श्योपुर जिले में घूमने की जगह – कूनो नेशनल पार्क, ऐतिहासिक धरोहर और प्राकृतिक सौंदर्य
श्योपुर मध्य प्रदेश के उत्तर पश्चिमी भाग में स्थित प्रमुख जिला है। यह जिला ग्वालियर चंबल संभाग का एक महत्वपूर्ण जिला है। यह जिला अपने प्राकृतिक सौंदर्य और वन्य जीवन के लिए प्रसिद्ध है। श्योपुर जिले की सबसे बड़ी पहचान कूनो नेशनल पार्क है जहां एशियाई चीते को बसाया गया है।
इस लेख में हम श्योपुर जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों (Sheopur Tourist Places in Hindi) के बारे में जानकारी देंगे, जहां जाकर आप अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं। अगर आप प्रकृति, जंगल, वन्यजीव और शांत वातावरण पसंद करते हैं, तो श्योपुर जिले में घूमने की जगह (Sheopur Tourist Places in Hindi) आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है।
इस लेख में श्योपुर में घूमने की प्रमुख जगह (Sheopur Tourist Places in Hindi), श्योपुर कैसे पहुंचे, श्योपुर में घूमने का सही समय, श्योपुर टूर प्लान, श्योपुर यात्रा सुझाव के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी मिलेगी।
श्योपुर जिले का इतिहास (Sheopur District History in Hindi)
श्योपुर जिला मध्य प्रदेश के उत्तर पश्चिमी भाग में स्थित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिला है। यह जिला चंबल अंचल का हिस्सा है। श्योपुर जिले का इतिहास प्राचीन भारत से जुड़ा हुआ है। यह क्षेत्र कभी मत्स्य, अवंति और बाद में मालवा जनपदों के प्रभाव में रहा।
चंबल नदी और उसकी सहायक नदियों के कारण यह क्षेत्र मानव के रहने के लिए उपयुक्त रहा है। यहां पर प्राप्त पुरातात्विक अवशेष, प्राचीन सिक्के और स्थापत्य के प्रमाण इस क्षेत्र की प्राचीनता को दर्शाते हैं। मध्यकाल में श्योपुर विभिन्न राजवंशों के अधीन रहा।
इस क्षेत्र पर परमार, तोमर और बाद में चंदेल शासकों का प्रभाव रहा। श्योपुर का किला इस बात का प्रमाण है कि यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था। 16वीं शताब्दी में श्योपुर मुगल साम्राज्य के अधीन आ गया और इसे ग्वालियर सूबे का हिस्सा बनाया गया। मुगल शासनकाल में यहां प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया गया और कृषि व व्यापार को बढ़ावा मिला।
18वीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य के पतन के बाद, यह क्षेत्र मराठाओं के निरंतर में आ गया। सिंधिया शासको ने यह अपना प्रभुत्व स्थापित किया। मराठा काल में क्षेत्र ग्वालियर रियासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। इस दौरान राजस्व व्यवस्था को मजबूत किया गया।
ब्रिटिश शासनकाल में श्योपुर ग्वालियर रियासत के अंतर्गत रहा। ब्रिटिश शासक ने यहां प्रशासनिक ढांचे, न्याय व्यवस्था और यातायात के साधनों का विकास किया। हालांकि यहां पर कर की कठोर व्यवस्था और शोषण के कारण जनता का हाल बेहाल था। चंबल अंचल का यह क्षेत्र बाद में डकैतों की समस्या के लिए जाना जाता है।
श्योपुर जिले के लोगों ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया है। यहां के स्थानीय नेता और समाजसेवियों ने अंग्रेजों के विरुद्ध जन जागरण किया है और भारत को स्वतंत्रता कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारत की आज़ादी के बाद श्योपुर मध्य भारत राज्य का हिस्सा बना और 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश राज्य के गठन के साथ यह क्षेत्र मध्य प्रदेश में शामिल हुआ। 1998 में श्योपुर को एक स्वतंत्र जिला बनाया गया। जिला बनने के बाद शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और प्रशासनिक सुविधाओं में सुधार आया।
आज श्योपुर जिला कृषि, वन संपदा और पर्यटन के लिए जाना जाता है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान जिले की पहचान है, जिसने श्योपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई है। साथ ही यह जिला अपने ऐतिहासिक किले, मंदिरों और सांस्कृतिक परंपराओं के कारण भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
