सिद्धवट मंदिर उज्जैन – पितृ मोक्ष, श्राद्ध और आध्यात्मिक शांति का पावन तीर्थ
सिद्धवट मंदिर मध्य प्रदेश के पवित्र नगर उज्जैन में स्थित धार्मिक स्थान में से एक है। सिद्धवट मंदिर (Siddhavat Mandir) विशेष रूप से पितृ दोष निवारण, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए प्रसिद्ध है। सिद्धवट मंदिर शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। इस मंदिर को लेकर ढेर सारी धार्मिक और पौराणिक मान्यता है। उज्जैन की यात्रा में आपको इस मंदिर में जरूर आना चाहिए।
चलिए जानते हैं उज्जैन के इस पवित्र सिद्धवट मंदिर (Siddhavat Mandir) के बारे में
उज्जैन के प्रसिद्ध सिद्धवट मंदिर की यात्रा
उज्जैन का प्रसिद्ध सिद्धवट मंदिर (Siddhavat Mandir) धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। आप अपने उज्जैन की यात्रा में इस मंदिर को जरूर शामिल करें। यह मंदिर उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे में बना हुआ है। इस मंदिर में आप सड़क मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। यह मंदिर भैरवगढ़ में स्थित है। सिद्धवट मंदिर काल भैरव मंदिर से 1 किलोमीटर दूर है। आप जब भी काल भैरव मंदिर जाते हैं, तो आप सिद्धवट मंदिर (Siddhavat Mandir) आराम से घूमने के लिए जा सकते हैं।
यहां पर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट से भी आ सकते हैं। उज्जैन मुख्य शहर में आपको ऑटो की सुविधा मिल जाती है, जो नॉमिनल कास्ट में पूरे शहर के मंदिरों की सैर करवा देते हैं। आप उन ऑटो का प्रयोग करके इस मंदिर में घूमने के लिए आ सकते हैं।
आप यहां पर अपने वाहन का प्रयोग करके भी आ सकते हैं। मंदिर के बाहर पार्किंग के लिए बहुत बड़ा स्पेस है, जहां पर आप गाड़ी खड़ी कर सकते हैं। मंदिर में प्रवेश के लिए एक सुंदर प्रवेश द्वार बना हुआ है, जिससे आप प्रवेश करके, इस मंदिर में घूमने के लिए जा सकते हैं।
सिद्धवट मंदिर उज्जैन (Siddhavat MandirUjjain) के सबसे प्रसिद्धऔर पवित्र स्थान में से एक है। यह मंदिर मुख्य रूप से श्रद्धा के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर श्रद्धा और पिंडदान से संबंधित सभी क्रियाएं की जाती है। पूरे भारत से लोग इस मंदिर में आते हैं और यह पूजा को करवाते हैं। यहां पर भगवान शिव बाबा और भगवान राम का मंदिर बना हुआ है।
सिद्धवट मंदिर (Siddhavat Mandir) पर शिप्रा नदी का सुंदर घाट भी है, जो बहुत ही सुंदर लगता है। यहां पर एक प्राचीन वृक्ष लगा हुआ है, जिसे वटवृक्ष के नाम से जाना जाता है और इस वटवृक्ष का पौराणिक महत्व है। मंदिर परिसर में ढेर सारे बंदर है। अगर आपके पास खाने का समान है, तो आप वह जरूर संभाल के रख, नहीं तो बंदर आपसे छीन सकते हैं।
यहां पर प्रसाद की दुकान मिलती है। अगर आप प्रसाद लेना चाहते हैं, तो ले सकते हैं और उसके बाद आप घाट और मंदिर की तरफ आगे जा सकते हैं। आगे जाने पर सबसे पहले आपको शिप्रा नदी पर बना हुआ सुन्दर घाट देखने के लिए मिलता है। घाट में एक सुंदर दीप स्तंभ भी बना हुआ है, जो बहुत ही आकर्षक लगता है।
घाट में घूमने के बाद, आप मंदिर में घूमने के लिए जा सकते हैं। यहां पर शंकर भगवान जी का प्राचीन मंदिर बना हुआ है। यह 84 महादेव मंदिरों में से एक मंदिर है। यहां पर जाकर आप भगवान शंकर जी के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर आपको प्राचीन शिवलिंग के दर्शन होते हैं। इस शिवलिंग के बारे में ढेर सारी मान्यताएं हैं।
