सिंगरौली जिले में घूमने की जगह – Singrauli Travel Guide in Hindi
सिंगरौली मध्य प्रदेश के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है। सिंगरौली जिले को ऊर्जा राजधानी (Energy Capital of Madhya Pradesh) कहा जाता है। यह जिला मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित है। सिंगरौली अपनी कोयला खदानों, बिजली परियोजनाओं, नदियों, जंगलों और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है।
सिंगरौली जिला प्राकृतिक सुंदरता और आदिवासी संस्कृति भी देखने के लिए मिलती है। इस लेख में हम सिंगरौली में घूमने की जगह (Singrauli Tourist Places in Hindi) के बारे में जानकारी देंगे। यदि आप प्राकृतिक, धार्मिक, आस्था और आधुनिक विकास को एक साथ देखना चाहते हैं, तो सिंगरौली जिला आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। सिंगरौली जिले के आस-पास घूमने के लिए ढेर सारी जगह है, जहां पर जाकर आप अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं।
चलिए जानते हैं – सिंगरौली जिले में घूमने की प्रमुख जगह (Singrauli Tourist Places in Hindi), सिंगरौली कैसे पहुंचे, सिंगरौली में घूमने का सही समय, सिंगरौली टूर प्लान, सिंगरौली यात्रा के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी।
सिंगरौली जिले का इतिहास (Singrauli District History in Hindi)
सिंगरौली जिला मध्य प्रदेश के अउत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है। यह जिला अपनी समृद्ध प्राकृतिक संपदा, प्राचीन इतिहास और आधुनिक औद्योगिक विकास के लिए जाना जाता है। सिंगरौली देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में जाना जाता है।
सिंगरौली का इतिहास प्रागैतिहासिक काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस क्षेत्र में प्राप्त पत्थर के औजार, गुफाओं के अवशेष और शैलचित्र से यह संकेत मिलता है, कि आदिमानव यहां पर निवास करते रहें है। जंगलों, नदियों और पहाड़ियों से घिरे इस क्षेत्र ने मानव सभ्यता के विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान किया।
प्राचीन काल में सिंगरौली विंध्याचल पर्वतमाला का हिस्सा था। यह क्षेत्र घने जंगलों और खनिज संपदा से समृद्ध था, जिस कारण यहां आदिवासी समुदाय का प्रभाव लंबे समय तक बना रहा। यहां पर गोंड, कोल, बैगा और पनिका जैसी जनजातियां निवास करती हैं, जो यहां के स्थानीय निवासी हैं।
इस क्षेत्र का उल्लेख रामायण और महाभारत काल में भी मिलता है। कहा जाता है, कि भगवान श्री राम जी वनवास के दौरान इस क्षेत्र से होकर गुजरे थे। आस-पास के क्षेत्र में प्राचीन तीर्थ स्थल और कथाएं इस विश्वास को मजबूत करते हैं।
मौर्य काल में सिंगरौली क्षेत्र मगध साम्राज्य के प्रभाव में रहा। सम्राट अशोक के शासनकाल में बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार हुआ। आसपास के क्षेत्र में शांति और सुव्यवस्था स्थापित हुई। गुप्त काल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग माना जाता है। इस काल में कला, साहित्य और विज्ञान का विकास हुआ।
सिंगरौली क्षेत्र में भी इस सांस्कृतिक प्रभाव से अछूता नहीं रहा। यहां पर प्राप्त अवशेष गुप्तकालीन स्थापत्य और कला की झलक देते हैं। मध्यकाल में सिंगरौली क्षेत्र विभिन्न राजवंशों के अधीन रही है। कभी यह कलचुरी राजाओं के प्रभाव में रहा तो कभी चंदेल शासकों का यहां वर्चस्व रहा। चंदेल काल में मंदिर निर्माण और स्थापत्य कला को विशेष प्रोत्साहन मिला।