श्योपुर जिले में घूमने की प्रमुख जगहें (Sheopur Tourist Places in Hindi)
1. कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park)
कूनो नेशनल पार्क मध्य प्रदेश का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है और पूरे भारत में अपनी अलग पहचान रखता है। यह पार्क मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यान है, जो भारत में एशियाई चीता पुनर्वास परियोजना के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह पार्क श्योपुर और मुरैना जिले में फैला हुआ है।
इस पार्क में ढेर सारे वन्य जंगली जीव एवं पेड़ पौधों की प्रजातियां देखने के लिए मिलती है। इस पार्क में आप टिकतौली गेट से प्रवेश कर सकते हैं और पार्क में सफारी का आनंद उठा सकते हैं। पार्क के अंदर ठहरने के लिए विश्राम स्थल भी बना हुआ है, जहां पर आप ठहर सकते हैं।
इस पार्क का नाम कूनो नदी के नाम पर रखा गया है और चंबल अंचल का हिस्सा है। यह नदी इस राष्ट्रीय उद्यान के बीचों बीच से बहती है। पहले इसे कूनो वाइल्डलाइफ सेंचुरी के नाम से जाना जाता था, जिसे वर्ष 2018 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला।
कूनो नेशनल पार्क का कुल क्षेत्रफल लगभग 748 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें घने जंगल, घास के मैदान, पहाड़ियां और नदी-नाले शामिल हैं। वर्ष 2022 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाकर यहां बसाया गया, जिससे कूनो नेशनल पार्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया।
यहां शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं, जिनमें सागौन, खैर, पलाश, बेर और बांस प्रमुख हैं। वन्यजीवों की बात करें तो यहां चीता, तेंदुआ, भेड़िया, सियार, चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर और स्लॉथ भालू पाए जाते हैं। पक्षियों की भी कई प्रजातियां यहां देखने को मिलती हैं।
स्थापना और इतिहास
- स्थापना वर्ष: 1981 (वन्यजीव अभयारण्य)
- राष्ट्रीय उद्यान घोषित: 2018
पहले इसे कूनो वाइल्डलाइफ सेंचुरी कहा जाता था। बाद में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया। शुरुआत में यहां एशियाई शेरों के पुनर्वास की योजना बनाई गई थी, लेकिन बाद में यहां एशियाई चीता पुनर्वास परियोजना लागू की गई।
कूनो नेशनल पार्क की खासियत
- स्थान: श्योपुर, मध्य प्रदेश
- राष्ट्रीय उद्यान घोषित: 2018
- प्रसिद्ध: चीता प्रोजेक्ट
- घूमने का सही समय: अक्टूबर–मार्च
- कुल क्षेत्रफल: लगभग 748 वर्ग किलोमीटर
- प्रमुख वनस्पति (Flora) : यहां प्रमुख रूप से: सागौन, साल, खैर, पलाश, बेर, बांस
- प्रमुख वन्यजीव : एशियाई चीता (पुनर्वासित), तेंदुआ, भेड़िया, सियार, चीतल, सांभर, नीलगाय, चौसिंगा, जंगली सूअर, स्लॉथ भालू
- पक्षी : मोर, गिद्ध, चील, उल्लू, तोते, कई प्रवासी पक्षी
सफारी
- जंगल सफारी की सुविधा उपलब्ध
- वन विभाग की अनुमति आवश्यक
एंट्री फीस
- भारतीय पर्यटक: अलग‑अलग श्रेणी अनुसार
- विदेशी पर्यटक: अलग शुल्क (शुल्क समय‑समय पर बदल सकता है)
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श्योपुर का किला श्योपुर (Sheopur Fort)
श्योपुर का किला श्योपुर जिले का मुख्य ऐतिहासिक स्थान है। यह किला सीप नदी के किनारे बना हुआ है। यह किला प्राचीन है। इस किले में घूमने के लिए आप आसानी से सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं। यह किला बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है। किले के अंदर ढेर सारे स्थल है, जहां पर आप घूम सकते हैं।
श्योपुर के किले पर स्थित घुड़साल और महल का निर्माण 16वीं शताब्दी में राजा इंद्रसिंह ने करवाया था। यहां का सबसे आकर्षक स्थल है घुड़साल। घुड़साल में स्तंभों से युक्त एक बारादरी का निर्माण कराया गया था, जिसमें एक साथ 16 घोड़े बांधे जाते थे। इसके अंदर बड़े-बड़े दो दरवाजे थे। महल घुड़साल के सामने बना हुआ है, इसमें राजा के उच्च कर्मचारी रहते होंगे।
