शाजापुर जिले में घूमने की जगह – Shajapur travel guide in Hindi
शाजापुर मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में स्थित एक प्रमुख जिला है। यह जिला ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। शाजापुर जिले का प्राचीन काल में शाहजहांपुर के नाम से जाता जाना जाता था। इसका नाम धीरे-धीरे बदलकर शाजापुर हो गया।
इस लेख में हम शाजापुर में घूमने की प्रमुख पर्यटन स्थलों (Shajapur Tourist Places in Hindi) के बारे में जानकारी देंगे, जहां पर जाकर आप अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं। यह जिला अपनी धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक इमारतें, नदियों, मंदिरों और शांत ग्रामीण वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। शाजापुर उन यात्रियों के लिए बेहतरीन स्थल है, जो कम भीड़ वाली, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा करना चाहते हैं।
इस लेख में, शाजापुर जिले में घूमने की प्रमुख जगह (Shajapur Tourist Places in Hindi), शाजापुर कैसे पहुंचे, शाजापुर में घूमने का सही समय, शाजापुर टूर प्लान, शाजापुर ट्रैवल प्लान के बारे में विस्तार पूर्वक जानेगे।
शाजापुर जिले का इतिहास (Shajapur District history in Hindi)
शाजापुर मध्य प्रदेश के मालवांचल में स्थित एक प्रमुख जिला है। यह जिला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है। जिला अपने प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल और गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। शाजापुर क्षेत्र का इतिहास प्राचीन भारत से जुड़ा हुआ माना जाता है। यह क्षेत्र कभी अवंतिका जनपद का हिस्सा हुआ करता था।
मालवा क्षेत्र प्राचीन समय से ही शिक्षा, व्यापार और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां से प्राप्त पुरातात्विक अवशेष इस बात के प्रमाण हैं कि यह क्षेत्र मानव सभ्यता के पहले ही विकसित हो चुका था।
मौर्य काल में शाजापुर क्षेत्र मगध साम्राज्य के प्रभाव में रहा। सम्राट अशोक के शासनकाल में बौद्ध धर्म का व्यापक प्रचार प्रसार हुआ। मालवा क्षेत्र में बौद्ध विहार और स्तूपों का निर्माण हुआ, जिनका प्रभाव शाजापुर क्षेत्र में भी देखने मिलता है। यह क्षेत्र प्रशासनिक व्यवस्था और शांति के लिए जाना जाता है।
गुप्त काल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग माना जाता है। इस काल में कला, साहित्य, विज्ञान और स्थापत्य का अत्यधिक विकास हुआ। मध्यकाल में शाजापुर क्षेत्र विभिन्न राजवंशों के अधीन रहा है। यह क्षेत्र कभी परमार शासको के नियंत्रण में रहा, तो कभी चंदेल शासको के नियंत्रण में रहा है। परमार शासको ने मलवा को अपनी राजधानी बनाकर, इसे सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से समृद्ध किया है।
बाद में यह क्षेत्र दिल्ली सल्तनत के अधीन आया। शाजापुर जिले का नाम, मुस्लिम काल में प्रसिद्ध सूफी संत शहाबुद्दीन के नाम पर पड़ा, जिनकी दरगाह आज भी श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। मुगल काल में शाजापुर मालवा सूबे का हिस्सा रहा। अकबर ने यहां पर प्रशासनिक सुधार के माध्यम से इस क्षेत्र को सुधार किया।
इस समय कृषि, व्यापार और शहरीकरण को बढ़ावा मिला। मुगलकालीन स्थापत्य और सांस्कृतिक प्रभाव आज भी जिले के कई हिस्सों में दिखाई देते हैं।
18वीं शताब्दी में शाजापुर मराठों के अधीन आ गया। सिंधिया और होलकर शासकों के बीच मालवा क्षेत्र को लेकर संघर्ष होता रहा। मराठा काल में राजस्व व्यवस्था को मजबूत किया गया और स्थानीय प्रशासन में परिवर्तन हुए।