बाद में इस क्षेत्र में दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य के अधीन आया। घने जंगल और दुर्गम भूभाग के कारण मुगल प्रशासन का प्रभाव यहां पर सीमित रहा है। यहां पर आदिवासी समाज और उनकी परंपराएं लम्बे समय तक फलती फूलती रही है।
18वीं शताब्दी में सिंगरौली क्षेत्र मराठा शासक के प्रभाव में आया। मराठा शासक ने यहां राजस्व व्यवस्था को मजबूत किया, लेकिन आदिवासी इलाकों में उनका नियंत्रण पूरा नहीं हो पाया। ब्रिटिश शासनकाल में सिंगरौली को रीवा रियासत का हिस्सा बनाया गया। अंग्रेजों ने यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर ध्यान दिया और प्रशासनिक ढांचों का विकास किया।
इस दौरान रेलवे और सड़क का विस्तार हुआ, जिससे क्षेत्र का संपर्क देश के अन्य हिस्सों में बना। सिंगरौली क्षेत्र के लोगों ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई है। आदिवासी समाज ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध कई स्थानीय आंदोलन में भाग लिया है।
1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद सिंगरौली क्षेत्र मध्य प्रदेश राज्य का हिस्सा बना। सिंगरौली को 24 मई 2008 को एक स्वतंत्र जिला बनाया गया। इससे पहले यह सीधी जिले का हिस्सा था। जिला बनने के बाद प्रशासनिक सुविधाओं का विस्तार हुआ और विकास की गति तेज हुई।
आधुनिक समय में सिंगरौली देश की ऊर्जा राजधानी है। यहां पर स्थित कोयला खदानें, ताप विद्युत संयंत्र देश की ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एनटीपीसी, हिंडाल्को और अन्य प्रमुख औद्योगिक परियोजनाओं ने जिले के आर्थिक स्वरूप को बदल दिया है। हालांकि औद्योगीकरण से जिले के पर्यावरण पर विशेष प्रभाव पड़ा है। मगर आज इसमें भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सिंगरौली जिले के आसपास घूमने के प्रमुख पर्यटन और दर्शनीय स्थान (Singrauli Tourist Places in Hindi)
संजय नेशनल पार्क सिंगरौली (Sanjay National Park)
संजय नेशनल पार्क मध्य प्रदेश के सबसे सुंदर पार्कों में से एक है। यह पार्क मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के एरिया में फैला हुआ है। यह पार्क ज्यादा प्रसिद्ध नहीं है, मगर आप यहां पर आकर घूम सकते हैं। यह पार्क अन्य कमर्शियल पार्कों में से कम भीड़ वाला है और यहां पर आकर आप अपना बेहतर समय बिता सकते हैं। यहां अच्छे से जंगली जीवों और वन संपदा को देख सकते हैं।
संजय नेशनल पार्क विंध्याचल पर्वतमाला में फैला हुआ है और घने साल, सागौन व मिश्रित वनों के लिए जाना जाता है। यहां बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय, भालू और कई प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं। यह क्षेत्र जैव विविधता से भरपूर है और प्रकृति प्रेमियों के साथ-साथ वन्यजीव फोटोग्राफरों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य इसे खास बनाते हैं।
संजय नेशनल पार्क में आप सफारी का आनंद उठा सकते हैं। यहां पर सफारी की टाइमिंग अलग-अलग होती है। यहां पर ज्यादा भीड़ नहीं रहती है, इसलिए आप आराम से सभी जगह को अच्छे से देख सकते हैं और गाइड भी यहां पर आपको अच्छी तरह गाइड करता है। अगर आप यहां पर ठहरना चाहते हैं, तो फॉरेस्ट ऑफिस डिपार्मेंट से ठहरने के लिए बुकिंग करा सकते है।
संजय नेशनल पार्क की खास बातें
- स्थान: सिंगरौली व सीधी जिला, मध्य प्रदेश
- स्थापना: 1975
- कुल क्षेत्रफल: लगभग 466 वर्ग किमी
- प्रमुख जीव: बाघ, तेंदुआ, भालू, चीतल, सांभर
- वनस्पति: साल, सागौन, मिश्रित वन
- घूमने का सही समय: अक्टूबर से जून
