाल
  4. कोलार बांध सीहोर
  5. भारत भवन
  6. वन विहार नेशनल पार्क
  7. गुफा मंदिर लालघाटी

निष्कर्ष

रानी कमलावती पैलेस (Rani Kamlapati Palace)भोपाल के इतिहास का वह अध्याय है, जो प्रेम, सम्मान, त्याग और संघर्ष की भावना से भरा हुआ है। यह महल हमें याद दिलाता है कि इतिहास केवल राजाओं और युद्धों का नहीं, बल्कि साहसी नारियों और उनके आत्मसम्मान का भी होता है। भोपाल यात्रा के दौरान यदि आप इतिहास और संस्कृति को करीब से समझना चाहते हैं, तो रानी कमलावती पैलेस का भ्रमण अवश्य करें।

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