ब्रिटिश काल के समय शाजापुर ग्वालियर रियासत का हिस्सा था। ब्रिटिश शासनकाल में यहां रेलवे, सड़क और प्रशासनिक राज्यों का विकास हुआ। किसान और आम जनता पर राजस्व व्यवस्था के द्वारा कर भारी मात्रा में लगाया गया, जिससे आम जनता त्रस्त हो गई, जिससे असंतोष भी उत्पन्न हुआ।
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में शाजापुर के लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यहां पर स्थानीय नेता और स्वतंत्रता सेनानियों ने यहां जन जागरूकता फैला कर, अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया है।
भारत की स्वतंत्रता के बाद, शाजापुर मध्य भारत राज्य का हिस्सा बना। 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश राज्य के गठन के बाद, यह एक जिला बना। इस जिले को प्रशासनिक और सामाजिक विकास को नई दिशा मिली। आज शाजापुर जिला कृषि प्रधान है। यहां पर गेहूं, सोयाबीन, चना, प्रमुख फैसले हैं। यह शहर धार्मिक, ऐतिहासिक और शांत ग्रामीण जीवन शैली की पहचान है।
शाजापुर जिले के आसपास घूमने की प्रमुख जगह (Shajapur Tourist Places in Hindi)
मां राजराजेश्वरी मंदिर शाजापुर (Maa Rajarajeshwari Temple)
मां राजराजेश्वरी मंदिर शाजापुर के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थानों में से एक है। यह मंदिर प्राचीन है। इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। माना जाता है, की इस मंदिर का निर्माण राजा भोज के शासनकाल में दसवीं शताब्दी में किया गया था। मुगल बादशाह शाहजहां ने भी इस मंदिर का विकास करवाया था।
ग्वालियर के सिंधिया परिवार ने इस मंदिर के विकास के योगदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मंदिर में नवरात्रि के समय विशाल मेले का आयोजन होता है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। यह मंदिर शाजापुर मुख्य शहर में बना हुआ है।
मां राजराजेश्वरी मंदिर नेशनल हाईवे 47 में चिल्लर नदी के किनारे बना है। यहां पर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट से या बस के द्वारा आ सकते हैं और मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। मंदिर परिसर बहुत अच्छा है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में माँ राजेश्वरी की बहुत ही सुंदर प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो बहुत आकर्षक है।
यहां माँ की मूर्ति बहुत ही सुंदर है। मूर्ति की ऊंचाई करीब 6 फिट है। मूर्ति देखने में बहुत ही आकर्षक लगती है। अगर आप शाहजहांपुर आ रहे हैं, तो आप इस मंदिर में जरूर आएं और मां राजराजेश्वरी के दर्शन करें। मंदिर परिसर में और भी मंदिर बने हुए हैं, जहां पर आप दर्शन कर सकते हैं। यहां पर भगवान विष्णु जी, शनि देव जी, भगवान गणेश जी, सूर्य देव जी, हनुमान जी और भगवान शंकर जी का मंदिर बना है।
मुख्य आकर्षण
- माता राजराजेश्वरी की प्राचीन प्रतिमा
- नवरात्रि में भव्य मेले
- दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु
- शांत और आध्यात्मिक वातावरण
प्राचीन किला शाजापुर
प्राचीन किला शाजापुर मुख्य शहर में स्थित एक ऐतिहासिक स्थान है। यह किला चिल्लर नदी के किनारे मुख्य शहर में बना है। यहां पर आप आसानी से घूमने के लिए आ सकते हैं और किले को देख सकते हैं। किले में देखने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। मगर आप इसकी प्राचीन दीवारें, मजार और किले अवशेष देखने लायक है।