- निकटतम शहर: सीधी, सिंगरौली
- पर्यटन का प्रकार: जंगल सफारी, नेचर ट्रेल
- बुकिंग वेबसाइट: MP Forest Department
गोविंद बल्लभ पंत सागर (Govind Ballabh Pant Sagar)
गोविंद बल्लभ पंत सागर बांध, जिसे रिहंद बांध के नाम से भी जाना जाता है। यह सिंगरौली के पास घूमने के लिए एक बढ़िया जगह है। यह बांध बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है और यह बांध भारत के सबसे बड़े बांधों में से एक है। यह बांध उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर बना हुआ है।
यह बांध रिहंद नदी पर बना हुआ है, इसलिए इस बांध को रिहंद बांध के नाम से भी जाना जाता है। रिहंद बांध एक बहुउद्देशीय परियोजना है। इस बांध में 13 गेट बने हुए हैं। इस बांध को देखने का सबसे अच्छा समय बरसात का रहता है। आप यहां पर बरसात में आकर बांध के सुंदर दृश्य का आनंद ले सकते हैं।
साथ ही साथ बरसात के समय बांध के चारों तरफ का दृश्य भी भोत मनमोहक होता है। बांध के चारों तरफ घना जंगल है, जो इसे और भी ज्यादा आकर्षक बनाता है। यहां पर बरसात के समय चारों तरफ हरियाली देखने के लिए मिलती है। बांध के पास में मंदिर भी बना हुआ है, जहां पर आप जाकर दर्शन कर सकते हैं। यह डैम बरसात में और ठंड में घूमने के लिए परफेक्ट है।
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माडा की गुफाएं सिंगरौली (Mada Caves Singrauli)
माडा की गुफाएं सिंगरौली शहर के पास घूमने के लिए ऐतिहासिक और प्राकृतिक सुंदरता से भरा हुआ एक स्थान है। यह गुफाएं माडा तहसील के सिंगरौली वन परिक्षेत्र के अंदर स्थित है। यहां पर आप सड़क मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। यहां पर आप बाइक, कार और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से पहुंच सकते हैं। यहां पर प्राचीन गुफाएं देखने के लिए मिलती हैं। यह गुफाएं सातवीं, आठवीं शताब्दी पूर्व की है। यहां पर ढेर सारी गुफाएं बनी हुई है। इन गुफाओं में से कुछ प्रमुख गुफाएं हैं –
गुफा नंबर 1 – जलजलिया देवी गुफा एक छोटी सी गुफा है। गुफा को देखकर ऐसा लगता है, कि यह गुफा अपूर्ण है। गुफा में केकड़े की आकृति बनाई गई है। कुछ विद्वान इसे नागिन की प्रतिमा मानते हैं। इस गुफा में एक अज्ञात स्रोत से निरंतर जल बहता रहता है। इस गुफा में कुछ नव निर्माण भी किए गए हैं। यह गुफा सातवीं से आठवीं शताब्दी की मानी जाती है।
गुफा नंबर 2 – जलजलिया देवी के सामने एक और गुफा बनी हुई है, जो स्तंभों पर आधारित है और एक बरांडा है। स्तंभों पर आधारित एक बड़ी कोट है। गुफा का निर्माण सातवीं से आठवीं शताब्दी माना गया है।
इन गुफा के बारे में माना जाता है, कि यहां पर आप अपनी जो भी मनोकामना मांगता है। वह जरूर पूरी होती है। दूर-दूर से लोग यहां पर आते हैं और मनोकामना मांगते हैं। यह स्थल धार्मिक रूप से भी लोगों के मन में स्थान रखता है। यहां पर मकर संक्रांति के समय मेले का आयोजन भी होता है।
इको एडवेंचर पार्क सिंगरौली (Eco Adventure Park)
इको एडवेंचर पार्क सिंगरौली के पास माडा में घूमने के लिए एक प्रमुख स्थानों में से एक है। ये जगह सिंगरौली वनक्षेत्र में बनी हुई है। यहां पर आकर आप एडवेंचरस गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं। यहां पर आने के लिए सड़क मार्ग उपलब्ध है। आप यहां पर बाइक, कार और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आ सकते हैं।