महल के दो भाग हैं एक भाग लंबा बारादरी नुमा है तथा दूसरे भाग में खुले आंगन के चारों तरफ स्तंभियुक्त बरामदे एवं छोटे-छोटे कमरे का निर्माण किया गया है। महल दो मंजिला है। महल के प्रवेश द्वार पर लगे हुए छोटे-छोटे कक्ष सिपाही के लिए निर्मित किए गए थे।
श्योपुर किले की विशेषताएँ
- प्राचीन स्थापत्य
- ऊँची प्राचीर
- ऐतिहासिक अवशेष
विजयपुर का किला श्योपुर
विजयपुर का किला श्योपुर के पास घूमने के लिए एक ऐतिहासिक महत्व का स्थान है। यह किला श्योपुर के पास कुआरी नदी के किनारे बना है। यहां पर आप सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं। यह किला करौली के राजा के अधीन एक किलेदार विजय सिंह जादौन ने बनवाया था। इस किले आप घूमने आ सकते है और महल के अवशेष देख सकते है। साथ ही साथ यहां पास में नदी भी बहती है, जिसका दृश्य आप देख सकते हैं।
छिमछिमा हनुमान मंदिर श्योपुर (Chhimchima Hanuman Temple, Sheopur)
छिमछिमा हनुमान मंदिर श्योपुर जिले के पास एक प्रसिद्ध और धार्मिक महत्व का स्थान है। यह मंदिर श्योपुर के पास विजयपुर शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर शिवपुरी रोड पर बना हुआ है। इस मंदिर में आप सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं। मंदिर के चारों तरफ घना जंगल है। मंदिर में आकर बहुत अच्छा लगता है।
इस मंदिर में आप अपने वाहन से या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आ सकते हैं। यह मंदिर आसपास के एरिया में बहुत प्रसिद्ध है। मंदिर में हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा विराजमान है, जो बहुत ही सुंदर है। इस मंदिर के बारे में माना जाता है, कि यहां पर आप जो भी मनोकामना मांगते हैं। वह पूरी होती है। इस मंदिर के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। इस मंदिर में हर साल भादो के महीने में मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें अलग-अलग राज्यों से लोग यहां पर दर्शन के लिए आते हैं।
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चंबल मगरमच्छ अभयारण्य पाली घाट (Chambal Crocodile Sanctuary Pali Ghat)
चंबल मगरमच्छ अभ्यारण श्योपुर के पास घूमने के लिए प्राकृतिक स्थान में से एक है। यह स्थल मध्य प्रदेश और राजस्थान बॉर्डर एरिया में बहने वाली चंबल नदी में स्थित है। यह एक संरक्षित क्षेत्र है। यहां पर मगरमच्छों और घड़ियालों का संरक्षण किया जाता है। यहां पर आप आकर सफारी का आनंद उठा सकते हैं और घड़ियाल, मगरमच्छ देख सकते हैं।
यहां पर बहुत सारे देसी और विदेशी पक्षी भी देखने के लिए मिलते हैं। यह जगह बहुत सुंदर है। आप सफारी की शुरुआत पालीघाट से कर सकते हैं। पालीघाट में तीन नदियों का संगम हुआ है, जो इस जगह का और भी अधिक महत्व बढ़ाते हैं। यहां पर त्रिवेणी संगम देखने के लिए मिलता है, जहां पर चंबल, पार्वती और द्वारिका नदी का संगम हुआ है।
यहां पर मंदिर भी बना हुआ है, जहां पर आप घूम सकते हैं। सफारी की बुकिंग आप ऑनलाइन कर सकते हैं। यहां पर आपको बोटिंग की सुविधा भी मिल जाती है। यहां पर सूर्यास्त का जबरदस्त दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर आसपास ठहरने की सुविधा भी उपलब्ध रहती है।
रामेश्वरम धाम और त्रिवेणी संगम श्योपुर (Rameshwaram Dham and Triveni Sangam)
रामेश्वरम धाम श्योपुर के पास स्थित धार्मिक महत्व का स्थल है। यह स्थल मध्य प्रदेश और राजस्थान बॉर्डर एरिया पर चंबल नदी के किनारे बना हुआ है। यहां पर तीन मुख्य नदियों का संगम हुआ है। यहां पर बानस, चंबल और सीप नदी का संगम हुआ है, जिससे यह स्थल पवित्र माना जाता है और त्रिवेणी संगम के नाम से प्रसिद्ध है।
इस संगम स्थल पर रामेश्वरम मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है। मंदिर के अंदर गर्भगृह में शिवलिंग विराजमान है। मंदिर का वातावरण सुंदर है। यहां पर आकर आप प्राकृतिक वातावरण में अच्छा समय बिता सकते हैं। यहां पर आस-पास आपको विभिन्न प्रकार के पक्षी देखने के लिए मिलते हैं।
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डोब कुंड (Dob Kund)