वर्तमान समय में किले के अंदर एक स्कूल बना है और अन्य परिसर बने हुए हैं। इस किले के बारे में कहा जाता है, कि मुगल बादशाह शाहजहां एक बार शाहजहांपुर आए थे और उनके ठहरने के लिए इस किले का निर्माण किया गया था।
जानें : अमरकंटक में घूमने की जगह
माधवराव सिंधिया उद्यान
माधव राज सिंधिया उद्यान शाजापुर में घूमने के लिए एक सुंदर और प्रसिद्ध गार्डन है। यह गार्डन शाजापुर मुख्य शहर में चिल्लर नदी के किनारे बना है। इस गार्डन में आप आसानी से सड़क मार्ग से आ सकते हैं। यह गार्डन बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है। इस गार्डन में देखने के लिए और करने के लिए बहुत सारी एक्टिविटी है, जिनका आप आनंद उठा सकते हैं।
यहां पर शाम के समय बहुत सारे लोग घूमने लिए आते हैं, क्योंकि शाम के समय चिल्लर नदी का दृश्य बहुत ही सुंदर लगता है और पार्क रोशनी से जगमगा उठता है। पार्क में घास का मैदान और हरे भरे पेड़ पौधे देखने के लिए मिलते हैं। गार्डन के आसपास ढेर सारे मंदिर बने हुए हैं, जहां पर आप घूमने के लिए जा सकते हैं। यहां पर शनि देव मंदिर, शिव मंदिर और मारुति नंदन मंदिर बने हुए हैं, जहां पर आप घूम सकते हैं।
श्री हनुमान मंदिर मुरादपुरा
श्री हनुमान मंदिर शाजापुर का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है। यह मंदिर शाजापुर के पास मुरादपुरा में बना है। इस मंदिर में आप आसानी से घूमने के लिए आ सकते हैं। यह मंदिर बहुत सुंदर है। इस मंदिर में हनुमान जी का बाल रूप का दर्शन करने के लिए मिलता है। मंदिर का परिसर आध्यात्मिक और प्राकृतिक है। यहां पर जाकर शांति का एहसास होता है। यहां पर मंगलवार और शनिवार के दिन बहुत सारे श्रद्धालु हनुमान जी के दर्शन करने के लिए आते हैं।
चिल्लर बांध शाजापुर (Chillar Dam Shajapur)
चिल्लर बांध शाजापुर के पास घूमने का एक मुख्य आकर्षण स्थल है। इस बांध को शाजापुर बांध के नाम से भी जाना जाता है। यह बांध शाजापुर मुख्य शहर से करीब चार से पांच किलोमीटर दूर है। यहां पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट, बाइक और कार से आराम से आ सकते हैं।
चिल्लर बांध बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है। बांध के चारों तरफ प्रकृतिक दृश्य देखा जा सकता है। बांध का सबसे अच्छा दृश्य बरसात के समय देखने के लिए मिलता है। जब बांध पानी से पूरी तरह भर जाता है और इसका पानी ओवरफ्लो होकर बहता है, तब बांध बहुत ही मनोरम लगता है। बांध के पास एक पार्क भी बना हुआ है, जहां पर झूले उपलब्ध है। इस बांध से सूर्योदय और सूर्यास्त का सुंदर दृश्य देखा जा सकता है।
नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर शाजापुर (Neelkantheshwar Mahadev Temple Shajapur)
नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर शाजापुर मुख्य शहर में एक प्रमुख धार्मिक स्थान है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। यह शाजापुर में शिव भक्तों के लिए एक पवित्र धाम है। यह मंदिर चिलर नदी के किनारे बना हुआ है। इस मंदिर में आप आसानी से सड़क मार्ग से आ सकते हैं।
मंदिर के आस-पास का वातावरण सुंदर है और पेड़ पौधों से घिरा हुआ है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में शिवलिंग के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर सावन सोमवार और महाशिवरात्रि के समय बहुत सारे लोग दर्शन करने लिए आते हैं।
जानें : अशोकनगर में घूमने की जगह
भैरव टेकरी शाजापुर