सिद्धवट मंदिर (Siddhavat Mandir) परिसर में वट वृक्ष भी लगा हुआ है, जिसकी आप दर्शन कर सकते हैं। इस वट वृक्ष के बारे में ढेर सारी पौराणिक मान्यता है। यहां पर आपको एक बोर्ड देखने के लिए मिलता है, जहां पर आप इस वृक्ष की पौराणिक मान्यताओं की कहानी जान सकते हैं।
वट वृक्ष के पास में ही शिव पार्वती की प्रतिमा के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यह प्रतिमाएं प्राचीन है। यहां पर सिद्धिविनायक गणेश जी के प्रतिमा विराजमान है, जो काले पत्थर से बनी है। यहां पर पंडित जी बैठे रहते हैं, जो पूजा करते हैं। यहां पर सत्यनारायण मंदिर भी बना हुआ है, जहां पर आप घूम सकते हैं।
अगर यह आपको पिंडदान या अन्य पूजा करवानी है, तो आप यहां पर करवा सकते हैं। मंदिर घूमने के बाद आप कुछ देर घाट में शांति से बैठकर नदी को बहता हुआ देख सकते हैं, जो बहुत ही सुंदर लगती है और आप चाहे तो यहां पर नहाने का आनंद भी उठा सकते हैं।
उज्जैन को सप्तपुरी में गिना जाता है और सिद्धवट मंदिर इस पवित्र नगरी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है। यहाँ देश-विदेश से श्रद्धालु अपने पितरों की शांति और आत्मा की मुक्ति के लिए आते हैं।
सिद्धवट मंदिर का इतिहास (Siddhavat Temple History)
स्कंद पुराण के अवंतिका खंड के उल्लेख अनुसार इस वट वृक्ष को स्वयं जगत जननी माता पार्वती ने अपने हाथों से यहां पर लगाया था और इसके नीचे बैठकर शंकर पुत्र कार्तिकेय ने भोजन किया था।
श्री कार्तिकेय को देवताओं ने इसी स्थान पर देवासुर संग्राम के पूर्व सेनापति पद पर अभिषेक किया था। इसी के बाद कार्तिकेय स्वामी ने तारकासुर रक्षक का वध किया था तथा वध के पश्चात वह शक्ति यही शिप्रा नदी में लीन हुई। तभी से इस तीर्थ का नाम शक्ति भेद तीर्थ कहलाया।
इतिहास के वर्णन अनुसार सम्राट विक्रमादित्य ने इसी वट वृक्ष के नीचे घोर तपस्या कर, बेताल को वश में करने की सिद्धि प्राप्त की थी। भारत सम्राट अशोक पुत्र महेंद्र व पुत्री संघमित्र ने श्रीलंका आदि सुदूर देशों में इसी वटवृक्ष का पूजा अर्चना कर धर्म प्रचार की यात्राएं की थी।
एक अन्य ऐतिहासिक वर्णन के अनुसार इस वट वृक्ष को मुगल काल में कटवा कर सात लोहे के तवे से जुड़वा दिया था। किंतु उन तवों को भी फोड़ कर, यह वटवृक्ष पुनः हरा भरा हो गया। यह वटवृक्ष कल्पवृक्ष है। संपत्ति अर्थात भौतिक व अलौकिक सुख सुविधा हेतु वटवृक्ष पर रक्षा सूत्र बांधते हैं
सद्गति अर्थात मोक्ष हेतु पिंडदान, तर्पण तथा दुग्ध अभिषेक, संतान प्राप्त पुत्र कामना हेतु स्वास्तिक चिन्ह अंकित कर मन्नत करने का विधान है। यहां पर प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष या शुक्ल पक्ष चतुर्दशी पर कच्चा दूध चढ़ाने का महत्व है। यहां वर्ष में कार्तिक शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तथा वैशाख कृष्ण पक्ष की अमावस्या का मुख्य स्नान एवं मेला का विशेष महत्व है। उज्जैन में लगने वाला कार्तिक मेला इसी तीर्थ से जाना जाता है।
भारत वर्ष में सिर्फ सिद्धवट घाट और नासिक में कालसर्प दोष शांति व नागबली नारायण बलि कर्म किया जाता है। यह स्थान शासन द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
वटवृक्ष का महत्व
सिद्धवट मंदिर (Siddhavat Mandir) में स्थित वटवृक्ष इसकी सबसे बड़ी पहचान है।
अक्षय वट की मान्यताएँ:
- यह वृक्ष कभी नष्ट नहीं होता
- यहाँ पूजा करने से पितृ दोष समाप्त होता है
- पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है
- संतान सुख और पारिवारिक शांति मिलती है