यहां पर आप ढेर सारी एडवेंचर स्पोर्ट्स जैसे जिपलाइन, मंकी जंप जैसे खेलों का आनंद ले सकते हैं। यहां पर संडे के दिन बहुत सारे लोग घूमने के लिए आते हैं। यह जगह सिंगरौली में बच्चों के साथ घूमने के लिए बहुत ही बढ़िया है। बच्चे यहां पर आकर इस जगह का भरपूर लाभ उठाएंगे और यहां चारों तरफ जंगल का दृश्य भी देखा जा सकता है। यहां पर घना जंगल है जिसके बीच में यह जगह स्थित है।
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विंध्यानगर लेक पार्क (Vindhyanagar Lake Park)
विंध्यानगर लेक पार्क सिंगरौली जिले में विंध्यानगर टाउनशिप में स्थित एक मुख्य पार्क है। यह पार्क बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है और बहुत सुंदर है। इस पार्क का मैनेजमेंट एनटीपीसी द्वारा किया जाता है। यहां पर आर्टिफिशियल लेक बनी हुई है, जिसमें बोट राइडिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध है।
यह पार्क सिंगरौली में बच्चों के लिए बहुत ही अच्छी जगह है। बच्चे यहां पर आकर ढेर सारी एडवेंचरस एक्टिविटी कर सकते हैं। यहां पर जानवरों के स्टैचू बने हुए हैं, जो बच्चों को पसंद आएंगे। साथ ही साथ यहां पर ढेर सारे झूले हैं, जिसमें बच्चे एन्जॉय कर सकते है।
पार्क के अंदर मंदिर भी बना हुआ है। यहां पर शिव मंदिर और गायत्री मंदिर बना है। पार्क में रोज गार्डन बना हुआ है, जहां तरह-तरह के रोज लगे हैं। पार्क के बाहर खाने पीने के लिए ढेर सारे फूड स्टाल लगे हुए हैं, जहां तरह-तरह का खाना उपलब्ध रहता है। आप यहां पर आकर एंजॉय कर सकते हैं।
हनुमान मंदिर झींगुरदहा (Hanuman Mandir Jhingurdaha)
झींगुरदहा का हनुमान मंदिर सिंगरौली के पास घूमने के लिए प्रमुख धार्मिक स्थान है। यह मंदिर सिंगरौली के झींगुरदहा एरिया में बना हुआ है। यह मंदिर पहाड़ी के ऊपर बना हुआ है। मंदिर में पहुंचने के लिए रास्ता है। इस मंदिर में आप सड़क मार्ग से अपने वाहन से आराम से पहुंच सकते हैं। यह मंदिर चारों तरफ से घाटियों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है।
यहां पर आकर आप मंदिर से चारों तरफ के सुंदर दृश्य को देख सकते हैं। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में हनुमान जी के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर हनुमान जी की प्रतिमा बहुत सुंदर और आकर्षक है। यह मंदिर प्राचीन है। यहां पर आप अच्छा समय बिता सकते हैं। बरसात के समय यह जगह और भी आकर्षक लगती है। मंदिर के आस-पास आप पिकनिक मना सकते हैं। यह जगह प्राकृतिक है, इसलिए पिकनिक के लिए बहुत बढ़िया है।
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जरब जलप्रपात सिंगरौली (Jarab Waterfall)
जरब जलप्रपात सिंगरौली के पास घूमने के लिए सुंदर और प्रसिद्ध झरनों में से एक है। यह जलप्रपात घने जंगलों के अंदर बना हुआ है। यह जलप्रपात को गोपद नदी पर बना हुआ है। यह जलप्रपात निग्री के करीब बना है। यहां पर आने के लिए सड़क मार्ग उपलब्ध है। यहां पर कुछ दूरी पर ट्रैकिंग भी करनी पड़ती है। आप यहां पर ट्रैकिंग करके आराम से जा सकते हैं।
झरने के पास पहुंचने पर झरने की आवाज सुनकर, उत्सुकता और भी ज्यादा बढ़ जाती है। गोपाद नदी में पहुंच कर यह झरना देखने की मिलता है, जो ऊंची चट्टानों से गिरता है। झरने के आसपास चट्टानों और जंगल का नजारा शानदार रहता है। यह जगह ठंड और बरसात के समय घूमने के लिए बहुत ही बढ़िया है, मगर भारी बरसात के समय आप यहां पर न जाए, तो बेहतर होगा।
चिल्का झील और पार्क
चिल्का झील और पार्क सिंगरौली के पास घूमने के लिए एक सुंदर स्थान में से एक है। यह पार्क सिंगरौली में शक्तिनगर में बना हुआ है। इस पार्क में एक बड़ी झील है और झील के आसपास सुंदर पार्क है। इस पार्क में आप आकर अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं।