भैरव टेकरी शाजापुर के पास घूमने के लिए एक बहुत ही बढ़िया जगह है। यह नेशनल हाईवे 52 के पास में स्थित है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर बना है। मंदिर में जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। यह मंदिर भैरव बाबा जी को समर्पित है। इस मंदिर में आप आकर चारों तरफ का प्राकृतिक दृश्य देख सकते हैं।
यहां पर चारों तरफ हरियाली और पहाड़ी की सुंदरता देखने के लिए मिलती है। यहां पर भैरव बाबा की भी बहुत सुंदर मूर्ति विराजमान है। यह मंदिर मुख्य शहर से करीब 3 किलोमीटर दूर है। यहां पर हर साल मेले का आयोजन किया जाता है। मंदिर से चारों तरफ का बहुत ही मनोरम दृश्य देखने के लिए मिलता है। बरसात के समय ये जगह और भी आकर्षक लगती है।
करेड़ी माता मंदिर शाजापुर (Karedi Mata Mandir)
करेड़ी माता मंदिर शाजापुर के पास एक प्रसिद्ध और ऐतिहासिक महत्व का स्थान है। यह मंदिर शाजापुर से 10 किलोमीटर दूर करेड़ी गांव में बना हुआ है। यह मंदिर प्राचीन है। करेड़ी माता को कंकावती माता के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में आप आसानी से घूमने के लिए आ सकते हैं।
इस मंदिर का संबंध महाभारत काल से माना जाता है। माना जाता है, कि महाभारत काल के कर्ण, जो एक योद्धा थे। यह उनकी कुलदेवी थी। यह मंदिर बहुत अच्छी तरह से बना है। मंदिर के गर्भगृह में करेड़ी माता के बहुत ही सुंदर प्रतिमा के दर्शन करने के लिए मिलते हैं।
मंदिर में ढेर सारी पुरानी मूर्तियों का संग्रह है, जिन्हें आप देख सकते हैं। इस मंदिर में दूर-दूर से लोग माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। रंग पंचमी के दौरान यहां पर मेले का आयोजन होता है। मंदिर में ढेर सारे मूर्तियां हैं, जिनमें नाग चिन्ह बने हुए हैं।
रानी रूपमती एवं बाज बहादुर का मकबरा शाजापुर (Rani Roopmati and Baz Bahadur’s Tomb, Shajapur)
रानी रूपमती एवं बाज बहादुर का मकबरा शाजापुर के पास सारंगपुर में घूमने के लिए प्रमुख स्थानों में से एक है। यह मकबरा सारंगपुर मुख्य शहर से थोड़ी दूरी पर बना हुआ है। इस स्थल पर आने के लिए सड़क मार्ग बना हुआ है। आप यहां बाइक और कार से आराम से आ सकते हैं। यह मकबरा बहुत अच्छी तरह बना है।
इस मकबरे का संरक्षण भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा किया जा रहा है। रानी रूपमती और बाज बहादुर की प्रेम कहानी बहुत ही प्रसिद्ध है। मुगल बादशाह अकबर ने रानी रूपमती की सुंदरता और उनके गीत गायन कला को देखकर उन्हें दिल्ली दिल्ली भेजने की मांग की थी। तब बाज बहादुर और अकबर की सेना के बीच युद्ध हुआ था और बाज बहादुर को हार का सामना करना पड़ा।
जब रानी रूपमती यह पता चला है, तब उन्होंने जहर खा लिया। सम्राट अकबर को यह पता चला तब उन्हें बहुत दुख हुआ और तब उन्होंने सारंगपुर में इस मकबरे का निर्माण किया और रानी रूपमती को यहां पर दफन किया। कुछ सालों बाद, सुल्तान बाज बहादुर की मृत्यु के पश्चात उन्हें भी यहां पर दफन कर दिया गया।
जैन मंदिर मक्सी शाजापुर
जैन मंदिर शाजापुर के पास घूमने के लिए एक प्रमुख जैन स्थल है। यह मंदिर शाजापुर के मक्सी में बना हुआ है। इस मंदिर में आप आसानी से सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं। यह मंदिर प्राचीन है। यह मंदिर 1416 ईस्वी में बनाया गया था। इस मंदिर का निर्माण तत्कालीन मांडवगढ़ राज्य के कोषाध्यक्ष संग्राम सोनी ने करवाया था।