श्रद्धालु इस वृक्ष की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना करते हैं और धागा बाँधते हैं।
पिंडदान और श्राद्ध का विशेष स्थान
सिद्धवट मंदिर (Siddhavat Mandir) भारत के उन गिने-चुने स्थानों में से एक है जहाँ पिंडदान और श्राद्ध का विशेष महत्व है।
यहाँ किए जाने वाले पूजा
- पिंडदान
- तर्पण
- श्राद्ध
- नारायण बलि
- पितृ दोष निवारण पूजा
मान्यता है कि जो व्यक्ति यहाँ विधि-विधान से श्राद्ध करता है, उसके पितरों को सदैव शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सिद्धवट मंदिर कैसे पहुँचे (How to Reach Siddhavat Temple)
सड़क मार्ग: सिद्धवट मंदिर उज्जैन (Siddhavat Mandir Ujjain) के भैरवगढ़ में शिप्रा नदी के किनारे बना हुआ है। इस मंदिर में आप आसानी से आ सकते हैं। यहां पर आने के लिए अच्छी सड़क बनी हुई है। उज्जैन शहर से सिद्धवट मंदिर तक ऑटो, टैक्सी और ई-रिक्शा आसानी से उपलब्ध हैं।
रेलवे: उज्जैन मुख्य शहर में रेलवे स्टेशन बना हुआ है। सिद्धवट मंदिर रेलवे स्टेशन से करीब तीन से चार किलोमीटर दूर है।
हवाई मार्ग: उज्जैन का निकटतम हवाई अड्डा इंदौर में बना हुआ है। आप इंदौर में वायु मार्ग से आ सकते हैं। उसके बाद इस मंदिर में सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं।
सिद्धवट मंदिर उज्जैन का गूगल मैप लोकेशन
दर्शन और पूजा का समय
मंदिर खुलने का समय: सुबह 5:00 बजे
मंदिर बंद होने का समय: शाम 7:00 बजे
श्राद्ध का समय: सुबह के समय सर्वोत्तम
(त्योहार और विशेष तिथियों पर समय बदल सकता है)
सिद्धवट मंदिर का घूमने का सबसे अच्छा (The best time to visit Siddhavat Temple)
सिद्धवट मंदिर (Siddhavat Mandir) में घूमने का सबसे अच्छा समय ठंड का रहता है। आप यहां पर ठंड के समय आकर घूम सकते हैं। मंदिर में आप पूजा पाठ करवाने के लिए आते हैं, तो आपको पितृ पक्ष के समय आना चाहिए। यह सबसे महत्वपूर्ण समय रहता है। इस समय पितरों की शांति के लिए पूजा करवाई जाती है।
सिद्धवट मंदिर के पास घूमने की जगहें
- महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
- राम घाट
- काल भैरव मंदिर
- सांदीपनि आश्रम
- गढ़कालिका मंदिर
- भर्तृहरि की गुफा
- कालियादेह पैलेस
श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
- पूजा के लिए स्थानीय पुरोहित से संपर्क करें
- श्राद्ध सामग्री मंदिर परिसर में उपलब्ध होती है
- श्रद्धा और नियमों का पालन करें
- गंदगी और शोर-शराबा न करें
FAQ – सिद्धवट मंदिर उज्जैन
Q1. सिद्धवट मंदिर (Siddhavat Mandir) क्यों प्रसिद्ध है?
यह पितृ दोष निवारण, श्राद्ध और पिंडदान के लिए प्रसिद्ध है।
Q2. क्या यहाँ पिंडदान करना आवश्यक है?
जिन लोगों को पितृ दोष होता है, उनके लिए यह अत्यंत फलदायी माना जाता है।
Q3. क्या महिलाएँ यहाँ पूजा कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएँ भी पूजा और दर्शन कर सकती हैं।
Q4. क्या यहाँ प्रवेश शुल्क है?
नहीं, मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।
निष्कर्ष
सिद्धवट मंदिर उज्जैन (Siddhavat Mandir) केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पितरों के प्रति श्रद्धा, कर्तव्य और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। यहाँ किया गया श्राद्ध और तर्पण मन को शांति और आत्मा को संतोष प्रदान करता है। यदि आप उज्जैन की यात्रा पर हैं या पितृ दोष निवारण के लिए किसी पवित्र स्थान की तलाश में हैं, तो सिद्धवट मंदिर (Siddhavat Mandir) अवश्य जाएँ। यह अनुभव जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध कर देता है।