झील के आसपास ढेर सारे पेड़ पौधे लगे हुए हैं। पार्क में बच्चों के लिए और बड़ों के लिए ढेर सारी एक्टिविटी उपलब्ध है। यह पार्क दोस्तों और फैमिली के साथ समय बिताने के लिए और पिकनिक मनाने के लिए बढ़िया जगह है। यहां पर आकर नाव की सवारी और शांतिपूर्वक समय बिताने जैसी गतिविधियों की जा सकती है।
बच्चों के लिए यहां पर ढेर सारे झूले लगे हुए हैं। साथ ही साथ यहां पर भगवान शिव का मंदिर भी बना हुआ है, जो बहुत सुंदर है और बहुत ही आकर्षक है। पार्क में कई तरह के फूलों वाले प्लांट लगे हुए हैं, जो इसे और भी ज्यादा सुंदर बनाते हैं।
मुड़वानी डैम और पार्क
मुड़वानी डैम और पार्क सिंगरौली में घूमने के लिए एक बढ़िया जगह है। यहां पर आपको एक बड़ा सा डैम देखने के लिए मिलता है, जो चारों तरफ से पहाड़ियों और पेड़ पौधों से घिरा हुआ है। डैम के पास में ही एक पार्क बना हुआ है। यह जगह इको-फ्रेंडली है। यहां पर आकर आप अच्छा और शांतिपूर्ण समय बिता सकते हैं। यहां पर आकर आप बोटिंग का मजा ले सकते हैं। यह परिवार और दोस्तों के साथ पिकनिक के लिए बढ़िया जगह है।
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सिंगरौली जिले का प्रसिद्ध भोजन
सिंगरौली जिले का भोजन सादा, पौष्टिक और स्थानीय स्वाद से भरपूर होता है।
ज़रूर चखें
- चावल और दाल
- साग-भाजी
- महुआ से बने व्यंजन
- देसी मिठाइयाँ
सिंगरौली में घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit Singrauli)
सिंगरौली में घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च का होता है। यह समय ठंड का रहता है। इस समय मौसम सुहावना और ठंडा रहता है। इस समय आप सिंगरौली के सभी पर्यटन स्थलों की सैर कर सकते हैं। आप यहां पर बरसात के समय भी आ सकते हैं। बरसात के समय आप सिंगरौली के आस-पास के झरना और जंगल की सैर कर सकते हैं।
सिंगरौली कैसे पहुँचे (How to Reach Singrauli)
सड़क मार्ग : सिंगरौली में सड़क मार्ग से आसानी से आ सकते हैं। यहां पर अन्य शहर जैसे रीवा, सीधी, प्रयागराज, जबलपुर, मंडला, शहडोल से आसानी से आ सकता है। यहां अन्य शहरों से आने के लिए बस की सुविधा उपलब्ध है। आप यहां पर अपने वाहन से या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आराम से आ सकते हैं।
रेल मार्ग : सिंगरौली आने के लिए रेल मार्ग की सुविधा उपलब्ध है। सिंगरौली रेलवे स्टेशन मुख्य शहर में बना हुआ है, जिससे आप यहां पर आसानी से आ सकते हैं। सिंगरौली अन्य शहरों से रेल मार्ग द्वारा अच्छी तरह कनेक्ट है। आप यहां पर अन्य शहरों से आसानी से पहुंच सकते हैं। सिंगरौली रेलवे स्टेशन और ओबरा रेलवे स्टेशन नज़दीकी विकल्प हैं।
हवाई मार्ग : सिंगरौली का नजदीकी हवाई अड्डा वाराणसी में बना हुआ है। आप वाराणसी हवाई मार्ग से आ सकते हैं और उसके बाद सिंगरौली सड़क के द्वारा आसानी से पहुंच सकते हैं।
सिंगरौली जिला का गूगल मैप लोकेशन
सिंगरौली जिले में ठहरने की सुविधा
- बजट होटल
- गेस्ट हाउस
- सरकारी विश्राम गृह
सिंगरौली पर्यटन क्यों खास है?
- ऊर्जा राजधानी
- विशाल जलाशय
- औद्योगिक पर्यटन
- आदिवासी संस्कृति
निष्कर्ष
सिंगरौली जिला मध्य प्रदेश का एक अनोखा पर्यटन स्थल है जहाँ प्राकृतिक सुंदरता, औद्योगिक विकास और आदिवासी संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यदि आप कुछ अलग और खास देखने की इच्छा रखते हैं, तो सिंगरौली जिले में घूमने की जगह आपकी यात्रा सूची में जरूर शामिल होनी चाहिए।