यहां पर भगवान तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ जी की प्राचीन प्रतिमा के दर्शन करने के लिए मिलते हैं, जो बहुत सुंदर है। पूरा मंदिर पत्थर से बना है। मंदिर की दीवारों में सुन्दर नक्काशी की गई है, जो देखने लायक है।
इस मंदिर में आदिनाथ भगवान जी के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। आप यहां पर आ सकते हैं और मंदिर में घूम सकते हैं। मंदिर के पीछे की तरफ तालाब बना है, जहां पर आप जा सकते हैं। मंदिर में आने का एक टाइमिंग है, जिसमें आकर आप मंदिर में घूम सकते हैं।
श्री कपिलेश्वर महादेव मन्दिर शाजापुर (Kapileshwar Mahadev Mandir )
श्री कपिलेश्वर महादेव मंदिर शाजापुर के पास सारंगपुर में घूमने के लिए प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह मंदिरसारंगपुर में काली सिंध नदी के बीच में बना है। मंदिर में आप आसानी से सड़क मार्ग से आ सकते हैं। मंदिर परिसर बहुत बड़े एरिया में फैला है। यह मंदिर सारंगपुर नगर के बाहरी क्षेत्र में स्थित है। यहां पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के द्वारा आराम से पहुंचा जा सकता है।
कपिलेश्वर महादेव मंदिर काली सिंध नदी के बीच में बना है। इस मंदिर में आप पुल के माध्यम से जा सकते हैं और मंदिर में भगवान शिव के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर आप नवग्रह के भी दर्शन कर सकते हैं। मंदिर के पास में ही गौशाला देखने के लिए मिलती है, जहां पर गायों को सेवा की जाती है। मंदिर के पास में ही गार्डन बना हुआ है, जहां परआप अच्छा समय बिता सकते हैं।
शाजापुर घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit Shajapur)
शाजापुर में घूमने का सबसे अच्छा समय ठंड का रहता है। आप यहां पर अक्टूबर से मार्च महीने के बीच में आ सकते हैं और शाजापुर के सभी पर्यटन स्थलों की सैर कर सकते हैं। ठंड के समय मौसम सुहावना और अच्छा रहता है, जिससे यहां पर घूमने में कोई भी दिक्कत नहीं होती है। आप यहां पर बरसात के समय भी घूमने के लिए आ सकते हैं।
शाजापुर कैसे पहुँचे (How to reach Shajapur)
सड़क मार्ग : शाजापुर में सड़क मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। शाजापुर उज्जैन, इंदौर और भोपाल से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यहां पर बस और अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आ सकते हैं।
रेल मार्ग : शाजापुर रेलवे स्टेशन प्रमुख रेल मार्ग पर स्थित है। यहां पर सभी प्रमुख शहरों से ट्रेन आती है। आप यहां पर ट्रेन के माध्यम से आसानी से आ सकते हैं।
हवाई मार्ग : शाजापुर का निकटतम हवाई अड्डा इंदौर और भोपाल में बना है। आप अपनी सुविधा अनुसार वायुमार्ग से इंदौर या भोपाल में आ सकते हैं और उसके बाद सड़क के द्वारा शाजापुर आ सकते हैं।
शाजापुर का गूगल मैप लोकेशन
शाजापुर जिले का प्रसिद्ध भोजन
शाजापुर जिले के भोजन में मालवा क्षेत्र की खास झलक देखने को मिलती है।
ज़रूर चखें
- दाल-बाफला
- सेव-परमल
- कचौरी
- घेवर और मालपुआ
शाजापुर जिले में ठहरने की सुविधा
- बजट होटल
- धर्मशालाएँ
- गेस्ट हाउस
शाजापुर पर्यटन क्यों खास है?
- प्रसिद्ध शक्तिपीठ
- मालवा की संस्कृति
- ऐतिहासिक धरोहर
- शांत और धार्मिक वातावरण
निष्कर्ष
शाजापुर जिला मध्य प्रदेश का एक ऐसा पर्यटन स्थल है जहाँ धार्मिक आस्था, इतिहास और मालवा संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिलता है। यदि आप शांत, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो शाजापुर जिले में घूमने की जगह आपकी लिस्ट में अवश्य होनी चाहिए।