डोब कुंड श्योपुर जिले के पास घूमने के लिए ऐतिहासिक और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर एक सुंदर स्थान हैं। यह श्योपुर जिले से लगभग 25 किलोमीटर दूर घने जंगल के अंदर स्थित है। आप यहां पर सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं। यह कुनो वन मंडल के अंदर आता है। यह स्थल प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है।
इस स्थल पर ढेर सारी जगह हैं, जो आप देख सकते हैं। यहां पर 8 से 10000 वर्ष पूर्व के आदिमानव के प्राचीन आवास शैलाश्रय बने हैं, जिसमें उनके द्वारा शैल चित्रों का अंकन किया गया है। 9वीं से 10वीं शताब्दी में डोब कच्छपघात राजाओं की राजधानी रहा है।
सन 1045 में विक्रमसिंह कच्छपघात द्वारा बनाए गए जैन मंदिर, हरी गौरी मंदिर सहित प्राचीन नगर के अवशेष यहां देखने लायक है। इसके अतिरिक्त महाराज माधोराव सिंधिया के द्वारा शेरों को पकड़ने के लिए बनाया विशाल बैरकनुमा पिंजरा भी दर्शनीय है। आप यहां पर आकर इन सभी स्थलों में घूम सकते हैं और इन सभी स्थान की खूबसूरती को निहार सकते हैं। यहां पर आने का सबसे अच्छा समय ठंड और बरसात का है।
सिरोनी वाले हनुमान जी का मंदिर श्योपुर (Sironi Wale Hanuman Temple sheopur)
सिरोनी वाले हनुमान जी का मंदिर श्योपुर के पास एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंशापूर्ण हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर श्योपुर सबलगढ़ के मार्ग पर बना हुआ है। यहां पर आप आसानी से सड़क मार्ग से आ सकते हैं। यह मंदिर बहुत ही अच्छी तरह बना हुआ है।
मंदिर के मुख्य गर्भगृह में हनुमान जी की प्रतिमा के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। कहा जाता है, कि इस मंदिर में आकर आप जो भी मनोकामना मांगते हैं। वह पूरी होती है। यह मंदिर प्राचीन है। आप यहां पर आकर चारों तरफ के प्राकृतिक नजारो का आनंद ले सकते हैं।
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श्योपुर जिले का प्रसिद्ध भोजन
श्योपुर जिले के भोजन में बुंदेलखंड और चंबल क्षेत्र का प्रभाव देखने को मिलता है।
ज़रूर चखें
- बाजरे की रोटी
- साग-भाजी
- दाल
- देसी मिठाइयाँ
श्योपुर घूमने का सही समय (Best Time to Visit Sheopur)
श्योपुर घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा माना जाता है। इस समय ठंड का मौसम रहता है। ठंड का मौसम घूमने के लिए बढ़िया रहता है। आप इस समय आकर श्योपुर के सभी पर्यटन स्थलों की सैर कर सकते हैं।
आप यहां बारिश के समय भी आ सकते हैं। बारिश के समय आप यहां के आसपास के झरनों और प्राकृतिक जगह की सैर कर सकते हैं। गर्मी के समय यहां पर यात्रा न करें, तो बेहतर होगा।
श्योपुर कैसे पहुँचे (How to Reach Sheopur)
सड़क मार्ग : श्योपुर में सड़क मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। श्योपुर प्रमुख शहरों जैसे ग्वालियर, मुरैना और कोटा से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। यहां पर आने के लिए बस एवं पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा उपलब्ध है।
रेल मार्ग : श्योपुर निकटतम रेलवे स्टेशन सबलगढ़ और मुरैना हैं। आप अपने सुविधा अनुसार सबलगढ़ या मुरैना आ सकते हैं और उसके बाद सड़क मार के द्वारा श्योपुर पहुंच सकते हैं।
हवाई मार्ग : श्योपुर का निकटतम हवाई अड्डा ग्वालियर है। आप अन्य शहरों से वायु मार्ग के द्वारा ग्वालियर आ सकते हैं और उसके बाद श्योपुर सड़क मार्ग के द्वारा पहुंच सकते हैं।
श्योपुर जिले का गूगल मैप लोकेशन
श्योपुर जिले में ठहरने की सुविधा
- बजट होटल
- सरकारी विश्राम गृह
- गेस्ट हाउस
श्योपुर पर्यटन क्यों खास है?
- कूनो नेशनल पार्क
- एशियाई चीता परियोजना
- ऐतिहासिक किले
- शांत और हरित वातावरण
निष्कर्ष
श्योपुर जिला मध्य प्रदेश का एक ऐसा पर्यटन स्थल है जहाँ वन्यजीव, इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। कूनो नेशनल पार्क और चीता परियोजना ने श्योपुर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान दी है। अगर आप प्रकृति और रोमांच पसंद करते हैं, तो श्योपुर जिले में घूमने की जगह आपकी यात्रा सूची में जरूर होनी चाहिए।
